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ISRO तकनीक हस्तांतरण में पारदर्शिता: NSIL ने अब तक 70 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट किए

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 यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लोकसभा में प्रदान की गई कि वर्तमान तिथि तक न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने ISRO द्वारा विकसित तकनीकों के हस्तांतरण के लिए 70 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट (TTAs) पर हस्ताक्षर किए हैं।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया और पारदर्शिता

  • ISRO से निजी उद्योगों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को तकनीक हस्तांतरित करने के लिए TTA और NDA किए जाते हैं, जिनमें गोपनीयता बनाए रखने के स्पष्ट प्रावधान होते हैं।

  • फिर भी, RTI अधिनियम के अंतर्गत NSIL ने उन भारतीय उद्योगों के नाम और विवरण साझा किए हैं जिन्हें ISRO तकनीकें हस्तांतरित की गई हैं।

  • कुछ जानकारी ISRO/DoS की आधिकारिक वेबसाइटों—U R Rao Satellite Centre, IN-SPACe, और NSIL—पर भी उपलब्ध है।

  • IN-SPACe केवल एक फैसिलिटेटर है, जबकि NSIL वास्तविक लाइसेंसर है।

RTI के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित

  • NSIL, RTI अधिनियम 2005 के तहत सुओ-मोटो खुलासे के सिद्धांतों का पालन करता है।

  • निजी क्षेत्र को तकनीक हस्तांतरण से जुड़ी दिशानिर्देश, उपलब्ध तकनीकें आदि NSIL की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं।

निगरानी और निष्पक्षता की व्यवस्था

  • NSIL ने एक स्वतंत्र टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कमेटी बनाई है जो सभी अनुरोधों की जांच कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।

  • हालांकि, कुछ जानकारी जैसे—शर्तें, भुगतान विवरण, और समझौतों की प्रतियां—व्यावसायिक एवं रणनीतिक रूप से संवेदनशील हैं।

  • इसलिए, इन्हें RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत खुलासा से छूट प्राप्त है।


चंद्रयान से चाँद तक – भारत का स्पेस मिशन अब होगा और बड़ा!

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2033 तक भारत की स्पेस इकॉनमी होगी 44 अरब डॉलर की, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया – निजी भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़त

नई दिल्ली- भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में जबरदस्त उछाल लेने जा रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की स्पेस इकॉनमी 2033 तक करीब 44 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी, जो 2022 के 8.4 अरब डॉलर से लगभग पाँच गुना वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरने का मौका दिया है।

🚀 निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स ने बढ़ाई रफ्तार

डॉ. सिंह ने कहा कि IN-SPACe और New Space India Limited (NSIL) जैसी संस्थाओं की स्थापना से सरकारी एकाधिकार खत्म हुआ और निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश का अवसर मिला।
इसके परिणामस्वरूप, पिछले पाँच वर्षों में 300 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स उभरे हैं, जिससे भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

🌕 चंद्रयान-3 बना भारत की पहचान

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बना।
यह मिशन अन्य देशों की तुलना में लगभग आधी लागत में पूरा हुआ, जिससे भारत की लागत-प्रभावी तकनीक की विश्व भर में सराहना हुई।

💰 विदेशी सैटेलाइट लॉन्च से हुआ बड़ा मुनाफा

अब तक भारत ने 433 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए हैं, जिससे 190 मिलियन डॉलर और 270 मिलियन यूरो की कमाई हुई है।

🛰️ भविष्य की बड़ी योजनाएँ

मंत्री ने बताया कि भारत की दीर्घकालिक योजना के तहत –

  • 2035 तक “भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन” (Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना की जाएगी।

  • 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे, और “विकसित भारत 2047” की दृष्टि का ऐलान करेंगे।

  • अगले 15 वर्षों में 100 से अधिक उपग्रहों के प्रक्षेपण की योजना है, जिनमें अधिकांश छोटे उपग्रह होंगे जो निजी कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जाएंगे।

🌍 शासन और विकास में बढ़ती भूमिका

अंतरिक्ष तकनीक अब शासन और विकास में भी अहम भूमिका निभा रही है।
SVAMITVA योजना के जरिए अब तक 1.61 लाख गांवों के 2.4 करोड़ ग्रामीणों को संपत्ति स्वामित्व अधिकार उपग्रह मानचित्रण के माध्यम से मिले हैं।
साथ ही उपग्रह तकनीक का उपयोग आपदा प्रबंधन, कृषि आकलन, वनाग्नि निगरानी और बुनियादी ढांचा योजना (गति शक्ति) में किया जा रहा है।

🤝 अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत की “स्पेस डिप्लोमेसी” भी मजबूत हो रही है।
भारत जल्द ही जापान के साथ चंद्रयान-5 मिशन और NASA के साथ NISAR मिशन लॉन्च करने जा रहा है।
पड़ोसी देश भी अब आपदा प्रबंधन और संचार के लिए भारतीय सैटेलाइट्स पर निर्भर हो रहे हैं।

🗣️ “विकसित भारत 2047” की ओर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा,

“हमारी 70 प्रतिशत अंतरिक्ष तकनीक देश के विकास और लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए समर्पित है। अंतरिक्ष, डिजिटल अवसंरचना और शासन का संगम ‘विकसित भारत 2047’ की डिजिटल तंत्रिका प्रणाली बनेगा।”

कार्यक्रम में IN-SPACe के चेयरमैन डॉ. पवन गोयंका और ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने भी संबोधित किया और भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिससे सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से सार्वभौमिक कनेक्टिविटी पर सहयोगात्मक चर्चा की नई शुरुआत हुई।


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