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प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

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पटेवा- सावन माह के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली। विद्यालय प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक योगेश निर्मलकर एवं शिक्षक रामेश्वर ढीढी के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना दिया।

कांवड़ यात्रा के लिए बच्चों ने आकर्षक रूप से सजी कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान बच्चे भगवान शिव-पार्वती तथा विभिन्न गणों के आकर्षक वेशभूषा में नजर आए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति और धार्मिक उत्साह ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया।

जुन्ना तालाब से जल लेकर पहुंचे शिव मंदिर

विद्यालय से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा जुन्ना तालाब पहुंची, जहां बच्चों ने विधि-विधान से जल लिया। इसके बाद कांवड़ यात्री बच्चे तालाब स्थित शिव मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद गांव के मुख्य शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।

पूरे रास्ते बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह बच्चों का स्वागत किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, वहीं अनेक ग्रामीण उत्साहपूर्वक बच्चों के साथ नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। इससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

मुख्य शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

कांवड़ यात्रा गांव के मुख्य शिव मंदिर पहुंची, जहां बच्चों ने भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इस दौरान बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना की और गांव की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल को ग्रामीणों और पालकों का भी भरपूर सहयोग मिला। कार्यक्रम ने बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सामूहिकता, अनुशासन, सेवा और संस्कार की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

विद्यालय में हुई भजन संध्या

कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी बच्चे वापस विद्यालय पहुंचे। यहां पालकों और ग्रामीणों के साथ भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और भजनों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भजन संध्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन पर पालकों और गांववासियों के सहयोग से प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया।

ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन समिति, पालकों, शिक्षकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, योगीराम साहू, बैगा नंद ध्रुव, भुनेश्वर साहू, भीम यादव, कार्तिक सिन्हा, उमेश सिन्हा, पूर्णिमा यादव, देवकी सिन्हा, बरतनीन दीवान, प्रमिला ध्रुव, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव, तिलक यादव, भुवन साहू, तिलक साहू, उमेन्द्र दीवान, भूपेंद्र मनोज साहू, सुकदेव दीवान, लीलेश्वर साहू एवं विष्णु दीवान का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय परिवार ने सभी पालकों, ग्रामीणों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की सहभागिता और ग्रामीणों के उत्साह से कांवड़ यात्रा पूरे गांव के लिए यादगार बन गई।


https://youtu.be/weoLy9hhZTs

नाग पंचमी पर गूंजा हर-हर महादेव, नाग देवता के दरबार में उमड़ी आस्था

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श्रद्धा के रंग में रंगा शहर, शिवालयों में सुबह से लगी भक्तों की कतारें

धमतरी- सावन की पावन बेला में सोमवार को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान शिव के साथ नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठे।

नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध, जल, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित कर पूजा की। वहीं भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भक्तों ने आशीर्वाद मांगा। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर तक चलता रहा।

सावन और नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं और सुख-शांति बनी रहती है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान होने के कारण सावन माह में नाग पंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ पूजा कर भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

बच्चों में भी दिखा उत्साह

नाग पंचमी को लेकर बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। घरों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। कई परिवारों ने सुबह स्नान के बाद नाग देवता की पूजा कर प्रसाद का वितरण किया।

जीव-जंतुओं की सुरक्षा का भी दिया संदेश

नाग पंचमी का पर्व जहां धार्मिक आस्था से जुड़ा है, वहीं यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। लोगों ने सांपों को नुकसान न पहुंचाने और उनके दिखाई देने पर वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद लेने की अपील की।

सावन की भक्ति और नाग पंचमी की आस्था से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार में सुख-शांति, अच्छी बारिश, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।

शिवालयों की नगरी आरंग में निकली विशाल नारी शक्ति कांवर यात्रा,500 महिलाएं हुई कांवर यात्रा में शामिल

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आरंग- रविवार को शिवालयों की नगरी आरंग में नारी शक्ति कांवर यात्रा समिति के तत्वावधान में विशाल कांवर यात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें  करीब 500 महिलाएं शामिल हुई। कांवर यात्रा की शुरुआत आदिशक्ति मां महामाया मंदिर से जल लेकर की गई। इसके बाद भक्तों ने कुमारेश्वर महादेव में जलाभिषेक किया। वहां से यात्रा नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए राजराजेश्वर महादेव, बाबा बागेश्वर नाथ महादेव पहुंचकर जलाभिषेक कर आशीर्वाद लिया।राह में पड़ने वाले प्रत्येक शिवालय में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। यात्रा का समापन पंचमुखी महादेव मंदिर में हुआ।आयोजकों ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य आरंग के प्राचीन शिवालयों की महिमा को जन-जन तक पहुंचाना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। यात्रा के दौरान भक्त शिव भजनों और गीत-संगीत पर थिरकते रहे, जो आमजन के लिए आकर्षण वहीं का केंद्र बना रहा। इस विशाल कांवर यात्रा में नगर के महाकाल ग्रुप, पीपला वेलफेयर फाउंडेशन, रानी पद्मावती महिला संगठन सहित कई सामाजिक संगठन भी शामिल हुए। वहीं लोक बयार सांस्कृतिक टीम मोरध्वज नगरी आरंग के कलाकारों द्वारा शिव भजनों की प्रस्तुति सबका मन मोह लिया।

पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने "हर-हर महादेव" के जयकारों से वातावरण को शिवमय कर दिया।



सावन का दूसरा सोमवार : शिवालयों में दर्शन के लिए लगा भक्तों का तांता, बोल बम के जयकारों के साथ पहुंचे कांवड़िए

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 रायपुर। सावन माह में पूरा छत्तीसगढ़ शिवमय हो चुका है। शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है और दूर-दूर से भक्तों व कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।


आज सावन महीने का दूसरा सोमवार है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

रायपुर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़

सावन के दूसरे सोमवार पर राजधानी रायपुर के शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हैं। पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान है। श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग

आज सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बना है। करीब 6 साल बाद सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

फणीकेश्वर नाथ मंदिर में भी गूंजे जयकारे

उधर, गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर स्थित ऐतिहासिक फणीकेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ा है। सुबह से ही श्रद्धालु जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद ले रहे हैं। मंदिरों के आसपास का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

शिवालयों की नगरी आरंग में गूंजेगी भक्ति की तान, भव्य शिवभक्ति गीत की शूटिंग पूरी

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​डिजिटल डेस्क, आरंग: "शिवालयों की नगरी" के नाम से सुप्रसिद्ध नगर आरंग अब भक्ति, संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। अंचल के उभरते व सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भगवान शिव को समर्पित एक भव्य और अत्यंत मधुर शिवभक्ति गीत का निर्माण किया जा रहा है।

इस भक्ति गीत के बोल "कांशी जैइसे नगरी मोर आरिंग" हैं, जिसे आरंग अंचल के लोकप्रिय लोकगायक गंगा साहू ने कलमबद्ध किया है। इस गीत की परिकल्पना पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने की है।

​गीत की प्रमुख विशेषताएँ और टीम वर्क:

​मधुर स्वर: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा और लोकगायक गंगा साहू ने गीत को अपनी सुरीली आवाज दी है।

​संगीत संयोजन: भिलाई के प्रख्यात संगीतकार देवेंद्र साहू ने इस गीत को मनमोहक संगीत से सजाया है।

​फिल्मांकन व कोरियोग्राफी: प्रख्यात कोरियोग्राफर उत्तम साहू की टीम और कैमरामैन वीरू साहू ने गीत के फिल्मांकन में अहम भूमिका निभाई है।

​नगर के सभी शिवालयों के होंगे एक साथ दर्शन

​इस शिवभक्ति गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आरंग नगर में स्थापित सभी प्रमुख शिवलिंगों और मंदिरों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। हाल ही में सोमवार को पंचमुखी महादेव मंदिर, बाबा बागेश्वर नाथ मंदिर, बस स्टैंड तथा समलेश्वरी मंदिर परिसर सहित नगर के विभिन्न शिवालयों में गीत के दृश्यों को शूट किया गया।

​शूटिंग के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो पूरे दिन कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही।

​स्थानीय लोगों में उत्साह

​आरंग के नागरिकों ने इस सांस्कृतिक व धार्मिक पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस गीत के माध्यम से न केवल देश-प्रदेश के लोग आरंग के पावन शिवालयों के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि इससे आरंग की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।

सावन का पहला सोमवार: आस्था, शिव भक्ति और शुभ आरंभ का पावन पर्व

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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने का प्रत्येक सोमवार विशेष महत्व रखता है, लेकिन सावन का पहला सोमवार भक्तों के लिए नई ऊर्जा, श्रद्धा और शुभ संकल्प का प्रतीक होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

सावन के पहले सोमवार का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद देवताओं ने उन्हें जल अर्पित कर शीतलता प्रदान की। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

सावन का पहला सोमवार इस पावन माह की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और शिवभक्त "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पूजा की विधि

सावन के पहले सोमवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र तथा शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

व्रत का महत्व

इस दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। अविवाहित युवक-युवतियाँ मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए तथा विवाहित महिलाएँ परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं।

आध्यात्मिक संदेश

सावन का पहला सोमवार केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और सकारात्मक सोच अपनाने का भी अवसर है। भगवान शिव हमें सादगी, धैर्य, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि त्याग, संतुलन और प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।

निष्कर्ष

सावन का पहला सोमवार श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का पावन पर्व है। इस दिन भगवान शिव की आराधना से मन को शांति, जीवन को नई दिशा और आत्मा को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। आइए, इस शुभ अवसर पर हम सभी भगवान भोलेनाथ का स्मरण करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें।

हर हर महादेव!


सावन: शिव भक्ति, हरियाली और भारतीय संस्कृति का उत्सव

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"रिमझिम बरसती फुहारें, मिट्टी की सौंधी खुशबू, पेड़ों पर झूलों की मस्ती और 'हर-हर महादेव' के जयघोष..." यही है सावन की पहचान। श्रावण मास केवल हिंदू धर्म का एक पवित्र महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन का जीवंत उत्सव है।


बरसात की पहली बूंद जब धरती को स्पर्श करती है, तो सूखी वसुंधरा हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। खेतों में नई फसल की उम्मीद अंकुरित होती है, नदियां और तालाब जीवन से भर उठते हैं और प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेर देती है। यही कारण है कि सावन को नवजीवन, समृद्धि और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। तब से सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना करते हैं। सावन के सोमवार और कांवड़ यात्रा इस आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

सावन भारतीय लोक संस्कृति का भी सबसे रंगीन अध्याय है। गांवों में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं, महिलाएं और युवतियां हरे परिधानों में सजकर कजरी और सावनी गीत गाती हैं। हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा देते हैं। यह महीना रिश्तों में अपनापन और जीवन में सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है।

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, तब सावन हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। हरियाली तभी बचेगी, जब हम पेड़ लगाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। भगवान शिव स्वयं प्रकृति के देवता माने जाते हैं, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना भी उनकी सच्ची आराधना है।

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। आइए, इस पावन मास में भगवान शिव से यही प्रार्थना करें कि हमारे जीवन में शांति, समाज में सद्भाव और प्रकृति में सदैव हरियाली बनी रहे।

हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ!

जलेश्वर महादेव धाम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया जलाभिषेक: प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

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किसानों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के हित में मुख्यमंत्री साय की महत्वपूर्ण घोषणाएं: जलेश्वर महादेव धाम के विकास के साथ क्षेत्रीय अधोसंरचना को मिलेगा विस्तार

क्षीरपानी मध्यम परियोजना के नहर विस्तार से सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत डोंगरिया गांव पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध जलेश्वर महादेव धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। मुख्यमंत्री साय ने भगवान भोलेनाथ से प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पंडरिया भावना बोहरा, विधायक तखतपुर धर्मजीत सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालुगण उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं हमारी पहचान हैं। ऐसे पवित्र धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने वाले प्रेरणा स्थल भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने क्षीरपानी जलाशय मध्यम परियोजना अंतर्गत 50 करोड़ की लागत से नहर विस्तारीकरण कार्य कराने की घोषणा की।  इस परियोजना से लगभग 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने जलेश्वर महादेव धाम के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने खरहट्टा से डोंगरिया तक लगभग 2.5 किलोमीटर सड़क के उन्नयन कार्य की घोषणा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा।

उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले के डोंगरिया गांव स्थित जलेश्वर महादेव धाम स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह शिवधाम विशेष रूप से सावन माह, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। पहाड़ी और नदी-घाट के रमणीय वातावरण में स्थित यह धाम शिवभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विशेष पहचान रखता है।

नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हुए शामिल

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सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुशीला साय, कृष्णा राय, पवन साय, भरत सिंह,अरविन्द प्रसाद साय, कपिल देव साय, सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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