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श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, में “साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रबंधन” प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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आरंग- 19 सितंबर को श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर में नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम द्वारा साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण  में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को स्तनपान से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित जानकारी प्रदान करना तथा माताओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्तनपान सहायता एवं परामर्श उपलब्ध कराने के लिए उनकी क्षमता को और मजबूत करना था।प्रशिक्षण में देश के प्रतिष्ठित एवं अनुभवी राष्ट्रीय प्रशिक्षकों डॉ. ओमेश खुराना, डॉ. जयन्ती जे. एवं डॉ. सपना ठाकुर द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्तनपान प्रबंधन, नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व तथा माताओं को प्रभावी स्तनपान सहायता प्रदान करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यावहारिक एवं साक्ष्य आधारित जानकारी साझा की गई।

श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल को इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चुना जाना विशेष महत्व रखता है। अस्पताल को  (BPNI) द्वारा “Breastfeeding Friendly Hospital” के रूप में मान्यता प्राप्त है। अस्पताल में माताओं एवं नवजात शिशुओं के हित में स्तनपान को बढ़ावा देने, उसकी सुरक्षा एवं समर्थन के लिए निर्धारित WHO के “10 Steps to Successful Breastfeeding”का पालन किया जाता है।

अस्पताल का उद्देश्य प्रत्येक नवजात को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत प्रदान करना तथा माताओं को स्तनपान के लिए आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी, सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान एवं कौशल को निरंतर सुदृढ़ करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिभागियों की सहभागिता रही। NNF द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में *साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रथाओं को मजबूत करने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

विशेष लेख-नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

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माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है 

अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध                                             रायपुर- विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।

स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।   स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है। 

अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)

जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।

शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान के बहुआयामी लाभ

शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।

मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध  स्थापित होता है।

समाज और परिवार की जिम्मेदारीस्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।

माँ के दूध से स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत, प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत

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जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी

रायपुर- हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को मिलेगी नई दिशा: आज लॉन्च होगा 'सुमन रोडमैप 2030'

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन में 'सुमन रोडमैप 2030' (SUMAN Roadmap 2030) का शुभारंभ करेंगे। यह रोडमैप मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है।

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने का लक्ष्य।

  • नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी लाने पर जोर।

  • गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक संपूर्ण जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवाएं।

  • 13 राज्यों के 130 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष रणनीति लागू होगी, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, निगरानी और उपचार के लिए चार-स्तरीय प्रणाली विकसित की जाएगी।

गर्भवती महिलाओं को मिलेंगी विशेष सुविधाएं

  • समय पर पंजीकरण और सभी प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित की जाएंगी।

  • आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता प्रत्येक दो सप्ताह में घर जाकर स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और सुरक्षित प्रसव की तैयारी कराएंगी।

  • कठिन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसव के लिए बेहतर एम्बुलेंस और रेफरल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

  • बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wing), हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) और आईसीयू जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

नई पहलें

  • सुमन पंचायत के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाई जाएगी।

  • मदर्स पिकनिक कार्यक्रम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • JANANI पोर्टल के जरिए डिजिटल मॉनिटरिंग और एआई आधारित लेबर रूम विकसित किए जाएंगे।

  • जलवायु परिवर्तन, हीटवेव और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पूरे देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप परिवार नियोजन, पोषण, किशोर स्वास्थ्य और नवजात देखभाल को एकीकृत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूर्ण, सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने आज सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में अपनी सफल यात्रा के 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने “10 Years of PMSMA – A Decade of Care” थीम के तहत देशव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया।

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए ने देशभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री द्वारा 9 जून 2016 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2022 में शुरू की गई विस्तारित पीएमएसएमए (E-PMSMA) रणनीति के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी की जाती है तथा प्रसव के 45 दिनों बाद तक उनका फॉलो-अप किया जाता है। एसएमएस अलर्ट और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को और मजबूत किया गया है।

जे.पी. नड्डा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 1990 के बाद से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत तथा नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 90.6 प्रतिशत तथा प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले दस वर्षों में पीएमएसएमए के तहत 7.5 करोड़ से अधिक प्रसवपूर्व जांचें की गई हैं तथा लगभग 1.2 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई है। इससे समय पर उपचार और विशेषज्ञ हस्तक्षेप संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पीएमएसएमए से जुड़े हुए हैं, जिससे दूरदराज और आकांक्षी जिलों में भी विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पीएमएसएमए के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी किया। साथ ही 9 जून 2026 से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया गया है।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉ. यवान जे. एफ. ह्यूटिन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने ऐसे ही नहीं मारी बाजी

शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान

आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि

रायपुर- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में  डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है। 

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है।

जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

ऐसे मिली उपलब्धि

प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में  फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है।

रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए  आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है।

इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा। 

यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई। 

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

मां और शिशु का स्वस्थ भविष्य ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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माताओं के स्वास्थ्य और पोषण में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि : प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में मिला पहला स्थान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश की माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के क्रियान्वयन में बड़े राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 93.37 प्रतिशत नामांकन, 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर तथा 93.95 प्रतिशत शिकायतों के त्वरित समाधान का रिकॉर्ड दर्ज किया है। यह उपलब्धि राज्य में योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता का श्रेय महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम और समर्पित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि इनके अथक प्रयासों से प्रदेश की लाखों गर्भवती माताओं तक योजना का लाभ समय पर पहुँच रहा है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मां और शिशु का स्वस्थ भविष्य ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

https://x.com/i/status/2031690090708419057

रायपुर: सीएचसी मोहला में सफल सिजेरियन ऑपरेशन, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ; स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति से ग्रामीण माताओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

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रायपुर-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। ग्राम गिधाली की गर्भवती महिला कुलेश्वरी पति अर्जुन का सिजेरियन ऑपरेशन (सी-सेक्शन) स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सक टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस महत्वपूर्ण शल्यक्रिया को स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद बनकर, डॉ. दिलीप शर्मा, डॉ. सीमा ठाकुर एवं डॉ. एस.आर. कोवाची की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। पूरा ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित रहा और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति से अब उच्च जोखिम वाली गर्भवती माताओं को प्रसव हेतु राजनांदगांव या निजी अस्पतालों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे  अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला में ही सिजेरियन ऑपरेशन एवं संपूर्ण जांच की सुविधा उपलब्ध हो गई है। इससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी मजबूती मिलेगी। यह सुविधा विशेष रूप से उन ग्रामीण महिलाओं के लिए लाभकारी साबित होगी।  जिन्हें पहले औंधी से राजनांदगांव तक लगभग 150 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।

इस उपलब्धि से क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं को समय पर सुरक्षित प्रसव और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित होंगी परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर में भी कमी आएगी।


स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान ने देशभर में दिखाई जोरदार भागीदारी

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17 सितम्बर 2025 को शुरू किया गया “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार” अभियान पूरे भारत में जोरदार भागीदारी देख रहा है, जिसमें लाखों महिलाएँ, बच्चे और परिवार समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। 20 सितम्बर 2025 तक, अभियान के तहत 2.83 लाख से अधिक स्वास्थ्य शिविर (स्क्रीनिंग और विशेषज्ञता शिविर) आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 76 लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया।

मुख्य विशेषताएँ

  • उच्च रक्तचाप और मधुमेह जांच: 37 लाख से अधिक नागरिकों की उच्च रक्तचाप और 35 लाख से अधिक की मधुमेह जांच।

  • कैंसर स्क्रीनिंग: 9 लाख से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर, 4.7 लाख से अधिक की सर्वाइकल कैंसर, और 16 लाख से अधिक की मौखिक कैंसर जांच।

  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: 18 लाख से अधिक प्रसवपूर्व जांच; 51 लाख बच्चों को जीवनरक्षक टीके प्रदान किए गए।

  • रक्ताल्पता एवं पोषण: 15 लाख से अधिक नागरिकों की रक्ताल्पता जांच; पोषण परामर्श लाखों परिवारों तक पहुँचाया गया।

  • टीबी एवं सिकल सेल जांच: 22 लाख से अधिक नागरिकों की TB और 2.3 लाख की Sickle Cell रोग जांच।

  • रक्तदान एवं पीएम-जेएवाई पंजीकरण: 1.6 लाख से अधिक रक्तदाता पंजीकृत; 4.7 लाख नए आयुष्मान/PM-JAY कार्ड जारी।

संस्थानिक सहभागिता

NHM स्वास्थ्य शिविरों के साथ-साथ आयुष्मान आरोग्य मंदिर, AIIMS, अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, तृतीयक देखभाल अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निजी संस्थान भी इस अभियान में अग्रणी रहे। इन संस्थानों ने हजारों विशेषज्ञता शिविर आयोजित किए, जिनमें उन्नत स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, परामर्श और उपचार सेवाएँ प्रदान की गईं।

केंद्रीय सरकार के संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और निजी संगठनों ने कुल 3,410 स्क्रीनिंग और विशेषज्ञता शिविर आयोजित किए, जिनसे 5.8 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए।

क्षेत्रीय प्रमुख गतिविधियाँ

अभियान सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जन आंदोलन के रूप में मनाया जा रहा है:

  • दिल्ली: सफदरजंग अस्पताल, CGHS आर.के. पुरम और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में TB, NCD, मानसिक स्वास्थ्य और मातृ स्क्रीनिंग के मेगा शिविर।

  • गुजरात: डाहोद, कच्छ और नवसारी में कैंसर स्क्रीनिंग और NCD देखभाल शिविर, 42,000 से अधिक महिलाओं को लाभ।

  • जम्मू और कश्मीर: श्रीनगर और RS पुरा में मेगा स्वास्थ्य शिविर, जिसमें बड़ी संख्या में समुदाय ने भाग लिया (सेवा पखवाड़ा के तहत)।

  • पूर्वोत्तर: अरुणाचल प्रदेश के पापुम परे से मणिपुर के इम्फाल तक, अभियान ने दूरदराज़ के आदिवासी समुदायों तक पहुँच बनाई और मुफ्त स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता अभियान आयोजित किए।

  • गोवा और महाराष्ट्र: PHC और पंचायतों द्वारा रैली, स्क्रीनिंग शिविर और रक्तदान अभियान।

  • बिहार और उत्तर प्रदेश: जिला अस्पताल और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में NCD स्क्रीनिंग और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से हजारों लोग लाभान्वित।

  • लद्दाख: लिंगशेड गाँव में सामान्य परामर्श, मोतियाबिंद स्क्रीनिंग और मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता सत्र आयोजित।

सराहना एवं आगे की दिशा

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय स्वास्थ्यकर्मियों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और सामुदायिक संगठनों के अथक प्रयासों की सराहना करता है। उनकी सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सफलता का मूल कारण है।

अभियान 2 अक्टूबर 2025 तक जारी रहेगा, और लक्ष्य है:

“स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार – स्वस्थ महिलाएं, मजबूत परिवार और सक्षम राष्ट्र।”


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