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राजिम की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी, बना नगर पालिका : राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।



कोरबा को मिली 37.28 करोड़ रूपए की ऐतिहासिक सौगात, 15वें वित्त आयोग अंतर्गत 116 विकास कार्यों को स्वीकृति

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रायपुर- हर गली पक्की बने, कहीं जलभराव न हो और कोरबा एक सुव्यवस्थित एवं विकसित शहर बनेकृ इसी संकल्प को साकार करते हुए नगर विधायक एवं प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, वाणिज्यिक कर (आबकारी) एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के सतत प्रयासों से नगर पालिक निगम कोरबा को 15वें वित्त आयोग अंतर्गत 37 करोड़ 28 लाख रूपए से अधिक राशि के 116 विकास कार्यों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अप्रैल 2026 में विभिन्न निर्माण कार्यों की स्वीकृति हेतु राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इन प्रस्तावों की शीघ्र स्वीकृति के लिए मंत्री लखन लाल देवांगन ने गुरुवार को उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से भेंट कर तत्काल स्वीकृति का आग्रह किया। उनके विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप सभी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्री देवांगन के नेतृत्व में कोरबा नगर के विकास के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं एवं मदों से राशि स्वीकृत हो रही है। अब तक कोरबा शहर के लिए लगभग 1000 करोड़ रूपए के विकास कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, जिनका लाभ अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

इस स्वीकृति के अंतर्गत शहर के सभी वार्डों में सीसी सड़क, आरसीसी नाली, जल निकासी, पेयजल प्रबंधन, सड़क निर्माण तथा अन्य मूलभूत अधोसंरचना से जुड़े 116 विकास कार्यों को स्वीकृति मिली है। इनमें वार्डवार गली-गली तक सड़क एवं नाली निर्माण के कार्य शामिल हैं, जिससे वर्षों से चली आ रही जलभराव एवं आवागमन की समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।

स्वीकृत सूची में वार्ड क्रमांक 1 से लेकर सभी वार्डों तक सड़क एवं नाली निर्माण, तालाबों के आसपास जल निकासी व्यवस्था, प्रमुख मार्गों का उन्नयन तथा मोहल्लों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। यह स्वीकृति कोरबा नगर के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि डबल इंजन नहीं, अब ट्रिपल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों के साथ-साथ गली-मोहल्लों की छोटी-छोटी समस्याओं का भी तेजी से समाधान किया जा रहा है। उनका लक्ष्य है कि कोरबा का कोई भी वार्ड विकास से अछूता न रहे और प्रत्येक नागरिक को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

उन्होंने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से कोरबा तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। आने वाले समय में भी शहर के सर्वांगीण विकास के लिए इसी प्रकार निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।   

   15वें वित्त आयोग अंतर्गत नगर पालिक निगम कोरबा में स्वीकृत विकास कार्य

वार्ड क्र. 01 रामसागर में तुलसी घर के आगे सड़क निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 01 अंतर्गत गीता ज्वेलर्स से स्वर्ण भूमि तक आर.सी.सी. नाली का निर्माण कार्य -  38.13 लाख रूपए, वार्ड क्र. 01 अंतर्गत रामसागर तालाब बस्ती साइड में आर.सी.सी. नाला निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 03 प्राथमिक स्कूल के पीछे तुलसी नगर में आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  15.80 लाख रूपए, वार्ड क्र. 04 गृहणी अनाज से पोषण किराना दुकान तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  40.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 05 देवांगन पारा अंतर्गत कोरबा फाटक से गणेश स्टोर गोकुल चंद लालूमल की दुकान के सामने से होते हुए गांधी चौक तक नाली निर्माण कार्य -  10.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 05 देवांगन पारा अंतर्गत लवली केयर स्कूल से कदम पेड़ नाला तक नाला निर्माण कार्य - 10.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 06 अंतर्गत गुरुघासी से लेकर कृपाल सिंह के घर तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 07 धनुहार मोहल्ला में जवरीहिन सनवाल के घर से लेकर तारा चंद्र श्रीवास के घर तक रोड निर्माण -  7.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 08 अंतर्गत मोतीसागर पारा पूर्व पार्षद बेरी महिलाओं के घर के आगे वाली गली, वृद्ध आश्रम एवं प्राथमिक शाला जाने के मुख्य मार्ग/गली निर्माण कार्य -  8.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 09 इमलीडुग्गू अंतर्गत पोखरी पारा स्थित तालाब के चारों ओर नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 10 मिलाई खुर्द अंतर्गत बरबसपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मंदिर के समीप सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 11 अंतर्गत मोनू सारथी के घर से राजकुमारी महंत एवं बबलू के घर से महेश दास के घर तक सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -   20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 12 बंटी स्टोर के सामने गुप्ता गली में रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  18.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 12 सिटी कोतवाली के सामने से अशोका भवन की ओर मनोकामना मंदिर तक जाने वाली रोड एवं नाली निर्माण कार्य - 15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 13 शारदा विहार अंतर्गत पानी टंकी मोहल्ले में नाला निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 14 अंतर्गत न्यू अमरैयापारा में खान घर से विनोद श्रीवास के घर तक सी.सी. रोड एवं आर.सी.सी. नाली निर्माण कार्य -  18.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 14 अंतर्गत शारदा विहार रेलवे फाटक से चिमनी भट्ठा तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  26.74 लाख रूपए, वार्ड क्र. 15 इंदिरा नगर स्कूल के पीछे इन्द्रापारा एवं 15 ब्लॉक में आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  19.63 लाख रूपए, वार्ड क्र. 16 पंप हाउस अंतर्गत आत्मानंद स्कूल के पीछे इमरी मोहल्ला में सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  17.68 लाख रूपए, वार्ड क्र. 17 घाटघोरा रोड से प्रेम खटाल तक सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  25.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 18 भवानी मंदिर के पास निर्मित पूर्वांचल शेड से भवन तक जाने हेतु रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  26.30 लाख रूपए, वार्ड क्र. 19 अंतर्गत गिरिराजचंद्र घर के पास से रविशंकर दिवाकर घर तक, महंत घर से कॉलोनी तक, नीलगिरी बस्ती से श्रीवास्तव घर से दिलीप दिवान घर तक आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  10.41 लाख रूपए, वार्ड क्र. 20 नीलगिरी बस्ती में आंगनबाड़ी- 1 से आश्रम के पीछे तक नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 20 सामुदायिक भवन के पीछे से आश्रम के पीछे तक नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए की स्वीकृति शामिल है।


जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर ने अपर कलेक्टर को सौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन

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आरंग- ग्राम जरौद (क) में आयोजित 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के लोकप्रिय जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर ने किसानों, युवाओं, छात्रों और ग्रामीणों की प्रमुख समस्याओं को लेकर अपर कलेक्टर रायपुर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन ने इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो जनता के हक के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन की प्रमुख मांगें और मुद्दे: 

किसानों के लिए खाद की पुरानी व्यवस्था: किसानों को हो रही परेशानी को देखते हुए डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की वितरण व्यवस्था को पहले की तरह करने की मांग की गई।

​शासकीय भूमि आवंटन पर रोक: ग्राम रसनी में पंचायत की मर्जी के बिना 56 एकड़ सरकारी जमीन के आवंटन पर तुरंत रोक लगाने की बात कही गई।

​ ट्रेन स्टॉपेज और सिटी बस का विस्तार: आरंग रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव (स्टापेज) और रायपुर की सिटी बस सेवा को भानसोज से आगे फरफौद और खौली तक बढ़ाने की मांग की ताकि यात्रियों को आसानी हो।

​ स्कूलों का उन्नयन (अपग्रेड): शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए रसनी और पारागांव के हाईस्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाने की मांग रखी।

धान खरीदी केंद्र की बहाली: ग्राम रसनी में राज्यपाल की मंजूरी के बाद स्वीकृत धान खरीदी केंद्र को रद्द किए जाने पर नाराजगी जताते हुए इसे दोबारा शुरू करने की मांग की गई।

अवैध शराब पर रोक: गांवों में बढ़ रही अवैध शराब की बिक्री पर तुरंत लगाम लगाने की मांग की गई।

​मनरेगा में 100 दिन का रोजगार: मनरेगा में रोजगार कटौती पर चिंता जताते हुए कहा गया कि ग्रामीणों को अभी 20 दिन का काम भी नहीं मिला है। हर पात्र परिवार को पूरे 100 दिनों का रोजगार दिया जाए।

​रुका हुआ विकास फंड जारी हो: अलग-अलग ग्राम पंचायतों में पास हो चुके विकास कार्यों के लिए अटकी हुई राशि (फंड) को जल्द से जल्द जारी किया जाए।

​"ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को दूर करना शासन-प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। क्षेत्र की जनता  के लिए हमारी लड़ाई लगातार जारी रहेगी।"

 — वतन चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य .

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ - मुख्यमंत्री

रायपुर- डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 



मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

सम्मेलन को सांसदबृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।

इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

केन्द्रीय सरकार ने राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग अनुदान जारी किया

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को सशक्त बनाने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अनुदान जारी किए हैं।

राजस्थान में, FY 2025–26 के लिए पहली किस्त के बिना बंधन (Untied) अनुदान की राशि ₹303.0419 करोड़ जारी की गई है, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, FY 2024–25 की पहली और दूसरी किस्तों के रोके गए हिस्से के ₹145.24 करोड़ अतिरिक्त पात्र ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी किए गए हैं।

झारखंड राज्य के लिए, Union Government ने FY 2025–26 की पहली किस्त के बिना बंधन अनुदान के रूप में ₹275.1253 करोड़ जारी किए हैं, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 253 ब्लॉक पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं।

भारत सरकार, मंत्रालय पंचायती राज और मंत्रालय जल शक्ति (पीने के पानी और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में सिफारिश और जारी किए जाते हैं। बिना बंधन (Untied) अनुदान का उपयोग PRIs/ RLBs द्वारा स्थानीय स्तर की आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा, जो संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों में आता है, सिवाय वेतन और अन्य स्थायी खर्चों के।

बंधित (Tied) अनुदान का उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:
(a) स्वच्छता और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मानव मल और फेकल स्लज प्रबंधन विशेष रूप से शामिल है, और
(b) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं के लिए XV वित्त आयोग अनुदान के रूप में ₹94.236 करोड़ जारी

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (RLBs/PRIs) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹94.236 करोड़ की राशि जारी की है। इस निर्गम में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनटाइड ग्रांट्स की दूसरी किस्त के रूप में ₹9,410.03 लाख शामिल हैं, जो राज्य के सभी पात्र 13 जिला पंचायतों, 95 क्षेत्र पंचायतों और 7,784 ग्राम पंचायतों को प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024-25 की अनटाइड ग्रांट्स की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में ₹13.60 लाख की राशि 15 अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों को भी जारी की गई है।

पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं के लिए XV वित्त आयोग अनुदानों की अनुशंसा करते हैं, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किया जाता है।

अनटाइड ग्रांट्स का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जाना है, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्ययों पर नहीं किया जा सकता।

वहीं टाइड ग्रांट्स का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें

(क) स्वच्छता और ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति का रखरखाव, घरेलू कचरे, मानव अपशिष्ट और फीकल स्लज का प्रबंधन एवं उपचार, तथा
(ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण से संबंधित कार्य शामिल हैं।

केरल के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग के तहत ₹260.20 करोड़ जारी

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए केरल की ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹260.20 करोड़ की राशि जारी की है। यह राशि अनटाइड ग्रांट की पहली किस्त है और राज्य के सभी 14 जिला पंचायतों, 152 ब्लॉक पंचायतों तथा 9,414 ग्राम पंचायतों को कवर करती है।

ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (RLBs/PRIs) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी करने की सिफारिश पंचायती राज मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) द्वारा की जाती है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय इसे एक वित्तीय वर्ष में दो किश्तों में जारी करता है।

अनटाइड ग्रांट का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकता है, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्यय के लिए नहीं किया जा सकता।

वहीं, टाइड ग्रांट का उपयोग मूलभूत सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—
(क) स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे, मानव अपशिष्ट तथा फीकल स्लज का प्रबंधन एवं उपचार शामिल है, तथा
(ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण से संबंधित कार्य।

असम की ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए केंद्र ने जारी किए पंचदश वित्त आयोग के अनुदान

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान पंचदश वित्त आयोग (XV FC) के तहत असम की ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए अनुदान जारी कर दिए हैं। इसमें वित्त वर्ष 2024–25 की दूसरी किस्त का अनटाइड ग्रांट शामिल है, जिसकी कुल राशि ₹219.24 करोड़ है। यह राशि राज्य के सभी पात्र 27 जिला पंचायतों (DPs), 182 ब्लॉक पंचायतों (BPs) और 2192 ग्राम पंचायतों (GPs) के लिए है।

इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024–25 की पहली किस्त के अनटाइड ग्रांट के रोके गए हिस्से में से ₹4.698 करोड़ भी जारी किए गए हैं, जो 26 अतिरिक्त पात्र ब्लॉक पंचायतों के लिए हैं।

भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदानों की सिफारिश करती है, जिन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा दो किस्तों में जारी किया जाता है।

अनुदानों का उपयोग

  • अनटाइड ग्रांट्स: पंचायतों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उपयोग किए जाएंगे।
    इनका उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में दिए गए 29 विषयों पर किया जा सकता है,
    सिवाय वेतन और संस्थागत खर्चों के।

  • टाइड ग्रांट्स: इनका उपयोग निम्न सेवाओं के लिए किया जाएगा—
    (a) स्वच्छता सेवाएँ और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरा प्रबंधन, मानव मल तथा फीकल स्लज मैनेजमेंट शामिल हैं।
    (b) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

यह वित्तीय सहायता असम में ग्रामीण शासन को सशक्त बनाने, बुनियादी सेवाओं में सुधार लाने और स्थानीय विकास को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी।

सामुदायिक प्रयासों का रहा बेहतरीन परिणाम : संस्कारधानी को मिल रहा बेस्ट डिस्ट्रिक्ट का सम्मान

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  • 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार में देश के ईस्ट जोन के बेस्ट डिस्ट्रिक्ट के रूप में सम्मानित होने जा रहा राजनांदगांव
  • जल संरक्षण एवं जनभागीदारी के क्षेत्र में बना आदर्श मॉडल

रायपुर- जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 के विजेताओं की घोषणा की गई है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले को देश के ईस्ट जोन में बेस्ट डिस्ट्रिक्ट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। यह सम्मान जिले में जल संरक्षण, संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित सतत कार्यों के लिए 18 नवम्बर 2025 को देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस पुरस्कार में देशभर के विभिन्न जिलों के नामांकन के बाद सेन्ट्रल ग्राउण्ड वॉटर बोर्ड, सेन्ट्रल वॉटर कमिशन एवं विभिन्न दलों के निरीक्षण व विस्तृत अवलोकन के उपरांत छत्तीसगढ़ राज्य ही नहीं अपितु पूरे देश के ईस्ट जोन के पांच राज्यों के समस्त जिलों में से बेस्ट डिस्ट्रिक्ट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के रूप में यह खिताब राजनांदगांव जिले को प्रदान किया जा रहा है। विगत वर्ष केंद्रीय भू-जल मंत्री द्वारा राजनांदगांव जिले का दौरा कर जिले में चल रहे इस अभियान के प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए देश विभिन्न मंचों में राजनांदगांव जिले की प्रशंसा भी की गई थी।

जनभागीदारी आधारित यह अभियान जल संरक्षण की दिशा में सफल पहल

राजनांदगांव जिले में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के कार्यों को शासन-प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, महिला स्वसहायता समूहों, उद्योगपतियों, विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से मिशन के रूप में सघन अभियान चलाया गया। गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों ने जल ही जीवन है और जल है तो कल है के संदेश को आत्मसात करते हुए मिशन जल रक्षा को एक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। किसानों द्वारा फसल चक्र परिवर्तन, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्यों से जिले में जल स्तर में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। केंद्रीय भू-जल बोर्ड की 2021-22 की रिपोर्ट में जिले के तीन ब्लॉकों को सेमी-क्रिटिकल जोन के रूप में चिन्हित किया गया था। सेमीक्रिटिकल जोन का अर्थ पानी के विषय में 70 प्रतिशत से अधिक पानी का उपयोग करने वाले क्षेत्र इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मिशन जल रक्षा के व्यापक प्रयासों के साथ जिले ने यह अभियान प्रारंभ किया था, अब यह पूरे देश में मॉडल के रूप में जाना जाने लगा है। इस योजना में जिले की प्राथमिकता है कि पहले तो हम पानी के तेजी से घटते जल स्तर की गति को धीमा कर सके फिर उसे एक स्तर पर स्थिर कर सके तत्पश्चात् अत्यधिक जल दोहन को रोककर इस प्राकृतिक बहुमूल्य धरोहर को संधारित कर सके। इसके लिए अनिवार्य है कि प्रत्येक नागरिक आज से ही अपने आसपास के क्षेत्र में होने वाले जल दोहन को ध्यान में रख कर कम से कम भू-जल का उपयोग करें एवं कम से कम पानी उपयोग वाली फसलों को बढ़ावा दें। 

महिला समूहों ने नीर और नारी जल यात्रा जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता के लिए कार्य किया गया। जिसमें जिले की पद्मश्री फूलबासन बाई यादव का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने जिले के गांव-गांव में जाकर महिलाओं को एकजुट कर जल यात्राओं के माध्यम से मुहिम को बल प्रदान किया। जिले के समस्त विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने रैलियों, पौधारोपण विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया। 

मिशन जल रक्षा - सतत विकास की दिशा में अभिनव पहल के रूप में उभर कर आने लगा

पानी के तेजी से घटते जल स्तर की इस चुनौती को प्रयासों में बदलते हुए जिले में जीआईएस आधारित तकनीकी योजनाओं, रिचार्ज संरचनाओं, रिचार्ज सॉफ्ट, बोरवेल सह इंजक्शनवेल, परकोलेशन टैंक, फार्म पॉन्ड और तालाबों के पुर्नजीवन जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी गई। मिशन के अंतर्गत भू- जल दोहन नियंत्रण, वर्षा जल संग्रहण तथा सामुदायिक प्रयासों को जल संरक्षण की प्रमुख रणनीति के रूप में अपनाया गया।

सामुदायिक प्रयासों से मिली राष्ट्रीय पहचान

राजनांदगांव जिले को प्राप्त होने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान, जिले के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। साझा प्रयासों से जल बचाओ, भविष्य बनाओ की भावना को व्यवहार में उतारते हुए जिले ने यह साबित किया है कि जनभागीदारी से किसी भी संसाधन का संरक्षण संभव है। साथ ही साथ 18 नवंबर 2025 को ही नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में राजनांदगांव जिले को एक अन्य जल संचय से जनभागीदारी के क्षेत्र में भी सम्मानित किया जाना है। राजनांदगांव की यह उपलब्धियां अब पूरे देश के सामने आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है। यह सम्मान न केवल जिले की उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए सतत जल प्रबंधन और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।


जन योजना अभियान 2025-26 : सबकी योजना, सबका विकास

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पंचायती राज मंत्रालय आगामी 2 अक्टूबर 2025 से देशभर के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में जन योजना अभियान (PPC) 2025-26 : “सबकी योजना, सबका विकास” अभियान प्रारंभ करेगा। इसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु पंचायत विकास योजनाओं (PDPs) की तैयारी की जाएगी।

वर्ष 2018 से आरंभ हुए इस अभियान ने पंचायतों को साक्ष्य-आधारित, अभिसरणीय और समावेशी विकास योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाया है, जो स्थानीय प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं तथा राष्ट्रीय लक्ष्यों से सामंजस्य स्थापित करती हैं। विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से यह अभ्यास भागीदारीपूर्ण योजना प्रक्रिया को गहराई प्रदान करता है और जमीनी स्तर पर संस्थाओं को सशक्त बनाता है।

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 से अब तक 18.13 लाख से अधिक पंचायत विकास योजनाएँ (ग्राम पंचायत विकास योजना - GPDPs, ब्लॉक पंचायत विकास योजना - BPDPs तथा जिला पंचायत विकास योजना - DPDPs) अपलोड की गई हैं। इनमें से 2.52 लाख से अधिक योजनाएँ वित्तीय वर्ष 2025-26 की चल रही प्रक्रिया से संबंधित हैं।

अभियान की तैयारियाँ

मंत्रालय ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और हितधारकों के साथ वर्चुअल संवाद प्रारंभ किए हैं। 26 सितंबर 2025 को मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य संस्थानों (SIRD&PRs) के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और रणनीति साझा की।

अभिसरण और जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु मंत्रालय ने 20 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से अनुरोध किया है कि वे अपने राज्य/केंद्रशासित प्रदेश विभागों को विशेष ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए निर्देशित करें। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को निगरानी तंत्र सक्रिय करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने, सुगमकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, ग्राम सभा कार्यक्रम तय करने तथा सितंबर अंत तक सार्वजनिक सूचना बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। 2 अक्टूबर 2025 को आयोजित विशेष ग्राम सभाएँ इस अभियान की औपचारिक शुरुआत होंगी।

उद्देश्य और विशेष पहल

जन योजना अभियान 2025-26 का उद्देश्य भागीदारीपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह स्थानीय शासन को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत –

  • ग्राम सभाएँ पूर्ववर्ती GPDPs की डिजिटल प्लेटफॉर्म (ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत ऐप, पंचायत निर्णय) के माध्यम से समीक्षा करेंगी।

  • प्रगति का आकलन, लंबित कार्यों की पहचान तथा अप्रयुक्त केंद्रीय वित्त आयोग अनुदानों का उपयोग प्राथमिकता से किया जाएगा।

  • पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) के आधार पर योजना बनाई जाएगी।

  • सभा सार के प्रभावी उपयोग, स्वयं की आय (OSR) बढ़ाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाएगा।

  • आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदिवासी सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस अभियान से ग्राम सभाएँ समावेशी विकास की निर्णायक इकाई बनेंगी। पंचायत प्रतिनिधियों, विभागों, समुदाय एवं अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से योजना प्रक्रिया में पारदर्शिता, अभिसरण और जवाबदेही और सुदृढ़ होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवाओं की आपूर्ति और विकासात्मक परिणाम सुनिश्चित होंगे।


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