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पशु स्वास्थ्य पर सशक्त समिति की 10वीं बैठक आयोजित, रोग उन्मूलन और ‘वन हेल्थ’ पर जोर

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नई दिल्ली: पशुपालन एवं डेयरी विभागके तत्वावधान में 16 अप्रैल 2026 को पशु स्वास्थ्य पर सशक्त समिति (ECAH) की 10वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने की, जबकि सह-अध्यक्षता विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने की।

बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए। इसमें पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत भारत की प्रगति और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

बैठक में फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) और पीपीआर (पेस्ट दे पेटिट्स रूमिनेंट्स) जैसी बीमारियों के नियंत्रण से आगे बढ़कर उनके उन्मूलन पर जोर दिया गया। बताया गया कि 2020 से अब तक FMD के खिलाफ 133 करोड़ से अधिक टीकाकरण किए जा चुके हैं, जिससे इसके मामलों में काफी कमी आई है।

पीपीआर के मामलों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है—2019 में 98 मामलों से घटकर 2025 में 29 रह गए हैं, जो देशव्यापी टीकाकरण अभियान का परिणाम है।

बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे NDLM और भारत पशुधन के माध्यम से टीकाकरण की पारदर्शिता और निगरानी में सुधार पर भी चर्चा हुई। साथ ही, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, रोग निगरानी प्रणाली और महामारी तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

नियामक सुधारों के तहत पशु दवाओं और टीकों की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने और NANDI-SUGAM पोर्टल के उपयोग से समय में कमी लाने की सराहना की गई।

समिति ने पोल्ट्री क्षेत्र में बायो-सिक्योर उत्पादन प्रणाली को मजबूत करने और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया।

इसके अलावा, विदेशी बीमारियों से निपटने की तैयारी, पशु स्वास्थ्य अवसंरचना की मैपिंग, राष्ट्रीय स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित करने और सार्वजनिक-निजी साझेदारी को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

समिति ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक पारदर्शी, किसान-केंद्रित और वैश्विक मानकों के अनुरूप पशु स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की 43वीं बैठक: पशु संरक्षण और चिड़ियाघरों के प्रबंधन पर महत्वपूर्ण निर्णय

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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की 43वीं बैठक की अध्यक्षता की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किए गए संदेश में मंत्री ने बताया कि बैठक में देशभर के चिड़ियाघरों के एक्स-सिटू संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के चिड़ियाघरों की दूसरी बार प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन (MEE) पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल हैं:

  • CSR योगदान के माध्यम से चिड़ियाघरों के लिए संभावनाओं की समीक्षा करने हेतु उप-समिति का गठन।

  • अब से CZA की बैठकों की आवृत्ति बढ़ाना, जो राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठकों के अनुरूप होगी।

भूपेंद्र यादव ने बैठक में यह भी रेखांकित किया कि चिड़ियाघरों का MEE एक साक्ष्य-आधारित, व्यापक, समग्र और स्वतंत्र प्रक्रिया है, जो देशभर के चिड़ियाघरों में उच्चतम मानकों के पालन को प्रोत्साहित करती है।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि राष्ट्रीय चिड़ियाघर नीति का एक उद्देश्य है कि आगंतुकों में वन्यजीवों के प्रति सहानुभूति पैदा की जाए और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को समझाया जाए। इसके लिए यह सुनिश्चित किया गया कि चिड़ियाघरों की आउटरीच गतिविधियों को बढ़ाया जाए, जैसे कि महत्वपूर्ण दिवसों के लिए वार्षिक कैलेंडर और क्रियान्वयन योजना तैयार करना, तथा विभिन्न प्रजातियों के लिए जिम्मेदारी निर्धारित करना।

साथ ही, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने मंगलवार को 34वां स्थापना दिवस भी मनाया। यह अवसर मुख्य वन्यजीव संरक्षक और चिड़ियाघर निदेशकों की कॉन्फ्रेंस के साथ संपन्न हुआ, जो चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित चर्चाओं का साझा मंच प्रदान करता है।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन) किर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि चिड़ियाघर केवल जानवरों को देखने का स्थान नहीं है, बल्कि यह शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए जानवरों के व्यवहार, देखभाल और चिकित्सा विधियों को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम यहां कमजोर और असहाय जानवरों की देखभाल कर रहे हैं, इसलिए हमें संवेदनशील रहना चाहिए कि और क्या किया जा सकता है।”

सत्र में उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे विश्व के सर्वोत्तम प्रथाओं और अन्य चिड़ियाघरों से सीखने को ध्यान में रखें। उन्होंने उल्लेख किया कि युवा पीढ़ी अब मोबाइल और वर्चुअल रियलिटी पर अधिक केंद्रित है और प्राकृतिक चमत्कारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता घट रही है। इस संदर्भ में, चिड़ियाघरों की भूमिका विशेष रूप से शहरी निवासियों में प्राकृतिक जगत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम है।

प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास के संदर्भ में किर्ति वर्धन सिंह ने चर्चा की कि कैसे तकनीक का उपयोग बेहतर चिड़ियाघर प्रबंधन, जानवरों की देखभाल और आगंतुक अनुभव को सुधारने में किया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, हितधारकों और NGOs के साथ अधिक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

वन निदेशक और विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने कहा कि CZA का स्थापना दिवस भारत में नैतिक और संरक्षण-उन्मुख चिड़ियाघर प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर है। अतिरिक्त वन निदेशक (MoEFCC) रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि भारत चिड़ियाघर प्रबंधन में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि देश के 150 से अधिक चिड़ियाघरों में अधिकांश वन विभाग द्वारा संचालित हैं। CZA के सदस्य सचिव V. क्लेमेंट बेन ने कहा कि CZA ने भारतीय चिड़ियाघरों को पारंपरिक प्रदर्शन केंद्रों से पेशेवर रूप से प्रबंधित संरक्षण संस्थानों में बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पूरा दिन चलने वाला सम्मेलन नीति, प्रैक्टिस, विज्ञान और प्रशासन के दृष्टिकोण को एक साथ लाया। इसमें आधुनिक चिड़ियाघर प्रबंधन, संरक्षण प्रजनन, पशु चिकित्सा देखभाल, पोषण, स्थिरता और वन्य-स्वास्थ्य (One Health) दृष्टिकोण जैसे समकालीन मुद्दों और अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह चर्चा जानवरों, पारिस्थितिकी तंत्र और मानव समुदायों की आपसी भलाई को मजबूती प्रदान करने वाली थी।

इन्फ्लुएंजा तैयारी और प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने हेतु नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘इन्फ्लुएंजा चिंतन शिविर’ आयोजित

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राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इंडिया के सहयोग से “इन्फ्लुएंजा तैयारी एवं प्रतिक्रिया के लिए अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को सुदृढ़ करना” विषय पर दो दिवसीय इन्फ्लुएंजा चिंतन शिविर का आयोजन 22–23 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में किया।

चिंतन शिविर का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वीडियो संदेश के माध्यम से किया। उन्होंने इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए समन्वित तैयारी और प्रतिक्रिया उपायों के महत्व पर जोर देते हुए सर्ज क्षमता योजना को देश की महामारी-रोधी क्षमता मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) की अहम भूमिका को रेखांकित किया और केंद्र व राज्यों के बीच मजबूत तथा सहयोगात्मक निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

इस चिंतन शिविर में स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि और पर्यावरण मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों सहित लगभग 100 विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह सहभागिता सरकार के वन हेल्थ और समग्र सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) को और सशक्त करती है। इन्फ्लुएंजा मामलों की रिपोर्टिंग के इतिहास वाले 11 राज्यों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि राज्य एवं जिला निगरानी इकाइयों के IDSP अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े, जिससे सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। कार्यक्रम में तकनीकी प्रस्तुतियां, पैनल चर्चाएं, समूह कार्य सत्र और राज्यों की प्रस्तुतियां शामिल रहीं।

चर्चाओं में यह रेखांकित किया गया कि इन्फ्लुएंजा आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दीर्घकालिक रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के लिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय IDSP नेटवर्क के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौसमी इन्फ्लुएंजा की वास्तविक समय में निगरानी कर रहा है। शिविर में इस बात पर सहमति बनी कि प्रभावी अंतर-क्षेत्रीय समन्वय, मजबूत निगरानी, प्रयोगशाला क्षमता और नैदानिक तैयारी के माध्यम से मौसमी एवं जूनोटिक इन्फ्लुएंजा के शीघ्र पता लगाने और समय पर प्रतिक्रिया को और बेहतर किया जाए।

चिंतन शिविर का एक प्रमुख परिणाम इन्फ्लुएंजा तैयारी की एक संरचित चेकलिस्ट का विकास रहा, जो केंद्र, राज्यों और जिलों को चार प्रमुख क्षेत्रों में मार्गदर्शन प्रदान करेगी—

  1. निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और जोखिम आकलन

  2. प्रयोगशाला प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण

  3. अस्पताल तैयारी और नैदानिक प्रतिक्रिया

  4. वन हेल्थ समन्वय, जोखिम संचार और सामुदायिक सहभागिता (RCCE)

शिविर का समापन मौसमी एवं जूनोटिक इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए समग्र सरकारी और वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति के साथ हुआ। सभी मंत्रालयों ने मानव, पशु और वन्यजीव क्षेत्रों में एकीकृत निगरानी को मजबूत करने, प्रयोगशाला एवं जीनोमिक क्षमताओं को बढ़ाने, समय पर डेटा साझा करने और राष्ट्रीय महामारी तैयारी ढांचे के अनुरूप क्षेत्रीय कार्य योजनाओं को संरेखित करने का संकल्प लिया। चर्चाओं ने इन्फ्लुएंजा तथा अन्य श्वसन वायरल खतरों की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए भारत की समन्वित राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस पर राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 (2025–29) लॉन्च की

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज राष्ट्रीय रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस–AMR) पर राष्ट्रीय कार्य योजना का दूसरा संस्करण (2025–29) लॉन्च किया।
इस अवसर पर उनके साथ डॉ. ए. के. सूद, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार; पुन्या सलिला श्रीवास्तव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव; डॉ. राजीव बहल, सचिव—स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, तथा डॉ. सुनीता शर्मा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS) भी उपस्थित रहे।

“AMR एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से संभव” —  नड्डा

कार्यक्रम में बोलते हुए नड्डा ने जोर देकर कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है जिसे केवल सामूहिक प्रयासों से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में यात्रा वर्ष 2010 में प्रारंभ हुई थी और 2017 में पहला NAP-AMR लॉन्च किया गया था।


उन्होंने कहा कि AMR विशेष रूप से सर्जरी, कैंसर उपचार और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रक्रियाओं में गंभीर जोखिम पैदा करता है। एंटीबायोटिक दवाओं के अतिरिक्त और गलत उपयोग से यह समस्या और बढ़ गई है, जिसके लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कई महत्त्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया।

NAP–AMR 2.0 में प्रमुख सुधार

नड्डा ने बताया कि AMR पर नई राष्ट्रीय कार्य योजना—NAP-AMR 2.0—ने पहली कार्य योजना में पहचानी गई कमियों को दूर किया है। इसमें:

  • AMR प्रयासों की जिम्मेदारी बढ़ाना

  • सभी क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय

  • निजी क्षेत्र के साथ मजबूत भागीदारी शामिल है।

उन्होंने जागरूकता, शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रयोगशाला क्षमता और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नियमित बैठकों और समीक्षा की आवश्यकता भी बताई।

“AMR एक प्रकार की वैश्विक महामारी है” — डॉ. ए. के. सूद

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. सूद ने कहा कि NAP-AMR 2.0 का लॉन्च WHO की विश्व AMR जागरूकता सप्ताह (18–24 नवंबर) के पहले दिन होना अत्यंत उपयुक्त है।

उन्होंने बताया:

  • केरल और गुजरात OTC (ओवर-द-काउंटर) एंटीबायोटिक बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले राज्य हैं।

  • कई एंटीमाइक्रोबियल और कीटनाशक कृषि उपयोग के लिए प्रतिबंधित किए गए हैं।

  • India AMR Innovation Hub के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों को जोड़कर नई तकनीकों पर कार्य किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) को वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में मान्यता दी गई है, जिसके स्वास्थ्य, राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव व्यापक हैं।

AMR के परिणाम:

  • उपचार में देरी

  • संक्रमण के प्रसार का बढ़ना

  • स्वास्थ्य-सेवा लागत में वृद्धि

  • सर्जिकल प्रक्रियाओं, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर उपचार की प्रभावशीलता में कमी

भारत ने AMR रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता माना है।
2010 में राष्ट्रीय कार्यबल का गठन, 2011 में राष्ट्रीय नीति और 2017 में पहली राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) लॉन्च की गई थी।

NAP-AMR 2.0 का निर्माण 2022 से कई चरणों में हुआ, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, कृषि, अनुसंधान सहित 20 से अधिक मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी थी।

नई कार्य योजना में:

  • सभी मंत्रालयों के स्पष्ट कार्य, समयसीमा और बजट शामिल

  • विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय की व्यवस्था

  • निजी क्षेत्र, उद्योग, तकनीकी संस्थानों, NGOs और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की सक्रिय भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम में मत्स्य पालन मंत्रालय, पशुपालन मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, AYUSH मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।


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