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मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी सौगात : भारत सरकार से 1333 करोड़ रुपए स्वीकृत, 212 करोड़ की मजदूरी राशि का भुगतान

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रायपुर- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य की मांग एवं लंबित देनदारियों को ध्यान में रखते हुए कुल 1333 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण श्रमिक परिवारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

स्वीकृत राशि में से 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मजदूरी भुगतान हेतु जारी की गई है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता के साथ श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

वर्तमान में राज्य के श्रमिकों के खातों में 212 करोड़ रुपए की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि भी शीघ्र ही चरणबद्ध तरीके से श्रमिकों के खातों में अंतरित की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ श्रमिकों की आजीविका को स्थायित्व प्राप्त होगा।

राज्य में संचालित “मोर गांव मोर पानी महा अभियान” के अंतर्गत जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। मनरेगा के माध्यम से आजीविका डबरी, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण कार्यों को व्यापक स्तर पर स्वीकृत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, भू-जल स्तर में सुधार हो तथा किसानों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन, ग्रामीण अधोसंरचना विकास तथा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

भारत सरकार से प्राप्त यह वित्तीय स्वीकृति छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास को नई गति देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

बीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर

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दशकों से विकास से कटे इलाकों में पहुंचा रोजगार, राशन, शिक्षा और सुरक्षित आवास; 5 लाख मानव दिवस सृजित

वापस लौटे गांव, बदली जिंदगी: नक्सल इलाके में विकास की सशक्त कहानी

रायपुर- लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा

इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है।

पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।

आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया

नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही सहदेव कोरसा, लखु और सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है।

2977 परिवारों को मिला पक्का आवास

नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर

जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है।

ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं।

कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।

सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है।
पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है।

धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है।
ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है।

युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता

पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।

बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है - और हम इस बदलाव को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित

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पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के तहत स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने, जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण जल आपूर्ति सेवा वितरण में जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया।

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोन ने की। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव (NJJM) स्वाति मीना नाइक, वरिष्ठ अधिकारी, देशभर के जिला कलेक्टर्स/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन निदेशक एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य मिशन टीमों सहित 800 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ श्रृंखला जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन और स्थानीय शासन को मजबूत करने का एक राष्ट्रीय संवाद मंच है। इसका पहला संस्करण 14 अक्टूबर 2025 को आयोजित हुआ था, जिसमें डिजिटल टूल्स, जवाबदेही तंत्र और पारस्परिक सीख के माध्यम से पंचायतों और जिलों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई थी। आज आयोजित दूसरे संस्करण में जल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें डेटा आधारित योजना, कानूनी सुरक्षा उपायों और मनरेगा के साथ अभिसरण पर बल दिया गया।

प्रमुख बिंदु

🔹 मनरेगा के साथ अभिसरण – सोन ने 23 सितंबर 2025 को जारी राजपत्र अधिसूचना S.O. 4288(E) का उल्लेख करते हुए जिलों से आग्रह किया कि वे जल स्रोत पुनर्भरण, संरक्षण और जल संचयन के कार्यों पर विशेष खर्च सुनिश्चित करें।

🔹 संरक्षण और नियामक तंत्र – 27 अक्टूबर 2025 को विभाग द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने ‘संरक्षित पेयजल क्षेत्र’ (Protected Drinking Water Zones) स्थापित करने, गश्त और निरीक्षण व्यवस्था लागू करने तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को समुदाय आधारित निगरानी के लिए सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि “जल जीवन मिशन में जिलाधिकारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि स्थायी सेवा वितरण का आधार डेटा-आधारित निर्णय, स्थानीय स्वामित्व और निवारक शासन है।”

निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का प्रदर्शन

संयुक्त सचिव स्वाति मीना नाइक ने Decision Support System (DSS) का परिचय कराया, जिसे BISAG-N के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वैज्ञानिक आधार पर जल स्रोतों की योजना, आकलन और संरक्षण में सहायता करती है।
सहायक सचिव (DS-NJJM)अंकीता चक्रवर्ती ने DSS पोर्टल का प्रदर्शन किया, जो भू-स्थानिक मानचित्र, कृत्रिम जल पुनर्भरण आवश्यकता (AWRR) विश्लेषण और वास्तविक समय ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

जिलों द्वारा प्रस्तुत श्रेष्ठ अभ्यास

🔹 गडचिरोली (महाराष्ट्र) – पाइप जल योजनाओं और सौर ऊर्जा आधारित मिनी जल योजनाओं के माध्यम से FHTC कवरेज 8.37% से बढ़कर 93% तक पहुंचा। हनीकॉम्ब तकनीक आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली पर कार्य प्रगति पर है।

🔹 हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) – सभी 248 ग्राम पंचायतों में ‘हर घर जल’ उपलब्ध। महिलाओं द्वारा फील्ड टेस्ट किट (FTK) से जल परीक्षण।

🔹 डांग (गुजरात) – महिला संचालित जल समितियां ‘मुख्यमंत्री महिला पानी समिति प्रोत्साहन योजना’ के तहत कार्यरत।

🔹 बारामुला (जम्मू-कश्मीर) – 6,600 किमी पाइपलाइन नेटवर्क, 228 फिल्ट्रेशन प्लांट, और 391 सेवा जलाशय। ₹60 करोड़ की परिहासपोरा मल्टी-विलेज योजना से 75,000 लोगों को स्वच्छ जल।

🔹 बोकारो (झारखंड) – ‘जल सहिया’ मॉडल से महिलाओं को प्रशिक्षण, संचालन, परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन में सशक्त बनाया गया।

जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद के बारे में

DDWS द्वारा आरंभ की गई यह श्रृंखला जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में संलग्न जिला कलेक्टर्स और क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय ज्ञान-साझा और पारस्परिक सीख का मंच है। यह संवाद ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और सेवा वितरण की स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए तेज़ी लाने के निर्देश

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केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के कृषि भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव शैलेश सिंह और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अधिकारियों ने मंत्री को राज्यवार प्रगति की जानकारी दी। बताया गया कि कुछ पहाड़ी और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण कार्य अस्थायी रूप से धीमा हुआ है, जबकि अन्य सभी क्षेत्रों में योजना का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।

विशेष ध्यान उत्तर-पूर्वी राज्यों और वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर छत्तीसगढ़ पर दिया गया। शिवराज चौहान ने अधिकारियों को उत्तर-पूर्व में कार्यों को तेज़ करने के निर्देश दिए और घोषणा की कि वे जल्द ही इस क्षेत्र में एक विशेष समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि शामिल होंगे तथा ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं — जैसे PMGSY, मनरेगा, कौशल विकास, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन — की प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 25वीं वर्षगांठ को राष्ट्रव्यापी स्तर पर मनाया जाएगा। शिवराज चौहान ने कहा, “यह योजना हमारे ग्रामीण भारत के हालात और दिशा दोनों बदलने वाली ऐतिहासिक पहल है। 25 वर्ष पूरे होना अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है।”

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि PMGSY की 25 वर्षों की सफलता को दर्शाने वाली एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और जारी की जाए, ताकि योजना के राष्ट्रीय प्रभाव को उजागर किया जा सके।

बैठक के अंत में शिवराज चौहान ने अधिकारियों से कहा कि कार्य की गति को और तेज़ करें और राज्य सरकारों के साथ समन्वय में आने वाली चुनौतियों का शीघ्र समाधान करें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी सड़क निर्माण परियोजनाएं उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समय सीमा के भीतर पूरी हों, ताकि टिकाऊ अवसंरचना के माध्यम से समावेशी ग्रामीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

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जम्मू-केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज जम्मू के आर.एस.पुरा क्षेत्र के सीमा गाँव बदयाल ब्राह्मणा पहुंचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। पहुँचते ही मंत्री ने सबसे पहले खेतों का निरीक्षण कर खड़ी फसलों को हुए नुकसान का जायज़ा लिया। इसके बाद उन्होंने बाढ़ पीड़ित किसानों एवं स्थानीय नागरिकों की बड़ी सभा को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस संकट की घड़ी में जम्मू-कश्मीर की जनता के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार से परामर्श के बाद, हुए नुकसानों के आकलन पर सभी संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय, जल शक्ति, ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय की टीमें पहले ही प्रभावित इलाकों का सर्वेक्षण कर चुकी हैं और अपनी रिपोर्टें दे रही हैं। राज्य सरकार का ज्ञापन प्राप्त होते ही केंद्र सरकार राहत उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

बदयाल ब्राह्मणा के दौरे के बाद मंत्री जम्मू शहर लौटे और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ समीक्षा बैठक की। इसके उपरांत मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कई राहत उपायों की घोषणा की।

मुख्य घोषणाएँ:

  • प्रभावित किसानों को तुरंत पीएम-किसान की एक किस्त जारी की जाएगी।

  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मजदूरों को मनरेगा के तहत 50 अतिरिक्त मानव-दिवस दिए जाएंगे (कुल 150 मानव-दिवस, वर्तमान 100 के बजाय)।

  • बाढ़ में मारे गए पशुओं के लिए किसानों को मुआवज़ा दिया जाएगा।

  • बाढ़ से क्षतिग्रस्त लगभग 5000 मकानों का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होगा। प्रत्येक मकान के लिए ₹1,30,000 और अलग शौचालय की राशि दी जाएगी।

  • बाढ़ में प्रभावित स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए ₹76 करोड़ की राशि जारी की जाएगी।

चौहान ने सुझाव दिया कि किसानों के खेतों में जमा हुई रेत को उन्हीं के उपयोग में लाने की अनुमति दी जाए। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के खनन विभाग को नियमों में ढील देनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार के पास ₹2,499 करोड़ आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार अतिरिक्त सहायता भी देगी। साथ ही, क्षतिग्रस्त नहरों और तटबंधों के जीर्णोद्धार का कार्य भी केंद्र सरकार की मदद से किया जाएगा।

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