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DGMS ने 125वां स्थापना दिवस मनाया, खान मजदूरों की सुरक्षा और कल्याण में समर्पित सेवा का जश्न

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइनस सेफ्टी (DGMS) ने आज धनबाद, झारखंड में अपने मुख्यालय में 125वां स्थापना दिवस मनाया, जो देशभर में खान मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने में एक सदी से अधिक समर्पित सेवा का प्रतीक है। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंडलाजे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। DGMS के महानिदेशक उज्ज्वल ताह, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की संयुक्त सचिव दीपिका कच्छल, DGMS के वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रालय के अधिकारी, खनन उद्योग के प्रतिनिधि और विभिन्न हितधारक भी समारोह में उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंडलाजे ने कहा कि DGMS की 125 वर्षीय यात्रा अधिकारियों और खान मजदूरों की समर्पित सेवा और बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने उन सभी का योगदान स्वीकार किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम किया। मंत्री ने यह भी कहा कि आज खनन गतिविधियाँ सीधे भारत की विकास कहानी से जुड़ी हैं। उन्होंने खान मजदूरों के साहस और समर्पण को श्रद्धांजलि दी, जिनकी बहादुरी और जीवन जोखिम के बावजूद सेवा ने खनन को संभव बनाया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।

मंत्री ने दोहराया कि कर्मचारियों की सुरक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “फर्स्ट सेफ्टी” दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने DGMS की भूमिका पर बल दिया, जो सभी खनन संचालन में समान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करता है। साथ ही उन्होंने केंद्र-राज्य समन्वय और DGMS के क्षेत्रीय कार्यालयों की सशक्त भागीदारी को प्रभावी सुरक्षा प्रवर्तन के लिए आवश्यक बताया।

श्रम सुधारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए, करंडलाजे ने कहा कि चार श्रम संहिताएँ, जिन्होंने 29 कानूनों का समेकन और प्रतिस्थापन किया, विकसित भारत निर्माण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई हैं, जिसमें संविदा श्रमिक भी शामिल हैं। उन्होंने DGMS से कहा कि वे संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और खनन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें। मंत्री ने DGMS को सुरक्षित और सतत खनन के लिए मजबूत करने हेतु मंत्रालय का पूर्ण समर्थन सुनिश्चित किया।

मंत्री ने प्रदर्शनी, पुरालेख अनुभाग और मॉडल गैलरी का भ्रमण किया, जिसमें भारत में खान सुरक्षा प्रथाओं की समृद्ध विरासत और विकास को प्रदर्शित किया गया। समारोह के हिस्से के रूप में, उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जो DGMS की पर्यावरणीय सततता प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान DGMS की ऐतिहासिक उपलब्धियों, नियामक ढांचे और खनन सुरक्षा में तकनीकी प्रगति को दर्शाने वाली लघु फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर राज्य मंत्री ने DGMS का नया लोगो जारी किया, जो पुराने लोगो का प्रतिस्थापन है। इसके साथ ही DGMS थीम सॉन्ग और संगठन की यात्रा तथा योगदान को दर्शाने वाली डिजिटल कॉफी टेबल बुक भी जारी की गई। साथ ही खनन सुरक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं का डिजिटल संकलन/सौवेनियर भी प्रदर्शित किया गया।

एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, रेस्क्यू टीम के सदस्यों को उनके साहस और आपातकालीन स्थितियों में खान मजदूरों की सुरक्षा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

DGMS, जिसकी स्थापना 1902 में हुई थी, भारत में खनन सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और खान मजदूरों की भलाई तथा खनन उद्योग के सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में संशोधन: इंटरमीडिएट टाइमलाइन के साथ खनिज ब्लॉकों के संचालन को तेज करने का कदम

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खनिज मंत्रालय ने खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में संशोधन किया है, जिसमें लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी होने के बाद से लेकर खनन पट्टे के निष्पादन तक विभिन्न गतिविधियों को पूरा करने के लिए अंतरिम समयसीमा निर्धारित की गई है। 2015 में नीलामी व्यवस्था के आरंभ से अब तक कुल 585 प्रमुख खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके हैं, जिसमें से 34 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक केंद्रीय सरकार द्वारा नीलाम किए गए हैं।

शुरुआत में नीलामी की गति धीमी थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों में औसतन 100 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा रही है। इस वर्ष के पहले सात महीनों में ही 112 खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके हैं।

नीलामी के बाद खनन संचालन को तेज करने के लिए कदम:

खनिज मंत्रालय ने सफल बोलीदाताओं, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ नियमित बैठकें की हैं। इसके अलावा, खनन संचालन की निगरानी के लिए PMU (Project Management Unit) भी स्थापित किया गया है। इस दिशा में नवीनतम कदम के रूप में मंत्रालय ने 17.10.2025 को नियमों में संशोधन किया है और Letter of Intent (LoI) से लेकर खनन पट्टा निष्पादन तक के लिए अंतरिम समयसीमा तय की है।

पहले नियमों के अनुसार, LoI जारी होने के बाद खनन पट्टा निष्पादित करने की विस्तृत समयसीमा तीन वर्ष (अतिरिक्त दो वर्ष तक बढ़ाने योग्य) थी। यदि यह समयसीमा पूरी नहीं होती थी, तो ब्लॉक की नीलामी रद्द कर दी जाती थी। लेकिन LoI जारी होने और पट्टा निष्पादन के बीच प्रगति की निगरानी का कोई तंत्र नहीं था, जिससे मध्य-मार्ग सुधार के अवसर सीमित थे।

संशोधित नियमों की मुख्य विशेषताएँ:

1. प्रारंभिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन:

  • Mining Lease (ML) के लिए: LoI जारी होने की तारीख से 5 वर्ष से पहले खनिज की आपूर्ति पर केवल 50% नीलामी प्रीमियम देना होगा।

  • Composite Licence (CL) के लिए: LoI जारी होने की तारीख से 7 वर्ष से पहले खनिज की आपूर्ति पर प्रोत्साहन लागू होगा।

2. अंतरिम समयसीमा (Milestones):

  • ML के लिए तीन अंतरिम लक्ष्य:

    1. खनन योजना की स्वीकृति – 6 माह

    2. पर्यावरण मंजूरी – 18 माह

    3. खनन पट्टे का निष्पादन – 12 माह

  • CL के लिए दो अतिरिक्त लक्ष्य:

    1. CL का निष्पादन – 12 माह

    2. कम से कम G2 स्तर की खोज पूरी करना – 36 माह

3. विलंब पर दंड:

  • निर्धारित समयसीमा से विलंब होने पर, बैंक गारंटी से प्रति माह 1% की राशि काटी जाएगी।

  • ML के लिए कुल समयसीमा – 3 वर्ष, CL के लिए – 7 वर्ष।

  • दंड केवल बोलीदाता की गलती पर लागू होगा और राज्य सरकार की एक समिति द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

4. प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security):

  • पहले ML के लिए प्रदर्शन सुरक्षा खनन पट्टा मिलने से पहले जमा की जाती थी।

  • संशोधित नियमों के अनुसार, LoI जारी होने से पहले प्रदर्शन सुरक्षा जमा करना अनिवार्य है। बोलीदाता को 45 दिन का समय दिया जाएगा।

5. पहले से नीलाम किए गए खनिज ब्लॉक पर लागू:

  • बोलीदाता को संशोधन नियमों के लागू होने के 6 माह के भीतर प्रदर्शन सुरक्षा जमा करनी होगी।

  • शेष बचे अंतरिम लक्ष्य नए समयसीमा के अनुसार पूरे किए जाएंगे।

6. बोलीदाता की घोषणा:

  • अब नीलामी समाप्त होने के तुरंत बाद ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा बोलीदाता घोषित होगा और सार्वजनिक रूप से देखा जा सकेगा।

7. LoI जारी करने में विलंब:

  • यदि राज्य सरकार प्रथम किस्त और प्रदर्शन सुरक्षा जमा होने के 30 दिनों के भीतर LoI नहीं जारी करती है, तो दूसरी किस्त का 5% प्रति माह की दर से कटौती की जाएगी।

यह संशोधन सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श के बाद किया गया है और इसका उद्देश्य खनिज ब्लॉक की समय पर संचालन सुनिश्चित करना, विलंब को रोकना और प्रारंभिक उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

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