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भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में शुरू

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04 से 17 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाला भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में प्रारंभ हो गया है। यह अभ्यास वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे भारत और किर्गिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले संस्करण का आयोजन मार्च 2025 में किर्गिस्तान में किया गया था।

भारतीय सेना की 20 सदस्यीय टुकड़ी पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के जवानों द्वारा प्रतिनिधित्व की गई है, जबकि किर्गिस्तान की समान संख्या में आईएलबीआरआईएस विशेष बल ब्रिगेड के जवान हिस्सा ले रहे हैं।

अभ्यास का उद्देश्य शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी और विशेष बल संचालन के सर्वोत्तम अभ्यास और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। इसके अलावा, स्नाइपिंग, जटिल भवन अभियानों और पर्वतीय कौशल जैसे उन्नत विशेष बल प्रशिक्षण को भी विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

खंजर अभ्यास दोनों देशों को अपनी रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद व उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग को बढ़ावा देता है। यह अभ्यास भारत और किर्गिस्तान की क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है।

गरुड़ विशेष बलों का गौरवपूर्ण क्षण: चंडी नगर में मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड आयोजित

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  1. भारतीय वायु सेना की विशेष बल इकाई ‘गरुड़’ के ऑपरेटिव्स के प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में 17 जनवरी 2026 को वायु सेना स्टेशन चंडी नगर स्थित गरुड़ रेजिमेंटल प्रशिक्षण केंद्र (GRTC) में मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सहायक वायुसेना प्रमुख (ऑपरेशंस – वायु रक्षा) ने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की समीक्षा की।

  2. गरुड़ रेजिमेंटल प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा विभिन्न प्रशिक्षण पहलुओं की जानकारी दी। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर ‘गरुड़ों’ को बधाई दी। युवा कमांडो को संबोधित करते हुए उन्होंने बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप विशेष बलों के कौशल को निखारने और कठोर प्रशिक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सफल ‘गरुड़’ प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रवीणता बैज एवं स्पेशल फोर्सेज टैब प्रदान किए तथा पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफियां भी प्रदान कीं।

  3. पासिंग आउट सेरेमनी के दौरान ‘गरुड़ों’ ने युद्ध फायरिंग, बंधक बचाव, फायरिंग ड्रिल, असॉल्ट विस्फोटक, बाधा पार करना, दीवार चढ़ना, स्लिथरिंग, रैपलिंग तथा सैन्य मार्शल आर्ट्स जैसी विभिन्न कौशलों का प्रदर्शन किया।

  4. मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड ‘गरुड़ों’ के लिए गर्व और उपलब्धि का क्षण है, जो अत्यंत कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन तथा उनके ‘युवा विशेष बल ऑपरेटर’ के रूप में रूपांतरण का प्रतीक है, जिससे वे विशिष्ट ‘गरुड़’ बल में सम्मिलित होते हैं।

  5. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए, नव-प्रशिक्षित विशेष बल ऑपरेटर भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को और सुदृढ़ करेंगे, जिससे वह नव-परिभाषित विशेष अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकेगी।

भारतीय वायु सेना ने फ्रांस के साथ शुरू किया द्विपक्षीय वायु अभ्यास ‘गरुड़ 25’

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भारतीय वायु सेना (IAF) 16 से 27 नवंबर 2025 तक फ्रांस के मोंट-डी-मार्सान में आयोजित फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स (FASF) के साथ द्विपक्षीय वायु अभ्यास ‘गरुड़ 25’ के 8वें संस्करण में भाग ले रही है। IAF की टुकड़ी 10 नवंबर 2025 को फ्रांस पहुंची और इस अभ्यास में सु-30 MKI लड़ाकू विमानों के साथ भाग लेगी। अभ्यास के इंडक्शन और डी-इंडक्शन चरणों के लिए C-17 ग्लोबमास्टर III द्वारा एयरलिफ्ट समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जबकि भाग लेने वाले लड़ाकू विमानों की रेंज और क्षमता बढ़ाने के लिए IL-78 एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग टैंकरों का उपयोग किया जा रहा है।

अभ्यास के दौरान, IAF के सु-30MKI विमान फ्रांस के मल्टी-रोल फाइटर विमानों के साथ जटिल सिम्युलेटेड वायु युद्ध परिदृश्यों में संचालन करेंगे। इसका मुख्य फोकस एयर-टू-एयर कॉम्बैट, वायु रक्षा, और संयुक्त स्ट्राइक ऑपरेशनों पर होगा। यह अभ्यास वास्तविक ऑपरेशनल वातावरण में रणनीति और प्रक्रियाओं को निखारने, परस्पर सीख को बढ़ावा देने और IAF तथा FASF के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करने में मदद करेगा।


अभ्यास ‘गरुड़ 25’ दोनों वायु सेनाओं के लिए पेशेवर संवाद, ऑपरेशनल ज्ञान के आदान-प्रदान और बेहतरीन प्रथाओं को साझा करने का अवसर भी प्रदान करता है। इस अभ्यास में भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय वायु सेना मित्र देशों की वायु सेनाओं के साथ बहुपक्षीय अभ्यासों के माध्यम से रचनात्मक सहयोग और समझ को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।


संयुक्त सैन्य अभ्यास “मित्र शक्ति–2025” का ग्यारहवां संस्करण बेलगावी, कर्नाटक में प्रारंभ

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संयुक्त सैन्य अभ्यास “मित्र शक्ति–2025” का ग्यारहवां संस्करण आज कर्नाटक के बेलगावी स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में प्रारंभ हुआ। यह अभ्यास 10 से 23 नवम्बर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

भारतीय दल में 170 सैनिक शामिल हैं, जिनका नेतृत्व मुख्य रूप से राजपूत रेजिमेंट कर रही है। श्रीलंका की ओर से 135 सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से गजाबा रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के 20 और श्रीलंकाई वायुसेना के 10 कर्मी भी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र के अध्याय VII के तहत उप-पारंपरिक अभियानों (Sub Conventional Operations) के संचालन का अभ्यास करना है। अभ्यास के दायरे में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान संयुक्त प्रतिक्रियाओं का समन्वय शामिल है। दोनों सेनाएं छापामार कार्रवाई, खोज एवं नष्ट करने के मिशन, हेलीबोर्न ऑपरेशन आदि जैसी सामरिक गतिविधियों का अभ्यास करेंगी। इसके अतिरिक्त, अभ्यास पाठ्यक्रम में आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (AMAR), कॉम्बैट रिफ्लेक्स शूटिंग और योग भी शामिल हैं।

मित्र शक्ति–2025 में ड्रोन, काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (Counter-UAS) और हेलीकॉप्टरों का उपयोग भी किया जाएगा। अभ्यास के दौरान दोनों पक्ष मिलकर हेलिपैड की सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अभियानों में घायल सैनिकों की निकासी (casualty evacuation) जैसी प्रक्रियाओं का भी अभ्यास करेंगे। संयुक्त प्रयासों का लक्ष्य सैनिकों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता (interoperability) को बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के दौरान जीवन एवं संपत्ति के नुकसान के जोखिम को कम करना है।

दोनों सेनाएं युद्धक कौशलों की विस्तृत श्रृंखला पर संयुक्त अभ्यासों के दौरान अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगी। इन साझा प्रयासों से भारतीय सेना और श्रीलंकाई सेना के बीच रक्षा सहयोग और अधिक मजबूत होगा। यह अभ्यास दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को भी सुदृढ़ करेगा।

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