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जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए 'भुवनेश्वर घोषणा' को अपनाया गया

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जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को सशक्त बनाने' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन भुवनेश्वर घोषणा (Bhubaneswar Declaration) को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणा प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत@2047' के विजन को साकार करने की दिशा में जनजातीय ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने वाले मजबूत संस्थानों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

कार्यशाला में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों, राज्य जनजातीय कल्याण विभागों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी संगठनों, उद्योग, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा नागरिक समाज के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें भारत के जनजातीय अनुसंधान तंत्र के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

पहले दिन की प्रमुख चर्चाएं

पहले दिन चार विषयगत समूह चर्चाएं और विशेषज्ञ पैनल आयोजित किए गए। इनमें निम्नलिखित विषयों पर विशेष जोर दिया गया—

  • जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को ज्ञान एवं सांस्कृतिक संसाधन केंद्रों के रूप में विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण एवं डिजिटल संरक्षण।

  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए मजबूत जनजातीय डेटा प्रणाली, आधारभूत सर्वेक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा नवाचार आधारित तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान, योजना, सेवा वितरण और निगरानी को सशक्त बनाना।

  • संस्थागत सुधार, सुशासन, मानव संसाधन विकास और रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से TRIs को पेशेवर एवं टिकाऊ संस्थानों के रूप में विकसित करना।

दूसरे दिन राष्ट्रीय रोडमैप पर सहमति

दूसरे दिन सभी कार्य समूहों ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिन पर विशेषज्ञों एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा हुई। इन सिफारिशों के आधार पर जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया।

सचिव रंजना चोपड़ा का वक्तव्य

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव  रंजना चोपड़ा ने कहा कि—

"जनजातीय अनुसंधान संस्थान जनजातीय समुदायों की आवाज़ हैं। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्हें अधिक संस्थागत और वित्तीय स्वायत्तता मिलनी चाहिए तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और अन्य ज्ञान संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। भुवनेश्वर घोषणा जनजातीय विकास को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है।"

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सात TRIs सम्मानित

जनजातीय अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, ज्ञान सृजन एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सात जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए—

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, छत्तीसगढ़

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, ओडिशा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं सांस्कृतिक संस्थान, त्रिपुरा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, महाराष्ट्र

  • किर्टाड्स (KIRTADS), केरल

  • जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, तेलंगाना

  • डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान, झारखंड

भुवनेश्वर घोषणा के प्रमुख संकल्प

घोषणा में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी—

  • TRIs को उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) के रूप में विकसित करना।

  • सामुदायिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता देना।

  • राष्ट्रीय TRI अनुसंधान एजेंडा (2027–2032) तैयार करना।

  • Model TRI Framework 2030 को लागू करना।

  • सभी TRIs के लिए परिणाम एवं रैंकिंग प्रणाली विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, संस्कृति, संगीत, पारंपरिक ज्ञान एवं कला का संरक्षण करना।

  • अनुसंधान गुणवत्ता, डेटा प्रबंधन और नैतिक मानकों को मजबूत करना।

  • AI, डेटा एनालिटिक्स और साझा तकनीकी अवसंरचना का उपयोग बढ़ाना।

  • विश्वविद्यालयों, उद्योग और तकनीकी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना।

  • जनजातीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

समापन

कार्यशाला के समापन पर भुवनेश्वर घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया गया। यह घोषणा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को अनुसंधान, ज्ञान सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मार्गदर्शक दस्तावेज़ होगी। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का संरक्षण करते हुए 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य को साकार करने में जनजातीय समुदायों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

दूरदराज़ के आदिवासी गाँवों से आई उज्जवल सफलता: 597 EMRS छात्रों ने JEE और NEET में हासिल की कामयाबी

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देश के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों से आने वाले 597 छात्रों ने 2024-25 में JEE Main, JEE Advanced और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह बड़ी छलांग पिछले साल के सिर्फ 16 छात्रों (JEE) और 6 छात्रों (NEET) की तुलना में बेहद प्रेरणादायक है।

यह सफलता Eklavya Model Residential Schools (EMRS) की विशेष शिक्षा और मार्गदर्शन की देन है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें बड़े अवसरों तक पहुँचाने में मदद करती हैं। कुल 230 EMRS स्कूलों में से 101 स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास किया।

प्रेरणादायक उदाहरण:

जतिन नेगी, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला गाँव से, जिन्होंने JEE Advanced में 421वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IIT जोधपुर में B.Tech की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि EMRS में शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की।

पड़वी उर्जस्वीबेन अमृतभाई, गुजरात के खपतिया गाँव की रहने वाली, ने NEET परीक्षा पास की और अब GMERS मेडिकल कॉलेज, जूनागढ़ में MBBS कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मार्गदर्शन और मेहनत ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

EMRS छात्रों का प्रदर्शन (2024–25)

राज्य     JEE Main       JEE Advanced         NEET
आंध्र प्रदेश         17               1            0
छत्तीसगढ़         17               3           18
गुजरात        37               3          173
हिमाचल प्रदेश         3               1            7
झारखंड        6               0              0
कर्नाटक         7               0            0
मध्य प्रदेश      51              10          115
महाराष्ट्र         7               2            7
ओडिशा      10               4            0
तेलंगाना      60              10           24
उत्तर प्रदेश       1               0               0
उत्तराखंड       3               0            0
कुल     219              34          344

EMRS क्या हैं?

Eklavya Model Residential Schools (EMRS) केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित स्कूल हैं। ये स्कूल दूरदराज़ आदिवासी बच्चों को मुफ्त, CBSE-सम्बद्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हॉस्टल सुविधा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

संविधान और कानून की भूमिका

भारत के संविधान ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान बनाए हैं। Articles 15 और 46, और Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 जैसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं कि इन छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें।

विशेष शैक्षिक समर्थन

EMRS छात्रों को IIT-JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल ट्यूटरिंग, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास लैब्स, अटल टिंकरिंग लैब्स और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह मदद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाती है।

जतिन और पड़वी जैसी कहानियां यह दिखाती हैं कि सही शिक्षा, मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्र का बच्चा बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।


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