Media24Media.com: #NursingLeadership

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #NursingLeadership. Show all posts
Showing posts with label #NursingLeadership. Show all posts

भारत–ऑस्ट्रेलिया नर्सिंग सहयोग पर दो दिवसीय राउंडटेबल का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एडिथ कवान यूनिवर्सिटी (ECU), ऑस्ट्रेलिया और झपीगो के साथ मिलकर आज ‘भारत और ऑस्ट्रेलिया में नर्सिंग वर्कफोर्स को सशक्त बनाना: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप एक सुदृढ़ और कुशल नर्सिंग वर्कफोर्स के लिए सहयोगी मार्ग बनाना’ विषय पर आधारित दो दिवसीय राउंडटेबल के पहले दिन का उद्घाटन सफलतापूर्वक किया।

इस संवाद का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करना, श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान करना और भविष्य के लिए तैयार, लचीली नर्सिंग वर्कफोर्स विकसित करने हेतु संयुक्त मार्ग तैयार करना है।

मुख्य वक्तव्य

आकांक्षा रंजन, उप सचिव (नर्सिंग एवं डेंटल), स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यह राउंडटेबल अत्यंत उपयुक्त समय पर आयोजित हो रहा है, ठीक राष्ट्रीय रणनीतिक बैठक के बाद, जिसमें भारत में नर्सिंग नीति के भविष्य पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि “नर्सेस स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं” और एक सक्षम, लचीली व दक्षता-आधारित नर्सिंग वर्कफोर्स विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने बताया कि विश्वभर में 2.9 मिलियन नर्सें कार्यरत हैं, जबकि 4.5 मिलियन की कमी है, जिससे नर्सिंग पेशे के लिए वैश्विक मांग और नैतिक प्रवास के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत–ऑस्ट्रेलिया सहयोग नर्सिंग शिक्षा, वर्कफोर्स विकास और नैतिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

DGHS का संबोधन

डॉ. दीपिका कहखा, नर्सिंग सलाहकार, DGHS ने कहा कि “नर्सें वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की धड़कन हैं।”

उन्होंने बताया कि भारत की 3.5 मिलियन नर्सिंग वर्कफोर्स देश की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। देश में 5,000 से अधिक नर्सिंग संस्थान संचालित हैं और सरकार निकट भविष्य में 157 नए नर्सिंग संस्थान स्थापित करने जा रही है।

उन्होंने कहा कि फैकल्टी डेवलपमेंट में निवेश पूरे नर्सिंग तंत्र को मजबूत करता है और इसका लाभ सीधा छात्रों तक पहुंचता है।

उन्होंने यह भी बताया कि नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन एक्ट, 2023 के तहत नर्सिंग पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण नर्सिंग शिक्षा में एक ऐतिहासिक कदम है—जो दक्षता-आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, बेहतर क्लिनिकल एक्सपोजर और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

प्रो. कैरेन स्ट्रिकलैंड, एक्ज़ीक्यूटिव डीन, ECU, ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वैश्विक सहयोग अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य की चुनौतियों को संभालने में सक्षम नर्सिंग वर्कफोर्स तैयार की जा सके।

उन्होंने भारत–ऑस्ट्रेलिया की दीर्घकालिक साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह राउंडटेबल नवाचार, शोध और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान–प्रदान का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

डॉ. कमलेश लालचंदानी, डिप्टी कंट्री डायरेक्टर, झपीगो ने कहा कि भारत में नर्सिंग व मिडवाइफरी प्रणाली को मजबूत करने में झपीगो निरंतर सहयोग कर रहा है। उन्होंने सबूत-आधारित प्रथाओं, नवाचार और क्षमता निर्माण की भूमिका पर बल दिया।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

बैठक में निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत–ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को प्राथमिकता दी गई—

  • फैकल्टी डेवलपमेंट

  • संयुक्त शोध

  • एक्सचेंज प्रोग्राम

  • डिजिटल लर्निंग इनोवेशन

कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, नर्सिंग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और विकास साझेदार शामिल हुए। यह राउंडटेबल नर्सिंग एवं मिडवाइफरी सुधारों पर राष्ट्रीय एजेंडा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।


भारत में नर्सिंग शिक्षा और कार्यबल सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुभव साझा कार्यशाला का आयोजन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने झाइपाइगो (Jhpiego) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से “भारत में नर्सिंग पारिस्थितिकी तंत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने” पर अनुभव साझा कार्यशाला का आयोजन नई दिल्ली में किया।

यह बहुदिवसीय कार्यशाला 12 नवम्बर 2025 से प्रारंभ हुई, जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, नर्सिंग क्षेत्र के नेता, शिक्षाविद् एवं विकास सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य भारत की नर्सिंग कार्यबल, शिक्षा प्रणाली और सुशासन तंत्र को मजबूत बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।

पहले दिन की प्रमुख बातें

पहले दिन नर्सिंग शिक्षा सुधार और कार्यबल सुदृढ़ीकरण पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि नर्सिंग शिक्षा की प्रक्रिया, संरचना और परिणामों में सुधार की आवश्यकता है ताकि भविष्य के लिए सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नर्सिंग कार्यबल तैयार किया जा सके।

दूसरे दिन की चर्चा

कार्यशाला के दूसरे दिन, राज्यों और संस्थानों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए। प्रस्तुतियों में कौशल आधारित पाठ्यक्रम, क्लिनिकल प्रशिक्षण हेतु सिमुलेशन लैब की स्थापना, मान्यता प्रणाली में राज्य स्तरीय सुधार, सतत् शिक्षा हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगठित नर्सिंग शिक्षा कार्यक्रमों के उदाहरण साझा किए गए।

विचार-विमर्श के दौरान नर्सिंग नेतृत्व, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की भूमिका पर भी चर्चा की गई। समूह सत्रों में राज्यों ने अपनी विशिष्ट चुनौतियों और स्थानीय समाधान साझा किए, जिससे सफल मॉडलों की पहचान और उनके विस्तार के लिए ठोस सिफारिशें तैयार की जा सकीं।

अधिकारियों के वक्तव्य

स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ. दीपिका खाखा ने मंत्रालय की समावेशी नीति निर्माण प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, शिक्षाविदों, नियामक संस्थाओं और भागीदार संगठनों की सहभागिता से नीतियाँ अधिक प्रभावी बनती हैं।

अकांक्षा रंजन, उप सचिव (नर्सिंग एवं डेंटल), स्वास्थ्य मंत्रालय ने “एक दृष्टि, एक एजेंडा: राष्ट्रीय–राज्य सहयोग के माध्यम से नर्सिंग और मिडवाइफरी को सशक्त बनाना” विषय पर बोलते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय ही नीति को जमीनी स्तर पर सफल बनाने की कुंजी है।

डॉ. अमित अरुण शाह, देश निदेशक, झाइपाइगो ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा, नेतृत्व विकास और डिजिटल नवाचार नर्सिंग कार्यबल को उत्तरदायी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक हैं।

डॉ. खंदैत, उप निदेशक एवं कंट्री लीड, गेट्स फाउंडेशन ने नर्सिंग क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना की और मंत्रालय, राज्यों एवं भागीदारों के सामूहिक प्रयासों को सराहा।

निष्कर्ष

यह कार्यशाला राज्यों और संस्थानों से प्राप्त अनुभवों को एकीकृत कर, सर्वोत्तम प्रथाओं को व्यापक रूप से अपनाने एवं लागू करने के लिए एक सशक्त, सक्षम और सशक्त नर्सिंग कार्यबल निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी।




Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.