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कौशल भवन में कर्मचारियों के बच्चों हेतु आधुनिक डे-केयर सुविधा का उद्घाटन

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कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कौशल भवन (MSDE मुख्यालय) में कर्मचारियों के बच्चों के लिए नई डे-केयर (क्रेच) सुविधा का उद्घाटन किया। लगभग 600 वर्ग मीटर में फैली यह सुविधा 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और पोषणपूर्ण वातावरण प्रदान करती है।

डे-केयर में आराम एवं विश्राम कक्ष, खेल एवं गतिविधि क्षेत्र, आयु-उपयुक्त शिक्षण संसाधन, बच्चों के अनुकूल फर्नीचर, स्वच्छ शौचालय, फीडिंग रूम और बेबी-चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं द्वारा संचालित यह केंद्र बच्चों की देखभाल और विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

यह पहल कार्यरत अभिभावकों को गुणवत्तापूर्ण बाल-देखभाल सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ मंत्रालय की समावेशी, परिवार-अनुकूल और कर्मचारी-केंद्रित कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन अवसर पर मंत्रालय, DGT, NCVET और NSDC के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।


कौशल विकास को लेकर केंद्र और राजस्थान सरकार की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार ने आज राजस्थान सरकार के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य में चल रही कौशल विकास पहलों की प्रगति की समीक्षा और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने की। बैठक में राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल तथा कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ भी उपस्थित रहे।

राजस्थान देश के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है, जहां 1,537 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के तहत राज्य में 3.14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 2.50 लाख से अधिक प्रमाणित हो चुके हैं। राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) के तहत 1.04 लाख से अधिक अप्रेंटिस प्रशिक्षित किए गए हैं और 24.98 करोड़ रुपये का डीबीटी भुगतान किया गया है।

बैठक में राजस्थान में दो स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (SIIC) स्थापित करने और PM-SETU योजना के तहत ITI के उन्नयन पर चर्चा हुई। PM-SETU योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से 1,000 ITI और 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) को उन्नत करने तथा 20 लाख युवाओं को आधुनिक ट्रेड में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।

जयंत चौधरी ने कहा कि राजस्थान की संस्थागत क्षमता और बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्रणाली इसे कौशल परिवर्तन में अग्रणी बनाती है। उन्होंने उद्योग साझेदारी बढ़ाने और रोजगार परिणामों को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने राज्य में कौशल सुधारों को तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में भरतपुर में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और जयपुर व जोधपुर के NSTI के उन्नयन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जयपुर और भरतपुर में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित कर विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना पर विचार किया गया।

बैठक के अंत में दोनों सरकारों ने लंबित स्वीकृतियों को शीघ्र पूरा करने, निगरानी प्रणाली मजबूत करने और उद्योग सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, ताकि राजस्थान के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

“IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन: उत्तर-पूर्व के युवाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान का अवसर”

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गुवाहाटी (असम)- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्री,जयंत चौधरी ने आज गुवाहाटी विश्वविद्यालय में IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन किया। इस प्रतियोगिता में उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों के युवा 26 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

यह पहली बार है जब भारत की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आयोजित की जा रही है, जिससे यहां के युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का एक बड़ा अवसर मिल रहा है। इस आयोजन में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने कार्यान्वयन भागीदार के रूप में सहयोग किया।

उद्घाटन समारोह में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नानी गोपाल महंता, असम सरकार के प्रमुख सचिव ग्यानेंद्र देव त्रिपाठी, तथा MSDE की संयुक्त सचिव हेना उस्मान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की उत्तर-पूर्व पर निरंतर ध्यान और नीति प्राथमिकता ने क्षेत्र के युवाओं में आत्मविश्वास और अवसरों की नई लहर पैदा की है। उन्होंने IndiaSkills को केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कौशल, अनुशासन और श्रम की गरिमा का उत्सव बताया।

जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि NEP 2020 के अनुरूप शिक्षा और कौशल विकास के बीच तालमेल बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने के अवसर बढ़ते हैं।

यह क्षेत्रीय प्रतियोगिता उत्तर-पूर्व में कौशल विकास के मजबूत ढांचे को दर्शाती है। इस प्रतियोगिता में 162 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं और इसमें तकनीकी, डिजिटल, परंपरागत और सेवा क्षेत्रों के विविध कौशल शामिल हैं, जैसे:

  • ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी

  • क्लाउड कंप्यूटिंग

  • मोबाइल ऐप डेवलपमेंट

  • वेब टेक्नोलॉजी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • CNC मिलिंग/टर्निंग

  • वेल्डिंग

  • फैशन टेक्नोलॉजी

  • बेकरी और पेस्ट्री

  • होटल रिसेप्शन

  • रेस्टोरेंट सर्विस

  • स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल

  • रिटेल सेल्स

  • विजुअल मर्चेंडाइजिंग

प्रतियोगिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती हुई देखी गई, विशेषकर तकनीकी क्षेत्रों में जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, CNC, वेल्डिंग आदि। यह संकेत है कि उत्तर-पूर्व में कौशल क्षेत्र में लिंग समानता और डिजिटल-तकनीकी क्षमता का विकास हो रहा है।

IndiaSkills प्रतियोगिता एक चरणबद्ध मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए आयोजित की जाती है—जिला स्तर, राज्य स्तर, क्षेत्रीय स्तर, और फिर राष्ट्रीय स्तर। क्षेत्रीय विजेता IndiaSkills National Competition में भाग लेंगे, और सफल प्रतियोगियों को WorldSkills Competition 2026 (शंघाई) में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।


जॉब-लिंक्ड कौशल विकास का नया मंच: एमएसडीई का जन शिक्षा संस्थान सम्मेलन पुणे में 19-20 जनवरी 2026 को

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केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार, 19-20 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र के Symbiosis Skill and Professional University के ऑडिटोरियम हॉल में दो दिवसीय जन शिक्षा संस्थान (JSS) ज़ोनल सम्मेलन एवं स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन व प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 152 जन शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि, MSDE, Directorate of Jan Shikshan Sansthan (DJSS), National Institute for Entrepreneurship and Small Business Development (NIESBUD) तथा अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल होंगे।

जन शिक्षा संस्थान (JSS) योजना: एक व्यापक परिचय

JSS योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे MSDE द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य गैर-शिक्षित, नव-शिक्षित, स्कूल ड्रॉपआउट और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को गैर-औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों पर जोर दिया जाता है।

वर्तमान में 26 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों में 294 JSS कार्यरत हैं, जो 51 NSQF-आधारित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन में योगदान देते हैं।

प्रमुख आंकड़े (31 दिसंबर 2025 तक)

  • कुल 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण

  • जिनमें 28.3 लाख महिलाएँ शामिल

  • प्रशिक्षण मुख्य रूप से डोर-टू-डोर स्तर पर सब-सेंटर्स के माध्यम से दिया जाता है

  • विशेष रूप से अभिलाक्षित जिले, आदिवासी क्षेत्र, वामपंथी प्रभावित क्षेत्र, सीमा और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय

पुणे सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्य विषय

यह सम्मेलन JSS के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • FY 2025–26 में भाग लेने वाले JSS की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा

  • नीति, दिशा-निर्देशों में सुधार और कार्यान्वयन चुनौतियों पर संरचित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन

  • JSS कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि: रोजगार कौशल, उद्यमिता, आजीविका, क्रेडिट लिंकिंग और वित्तीय प्रबंधन

  • AI और डिजिटल टूल्स सहित मांग-आधारित और उभरते कौशल क्षेत्रों की पहचान

  • आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का एक्सपोज़र विज़िट

  • JSS की बेहतरीन प्रथाओं और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन

समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा

20 जनवरी 2026 को आयोजित वैलिडेटरी सत्र में MSDE की वरिष्ठ अधिकारी देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) मुख्य भाषण देंगी। इस सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें और निष्कर्ष तैयार किए जाएंगे, जो JSS योजना को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

सरकारी दृष्टि के साथ समावेशी विकास

यह ज़ोनल सम्मेलन MSDE के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो समुदाय आधारित कौशल विकास को और प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण और व्यापक बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भारत सरकार की समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।


PM-SETU के तहत पुणे में उद्योग परामर्श बैठक: उन्नत आईटीआई के माध्यम से भविष्य-तैयार कार्यबल की दिशा में कदम

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोज़गार परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU – Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना के कार्यान्वयन के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रमुख उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परामर्श बैठक यशवंतराव चव्हाण अकादमी ऑफ़ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (यशदा), पुणे में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा योजना के उद्योग-नेतृत्व वाले कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियाँ भाग लेंगी, जो निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। बैठक की अध्यक्षता देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा की जाएगी। उनके साथ मनीषा वर्मा, अपर मुख्य सचिव, कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार भी उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर वे क्षेत्र के आईटीआई एवं उद्योगों का भी दौरा करेंगी।

PM-SETU योजना के अंतर्गत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत अवसंरचना और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण की पहुँच को विस्तारित करेंगे। इस योजना में आईटीआई को सरकारी स्वामित्व लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और बेहतर प्लेसमेंट अवसर सुनिश्चित हो सकें। क्लस्टर आधारित साझेदारी के माध्यम से उद्योग, एंकर इंडस्ट्री के साथ मिलकर प्रशिक्षण और रोज़गार से जुड़ी मज़बूत कड़ियाँ स्थापित करेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श बैठक इस बात पर प्रकाश डालेगी कि PM-SETU किस प्रकार उद्योग को केवल समय-समय पर सहभागिता तक सीमित न रखते हुए, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर और संरचित भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है। क्लस्टर मॉडल के तहत उद्योग साझेदार संस्थागत शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धतियों में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन में सहयोग देंगे तथा अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट तंत्र को मज़बूत बनाएंगे। इससे भर्ती लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और उद्योग मानकों के अनुरूप जॉब-रेडी प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

योजना के क्रियान्वयन की दिशा में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी प्रारंभिक कदम उठाए गए हैं। अब तक 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक क्लस्टरों की पहचान कर ली है और 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य स्तरीय संचालन समितियों (State Steering Committees) को अधिसूचित कर दिया है।

परामर्श बैठक के दौरान, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार परिणामों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग एवं संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (DVET), महाराष्ट्र सरकार और FIAT इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फ़ाउंडेशन, तथा DVET और SDN/वाधवानी के बीच साझेदारियाँ शामिल हैं।

PM-SETU भारत की कौशल यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रही है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रमों के विकास और उभरते क्षेत्रों के लिए सशक्त प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संस्थागत शासन को सुदृढ़ कर, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण कर तथा कौशल को श्रम बाज़ार की मांग से जोड़कर, यह पहल विकसित भारत के अवसरों के लिए देश के युवाओं को तैयार करने में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

जयंत चौधरी ने कौशल मंथन का समापन सत्र अध्यक्षता किया; 2026 के लिए कौशल संकल्प तैयार

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जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने सप्ताह भर चले “कौशल मंथन” (23 दिसंबर 2025 – 31 दिसंबर 2025) का समापन सत्र अध्यक्षता करते हुए किया। इस कार्यक्रम में MSDE के विभिन्न विभागों, संस्थाओं और प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सप्ताह भर चलने वाली चर्चाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण सुधार और पहलें पहचानना था। deliberations का फोकस मजबूत, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर था। सत्र के समापन पर 2026 के लिए कौशल संकल्प (Skill Resolutions) तैयार किए गए, जो आने वाले वर्ष में नीति निर्माण और कार्यक्रम क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करेंगे।

चर्चाओं में अगले सुधार चरण पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें परिणामों पर अधिक ध्यान, राज्य सरकारों और उद्योग के साथ मजबूत समन्वय, और प्रशिक्षण गुणवत्ता, आकलन और प्रमाणपत्रों की निगरानी में सुधार शामिल हैं।

एक प्रमुख चर्चा थी संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने के साथ सिस्टम को सरल बनाना। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में ITI के लिए परिणाम-आधारित ग्रेडिंग तंत्र शामिल हैं ताकि गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा दिया जा सके और क्षेत्रीय और संस्थागत स्तर पर शक्तियों का प्रतिनिधिकरण आसान व्यवसाय के लिए सक्षम किया जा सके।

सेक्टर कौशल परिषदों (SSCs) का पुनर्गठन और सुदृढ़ीकरण भी चर्चा का हिस्सा रहा, जिसमें SSCs की नियमित समीक्षा और KPI का निर्धारण शामिल है। चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि तकनीकी परिवर्तन और उद्योग की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम का निरंतर अद्यतन आवश्यक है।

पाठ्यक्रम के आधुनिकीकरण, उद्योग के साथ सह-निर्माण को मजबूत करने और प्रशिक्षण डिजाइन में लचीलापन और अनुकूलता सुनिश्चित करना मजबूत कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए मुख्य कारक माने गए।

कौशल स्तरों के बीच स्पष्ट और सहज मार्ग बनाना भी महत्वपूर्ण बताया गया; इसमें स्कूल से पोस्ट-स्कूल, ड्रॉपआउट्स, कार्यरत पेशेवर और जीवनभर सीखने वालों के लिए क्रेडिट फ्रेमवर्क और प्रोग्राम्स के बीच गतिशीलता शामिल है।

हाल ही में आयोजित CS Conference में MSDE ने समयबद्ध तरीके से निम्नलिखित प्रतिबद्धताएँ व्यक्त की थीं:

  • राष्ट्रीय फेडरेटेड स्किल और वर्कफोर्स रजिस्ट्री की स्थापना

  • राष्ट्रीय प्रशिक्षक ढांचा (National Trainer Framework) का कार्यान्वयन

  • अप्रेंटिसशिप को स्कूल-टू-वर्क प्रमुख मार्ग के रूप में पुनर्स्थापित करना

  • MSMEs को राष्ट्रीय कौशल और अप्रेंटिसशिप ढांचे में शामिल करना

कौशल मंथन ने मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह राज्य सरकारों के साथ नियमित और संरचित परामर्श, गहन और सतत उद्योग सहभागिता, और अंतर-मंत्रालयीय और संस्थागत समन्वय सुनिश्चित करेगा।

ये साझा उपाय अपेक्षित हैं कि सुधारों के क्रियान्वयन को मजबूत करेंगे और सभी हितधारकों के बीच तालमेल सुनिश्चित करेंगे।

निफ्टेम कुंडली को ‘पीएम विकास’ योजना के क्रियान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में चयन

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राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), कुंडली को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा “पीएम विकास (PM VIKAS)” योजना के क्रियान्वयन हेतु परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (PIA) के रूप में चयनित किया गया है। इस संबंध में संस्थान और मंत्रालय के बीच 22 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह योजना अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से बनाई गई है, जिसके अंतर्गत आवश्यकता आधारित पाठ्यक्रमों में कौशल प्रशिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी तथा उनके लिए रोजगार/आजीविका के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। निफ्टेम, कुंडली इस योजना के लिए PIA के रूप में चयनित कुछ गिने-चुने राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) में से एक है।

इस परियोजना के अंतर्गत निफ्टेम-कुंडली अल्पसंख्यक समुदाय के कुल 2110 लाभार्थियों को तीन श्रेणियों—मल्टी स्किल टेक्नीशियन (फूड प्रोसेसिंग), मिलेट उत्पाद प्रोसेसर तथा असिस्टेंट बेकिंग टेक्नीशियन—में प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह प्रशिक्षण झारखंड, बिहार, पंजाब और हरियाणा के चार राज्यों में स्थित सात स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। यह पहल अल्पसंख्यक समुदायों की रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा उन्हें बाजार और ऋण से जोड़कर आर्थिक मुख्यधारा में सम्मिलित करने के माध्यम से बेहतर आजीविका के अवसर सृजित करने का प्रयास है।

परियोजना के तहत लाभार्थियों को NCVET (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद) द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के माध्यम से NSQF (राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा) के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही, योग्य प्रशिक्षित लाभार्थियों को किसी न किसी प्रकार के रोजगार—जैसे वेतन रोजगार, स्वरोजगार या अप्रेंटिसशिप—में, विशेषकर संगठित क्षेत्र में, नियुक्ति के लिए सहयोग किया जाएगा। सभी लाभार्थियों को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) / NCVET द्वारा अनुमोदित संस्थानों से प्रमाणन प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम जनवरी 2026 से प्रारंभ किए जाने की संभावना है।

विश्व कौशल एशिया 2025: भारत ने अपनी पदार्पण भागीदारी में हासिल की 8वां स्थान

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भारत ने विश्व कौशल एशिया प्रतियोगिता (WSAC) 2025 में अपनी पहली भागीदारी के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की, जिसमें 29 प्रतिभागी देशों में से 8वां स्थान प्राप्त किया। क्षेत्र की प्रमुख कौशल प्रणालियों के सामने पदार्पण करते हुए भारत ने उच्च मांग और उभरते ट्रेडों में अनुशासन, नवाचार और वैश्विक मानकों की उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया।

मंत्रालय के नेतृत्व में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), एनएसडीसी और अन्य तकनीकी साझेदारों द्वारा प्रशिक्षण और तैयारी को मार्गदर्शन दिया गया। भारतीय दल में 23 प्रतियोगी शामिल थे, जिन्होंने 21 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा की। इन्हें 21 विशेषज्ञों द्वारा समर्थित किया गया।

भारत ने पारंपरिक और तकनीकी-आधारित कौशल श्रेणियों दोनों में असाधारण प्रदर्शन किया। भारत ने एक रजत पदक, दो कांस्य पदक और तीन उत्कृष्टता पदक प्राप्त किए, जो देश की वैश्विक कौशल उत्कृष्टता में तेजी से बढ़ती उपस्थिति को दर्शाते हैं।

पदक उपलब्धियां:

  • रजत: पेंटिंग और डेकोरेटिंग – मुस्कान

  • कांस्य: इंडस्ट्रियल डिज़ाइन टेक्नोलॉजी – कोमल पांडा

  • कांस्य: रोबोट सिस्टम इंटीग्रेशन – शिवम सिंह और दिनेश आर

  • उत्कृष्टता पदक: सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन डेवलपमेंट फॉर बिजनेस – मोहम्मद माफाज़ पी आर

  • उत्कृष्टता पदक: वेब टेक्नोलॉजीज़ – आदित्य नंदन

  • उत्कृष्टता पदक: इलेक्ट्रिकल इंस्टालेशन्स – धनुष एम जी

महिला प्रतियोगियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पदक सूची में महत्वपूर्ण योगदान दिया, और यह दर्शाया कि भारत की कौशल प्रणाली में युवा महिलाओं की नेतृत्व क्षमता बढ़ रही है।

जयराम चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास और उद्यमिता ने कहा:

"विश्व कौशल एशिया 2025 में भारत का प्रदर्शन हमारे युवा प्रतिभा की आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अनुशासन को दर्शाता है। यहां अर्जित हर पदक और मान्यता हमारे प्रतियोगियों के कठिन परिश्रम, प्रशिक्षकों की प्रतिबद्धता और भारत की बढ़ती कौशल प्रणाली की ताकत का प्रमाण है।"

प्रतियोगियों का चयन IndiaSkills National Competition 2024 के माध्यम से किया गया था और उन्हें उद्योग-नेतृत्व वाले प्रशिक्षण और वैश्विक विशेषज्ञों के समर्थन से कई महीनों तक तैयार किया गया।

विश्व कौशल एशिया 2025 ने एशिया के विभिन्न देशों के 500+ युवा प्रतिभागियों को एक मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने नवाचार और भविष्य-तैयार क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता ने स्थानीय शिक्षा, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया।

भारत की लगातार वृद्धि इस क्षेत्र में राष्ट्रीय कौशल पहलों की प्रभावशीलता और युवा पेशेवरों की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।

ग्लोबल मंच पर भारत की नई छलांग: स्किल्स एशिया 2025 के लिए टीम इंडिया रवाना

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कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज चीनी ताइपे में 27–29 नवंबर 2025 को होने वाली विश्व स्किल्स एशिया प्रतियोगिता (WSAC) 2025 में भाग लेने वाले भारतीय दल के विदा समारोह (Send-Off Ceremony) का आयोजन किया। यह पहली बार है जब भारत वर्ल्ड स्किल्स एशिया मंच पर हिस्सा ले रहा है, जो देश की वैश्विक कौशल यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कौशल विकास और उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्यमंत्री जयंती चौधरी, तथा MSDE की सचिव देबाश्री मुखर्जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में MSDE के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार ज्ञान भूषण और प्रसिद्ध अभिनेता सुदेश बेरी ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

इस वर्ष की इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में 38 कौशल वर्गों में 500+ प्रतियोगी लगभग 40 सदस्य और आमंत्रित देशों से हिस्सा ले रहे हैं। भारत का दल, जिसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के नेतृत्व में तैयार किया गया है, 23 प्रतियोगियों और 21 विशेषज्ञों के साथ 21 कौशल श्रेणियों में हिस्सा लेगा—एशिया के सर्वश्रेष्ठ युवा पेशेवरों के बीच भारत की कौशल क्षमता को प्रदर्शित करते हुए।

समारोह को संबोधित करते हुए, जयंती चौधरी ने कहा:

“वर्ल्ड स्किल्स एशिया में भाग लेने वाले युवा प्रतियोगी भारत की वैश्विक कौशल नेतृत्व क्षमता का प्रतीक हैं। हमें विश्वास है कि महीनों की कठोर प्रशिक्षण प्रक्रिया, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और सेक्टर स्किल काउंसिल्स, मंत्रालय व उद्योग साझेदारों का सहयोग उन्हें श्रेष्ठ प्रदर्शन में सक्षम बनाएगा। सरकार विश्व की कौशल राजधानी बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिभाओं को सशक्त बनाने हेतु प्रतिबद्ध है।”

भारतीय प्रतिभागी डिजिटल एवं आईटी तकनीक, मोबाइल रोबोटिक्स, मेक्ट्रॉनिक्स, CNC मिलिंग, वेब डेवलपमेंट, ऑटोमोटिव रिपेयर, फैशन टेक्नोलॉजी, ग्राफिक डिजाइन, ब्यूटी थैरेपी सहित कई नई और पारंपरिक उच्च-डिमांड कौशलों में दक्षता प्रदर्शित करेंगे।

इन प्रतियोगियों का चयन इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2024 के माध्यम से कई चरणों की कड़ी प्रक्रिया द्वारा किया गया, जिसे NSDC द्वारा आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय पदक विजेताओं को विश्व स्तर की प्रतिष्ठित कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है।

MSDE की सचिव, देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि विश्व स्किल्स एशिया में भारत की पहली भागीदारी कौशल विकास यात्रा का ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने से हमारे युवा प्रतियोगी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने बच्चों को श्रेष्ठ प्रदर्शन करने और देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

इन 23 प्रतिभागियों ने पिछले राष्ट्रीय मूल्यांकन दौरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था और पिछले पांच महीनों में उद्योग-आधारित गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण JK Cement, Toyota Kirloskar Motor, LTA Academy of Beauty, Mahindra University, Welcomgroup Graduate School of Hotel Administration, Iraj Evolution Design Company Ltd. जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में दिया गया।

विश्व स्किल्स इंडिया (NSDC) ने 21–24 नवंबर के दौरान टीम बिल्डिंग और तैयारी कार्यक्रम भी आयोजित किया, जिसमें साइकोमैट्रिक असेसमेंट, संचार कौशल, न्यूरोथैरेपी, माइंडफुलनेस, न्यूट्रीशन काउंसलिंग, आर्ट और म्यूजिक थैरेपी एवं ट्रैवल रेडीनेस सत्र शामिल थे, जिससे प्रतियोगियों में तकनीकी आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती विकसित हुई।

WSAC 2025 में भारत की भागीदारी स्किल इंडिया मिशन के तहत वैश्विक मानकों, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग और विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें NSDC प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहभागिता और प्रतियोगी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


SportEdge Meerut: मेरठ को भारत का मॉडल स्पोर्ट्स हब बनाने की पहल

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भारत की खेल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और समावेशी विकास को सशक्त बनाने के लिए, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने स्पोर्ट्स, फिजिकल एजुकेशन, फिटनेस और लेजर स्किल्स काउंसिल (SPEFL-SC) तथा ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट (BAT) के सहयोग से “SportEdge Meerut” कार्यशाला का सफल आयोजन किया। यह पहल मेरठ को भारत का मॉडल स्पोर्ट्स हब बनाने के उद्देश्य से खेल और उद्यमिता विकास के लिए शुरू की गई है।

मुख्य उद्देश्य और पहल

SportEdge Meerut का उद्देश्य मेरठ की खेल विरासत का लाभ उठाकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, कौशल आधारित आजीविका के अवसर पैदा करना और स्थानीय प्रतिभा, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना है। SPEFL-SC इस कार्यक्रम को सेक्टरल कौशल आवश्यकताओं, उद्योग साझेदारियों और मानकों के अनुरूप विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाएगा, जबकि MSDE केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, उद्योग निकायों और खेल संघों के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगा।

कार्यशाला में भागीदारी

कार्यशाला में सरकार, उद्योग, वित्त और विकास क्षेत्रों के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। इसमें एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक, ONGC फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और SBI फाउंडेशन सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने SportEdge Meerut के महत्व और इसे एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

मेरठ: भारत की खेल अर्थव्यवस्था का इंजन

मेरठ भारत के सबसे बड़े खेल सामान निर्माण क्लस्टरों में से एक है और उत्तर प्रदेश के “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) पहल के तहत प्रमुख जिला है। यह जिला राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग ₹1,500 करोड़ का योगदान करता है और भारत के खेल सामान निर्यात में 40% से अधिक हिस्सा रखता है। क्लस्टर में 3 लाख से अधिक कारीगर, महिला कार्यकर्ता और छोटे उद्यमी कार्यरत हैं।

SportEdge Meerut के माध्यम से इस पारंपरिक कौशल और उत्पादन क्षमता को वैश्विक मानक के स्तर पर ले जाने और नवाचार, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सतत उद्यमिता के लिए सशक्त बनाने का लक्ष्य है।

नेतृत्व और दृष्टि

कौशल विकास और उद्यमिता राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने कहा:

“मैं SportEdge Meerut के तहत मेरठ स्पोर्ट्स हब विकास मॉडल की घोषणा करते हुए प्रसन्न हूँ। यह पहल खेल, कौशल और उद्यमिता को एक एकीकृत विकास इंजन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खेल केवल जीतने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन कौशल हैं जो चरित्र निर्माण, अनुशासन और नए अवसरों के द्वार खोलते हैं।”

संस्थागत सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण

MSDE की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने कहा:

“SportEdge Meerut पहल के माध्यम से हम नीति, उद्योग और लोगों को जोड़कर इस पारंपरिक क्लस्टर को कौशल, खेल और सतत विकास के वैश्विक प्रतीक में बदलना चाहते हैं। जब खेल आजीविका और उद्यमिता का माध्यम बनते हैं, तो हम केवल चैंपियनों को नहीं बनाते, बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करते हैं।”

उद्योग की दृष्टि और अगले कदम

उद्योग विशेषज्ञों ने R&D, डिज़ाइन नवाचार और तकनीकी एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने खेल इंजीनियरिंग, उपकरण डिजाइन और सामग्री विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देने, उत्पाद डिज़ाइन और IP निर्माण में नवाचार, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अगले चरण में MSDE, SPEFL-SC और BAT स्थानीय सरकार, उद्योग और वित्तीय भागीदारों के साथ परामर्श करके कार्यान्वयन ढांचा तैयार करेंगे और उसके पश्चात औपचारिक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे।

उद्देश्य

SportEdge Meerut का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर खेल और उद्यमिता आधारित विकास का मॉडल बनाना है, जो दिखाए कि स्थानीय ताकतें, कौशल विकास और वैश्विक सहयोग मिलकर समुदायों और अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी अवसर खोल सकती हैं।

राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (NSQC) की 44वीं बैठक आयोजित

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (NSQC) की 44वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव एवं NCVET की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की।

बैठक में कुल 210 कौशल योग्यताएँ — स्वास्थ्य, कृषि, ऑटोमोबाइल, आईटी-आईटीईएस, दूरसंचार, खुदरा, लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण और आतिथ्य क्षेत्रों से संबंधित — मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गईं।

इस बैठक में केंद्रीय एवं राज्य सरकारों, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और पुरस्कार प्रदाता संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

NSQC का उद्देश्य कौशल योग्यताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे (NSQF) के अनुरूप बनाना है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूपता सुनिश्चित हो सके।

यह पहल भारत में कौशल विकास पारितंत्र को सशक्त करने और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (Future-Ready Workforce) तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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