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जमुई की घटना: सिर्फ एक अपराध नहीं, समाज और सिस्टम के लिए बड़ा सबक

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जमुई, बिहार: बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित बदसलूकी, मारपीट और लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, कई आरोपियों की पहचान की और गिरफ्तारियां की गईं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के DGP से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

लेकिन यह मामला केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इसने महिला और बाल सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही, सोशल मीडिया की भूमिका, भीड़ की मानसिकता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

घटना में क्या हुआ?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर की शाम जमुई क्षेत्र में दसवीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में कुछ युवकों ने रोक लिया। दोनों को कथित तौर पर घेरा गया, छात्र के साथ मारपीट की गई और छात्रा के साथ बदसलूकी की गई।

घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में कई लोग मौके पर दिखाई दे रहे हैं और छात्रा लोगों से उसे जाने देने की अपील करती नजर आती है। पुलिस ने वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

पुलिस के अनुसार मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच के लिए SIT गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलिस कार्रवाई और मुख्य आरोपी पर कार्रवाई

घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज की। शुरुआती रिपोर्टों में तीन गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई, जबकि बाद की रिपोर्ट में मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ की भी रिपोर्ट सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया और पुलिस पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र कानूनी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

घटना के बाद सोशल मीडिया बना दूसरा मुद्दा

इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि नाबालिग पीड़िता से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।

पुलिस ने कथित तौर पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले लगभग 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यहां समाज के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है:

किसी अपराध का वीडियो शेयर करना न्याय दिलाने का तरीका नहीं है।

वीडियो शेयर करने से पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है, मानसिक आघात बढ़ सकता है और उसके परिवार को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

POCSO Act की धारा 23 बच्चे की पहचान—नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल या ऐसी किसी जानकारी के प्रकाशन पर रोक लगाती है जिससे बच्चे की पहचान उजागर हो सकती है।

इसलिए ऐसे मामलों में वीडियो को डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट करना, WhatsApp ग्रुप में भेजना या सोशल मीडिया पर वायरल करना मदद नहीं, बल्कि पीड़ित की निजता के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल: अगर वीडियो वायरल नहीं होता तो?

इस घटना से पुलिस की preventive policing और स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार घटना के समय पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी नहीं मिली और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़ितों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र में पेट्रोलिंग व्यवस्था की समीक्षा की बात भी कही है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—पीड़ित या परिवार की शिकायत न आना, पुलिस की जिम्मेदारी को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, खासकर जब मामला सार्वजनिक स्थान पर नाबालिगों के साथ कथित गंभीर अपराध से जुड़ा हो।

POCSO Act की धारा 19 के तहत किसी व्यक्ति को किसी POCSO अपराध की जानकारी होने या आशंका होने पर पुलिस/विशेष किशोर पुलिस इकाई को सूचना देना अनिवार्य है। कानून पुलिस को ऐसी सूचना पर बिना अनावश्यक देरी कार्रवाई करने का दायित्व भी देता है।

समाज को इस घटना से क्या सीखना चाहिए?

1. अपराध देखकर चुप रहना समाधान नहीं

अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की या बच्चे के साथ सार्वजनिक स्थान पर हिंसा या यौन दुर्व्यवहार होते देखता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचना देनी चाहिए।

भीड़ बनाकर तमाशा देखना या वीडियो बनाना समस्या को और गंभीर कर सकता है।

2. पीड़ित को दोष देना बंद करना होगा

किसी लड़की का किसी लड़के के साथ होना, किसी स्थान पर जाना या देर से घर लौटना किसी भी व्यक्ति को उसके साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं देता।

अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले व्यक्ति की होती है।

3. सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता जरूरी है

आज मोबाइल कैमरा अपराध का सबूत जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन वही कैमरा पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करके उसकी जिंदगी और मुश्किल बना सकता है।

वीडियो पुलिस को दें, सोशल मीडिया को नहीं।

4. युवाओं में कानून और सहमति की समझ जरूरी

स्कूल और कॉलेज स्तर पर बच्चों को केवल परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि सहमति, व्यक्तिगत सीमाएं, साइबर सुरक्षा, लैंगिक सम्मान और कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए।

क्या कानून में बदलाव की जरूरत है?

जमुई की घटना के आधार पर केवल “सजा और कठोर कर दी जाए” कहना पर्याप्त समाधान नहीं है। भारत में पहले से ही POCSO Act बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए व्यापक कानूनी ढांचा देता है और इसमें अनिवार्य रिपोर्टिंग, विशेष अदालत, बच्चे के अनुकूल प्रक्रिया तथा बंद कमरे में सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं हैं।

इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है कि मौजूदा कानून जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू हो रहा है।

फिर भी कुछ क्षेत्रों में सुधार पर विचार किया जा सकता है:

 1. Sensitive areas में mandatory safety audit

स्कूल, कोचिंग सेंटर और छात्र-छात्राओं के नियमित आवागमन वाले सुनसान रास्तों की पुलिस द्वारा नियमित सुरक्षा समीक्षा हो।

 2. POCSO मामलों के लिए तेज response system

नाबालिग से जुड़े गंभीर मामलों में सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, महिला हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाई और मेडिकल सहायता के बीच एकीकृत response mechanism मजबूत किया जाए।

3. सोशल मीडिया पर victim-identification रोकने की बेहतर व्यवस्था

प्लेटफॉर्म और पुलिस के बीच ऐसा त्वरित तंत्र होना चाहिए जिससे नाबालिग पीड़ित की पहचान वाले वीडियो को तेजी से हटाया जा सके और मूल uploader/resharer की पहचान की जा सके।

 4. Police accountability को measurable बनाया जाए

सिर्फ घटना के बाद गिरफ्तारी ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए। यह भी देखा जाए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कितने समय में response दिया, FIR कब दर्ज हुई, पीड़ित को सुरक्षा कब मिली और जांच कितनी जल्दी आगे बढ़ी।

5. Victim support को कानून का केंद्र बनाया जाए

कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित बच्चे और परिवार को counselling, legal aid, privacy protection और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में पीड़ितों की सुरक्षा, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श की जरूरत पर जोर दिया है।

राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत

ऐसी घटनाओं के बाद मामला अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाता है। अलग-अलग नेताओं ने घटना पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दी हैं। लेकिन किसी भी पक्ष के राजनीतिक बयान को घटना की जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मुख्य सवाल बहुत सीधा है:

क्या पीड़ित को न्याय मिला? क्या आरोपी कानून के अनुसार दंडित होंगे? और क्या ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था में ठोस सुधार होगा?

इन सवालों का जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से आना चाहिए।

निष्कर्ष: जमुई सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है

जमुई की घटना समाज के सामने कई स्तरों पर एक गंभीर चुनौती रखती है।

एक तरफ अपराध करने वालों की जवाबदेही जरूरी है, दूसरी तरफ पुलिस की preventive व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ समाज को यह समझना होगा कि किसी लड़की या बच्चे की गरिमा मनोरंजन, भीड़ के तमाशे या सोशल मीडिया कंटेंट का विषय नहीं है।

कानून मौजूद हैं। POCSO बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान देता है और BNS में भी महिलाओं तथा यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

अब असली चुनौती है—इन कानूनों का समय पर, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से पालन।

किसी भी सभ्य समाज की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि अपराधी को कितनी सजा मिली; बल्कि इससे भी होती है कि अपराध होने से पहले व्यवस्था ने कितनी सुरक्षा दी, अपराध के बाद पीड़ित को कितना सहारा मिला और समाज ने पीड़ित के साथ कैसा व्यवहार किया।

जमुई की घटना से सबसे बड़ा सबक यही है—अपराध को रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, लेकिन अपराध होने पर कानून लागू करना निश्चित रूप से राज्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है। समाज की जिम्मेदारी है कि वह तमाशबीन नहीं, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने।

रायपुर में 8 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म मामले में 30 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

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संतोषी नगर क्षेत्र की घटना, टिकरापारा पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत की कार्रवाई

रायपुर- राजधानी के संतोषी नगर इलाके में 8 वर्षीय बच्ची से कथित यौन अपराध का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में 30 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी बच्ची के परिवार का परिचित और उसके पिता का दोस्त बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर टिकरापारा पुलिस ने कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार घटना मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे की बताई गई है। शिकायत के मुताबिक आरोपी बच्ची के घर पहुंचा और उसे चिप्स देने के बहाने अपने पास बुलाया। आरोप है कि इसके बाद उसने बच्ची के साथ यौन अपराध किया। बच्ची किसी तरह वहां से निकलकर परिजनों तक पहुंची, जिसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया है और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

बच्ची की पहचान गोपनीय

पुलिस बच्ची का बयान दर्ज करने के साथ घटना से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। कानून के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। मामले में पुलिस की जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की सुगबुगाहट तेज़: दुर्ग संभाग से शुरू होगा जन-संवाद

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8 और 9 सितंबर को बैठकों का दौर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी गई है। प्रदेश में UCC का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति अब सीधे ज़मीन पर उतरकर सामाजिक और प्रशासनिक समन्वय साधने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत दुर्ग संभाग के सभी जिलों के प्रमुखों, प्रबुद्ध जनों और जनप्रतिनिधियों के साथ आगामी 8 और 9 सितंबर को एक वृहद समूह चर्चा और परिचयात्मक बैठक आयोजित करने जा रही है।

ज्ञात हो कि समान नागरिक संहिता  के दूरगामी प्रभावों और प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह संवाद प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन में दुर्ग संभाग के अलग-अलग जिलों को केंद्रित करते हुए बैठकें होंगी। आगामी ​8 सितंबर को दुर्ग में दोपहर 12 बजे से आयोजित इस बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी तरह ​9 सितंबर को राजनांदगांव में दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का प्रतिनिधित्व रहेगा।

हर वर्ग की आवाज़ को ड्राफ्ट में मिलेगी जगह

कानून का खाका तैयार करने में समाज के हर तबके की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समिति ने एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इन बैठकों में राजनीतिक दलों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों, शिक्षाविदों, पद्म श्री सम्मान से अलंकृत हस्तियों, निगम-मंडल व आयोगों के प्रतिनिधियों तथा प्रतिष्ठित व विशिष्ट नागरिकों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समावेशी ड्राफ्ट तैयार करना है, जो विधिक और सामाजिक दोनों पैमानों पर राज्य के हर नागरिक के हितों का संरक्षण कर सके।

देशभर में 8 नए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में 8 नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति को लेकर 5 सितंबर को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इन नियुक्तियों के साथ देश की न्यायपालिका के कई प्रमुख हाईकोर्ट में नेतृत्व स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद संबंधित हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन नियुक्तियों को न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ संबंधित हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यों के संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

अंबेडकर प्रतिमा लगाने को लेकर यूपी में बवाल, पथराव में 7 पुलिसकर्मी और एक नागरिक घायल

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उत्तर प्रदेश- उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद ने बुधवार को तनावपूर्ण रूप ले लिया। सिकरी गांव में प्रतिमा को लेकर विवाद के बाद शाम होते-होते पथराव शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद सामने आया। विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया और स्थिति पर नजर रखी।

मामला बढ़ने के बाद मौके पर डीएम और एसएसपी ने खुद मोर्चा संभाला। पुलिस ने क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

पथराव में पुलिसकर्मी घायल

विवाद के दौरान स्थिति बिगड़ने पर पथराव की घटना सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा में 7 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक के घायल होने की जानकारी है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजे जाने की बात सामने आई है।

घटना के बाद पुलिस ने संवेदनशील इलाके में गश्त बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

हालात बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल लगाया और पूरे क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की दोबारा हिंसा को रोकना है। अधिकारियों की ओर से स्थानीय लोगों से सहयोग करने की अपील की गई है।

प्रतिमा से जुड़े विवाद पहले भी सामने आए

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय में आंबेडकर प्रतिमाओं को लेकर विवाद की कई घटनाएं सामने आई हैं। जुलाई 2026 में देवरिया के पोखारभिंडा गांव में बिना प्रशासनिक अनुमति के खलिहान की जमीन पर आंबेडकर प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर विवाद हुआ था। उस मामले में पुलिस पर पथराव की घटना के बाद एक उपनिरीक्षक और दो आरक्षियों को निलंबित किया गया था।

बदायूं के ही फैजगंज बेहटा क्षेत्र में भी हाल में आंबेडकर की प्रतिमा गिराए जाने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था। पुलिस जब प्रतिमा को उठाने पहुंची तो उसका एक हाथ टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने हंगामा किया था।

पुलिस की अपील—अफवाहों से बचें

ताजा घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। संवेदनशील इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है और घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि पथराव की शुरुआत कैसे हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले में दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

फिलहाल इलाके में तनाव, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल है, हालांकि प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास कर रहा है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती और गश्त जारी है।

महत्वपूर्ण: घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर जांच जारी है। इसलिए किसी व्यक्ति या समूह को दोषी ठहराने से पहले पुलिस की आधिकारिक जांच और पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।

मणिपुर के सेनापति में फिर भड़की हिंसा: कई घरों में आगजनी, गोलीबारी में CRPF जवान घायल

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इंफाल- मणिपुर के सेनापति जिले में सोमवार को एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। ताफू और आसपास के इलाकों में आगजनी के बाद दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया। हिंसा के दौरान कई घरों को आग के हवाले किए जाने की भी सूचना है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) को भी बाधित किया। प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

तड़के शुरू हुई आगजनी

पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब 2:30 से 2:40 बजे कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव में एक मकान में आग लगा दी गई। आग की सूचना मिलने के बाद दमकलकर्मियों को बुलाया गया और इलाके में पुलिस की तैनाती की गई।

इसके बाद सुबह करीब 4 बजे सेनापति जिले के नागा ताफू इलाके में कई मकानों को कथित तौर पर जला दिया गया। उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ पूरी तरह जल गए। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

गोलीबारी में 54 वर्षीय CRPF जवान घायल

आगजनी के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सुबह करीब 9:20 बजे ताफू नागा इलाके में दो गुटों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इसी दौरान 36वीं बटालियन के 54 वर्षीय CRPF कांस्टेबल को गोली लगने की सूचना है।

घायल जवान को तत्काल सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक जवान की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

NH-2 पर प्रदर्शन, यातायात प्रभावित

आगजनी की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने सेनापति गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर लकड़ियां और टायर जलाकर सड़क को बाधित किया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

NH-2 मणिपुर को नागालैंड और आगे देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सड़क अवरोध के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होना क्षेत्र की सामान्य आवाजाही के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

ग्रामीण प्रशासन ने की घटना की निंदा

ताफू कुकी विलेज अथॉरिटी ने मकानों को जलाए जाने और संपत्ति के नुकसान की कड़ी निंदा की है। स्थानीय प्राधिकरण ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तथा प्रशासन से मामले की जांच करने की अपील की है।

प्राधिकरण ने हिंसा, आगजनी और संपत्ति के नुकसान से दूर रहने की अपील भी की है।

इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

घटना के बाद सेनापति और कांगपोकपी के प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि हिंसा को आगे फैलने से रोका जाए और इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल की जाए। गोलीबारी किस पक्ष की ओर से शुरू हुई और आगजनी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं, इसकी जांच की जा रही है।

प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, संपत्ति के नुकसान और घटनाओं की पूरी स्थिति का आकलन अभी किया जा रहा है।

2023 से जारी तनाव की पृष्ठभूमि

सेनापति और कांगपोकपी सहित मणिपुर के कई इलाकों में लंबे समय से जातीय और सामुदायिक तनाव बना हुआ है। मई 2023 में शुरू हुए व्यापक संघर्ष के बाद राज्य में 260 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की रिपोर्ट सामने आई है।

सोमवार की ताजा घटना ने एक बार फिर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करना, घायल CRPF जवान का उपचार सुनिश्चित करना, दोषियों की पहचान करना और किसी भी संभावित जवाबी हिंसा को रोकना है।

नोट: यह एक विकसित होती हुई खबर है। आगजनी में क्षतिग्रस्त या जले मकानों की अंतिम संख्या और घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

रायपुर में सीरियल रेप और हत्या का आरोपी गिरफ्तार: साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था, जांच में दो घटनाओं का कनेक्शन सामने आया

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रायपुर- राजधानी रायपुर में महिला से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच कर रही पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था और जुलाई तथा अगस्त में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में उसकी संलिप्तता सामने आई है।

21 जुलाई को महिला की हत्या का आरोप

पुलिस के मुताबिक, 21 जुलाई को 20 वर्ष की उम्र की एक महिला का आरोपी ने साइकिल से पीछा किया। आरोप है कि उसने न्यू स्वागतम विहार के पास पानी से भरे एक प्लॉट में महिला पर हमला किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में कई स्तरों पर सुराग जुटाए।

5 अगस्त की दूसरी घटना से जुड़ा कनेक्शन

जांच के दौरान पुलिस को 5 अगस्त को हुई एक अन्य घटना के बारे में जानकारी मिली। इस मामले में भी लगभग उसी उम्र की एक महिला का कथित रूप से साइकिल सवार व्यक्ति ने पीछा किया और उस पर हमला किया।

हालांकि, इस घटना में महिला ने शोर मचाकर मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस ने दोनों घटनाओं में समान पैटर्न को देखते हुए जांच आगे बढ़ाई। 

जांच में सामने आया समान पैटर्न

पुलिस जांच में दोनों मामलों के बीच समानताएँ सामने आने के बाद आरोपी तक पहुंचने की कोशिश तेज की गई। महिलाओं का पीछा करना और साइकिल का इस्तेमाल करना जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बना। इसी आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और अन्य तथ्यों की पुष्टि कानूनी जांच एवं आगे की विवेचना के माध्यम से की जाएगी। 

पुलिस जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों मामलों से जुड़े साक्ष्यों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की अन्य आपराधिक घटनाओं में कोई भूमिका रही है या नहीं।

इस घटना के बाद शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पुलिस का फोकस मामले की विस्तृत जांच करने, उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने और आरोपों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।

नोट: आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य

समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह

नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर

रायपुर- वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर में 70 लाख रुपये की चोरी का खुलासा, 12 दिन पहले रखे गए कुक ने दिया वारदात को अंजाम

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रायपुर- राजधानी रायपुर में एक कारोबारी के घर हुई करीब 70 लाख रुपये की नकदी और जेवरात चोरी के मामले का पुलिस ने महज छह घंटे में खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि सिर्फ 12 दिन पहले काम पर रखा गया कुक निकला।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घर की गतिविधियों और कीमती सामान की पूरी जानकारी जुटाने के बाद मौके का फायदा उठाकर लाखों रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पीछा किया। लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महज छह घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने नौकरी के दौरान घर की सुरक्षा व्यवस्था और दिनचर्या को अच्छी तरह समझ लिया था, जिसके बाद उसने वारदात की योजना बनाई।

पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की वारदात में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है।

कोरिया जिले के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला रेत खनन को लेकर चली आ रही आपसी प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है।

सीबीआई अब पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेकर हत्या के कारणों, साजिश, आरोपियों की भूमिका तथा रेत खनन से जुड़े संभावित पहलुओं की विस्तृत पड़ताल करेगी। मामले में स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए साक्ष्य और दस्तावेज भी केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराए जाएंगे।

राज्य सरकार ने कहा है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


रेत खनन की रंजिश ने ली तीन जानें, भाजपा नेता को जिंदा जलाने का आरोप

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कोरिया- छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध रेत खनन को लेकर चल रही पुरानी दुश्मनी ने मंगलवार रात खूनी रूप ले लिया। कथित तौर पर सुनियोजित हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक स्थानीय भाजपा नेता भी शामिल हैं, जिन्हें हमलावरों द्वारा उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी समेत जिंदा जलाए जाने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना दो प्रभावशाली परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे रेत खनन विवाद से जुड़ी हो सकती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ितों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसके बाद मारपीट और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है तथा आरोपियों की तलाश में विशेष टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

इस सनसनीखेज हत्याकांड ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन इस तरह की हिंसक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। 

मुख्य बिंदु:

  • कोरिया जिले में रेत खनन विवाद ने लिया हिंसक रूप।

  • तीन लोगों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

  • भाजपा नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाने का आरोप।

  • पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला माना।

  • पुरानी रंजिश और खनन विवाद की जांच जारी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के अनुपालन में अवैध खनन एवं परिवहन पर लगातार कार्यवाही

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अवैध खनन पर शासन-प्रशासन सख्त : केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई में 4 हाईवा जब्त

राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध खनन और परिवहन पर हो रही कड़ी निगरानी

गहन समीक्षा, प्रशासनिक चौकसी और खनिज विभाग की सक्रियता से अवैध गतिविधियों पर लग रहा अंकुश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।



खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया।

निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का किया शुभारंभ

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी सशक्त

‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित सेवा से पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी, सड़क दुर्घटना और आपदा जैसी हर स्थिति में मिलेगी त्वरित सहायता

रायपुर- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं  की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल

राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है। 

आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

खारंग नदी क्षेत्र में हादसे पर प्रशासन सख्त, अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई

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ट्रैक्टर पलटने की घटना की जांच पूरी, अवैध रेत उत्खनन पर कड़ी निगरानी

रायपुर- बिलासपुर जिले के खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की जांच के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन पर सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं छत्तीसगढ राज्य में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

बिलासपुर जिले के खनिज अमले द्वारा खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम गढ़वट में सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि 8-9 अप्रैल की मध्य रात्रि में दो युवक नदी क्षेत्र में गए थे, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना हुई। इस घटना में एक युवक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा घायल हुआ। मौके पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिले, बल्कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की पुष्टि हुई।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्राम गढ़वट निवासी तोषण कुमार कश्यप के नाम से जुड़ी है। इस आधार पर पुलिस थाना रतनपुर में वाहन मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105 एवं 238(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों युवक नदी क्षेत्र में रेत उत्खनन के उद्देश्य से गए थे। हालांकि घटना स्थल पर अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन क्षेत्र में बनाए गए कच्चे मार्ग और ट्रैक्टर के आवागमन के संकेत पाए गए।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2024-25 में  गढ़वट और आसपास के इलाके में कुल 47 प्रकरण दर्ज कर लगभग 6.95 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 22 प्रकरण दर्ज कर 3.19 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की जा चुकी है। पूर्व में भी गढ़वट क्षेत्र में अवैध परिवहन के मामलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर प्रकरण दर्ज किए गए थे। विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर भी अवैध उत्खनन रोकने के लिए समय-समय पर निर्णय और जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 5 करोड़ रुपये का गांजा किया गया स्वाहा, शासन की गाइडलाइन के तहत हुआ नष्टीकरण

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महासमुंद- नशीले पदार्थों के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत महासमुंद पुलिस ने शनिवार को अवैध मादक पदार्थ गांजा के नष्टीकरण की बड़ी कार्यवाही की है। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की मौजूदगी में लगभग 05 करोड़ 02 लाख 50 हजार रुपये कीमत का गांजा जलाकर नष्ट किया गया।

​शासन की गाइडलाइन का पालन 

​यह पूरी कार्यवाही शासन द्वारा निर्धारित कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुई। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी के अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक महासमुंद, सदस्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी की उपस्थिति में पहले मादक पदार्थ का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसके बाद उसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

​ 10 क्विंटल के करीब था गांजा 

​पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कोमाखान थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के तीन अलग-अलग बड़े मामलों में यह गांजा जप्त किया गया था। नष्ट किए गए गांजे का कुल वजन 09 क्विंटल 96 किलो 660 ग्राम है।

​ नष्टीकरण की मुख्य बातें: 

 ​स्थान: बालाजी प्लांट, बेलसोंडा (महासमुंद)।

 ​कुल वजन: 996.660 किलोग्राम।

​ बाजार मूल्य: ₹5,02,50,000 (लगभग 5 करोड़ 2 लाख रुपये)।

​ शामिल मामले: कोमाखान थाने के वर्ष 2025 का एक और वर्ष 2026 के दो बड़े प्रकरण।

​ अपराधियों में खौफ, पुलिस की मुस्तैदी 

​महासमुंद जिला ओडिशा सीमा से लगा होने के कारण तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। पुलिस द्वारा जप्त किए गए इस भारी मात्रा में गांजे को सार्वजनिक रूप से नष्ट करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अवैध नशे के कारोबार की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

महासमुंद: खट्टी जंगल 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा; पुरानी रंजिश में हुई थी प्रकाश की हत्या, 3 आरोपी गिरफ्तार

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महासमुंद- जिला पुलिस ने खट्टी जंगल में मिली युवक की लाश की गुत्थी सुलझाते हुए एक सनसनीखेज अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उड़ियापारा रावणभांठा निवासी तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश और गाली-गलौज को बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

​बीती 6 अप्रैल 2026 को ग्राम खट्टी के जंगल में एक अज्ञात युवक का शव संदेहास्पद स्थिति में मिला था। मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (23 वर्ष), निवासी खैराभांठा के रूप में हुई। प्रकाश के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और गले में गमछा लिपटा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

शराब पार्टी के दौरान गाली-गलौज बनी मौत का कारण 

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जब मृतक के दोस्तों से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि मृतक प्रकाश और आरोपी (जलांधर, काजू और गोपाल) आपस में दोस्त थे।

​पिछले महीने शराब पीने के दौरान प्रकाश ने नशे की हालत में आरोपियों को मां-बहन की गालियां दी थीं। इसी अपमान का बदला लेने के लिए तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

 ​फिल्मी अंदाज में दिया वारदात को अंजाम 

​अपहरण और हमला: 5 अप्रैल की रात आरोपियों को सूचना मिली कि प्रकाश गायत्री मंदिर के पास है। आरोपी काजू और गोपाल वहां पहुंचे, प्रकाश के साथ मारपीट की और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर खट्टी जंगल ले गए।

जघन्य हत्या: जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने कांच की बोतल और पत्थर से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

फरारी की साजिश: हत्या के बाद आरोपियों ने अपने साथी जलांधर सोनवानी को इसकी जानकारी दी। जलांधर ने उन्हें पैसे और अपनी स्प्लेंडर बाइक (CG 04 QQ 6845) देकर गरियाबंद भागने और 'अंडरग्राउंड' होने की सलाह दी।

​पुलिस की मुस्तैदी से दबोचे गए हत्यारे 

​महासमुंद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से घेराबंदी की। लगातार दबिश देकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 

​चंद्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​गोपाल प्रधान (20 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​जालंधर सोनवानी (21 वर्ष) - निवासी वार्ड नं. 30, नया रावणभांठा।

​पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

जेलों में बढ़ती मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में जेलों के भीतर हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक वर्ष के भीतर राज्य की विभिन्न जेलों में 33 कैदियों की मौत होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने चिंता जताई है।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई मामलों में अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है या लंबित पड़ी है, जिससे मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने जेल विभाग के महानिदेशक (DG) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और प्रत्येक मौत की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों और रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

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तमनार के बाद लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में अफीम खेती का भंडाफोड़, आरोपी हिरासत में

जिला प्रशासन की कार्रवाई से संलिप्त लोगों में हड़कंप 

ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्रवाई जारी

कलेक्टर-एसएसपी ने ली प्रेस वार्ता, गैर कानूनी अफीम की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही कार्रवाई की दी जानकारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 

कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। 

इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई। लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के पारित होने से धर्मांतरण पर लगेगी रोक,अवैध धर्मांतरण के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

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धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का पारित होना प्रदेशवासियों के लिए साबित होगा वरदान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 

विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधायक पुरंदर मिश्र के नेतृत्व में विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की और बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के पारित होने पर उनका सम्मान कर आभार जताया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026,छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल  विधेयक 2026 एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का विधानसभा में पारित होना पूरे प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा। इनमें धर्म स्वातंत्र्य विधेयक हमारी महान परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट संकल्प है। इसी तरह अन्य दो विधेयक भी पारदर्शिता के साथ भर्ती के लिए अहम साबित होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ  सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के अनुरूप हमने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था पर यह कानून उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे। प्रदेश में धर्मांतरण के कारण कुछ क्षेत्रों में सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ रहा था, जिससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही थी। इस बिल के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को पारित कर पूर्व राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जूदेव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ प्रखर मुहिम छेड़ कर "घर वापसी" अभियान चलाया था।

इसी तरह हमारी सरकार की पहल पर  प्रदेश के लाखों युवाओं की आवाज को सुनते हुए सरल एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया हेतु छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित किया गया है। इसी तरह परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने एवं नकल जैसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने  छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित किया गया है। यह दोनों  सर्वसम्मति से पारित किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्र ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

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