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पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन के लिए एनएलडीएसएल और पंजाब सरकार के बीच समझौता

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एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय ने 7 जुलाई, 2026 को यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) के माध्यम से पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की दृश्यता बढ़ाना, परिचालन दक्षता में सुधार करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रियल-टाइम लॉजिस्टिक्स डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान के माध्यम से डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। इस पहल से राज्य के उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निर्यातकों तथा अन्य लॉजिस्टिक्स हितधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस सहयोग के तहत एनएलडीएसएल, यूएलआईपी के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण सुनिश्चित कर पंजाब सरकार को एक डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग देगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, नीतिगत एवं परिचालन संबंधी निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा तथा विनिर्माण, कृषि और निर्यात केंद्र के रूप में पंजाब की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

यूएलआईपी विभिन्न सरकारी प्रणालियों से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा को एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में यह 12 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 46 प्रणालियों को 142 एपीआई के माध्यम से जोड़ता है, जिनमें 2,000 से अधिक डेटा फील्ड शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 260 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं तथा 450 करोड़ से अधिक एपीआई लेनदेन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापकता, विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाते हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परिवहन, वेयरहाउसिंग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, लोक निर्माण विभाग, नागरिक उड्डयन तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक इंटरैक्टिव यूएलआईपी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पंजाब की आवश्यकताओं के अनुरूप यूएलआईपी के उपयोग के मामलों की पहचान करना, लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का समाधान करना, आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता बढ़ाना तथा राज्य में कारोबार सुगमता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला के दौरान एनएलडीएसएल ने अपने प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म—लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB), कोयला शक्ति–स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड, ट्रैक योर ट्रांसपोर्ट (TYT), ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) और लॉजिस्टिक्स ई-मार्केटप्लेस (LeMP)—का प्रदर्शन किया। इन प्लेटफॉर्मों ने दिखाया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स डेटा किस प्रकार परिसंपत्ति ट्रैकिंग, परिचालन योजना, अंतर-विभागीय समन्वय और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।

यह समझौता पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पर एनएलडीएसएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ताकायुकी कानो तथा पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक जसप्रीत सिंह, आईएएस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह, आईएएस भी उपस्थित रहे।

यह पहल राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक तथा एनएलडीएसएल के अध्यक्ष रजत कुमार सैनी, आईएएस के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल एकीकरण और सहयोगात्मक प्रशासन के माध्यम से लॉजिस्टिक्स दक्षता को मजबूत करना है।

एनआईसीडीसी देश में ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज़ और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से भारत के औद्योगिक परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। 20 औद्योगिक स्मार्ट शहरों की सफलता के बाद एनआईसीडीसी को भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एनआईसीडीसी पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का भी क्रियान्वयन कर रहा है।

एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL), जो एनआईसीडीसी की लॉजिस्टिक्स शाखा है, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है। 30 दिसंबर, 2015 को स्थापित एनएलडीएसएल, NICDC Industrial Development Trust (NICDIT) और जापान की NEC Corporation का एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है।

निर्यात क्लस्टरों के पुनरुद्धार पर मंथन, NICDC की अहम बैठक

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) ने निर्यात-उन्मुख औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार से संबंधित केंद्रीय बजट घोषणा पर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक परामर्श बैठक आयोजित की।

यह परामर्श “सतत और सुदृढ़ आर्थिक विकास” विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार के अनुवर्ती के रूप में बुलाया गया था, ताकि क्लस्टर पुनर्जीवन पर हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके और बजट घोषणाओं को उद्योग के सतत सहयोग के माध्यम से व्यावहारिक रणनीतियों में बदला जा सके। बैठक में निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs), उद्योग संघों, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों ने व्यापक भागीदारी की।

चर्चा के दौरान हितधारकों ने क्लस्टर पुनर्जीवन के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ-साथ क्षमता निर्माण, तकनीक अपनाने और बाजार तक बेहतर पहुंच को शामिल किया जाए। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां आयात पर निर्भरता अधिक है, घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम करने के लिए मजबूत परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता अवसंरचना की आवश्यकता पर भी बल दिया।

चर्चाओं में क्लस्टरों के भीतर नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के महत्व को भी उजागर किया गया। MSME को लक्षित समर्थन देकर उनकी उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

हितधारकों ने प्रभावी प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाली भागीदारी और निवेशकों व उद्यमों के समर्थन के लिए क्लस्टर स्तर पर सुविधा तंत्र की स्थापना शामिल है। नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी और पहुंच, तथा राज्य और जिला स्तर पर लचीलेपन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

परामर्श में एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिसमें कार्यबल को बनाए रखने और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सामाजिक और शहरी अवसंरचना शामिल हो। डिजाइन, नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, सतत वित्तपोषण मॉडल विकसित करने और उच्च संभावनाओं वाले क्लस्टरों को बढ़ाने के लिए सरकारी पहलों का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।

एक व्यापक सहमति बनी कि MSME को क्लस्टर विकास के केंद्र में रखा जाए, जिसमें वित्त तक पहुंच सुधारने, क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए। वैश्विक मांग के रुझानों के साथ क्लस्टर विकास को संरेखित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

यह परामर्श उद्योग और सरकार के बीच रचनात्मक संवाद का एक मंच बना और औद्योगिक क्लस्टर पुनर्जीवन पर बजट घोषणा के कार्यान्वयन के लिए ठोस सुझावों के आदान-प्रदान को संभव बनाया। यह बैठक बजट प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चर्चाओं का मार्गदर्शन NICDC के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने किया, जिन्होंने क्लस्टर विकास ढांचे को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए हितधारकों की निरंतर भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।

इस परामर्श में ASSOCHAM, FICCI, CII, PHDCCI, NASSCOM, SIDBI, CSIR, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC), इंडियन डेयरी एसोसिएशन, अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC), ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA), इंडियन मशीन टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMTMA), इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमेन, वेयरहाउसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों और संस्थानों की भागीदारी रही। रिलायंस, टाटा केमिकल्स, रिलैक्सो, ब्यूमर ग्रुप और JLL जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

बैठक की अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की।

NICDC के बारे में:

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है, जो ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों की योजना, विकास और कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने का कार्य करती है।

JBIC गवर्नर का धोलेरा SIR दौरा: भारत की उभरती सेमिकॉन सिटी में प्रगतिशील अवसंरचना का अवलोकन

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जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर नोबुमित्सु हयाशी ने आज गुजरात स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) के फ्लैगशिप औद्योगिक पार्क ‘धोलेरा स्पेशल इंवेस्टमेंट रीजन (धोलेरा SIR)’ का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत के पहले और उभरते सेमिकॉन सिटी में प्रगति की समीक्षा करना तथा तेजी से विकसित हो रहे ग्रीनफील्ड एवं ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन करना था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और धोलेरा देश का सबसे महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड स्मार्ट औद्योगिक शहर बनकर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय अवसंरचना की सराहना

दौरे के दौरान JBIC गवर्नर हयाशी ने धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय योजना, मजबूत अवसंरचना तैयारियों और उत्कृष्ट प्रशासनिक ढांचे की सराहना की। उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर विकास यात्रा पर विश्वास व्यक्त करते हुए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की तेज प्रगति को नोट किया। उन्होंने कहा कि धोलेरा की एकीकृत प्रणालियाँ, स्केलेबल यूटिलिटीज और भविष्य-तैयार अवसंरचना उसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेशों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाती हैं।

ABCD बिल्डिंग और प्रमुख यूटिलिटी सुविधाओं का निरीक्षण

दौरा ABCD बिल्डिंग से शुरू हुआ, जो धोलेरा का प्रशासन एवं कमांड सेंटर है। यहाँ प्रतिनिधिमंडल ने एकीकृत योजना ढांचा, डिजिटल गवर्नेंस आर्किटेक्चर और केंद्रीकृत यूटिलिटी प्रबंधन प्रणालियों की समीक्षा की।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), एक्सपीरियंस सेंटर और टोरेंट पावर के 400 kV सबस्टेशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भ्रमण किया, जो उन्नत विनिर्माण के लिए धोलेरा की मजबूत आधारभूत संरचना को दर्शाती हैं।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 91,000 करोड़ रुपये के सेमीकॉन फैब प्लांट का अवलोकन

धोलेरा SIR में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट में JBIC प्रतिनिधिमंडल ने टाटा समूह नेतृत्व के साथ बैठक की और 163-एकड़ में विकसित किए जा रहे कारखाने की प्रगति का जायजा लिया।
यह भारत का पहला व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट है, जो ₹91,000 करोड़ के निवेश से PSMC (ताइवान) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।

यह प्लांट 2027 से उत्पादन शुरू करेगा और 110 nm से 28 nm नोड्स तक प्रति माह 50,000 वेफर्स का निर्माण करेगा। इससे 20,000 से अधिक उच्च-कुशल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
गवर्नर हयाशी ने उम्मीद जताई कि यह परियोजना भारत–जापान तकनीकी सहयोग को नए आयाम देगी।

NICDC और DICDL ने प्रस्तुत किए धोलेरा के प्रमुख फीचर्स

NICDC के CEO एवं MD रजत कुमार सैनी ने धोलेरा SIR की प्रमुख विशेषताओं पर प्रस्तुति दी। DICDL के MD  कुलदीप आर्या एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

भारत के NICDC औद्योगिक शहरों में जापानी कंपनियों का बढ़ता निवेश

जापानी कंपनियों ने NICDC के विभिन्न औद्योगिक नगरों में 116 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹1,700 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
नवीनतम निवेशकों में NX Logistics India Pvt. Ltd. शामिल है, जिसने AURIC (शेंद्रा) में 12.86 एकड़ से विस्तार करते हुए अब धोलेरा में भी अपनी इकाई स्थापित की है। इससे ₹86 करोड़ का निवेश और 400 नौकरियाँ पैदा होंगी।

अन्य जापानी कंपनियाँ—Nippon Express, Nagata, Sango और Fuji Silvertech—भी अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।

उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का केंद्र बन रहा है धोलेरा

हाल के महीनों में धोलेरा ने JBIC, JETRO, JICA, जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं दर्जनों अन्य कंपनियों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की है।
यह भारत–जापान औद्योगिक सहयोग में धोलेरा की केंद्रीय भूमिका को प्रदर्शित करता है।

धोलेरा में विकसित हो रहा है संपूर्ण स्मार्ट औद्योगिक शहर

धोलेरा में सामाजिक अवसंरचना भी तेजी से विकसित हो रही है:

  • 200-बेड का मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल

  • एकीकृत विद्यालय

  • गेस्ट हाउस एवं कॉर्पोरेट होटल

  • अंतरराष्ट्रीय टेंट सिटी

  • मल्टी-क्यूज़ीन फूड कोर्ट

  • अग्निशमन स्टेशन

  • निजी डेवलपर्स द्वारा आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाएँ

धोलेरा का Activation Area एक आधुनिक मिश्रित-उपयोग परिसर के रूप में उभर रहा है।

JBIC गवर्नर हयाशी का यह दौरा न केवल धोलेरा की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करता है, बल्कि भारत–जापान सेमीकंडक्टर सहयोग और वैश्विक वैल्यू चेन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।

आंध्र प्रदेश में लॉजिस्टिक्स डिजिटलीकरण को बढ़ावा: NLDSL और राज्य सरकार ने ULIP आधारित पहल के लिए किया MoU हस्ताक्षर

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NICDC) लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और आंध्र प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को विशाखापट्टनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग करके आंध्र प्रदेश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का व्यापक डिजिटलीकरण करना है।

इस पहल के तहत आंध्र प्रदेश के सरकारी और निजी हितधारकों को राज्य के लॉजिस्टिक्स संचालन और प्रदर्शन मानकों की वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करने के लिए एक मजबूत एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाएगा। यह प्लेटफ़ॉर्म विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय को बढ़ाएगा, दक्षता में सुधार करेगा और डेटा-आधारित निर्णय लेने को सक्षम बनाएगा।

आंध्र प्रदेश सरकार, INCAP के माध्यम से, NLDSL के साथ मिलकर राज्य के विभिन्न विभागों के लॉजिस्टिक्स संबंधी प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) की निगरानी के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक्स डैशबोर्ड विकसित करेगी। इस डैशबोर्ड से प्राप्त विश्लेषणात्मक रिपोर्टें और अंतर्दृष्टियाँ ULIP की क्षमताओं का उपयोग करते हुए राज्य के लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में मदद करेंगी।

यह MoU उन्नत तकनीकी समाधानों को लॉजिस्टिक्स विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और कुशल, आधुनिक और मजबूत आपूर्ति शृंखला अवसंरचना के निर्माण में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करता है।

MoU पर हस्ताक्षर NICDC के CEO एवं MD तथा NLDSL के चेयरमैन रजत कुमार सैनी की उपस्थिति में किए गए। यह समझौता INCAP के VC एवं MD सी. वी. प्रवीण आदित्य और NLDSL के CEO ताकायुकी काणो द्वारा औपचारिक रूप से कार्यान्वित किया गया। यह साझेदारी राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) के अनुरूप विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ULIP के बारे में:

ULIP एक डिजिटल गेटवे है जो उद्योग हितधारकों को विभिन्न सरकारी प्रणालियों से API-आधारित एकीकरण के माध्यम से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा तक पहुँच प्रदान करता है। ULIP ने 11 मंत्रालयों की 44 प्रणालियों से 136 APIs के माध्यम से एकीकरण किया है, जो 2,000 से अधिक डेटा फ़ील्ड्स को कवर करता है। अब तक उद्योगों ने ULIP का उपयोग करके 210 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए हैं और 200 करोड़ से अधिक API लेनदेन किए गए हैं। निजी क्षेत्र के अलावा, ULIP कोयला मंत्रालय, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न राज्य सरकारों सहित कई विभागों को डेटा-आधारित शासन प्रदान करने में भी सहयोग कर रहा है।


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