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आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुँचा, आईओएस सागर पहल के तहत तीसरा पोर्ट कॉल

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भारतीय नौसेना का आईएनएस सुनयना, जो  आईओएस सागर  पहल के तहत तैनात है, 21 अप्रैल 2026 को जकार्ता पहुँचा। यह उसके हिंद महासागर क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनल तैनाती का तीसरा पोर्ट कॉल है।

यह पोत, जिसमें 16 मित्र देशों के बहुराष्ट्रीय दल के सदस्य सवार हैं, आगमन से पहले मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य जैसे संकरे मार्गों से होकर गुजरा, जिससे उसकी उच्च स्तरीय समन्वय क्षमता और नौवहन दक्षता का प्रदर्शन हुआ।

 आईओएस सागर , भारत की MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) की दृष्टि का व्यावहारिक रूप है। यह “साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति और शांति के माध्यम से प्रगति” की भावना को दर्शाता है। इस मिशन का हार्बर चरण 16 से 29 मार्च 2026 के बीच भारत में पूरा हुआ, और वर्तमान में यह समुद्री चरण (अप्रैल–मई 2026) में है, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों में पोर्ट कॉल शामिल हैं।

जकार्ता में ठहराव के दौरान, जहाज इंडोनेशियाई नौसेना (TNI AL) के साथ पेशेवर, सामाजिक और खेल गतिविधियों में भाग लेगा। आईएनएस सुनयना के कमांडिंग ऑफिसर ने कोडारेल III (नौसैनिक क्षेत्रीय कमान III) के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की।

निर्धारित कार्यक्रमों में पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, हितधारकों के लिए जहाज का दौरा और डेक रिसेप्शन शामिल हैं। प्रस्थान के समय इंडोनेशियाई नौसेना के साथ एक पासेज एक्सरसाइज (PASSEX) भी आयोजित की जाएगी।

यह पहल भारत की “Neighbourhood First” नीति और MAHASAGAR की सोच को मजबूत करती है, तथा यह संदेश देती है कि “स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक सभी देशों के हित में है।”

आईएनएस सुदर्शिनी की मोरक्को यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न, समुद्री सहयोग को मिला नया बल

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 18 अप्रैल 2026 को कैसाब्लांका मोरक्को की अपनी सफल और सार्थक बंदरगाह यात्रा पूरी कर आगे बढ़ गया। यह दौरा ‘लोकायन 26’ तैनाती के तहत भारत-मोरक्को समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण पर जोर

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेशेवर बातचीत की, जिसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग को लेकर चर्चा हुई। भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने रॉयल मोरक्कन नौसैनिक विद्यालय के कैडेट्स के साथ क्रॉस-डेक विजिट और मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियों में भाग लिया।

राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत

इस यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, वहीं मोरक्को नौसेना की ओर से भी एक विशेष लंच का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने दोनों देशों के बीच पेशेवर और सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया।

वैश्विक मैत्री का संदेश

यह यात्रा भारत और मोरक्को के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों की पुष्टि करती है, जो साझा हितों और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं। अब आईएनएस सुदर्शिनी स्पेन के लास पाल्मास के लिए रवाना हो गया है, जहां वह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश फैलाते हुए अपनी अगली यात्रा जारी रखेगा।

निष्कर्ष

आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की मित्रता और सद्भावना के संदेश को भी आगे बढ़ाती है।

INS त्रिकंड मोंबासा पहुंचा, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोंबासा बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही तैनाती के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। इस दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का केन्या दौरा भी हो रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज के क्रू द्वारा पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया जाएगा, साथ ही केन्या डिफेंस फोर्सेस को आवश्यक सामग्री भी सौंपी जाएगी। INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मोंबासा से प्रस्थान के बाद भारतीय और केन्याई नौसेना के बीच PASSEX (Passage Exercise) आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय और संचालन क्षमता को और मजबूत किया जा सके। यह दौरा भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।



INS त्रिकंड तंजानिया पहुँचा, भारत-तंजानिया समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 03 अप्रैल 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुँचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है।

इस पोर्ट कॉल के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें पेशेवर संवाद और तंजानिया नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण शामिल है, ताकि आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के तहत मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले और योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जो आपसी सद्भाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।

इस यात्रा के दौरान भारत से लाए गए आवश्यक सामग्रियों (क्रिटिकल स्टोर्स) को भी सौंपा जाएगा।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

INS त्रिकंड का यह दौरा भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टि के अनुरूप है।


आईएनएस तरंगिणी का त्रिंकोमाली पहुंचना, भारत–श्रीलंका नौसैनिक सहयोग को नई मजबूती

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Indian Navy का सेल प्रशिक्षण पोत INS Tarangini 27 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण यात्रा पर Trincomalee Harbour, Sri Lanka पहुँचा। पोत का स्वागत श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से किया गया। यह यात्रा हाल ही में Visakhapatnam में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में जहाज की भागीदारी के बाद की गई है।

पोर्ट कॉल के दौरान तरंगिणी के कमांडिंग ऑफिसर ने पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के उप-कमांडर कमोडोर हरिता जयादेवाथे से शिष्टाचार भेंट की और सेल प्रशिक्षण में सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। जहाज पर श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए परिचयात्मक भ्रमण का आयोजन किया गया। पोर्ट कॉल के दौरान सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की भी योजना बनाई गई है।

चयनित प्रशिक्षु अधिकारियों को, जो श्रीलंकाई नौसैनिक एवं समुद्री अकादमी से हैं, तरंगिणी पर कोलंबो तक की यात्रा के लिए सवार किया जाएगा। इस दौरान उन्हें सेल प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

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आईएनएस तरंगिणी की यह यात्रा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों और बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है।

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गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) 21 फरवरी को, हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा पर होगा मंथन

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गोवा- गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) का पांचवां संस्करण 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में आयोजित किया जाएगा। भारतीय नौसेना की प्रमुख रणनीतिक पहल के तहत आयोजित यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों और नौसैनिक नेतृत्व को एक मंच पर लाता है, जहां समकालीन समुद्री चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान और रणनीतियां तैयार की जाती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री होंगे मुख्य अतिथि

इस सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों और समुद्री बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मेजबानी करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया शामिल हैं।

सम्मेलन की थीम

इस वर्ष सम्मेलन की थीम है:

“हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां — IUU फिशिंग और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसी गतिशील चुनौतियों से निपटने के प्रयास”।
इसका उद्देश्य समुद्री देशों के बीच सहयोग, समन्वय और तालमेल को मजबूत करना है।

MAHASAGAR विज़न के अनुरूप पहल

गोवा मैरीटाइम सिम्पोजियम (GMS) और गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC) की शुरुआत 2016 और 2017 में की गई थी, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विज़न के अनुरूप हैं। यह मंच समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान और क्षमता निर्माण की दिशा तय करता है।

समुद्री सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ना (IUU Fishing), समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट और अवैध प्रवासन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और डार्क शिपिंग जैसी नई चुनौतियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।

विशेषज्ञों के विचार और मुख्य भाषण

सम्मेलन में समुद्री जानकारी के वास्तविक समय आदान-प्रदान और संयुक्त क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) मुख्य भाषण देंगे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक समाधान तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।


भारतीय नौसेना ने CTF-154 की कमान संभाली – समुद्री सुरक्षा सहयोग में ऐतिहासिक कदम

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भारतीय महासागर क्षेत्र और उससे आगे सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, भारतीय नौसेना ने कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF)-154 की कमान संभाल ली है। यह टास्क फोर्स कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के तहत एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।

कमांड परिवर्तन समारोह 11 फरवरी 2026 को बहरीन के मनामा स्थित CMF मुख्यालय में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वाइस एडमिरल कर्ट ए. रेनशॉ, कमांडर CMF / US NAVCENT / US फिफ्थ फ्लीट ने की। इस अवसर पर वाइस एडमिरल तरुण सोबती, डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS), भारतीय नौसेना, तथा अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी (शौर्य चक्र) ने औपचारिक रूप से इतालवी नौसेना के निवर्तमान कमांडर से CTF-154 की कमान संभाली।

CTF-154 का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण है। यह 47 सदस्य देशों वाले CMF में भारत की पेशेवर विशेषज्ञता, संचालन अनुभव और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

CTF-154 की स्थापना मई 2023 में हुई थी और यह मध्य पूर्व तथा व्यापक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए समर्पित है।

प्रशिक्षण के पाँच प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA)

  2. समुद्री कानून (Law of the Sea)

  3. समुद्री अवरोधन संचालन

  4. समुद्री बचाव और सहायता

  5. नेतृत्व विकास

टास्क फोर्स नियमित Maritime Security Enhancement Training (MSET) कार्यक्रम, Compass Rose तथा Northern/Southern Readiness जैसे अभ्यास और साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने हेतु आउटरीच गतिविधियाँ आयोजित करता है। इसका उद्देश्य अवैध तस्करी, समुद्री डकैती और अवैध प्रवासन जैसी साझा चुनौतियों से निपटना है।

CTF-154, CMF की अन्य टास्क फोर्सेस—

  • CTF-150 (समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-151 (समुद्री डकैती विरोधी)

  • CTF-152 (अरब खाड़ी में समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-153 (लाल सागर में समुद्री सुरक्षा)
    के साथ मिलकर कार्य करता है।

भारतीय नौसेना ने उच्च प्रभाव वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और वैश्विक समुद्री साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



आईसीजी शिप ‘सार्थक’ का कुवैत पोर्ट में आगमन: भारत-कुवैत समुद्री सहयोग को मजबूती

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भारतीय तटरक्षक (ICG) की शिप सार्थक, जो स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) है, ने 9 दिसंबर 2025 को कुवैत के सुवाइक पोर्ट में अपना आगमन किया। यह पहली बंदरगाह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में इसके ओवरसीज डिप्लॉयमेंट (OSD) का हिस्सा है। इस यात्रा से भारत–कुवैत समुद्री सहयोग में नया अध्याय जुड़ता है और यह SAGAR (Security and Growth for All in the Region) दृष्टि के तहत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने के भारत के संकल्प को दर्शाता है।

चार-दिन के प्रवास के दौरान, शिप के चालक दल द्वारा कुवैत तटरक्षक और अन्य समुद्री हितधारकों के साथ पेशेवर सहभागिता की जाएगी। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट, प्रमुख समुद्री सुविधाओं के दौरे, और समान प्रशिक्षण गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, समुद्री खोज और बचाव, और समुद्री कानून प्रवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सांस्कृतिक और खेल आदान-प्रदान, जैसे संयुक्त योग सत्र और मैत्रीपूर्ण मैच, दोनों देशों की समुद्री सेनाओं के बीच पारस्परिक समझ और संबंधों को और मजबूत करेंगे।

आईसीजी शिप सार्थक का आगमन भारत के प्रधानमंत्री के कुवैत दौरे (दिसंबर 2024) के दौरान हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) के महत्व के समय हुआ। यह MoU भारत–कुवैत रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा और समुद्री सहयोग को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। शिप की यात्रा इन साझा उद्देश्यों को मजबूत करती है और दोनों पक्षों की संचालनिक समन्वय, इंटरऑपरेबिलिटी और सुरक्षित समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कुवैत यात्रा के बाद, आईसीजी शिप सार्थक अपनी OSD जारी रखते हुए ईरान और सऊदी अरब के बंदरगाहों का दौरा करेगी। ये सभी गतिविधियाँ भारत के पश्चिम एशिया में समुद्री सहयोग को सुदृढ़ बनाने, क्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण और साझा समुद्री शासन को बढ़ावा देने के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी का ब्राजील दौरा: भारतीय-ब्राजील नौसैनिक सहयोग को सुदृढ़ करना

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भारतीय नौसेना के मुख्य स्टाफ प्रमुख (CNS), एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, 09 से 12 दिसंबर 2025 तक ब्राजील का औपचारिक दौरा कर रहे हैं।

इस दौरे का उद्देश्य भारतीय नौसेना और ब्राजीलियाई नौसेना के बीच मजबूत और बढ़ते समुद्री साझेदारी को और सुदृढ़ करना है, जो व्यापक भारत–ब्राजील रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

CNS ब्राजील के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • जोस मूसियो, ब्राजील के रक्षा मंत्री

  • एडमिरल रेनाटो रोड्रिग्स डी अगुइआर फ्रेइरे, ब्राजील सशस्त्र बलों के संयुक्त स्टाफ प्रमुख

  • एडमिरल मार्कोस सांपायो ओल्सेन, ब्राजीलियाई नौसेना के कमांडर

ये बैठकें दोनों नौसेनाओं के बीच चल रहे द्विपक्षीय समुद्री सहयोग की समीक्षा, ऑपरेशनल स्तर की कड़ियों को मजबूत करना, और सहयोग के नए अवसरों की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेंगी।

दौरे में ऑपरेशनल कमांड्स के साथ सहभागिता, नौसैनिक अड्डों और शिपयार्ड का दौरा शामिल है।

चर्चाएँ साझा समुद्री प्राथमिकताओं, नौसैनिक इंटरऑपरेबिलिटी, क्षमता निर्माण, और बहुपक्षीय ढांचे में सहयोग जैसे साउथ–साउथ सहयोग पर केंद्रित होंगी।

मुख्य स्टाफ प्रमुख के इस दौरे से भारतीय नौसेना की ब्राजीलियाई नौसेना के साथ समुद्री सुरक्षा, पेशेवर आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है, जो वैश्विक समुद्री क्षेत्रों में स्थिरता में योगदान देती है।


भारत का स्वदेशी सामरिक सामर्थ्य प्रदर्शित: आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी ने श्रीलंका में IFR 2025 में किया हिस्सा

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भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant और स्वदेशी निर्मित फ्रिगेट INS Udaygiri श्रीलंका नौसेना द्वारा कोलंबो में 27 से 29 नवंबर 2025 तक आयोजित International Fleet Review (IFR) 2025 में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह कार्यक्रम श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कई देशों के युद्धपोत, प्रतिनिधिमंडल और पर्यवेक्षक शामिल हो रहे हैं।

यह यात्रा दोनों भारतीय युद्धपोतों की पहली विदेश तैनाती है, जो क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। स्वदेशी और राष्ट्र गौरव INS Vikrant की पहली अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भारत के बढ़ते सामरिक प्रभाव, साझेदार देशों के साथ सहयोग और भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में स्थिरता, शांति और सुरक्षा के प्रति समर्पण को उजागर करती है।

हाल ही में कमीशन किए गए INS Udaygiri की भागीदारी भारत की उन्नत स्वदेशी जहाज़ निर्माण क्षमता और IOR में संतुलित तथा विस्तारित नौसैनिक उपस्थिति का संकेत देती है।

कोलंबो प्रवास के दौरान, दोनों जहाज कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों जैसे—औपचारिक फ्लीट रिव्यू, शहर परेड, सामुदायिक सहभागिता गतिविधियाँ, और पेशेवर नौसैनिक संवाद—में हिस्सा लेंगे। इसके अतिरिक्त, IFR 2025 के दौरान जहाजों को जनता के लिए भी खोला जाएगा।


हिंद-प्रशांत में तैनात आईएनएस सह्याद्री ने फिलीपीन नौसेना संग समुद्री अभ्यास किया

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भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री ने मनीला, फिलीपींस में बंदरगाह चरण की तैनाती से पहले फिलीपीन नौसेना के साथ एक अभ्यास किया।

यह पोत वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन तैनाती पर है और मित्र देशों के साथ विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग ले रहा है, जिनमें मालाबार-2025, ऑसइंडेक्स-2025, जेमेक्स-25 तथा रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के साथ पहला द्विपक्षीय अभ्यास शामिल हैं।

अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं ने सामरिक संचार अभ्यास, नेविगेशन संचालन, विज़िट बोर्ड सर्च एंड सीज़र (VBSS) अभ्यास तथा उड़ान संचालन किए, जिससे पेशेवर तालमेल और पारस्परिक समझ को और मजबूत किया गया।

बंदरगाह चरण के दौरान कई पेशेवर आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक विज़िट और विषय विशेषज्ञों के बीच चर्चा आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएँ, संयुक्त योग सत्र और अनाथालय सहायता जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

आईएनएस सह्याद्री की यह यात्रा भारत की फिलीपींस के साथ बढ़ते संबंधों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और समुद्री क्षेत्र में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग को उजागर करती है। यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी तथा सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



आईएनएस सावित्री मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुंचा, भारत-मोज़ाम्बिक नौसेनाओं के बीच सहयोग को करेगा मजबूत

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भारतीय नौसेना का ऑफशोर पेट्रोल पोत (OPV) आईएनएस सावित्री हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी तैनाती के हिस्से के रूप में मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुँचा। पोत का स्वागत मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों द्वारा गर्मजोशी और औपचारिकता के साथ किया गया, जो दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक संबंधों और सशक्त समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

अपनी यात्रा के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मी संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान में भाग लेंगे, जिनका उद्देश्य पारस्परिक सहयोग और भविष्य की संयुक्त तैनातियों के लिए इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। प्रशिक्षण सत्रों में नेविगेशन, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी, VBSS अभ्यास, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन अभ्यास पर चर्चा और व्यावहारिक अनुभव शामिल होंगे।

पोत की सामुदायिक पहुंच गतिविधियों के तहत, आईएनएस सावित्री स्थानीय नागरिकों के लिए ओपन शिप विजिट आयोजित करेगा, जिससे उन्हें भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं और समृद्ध समुद्री परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, स्थानीय समुदाय के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया जाएगा, जिससे मित्रता और सद्भावना के संबंध और मजबूत होंगे।

यात्रा का समापन संयुक्त योग सत्रों और फुटसाल (इनडोर फुटबॉल) जैसे मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबलों के साथ होगा, जिससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच सौहार्द और टीम भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह बंदरगाह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक विश्वसनीय और प्राथमिक सुरक्षा साझेदार (Preferred Security Partner) के रूप में पुनः स्थापित करती है।

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