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वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य

समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह

नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर

रायपुर- वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर में 70 लाख रुपये की चोरी का खुलासा, 12 दिन पहले रखे गए कुक ने दिया वारदात को अंजाम

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रायपुर- राजधानी रायपुर में एक कारोबारी के घर हुई करीब 70 लाख रुपये की नकदी और जेवरात चोरी के मामले का पुलिस ने महज छह घंटे में खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि सिर्फ 12 दिन पहले काम पर रखा गया कुक निकला।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घर की गतिविधियों और कीमती सामान की पूरी जानकारी जुटाने के बाद मौके का फायदा उठाकर लाखों रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पीछा किया। लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महज छह घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने नौकरी के दौरान घर की सुरक्षा व्यवस्था और दिनचर्या को अच्छी तरह समझ लिया था, जिसके बाद उसने वारदात की योजना बनाई।

पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की वारदात में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है।

कोरिया जिले के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला रेत खनन को लेकर चली आ रही आपसी प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है।

सीबीआई अब पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेकर हत्या के कारणों, साजिश, आरोपियों की भूमिका तथा रेत खनन से जुड़े संभावित पहलुओं की विस्तृत पड़ताल करेगी। मामले में स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए साक्ष्य और दस्तावेज भी केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराए जाएंगे।

राज्य सरकार ने कहा है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


रेत खनन की रंजिश ने ली तीन जानें, भाजपा नेता को जिंदा जलाने का आरोप

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कोरिया- छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध रेत खनन को लेकर चल रही पुरानी दुश्मनी ने मंगलवार रात खूनी रूप ले लिया। कथित तौर पर सुनियोजित हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक स्थानीय भाजपा नेता भी शामिल हैं, जिन्हें हमलावरों द्वारा उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी समेत जिंदा जलाए जाने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना दो प्रभावशाली परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे रेत खनन विवाद से जुड़ी हो सकती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ितों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसके बाद मारपीट और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है तथा आरोपियों की तलाश में विशेष टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

इस सनसनीखेज हत्याकांड ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन इस तरह की हिंसक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। 

मुख्य बिंदु:

  • कोरिया जिले में रेत खनन विवाद ने लिया हिंसक रूप।

  • तीन लोगों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

  • भाजपा नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाने का आरोप।

  • पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला माना।

  • पुरानी रंजिश और खनन विवाद की जांच जारी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के अनुपालन में अवैध खनन एवं परिवहन पर लगातार कार्यवाही

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अवैध खनन पर शासन-प्रशासन सख्त : केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई में 4 हाईवा जब्त

राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध खनन और परिवहन पर हो रही कड़ी निगरानी

गहन समीक्षा, प्रशासनिक चौकसी और खनिज विभाग की सक्रियता से अवैध गतिविधियों पर लग रहा अंकुश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।



खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया।

निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का किया शुभारंभ

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी सशक्त

‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित सेवा से पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी, सड़क दुर्घटना और आपदा जैसी हर स्थिति में मिलेगी त्वरित सहायता

रायपुर- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं  की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल

राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है। 

आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

खारंग नदी क्षेत्र में हादसे पर प्रशासन सख्त, अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई

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ट्रैक्टर पलटने की घटना की जांच पूरी, अवैध रेत उत्खनन पर कड़ी निगरानी

रायपुर- बिलासपुर जिले के खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की जांच के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन पर सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं छत्तीसगढ राज्य में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

बिलासपुर जिले के खनिज अमले द्वारा खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम गढ़वट में सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि 8-9 अप्रैल की मध्य रात्रि में दो युवक नदी क्षेत्र में गए थे, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना हुई। इस घटना में एक युवक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा घायल हुआ। मौके पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिले, बल्कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की पुष्टि हुई।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्राम गढ़वट निवासी तोषण कुमार कश्यप के नाम से जुड़ी है। इस आधार पर पुलिस थाना रतनपुर में वाहन मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105 एवं 238(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों युवक नदी क्षेत्र में रेत उत्खनन के उद्देश्य से गए थे। हालांकि घटना स्थल पर अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन क्षेत्र में बनाए गए कच्चे मार्ग और ट्रैक्टर के आवागमन के संकेत पाए गए।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2024-25 में  गढ़वट और आसपास के इलाके में कुल 47 प्रकरण दर्ज कर लगभग 6.95 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 22 प्रकरण दर्ज कर 3.19 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की जा चुकी है। पूर्व में भी गढ़वट क्षेत्र में अवैध परिवहन के मामलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर प्रकरण दर्ज किए गए थे। विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर भी अवैध उत्खनन रोकने के लिए समय-समय पर निर्णय और जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 5 करोड़ रुपये का गांजा किया गया स्वाहा, शासन की गाइडलाइन के तहत हुआ नष्टीकरण

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महासमुंद- नशीले पदार्थों के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत महासमुंद पुलिस ने शनिवार को अवैध मादक पदार्थ गांजा के नष्टीकरण की बड़ी कार्यवाही की है। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की मौजूदगी में लगभग 05 करोड़ 02 लाख 50 हजार रुपये कीमत का गांजा जलाकर नष्ट किया गया।

​शासन की गाइडलाइन का पालन 

​यह पूरी कार्यवाही शासन द्वारा निर्धारित कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुई। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी के अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक महासमुंद, सदस्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी की उपस्थिति में पहले मादक पदार्थ का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसके बाद उसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

​ 10 क्विंटल के करीब था गांजा 

​पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कोमाखान थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के तीन अलग-अलग बड़े मामलों में यह गांजा जप्त किया गया था। नष्ट किए गए गांजे का कुल वजन 09 क्विंटल 96 किलो 660 ग्राम है।

​ नष्टीकरण की मुख्य बातें: 

 ​स्थान: बालाजी प्लांट, बेलसोंडा (महासमुंद)।

 ​कुल वजन: 996.660 किलोग्राम।

​ बाजार मूल्य: ₹5,02,50,000 (लगभग 5 करोड़ 2 लाख रुपये)।

​ शामिल मामले: कोमाखान थाने के वर्ष 2025 का एक और वर्ष 2026 के दो बड़े प्रकरण।

​ अपराधियों में खौफ, पुलिस की मुस्तैदी 

​महासमुंद जिला ओडिशा सीमा से लगा होने के कारण तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। पुलिस द्वारा जप्त किए गए इस भारी मात्रा में गांजे को सार्वजनिक रूप से नष्ट करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अवैध नशे के कारोबार की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

महासमुंद: खट्टी जंगल 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा; पुरानी रंजिश में हुई थी प्रकाश की हत्या, 3 आरोपी गिरफ्तार

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महासमुंद- जिला पुलिस ने खट्टी जंगल में मिली युवक की लाश की गुत्थी सुलझाते हुए एक सनसनीखेज अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उड़ियापारा रावणभांठा निवासी तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश और गाली-गलौज को बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

​बीती 6 अप्रैल 2026 को ग्राम खट्टी के जंगल में एक अज्ञात युवक का शव संदेहास्पद स्थिति में मिला था। मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (23 वर्ष), निवासी खैराभांठा के रूप में हुई। प्रकाश के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और गले में गमछा लिपटा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

शराब पार्टी के दौरान गाली-गलौज बनी मौत का कारण 

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जब मृतक के दोस्तों से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि मृतक प्रकाश और आरोपी (जलांधर, काजू और गोपाल) आपस में दोस्त थे।

​पिछले महीने शराब पीने के दौरान प्रकाश ने नशे की हालत में आरोपियों को मां-बहन की गालियां दी थीं। इसी अपमान का बदला लेने के लिए तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

 ​फिल्मी अंदाज में दिया वारदात को अंजाम 

अपहरण और हमला: 5 अप्रैल की रात आरोपियों को सूचना मिली कि प्रकाश गायत्री मंदिर के पास है। आरोपी काजू और गोपाल वहां पहुंचे, प्रकाश के साथ मारपीट की और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर खट्टी जंगल ले गए।

जघन्य हत्या: जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने कांच की बोतल और पत्थर से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

फरारी की साजिश: हत्या के बाद आरोपियों ने अपने साथी जलांधर सोनवानी को इसकी जानकारी दी। जलांधर ने उन्हें पैसे और अपनी स्प्लेंडर बाइक (CG 04 QQ 6845) देकर गरियाबंद भागने और 'अंडरग्राउंड' होने की सलाह दी।

​पुलिस की मुस्तैदी से दबोचे गए हत्यारे 

​महासमुंद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से घेराबंदी की। लगातार दबिश देकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 

​चंद्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​गोपाल प्रधान (20 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​जालंधर सोनवानी (21 वर्ष) - निवासी वार्ड नं. 30, नया रावणभांठा।

​पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

जेलों में बढ़ती मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में जेलों के भीतर हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक वर्ष के भीतर राज्य की विभिन्न जेलों में 33 कैदियों की मौत होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने चिंता जताई है।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई मामलों में अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है या लंबित पड़ी है, जिससे मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने जेल विभाग के महानिदेशक (DG) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और प्रत्येक मौत की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों और रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

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तमनार के बाद लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में अफीम खेती का भंडाफोड़, आरोपी हिरासत में

जिला प्रशासन की कार्रवाई से संलिप्त लोगों में हड़कंप 

ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्रवाई जारी

कलेक्टर-एसएसपी ने ली प्रेस वार्ता, गैर कानूनी अफीम की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही कार्रवाई की दी जानकारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 

कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। 

इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई। लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने से धर्मांतरण पर लगेगी रोक,अवैध धर्मांतरण के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

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धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का पारित होना प्रदेशवासियों के लिए साबित होगा वरदान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 

विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधायक पुरंदर मिश्र के नेतृत्व में विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की और बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के पारित होने पर उनका सम्मान कर आभार जताया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026,छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल  विधेयक 2026 एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का विधानसभा में पारित होना पूरे प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा। इनमें धर्म स्वातंत्र्य विधेयक हमारी महान परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट संकल्प है। इसी तरह अन्य दो विधेयक भी पारदर्शिता के साथ भर्ती के लिए अहम साबित होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ  सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के अनुरूप हमने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था पर यह कानून उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे। प्रदेश में धर्मांतरण के कारण कुछ क्षेत्रों में सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ रहा था, जिससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही थी। इस बिल के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को पारित कर पूर्व राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जूदेव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ प्रखर मुहिम छेड़ कर "घर वापसी" अभियान चलाया था।

इसी तरह हमारी सरकार की पहल पर  प्रदेश के लाखों युवाओं की आवाज को सुनते हुए सरल एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया हेतु छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित किया गया है। इसी तरह परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने एवं नकल जैसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने  छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित किया गया है। यह दोनों  सर्वसम्मति से पारित किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्र ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई- ग्राम समोदा में हटाई गई अवैध कब्जा

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दुर्ग- जिले के जनपद पंचायत दुर्ग के अतंर्गत ग्राम समोदा में जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई, अवैध कब्जों पर जेसीबी के माध्यम से शासकीय भूमि रिक्त कराई गई। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु द्वारा राजस्व अमले और पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम समोदा राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा तहसील व जिला दुर्ग के अतंर्गत शासकीय घास भूमि खसरा नम्बर 778 रकबा 0.13 हेक्टेयर भूमि पर किये गये अवैध पक्का दुकान निर्माण, टीन सेड लगाकर दुकान निर्माण तथा सीमेंट पोल लगाकर किया गया तार घेरा को हटाने की कार्रवाई की गई। 

ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा उक्त शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया गया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला, पटवारी चन्द्रिका प्रसाद खरें, शत्रुहन मिश्रा, अनिता साहू, संदीप देशमुख और पुलिस विभाग के अधिकारी तथा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीणजन मौजूद थे। 




नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में एक और निर्णायक कदम : चार इनामी माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयास, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार रहा है सिमट - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- किस्टाराम क्षेत्र में 8 लाख रुपये के इनामी चार सक्रिय माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय बस्तर में बढ़ते विश्वास, सुरक्षा और विकास के वातावरण का स्पष्ट प्रमाण है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि “नक्सल मुक्त बस्तर – सुरक्षित छत्तीसगढ़” का संकल्प अब जमीनी स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था, प्रभावी क्षेत्रीय उपस्थिति तथा बेहतर सड़क और संचार कनेक्टिविटी का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन प्रयासों से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है और उनका सामाजिक आधार कमजोर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो लोग हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की यह यात्रा आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगी।

जयपुर में राजस्थान पुलिस के 8 हजार से अधिक नव-नियुक्त कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र, गृह मंत्री अमित शाह ने किया संबोधन

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज जयपुर में राजस्थान पुलिस के नव-नियुक्त कांस्टेबलों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन राजस्थान पुलिस और राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज 8 हजार से अधिक युवा राजस्थान पुलिस में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये युवा पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुरक्षित राजस्थान के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि एक ओर हजारों जवानों को वर्दी मिली है, वहीं दूसरी ओर उनके परिवारों और परिजनों के मन में एक नई आशा का संचार हुआ है।

अमित शाह ने कहा कि आज मल्टीपर्पज़ इंडोर हॉल का वर्चुअल उद्घाटन किया गया तथा चूरू जिले के रतननगर पुलिस थाने को राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाना सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि आज नियुक्ति पत्र पाने वाले 8 हजार से अधिक कांस्टेबलों में 2500 से अधिक महिला कांस्टेबल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने इन युवाओं को बिना किसी रिश्वत और सिफारिश के, केवल उनकी योग्यता, क्षमता और मेरिट के आधार पर नौकरी दी है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के अंत और मेरिट के सम्मान को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य तभी आगे बढ़ सकता है, जब वहां प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर मिले और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल जी ने पिछली सरकार के दौरान हो रहे पेपर लीक की श्रृंखला को समाप्त कर राजस्थान को इस अभिशाप से मुक्त किया है। उन्होंने कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया तकनीक आधारित, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत आज नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये सभी युवा मार्च 1949 में स्थापित राजस्थान पुलिस का हिस्सा बनेंगे, जिस पर उन्हें गर्व होना चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि राजस्थान पुलिस देश की सबसे सक्षम और उन्नत पुलिस बलों में से एक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं—एक ओर पाकिस्तान के साथ 1070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा, चंबल के बीहड़ और विशाल थार मरुस्थल हैं, वहीं दूसरी ओर विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक किले और महल तथा रणथंभौर, सरिस्का और केवलादेव जैसे अभयारण्य हैं। इन परिस्थितियों में पुलिस की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। उन्होंने नव-नियुक्त जवानों से प्रशिक्षण के दौरान पूरी एकाग्रता और सतर्कता बनाए रखने का आग्रह किया, ताकि वे सुरक्षित राजस्थान के सपने को साकार कर सकें।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भजन लाल सरकार के गठन के बाद राजस्थान में कुल अपराधों में लगभग 14 प्रतिशत और गंभीर अपराधों में 19 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया कि राज्य में हत्या में 25 प्रतिशत, हत्या के प्रयास में 19 प्रतिशत, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 10 प्रतिशत, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 28 प्रतिशत, डकैती में 47 प्रतिशत और लूट में 51 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जब मजबूत इच्छाशक्ति वाली सरकार सत्ता में आती है, तो ऐसा सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल के नेतृत्व में राजस्थान पुलिस ने कई नई पहलें की हैं। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, पुलिस आधुनिकीकरण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। अभय कमांड सेंटर को CCTNS, 112 और ICJS से जोड़ा गया है। कालिका पेट्रोलिंग यूनिट शुरू की गई है और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए आज राजस्थान में I4C की तर्ज पर साइबर हेल्पलाइन शुरू की गई है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नव-नियुक्त जवान ऐसे समय में अपने सेवाकाल की शुरुआत कर रहे हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में 150 साल पुराने ब्रिटिश कानूनों को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता लागू की गई है। यह राजस्थान पुलिस का पहला बैच होगा, जो नए आपराधिक कानूनों के तहत सेवा में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि नए कानून नागरिकों के तन, मन, धन और सम्मान की सुरक्षा की संवैधानिक गारंटी को सशक्त बनाते हैं। नए कानूनों में तकनीक को विशेष महत्व दिया गया है और आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी पांच स्तंभ—पुलिस, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक साइंस लैब और न्यायालय—को ऑनलाइन जोड़ा गया है।

अमित शाह ने कहा कि किसी भी राज्य का विकास तभी संभव है, जब वहां कानून-व्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान में अपराधों में कमी और सजा दर में वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि जब सुशासन वाली सरकार आती है तो सकारात्मक परिणाम निश्चित होते हैं। उन्होंने कहा कि भजन लाल सरकार ने पेपर लीक समाप्त किए, कानून-व्यवस्था मजबूत की और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राजस्थान को देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बना दिया है। आज देशभर के निवेशक राजस्थान आने की होड़ में हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है।

नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प तेजी से हो रहा साकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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सुकमा में 10 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास से पुनर्जीवन की नई शुरुआत

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सुकमा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत दरभा डिवीजन कमेटी सहित विभिन्न नक्सली संगठनों से जुड़े 10 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को ऐतिहासिक और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया। इनमें 6 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती वास्तविकता बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में अब हिंसा, भय और भटकाव की विचारधारा कमजोर पड़ रही है, जबकि विकास, विश्वास और संवाद की राह मजबूत हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हिंसा के रास्ते पर न वर्तमान सुरक्षित होता है और न ही भविष्य। छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पुनर्वास नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की ठोस गारंटी देती है। मुख्यधारा में लौटकर ये लोग अपने परिवारों के साथ एक स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है— छत्तीसगढ़ को पूर्णतः नक्सलवाद मुक्त बनाना और बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देना।

मुख्यमंत्री साय ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के निर्णय का स्वागत करते हुए अन्य भटके युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के समन्वित प्रयासों से सुरक्षा बलों की सशक्त कार्रवाई, विकास योजनाओं का विस्तार और पुनर्वास आधारित मानवीय दृष्टिकोण—तीनों मिलकर बस्तर में परिवर्तन की नई कहानी लिख रहे हैं।

https://x.com/i/status/1999458357623787920

प्रधानमंत्री 29-30 नवंबर को रायपुर में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेंगे

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सम्मेलन का विषय: 'विकसित भारत: सुरक्षा आयाम'

  1. सम्मेलन में अब तक की प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और 'सुरक्षित भारत' के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार की जाएगी
  2. वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद का मुकाबला, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिसिंग में फोरेंसिक विज्ञान तथा एआई के उपयोग जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी
  3. प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे

रायपुर- प्रधानमंत्री 29-30 नवंबर, 2025 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन के 60वें संस्करण में भाग लेंगे।

यह सम्मेलन 28 से 30 नवंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य अब तक प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा करना और 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप 'सुरक्षित भारत' के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा तैयार करना है।

'विकसित भारत: सुरक्षा आयाम' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद निरोध, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान एवं एआई के उपयोग जैसे प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे।

यह सम्मेलन देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर खुले और सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण संवादात्मक मंच प्रदान करता है। यह पुलिस बलों के सामने आने वाली परिचालन, अवसंरचनात्मक और कल्याण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के साथ-साथ अपराध से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पेशेवर प्रथाओं के निर्माण और साझाकरण को भी सुगम बनाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस वार्षिक सम्मेलन में निरंतर गहरी रुचि दिखाई है, और स्पष्ट चर्चाओं को प्रोत्साहित किया है। उन्‍होंने एक ऐसा माहौल तैयार किया है जहां पुलिस व्यवस्था पर नए विचार उभर सकें। व्यावसायिक सत्र, विस्तृत बातचीत और विषयगत चर्चाएं प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा और नीतिगत मामलों पर सीधे प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस सम्मेलन के स्वरूप में निरंतर सुधार हुआ है, जिसमें देश भर के विभिन्न स्थानों पर इसका आयोजन भी शामिल है। यह सम्मेलन गुवाहाटी (असम), कच्छ के रण (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), टेकनपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, गुजरात), पुणे (महाराष्ट्र), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), नई दिल्ली, जयपुर (राजस्थान) और भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित किया जा चुका है। इसी परंपरा को जारी रखते हुए, इस वर्ष 60वां पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक सम्मेलन रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। नए और अभिनव विचारों को सामने लाने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग के प्रमुख और डीआईजी तथा एसपी स्तर के कुछ चुनिंदा पुलिस अधिकारी भी इस वर्ष सम्मेलन में भाग लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी 60वें DGs/IGs सम्मेलन में रायपुर, छत्तीसगढ़ में भाग लेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29-30 नवंबर, 2025 को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में भारत के पुलिस महानिदेशकों/अधीक्षक जनरल (DGs/IGs) की 60वीं अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेंगे।

तीन दिवसीय सम्मेलन, जो 28 से 30 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है, का उद्देश्य अब तक पुलिसिंग में हासिल की गई प्रगति की समीक्षा करना और ‘सुरक्षित भारत’ के निर्माण के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करना है, जो राष्ट्रीय दृष्टि ‘विकसित भारत’ के अनुरूप है।

‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’ के मुख्य विषय के तहत सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद विरोधी उपाय, आपदा प्रबंधन, महिलाओं की सुरक्षा, और पुलिसिंग में फोरेंसिक विज्ञान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Police Medals) सेवा के लिए भी प्रदान करेंगे।

यह सम्मेलन देशभर के वरिष्ठ पुलिस नेताओं और सुरक्षा प्रशासकों के लिए एक महत्वपूर्ण इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म प्रदान करता है, जहाँ वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विविध मुद्दों पर खुलकर और सार्थक आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, यह सम्मेलन पुलिस बलों द्वारा सामना किए जा रहे संचालन, अवसंरचना और कल्याण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करने, अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पेशेवर अनुभव साझा करने का अवसर भी देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वार्षिक सम्मेलन में लगातार गहरी रुचि दिखाई है, खुली चर्चाओं को प्रोत्साहित किया है और ऐसा वातावरण बनाया है जहाँ पुलिसिंग पर नए विचार और नवाचार उभर सकें। व्यावसायिक सत्र, ब्रेक-आउट इंटरेक्शन और थीम आधारित डाइनिंग टेबल चर्चाएँ प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री के साथ सीधे संवाद करने और आंतरिक सुरक्षा तथा नीति मामलों पर अपने विचार साझा करने का अवसर देती हैं।

2014 के बाद से, प्रधानमंत्री की मार्गदर्शन में इस सम्मेलन का प्रारूप लगातार उन्नत किया गया है और इसे देश के विविध स्थानों पर आयोजित किया गया है। इससे पहले सम्मेलन गुवाहाटी (असम), रण ऑफ कच्छ (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), टेकनपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, गुजरात), पुणे (महाराष्ट्र), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), नई दिल्ली और जयपुर (राजस्थान), और भुवनेश्वर (ओड़िशा) में आयोजित हो चुका है। इसी परंपरा को जारी रखते हुए, इस वर्ष 60वां DGsP/IGsP सम्मेलन रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, राज्य/संघ शासित प्रदेशों के गृह राज्य मंत्री, राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के DGPs और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख उपस्थित होंगे। नवोन्मेषी और ताज़ा विचार लाने के लिए इस वर्ष कुछ DIG और SP रैंक के उत्कृष्ट पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के गृह विभाग के प्रमुख भी शारीरिक रूप से भाग लेंगे।

निर्वाचन आयोग ने बिहार में अंतर्राज्यीय सीमा से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बैठक आयोजित की

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज बिहार में अंतर्राज्यीय सीमा से जुड़े मुद्दों पर एक समन्वय बैठक आयोजित की। इस बैठक में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGPs) और गृह विभाग के प्रमुख सचिवों के साथ-साथ गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर, बिहार और इसके पड़ोसी राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में पुरुषों, सामग्री और धन के साथ-साथ हथियार, असामाजिक तत्व, शराब, नशीले पदार्थ और उपहारों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखने और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा सहित अंतर्राज्यीय सीमाओं की प्रभावी सीलिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और प्रलोभन-मुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए पूर्ण समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करें।

आयोग ने मतदाताओं को सुगम और सुविधाजनक मतदान अनुभव प्रदान करने के लिए जारी निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की। बिहार विधानसभा के आम चुनाव 2025 को शांतिपूर्ण और प्रलोभन-मुक्त बनाने के लिए मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए गए।

झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों, साथ ही सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक को निर्देश दिया गया कि वे बिहार की सीमाओं से सटे इलाकों में सतर्कता बढ़ाएं और अंतर्राज्यीय चौकियों पर सघन जांच सुनिश्चित करें।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), आयकर विभाग, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को चुनाव से पहले अपनी कार्रवाई तेज करने और ठोस खुफिया जानकारी के आधार पर अधिकतम जब्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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