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BREAKING NEWS-किसानों को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख 5 फरवरी तक बढ़ी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के धान किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने धान खरीदी की अंतिम तारीख को दो दिन और बढ़ा दिया है। अब किसान 5 फरवरी 2026 तक अपनी धान सरकारी खरीदी केंद्रों में बेच सकेंगे।

  1. अब 4 और 5 फरवरी को खरीदा जाएगा किसानों का धान
  2. प्रदेश में अब तक 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी
  3. 25.11 लाख से अधिक किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रूपए का भुगतान

VIDEO में सुनिये: मुख्यमंत्री की घोषणा


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह फैसला उन किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लिया है, जिनका धान किसी कारणवश तय समय सीमा में नहीं खरीदा जा सका था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस बढ़ाई गई अवधि में केवल उन्हीं किसानों से धान की खरीदी की जाएगी, जो पहले किसी वजह से वंचित रह गए थे।

गौरतलब है कि प्रदेशभर में पिछले करीब दो महीनों से धान खरीदी का काम चल रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी उपज सरकारी केंद्रों में बेची। कई खरीदी केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिली और कई जगहों पर 31 जनवरी तक टोकन के आधार पर खरीदी होती रही।

इसके बावजूद कुछ किसान ऐसे रह गए थे, जिनका धान तय समय में नहीं खरीदा जा सका। इन्हीं किसानों की समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने धान खरीदी की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि कोई भी पात्र किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे।

यह निर्णय खासतौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक किसी कारण से धान नहीं बेच पाए थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में किसानों के हित और मांग को ध्यान में रखकर धान खरीदी की तिथि में दो दिवस की वृद्धि का अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय पर अब राज्य शासन द्वारा आगामी दो दिवस 4 और 5 फरवरी को राज्य के ऐसे किसान जो पंजीकृत है और जिनका टोकन कट चुके है, उन किसानों का धान खरीदा जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के वास्तविक किसानों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से धान खरीदी केन्द्रों में पारदर्शी व्यवस्था शुरू की थी जो सार्थ सिद्ध हुआ है। 

उल्लेखनीय है कि 15 नवम्बर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रूपए का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। सरकार द्वारा धान खरीदी की तिथि बढ़ाये जाने से अब उन छूटे हुए किसान भी सुगमतापूर्वक अपना धान बेच सकेंगे। 

इस वर्ष  छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था और किसान-हितैषी व्यवस्था से किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही वास्तविक किसानों को लाभान्वित करने का संकल्प सार्थक हो रहा है। राज्य में इस खरीफ सीजन के लिए 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। 

प्रदेशभर में संचालित सभी 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, डिजिटल निगरानीयुक्त और पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे।

छत्तीसगढ़ में 16 नवंबर तक अवैध धान परिवहन पर कड़ी निगरानी, 19,320 क्विंटल धान जब्त

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रायपुर-छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर तक लगभग 19 हजार 320 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है। 

मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर के अवधि में सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान में सर्वाधिक महासमुंद जिले में 4266 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार बलरामपुर जिले में 4139 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 1750 क्विंटल, रायगढ़ जिले में 1201 क्विंटल, जशपुर जिले में 1157 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 967 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 869 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 687 क्विंटल, राजनांदगांव 607 क्विंटल, मुंगेली में 490 क्विंटल, बलौदाबाजार में 386 क्विंटल, बिलासपुर में 273 क्विंटल, कोरिया में 253 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 250 क्विंटल, सरगुजा में 240 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 228 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 220 क्विंटल, बस्तर जिले में 218 क्विंटल, सक्ती में 137 क्विंटल, सुकमा में 130 क्विंटल, बालोद में 123 क्विंटल, गरियाबंद में 122 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 119 क्विंटल, कवर्धा में 90 क्विंटल, कोरबा में 85 क्विंटल, रायपुर में 84 क्विंटल, धमतरी में 72 क्विंटल, नारायणपुर में 53 क्विंटल, दुर्ग में 38 क्विंटल, बेमेतरा में 32 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 27 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं। 

उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के पूर्व प्रदेश में अवैध धान परिवहन और संग्रहण पर सख्त निगरानी जारी रखते हुए आज दो महत्वपूर्ण कार्रवाईयाँ की गईं। मार्कफेड के इंटीग्रेटेड कंट्रोल सिस्टम से प्राप्त 600 बैग (231.5 क्विंटल) अवैध धान संबंधी अलर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कोंडागांव जिले की टीम ने मौके पर पहुंचकर धान जप्त किया। सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।

इसी क्रम में, रात्री गश्त के दौरान ग्राम त्रिशूली, थाना सनवाल क्षेत्र में अशोक सिंह पिता रामचरित्र के घर के बाहर बने शेड में दो अलग-अलग स्थानों पर कुल 222 कट्टा धान पाया गया। विवाद की स्थिति को देखते हुए दिन में पुनः तहसीलदार रामचंद्रपुरपुर, थाना प्रभारी सनवाल, महिला पुलिस, तथा मंडी कर्मचारियों की मौजूदगी में विस्तृत जांच की गई और धान की विधिवत जप्ती की कार्रवाई पूरी की गई। शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ: खरीफ 2025 में संतोषजनक बुवाई, ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी

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केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सभी किसानों की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि खरीफ 2025 सीजन में बुवाई का कार्य अत्यंत संतोषजनक रहा है। धान की कुल बुवाई का क्षेत्रफल 441.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसी प्रकार, तेलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 190.13 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें सोयाबीन और मूंगफली प्रमुख फसलें हैं। दालों की बुवाई 120.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो देश की पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं गन्ने का क्षेत्रफल 59.07 लाख हेक्टेयर है, जिससे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

इस वर्ष भारत के कृषि क्षेत्र को अनुकूल मानसून, पर्याप्त वर्षा और जलाशयों में बेहतर जल भंडारण का बड़ा लाभ मिला है। साप्ताहिक कृषि प्रगति समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अधिकांश प्रमुख जलाशयों में जलस्तर सामान्य या उससे अधिक है, जिससे सिंचाई की आवश्यकताएँ पूरी तरह पूरी हो रही हैं और खरीफ फसलों की समय पर बुवाई संभव हो सकी है। पर्याप्त मिट्टी की नमी ने फसल वृद्धि को बढ़ावा दिया है और रबी फसलों के क्षेत्र में विस्तार की संभावना को बल दिया है।

कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि सिंचाई परियोजनाओं और जलाशयों में जल की उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे सिंचित क्षेत्रों में कृषि विकास को प्रोत्साहन मिला है। देशभर के 161 जलाशयों में कुल जीवित जल भंडारण 165.58 बिलियन घन मीटर (BCM) है, जो पिछले वर्ष के स्तर का 104.30% और दस वर्ष के औसत का 115.95% है।

बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ फसलों की कटाई कुछ क्षेत्रों में प्रारंभ हो चुकी है, जो कुल खरीफ क्षेत्र के लगभग 27% हिस्से को कवर करती है, जबकि रबी फसलों की बुवाई प्रारंभिक चरण में है। प्याज, आलू और टमाटर फसलों की स्थिति देशभर में संतोषजनक है और चावल व गेहूं का वर्तमान भंडार बफर मानकों से अधिक है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र समय पर और अनुकूल मानसून, पर्याप्त जल संसाधनों, कुशल योजना और डिजिटल नवाचारों के कारण ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ किसानों की आय बढ़ाने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार, राज्यों के सहयोग से, आगामी रबी सीजन में दालों और तेलहनों की अधिक बुवाई और रिकॉर्ड उत्पादकता को प्रोत्साहित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2025–26 के लिए दलहन और तिलहन खरीद योजना को दी मंजूरी; ₹15,095 करोड़ से अधिक की राशि से लाखों किसानों को मिलेगा लाभ

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश राज्यों में खरीफ 2025–26 सीजन के लिए दलहन और तिलहन की खरीद योजना को मंजूरी दी है। इन राज्यों के लिए कुल स्वीकृत खरीद राशि ₹15,095.83 करोड़ निर्धारित की गई है, जिससे संबंधित राज्यों के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह मंजूरी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अन्य योजनाओं के तहत दी। यह निर्णय कृषि मंत्रियों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक में लिया गया।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, मंत्री चौहान ने तेलंगाना में मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत ₹38.44 करोड़ की लागत से 4,430 मीट्रिक टन मूंग (हरी दाल) की खरीद को मंजूरी दी, जो राज्य के कुल उत्पादन का 25% है। इसके अलावा, उड़द की 100% खरीद और सोयाबीन की 25% खरीद की भी स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार, ओडिशा में मूल्य समर्थन योजना के तहत ₹147.76 करोड़ की लागत से अरहर (तुअर दाल) की 18,470 मीट्रिक टन खरीद की मंजूरी दी गई, जो राज्य के कुल उत्पादन का 100% है।

महाराष्ट्र में, केंद्रीय मंत्री ने 33,000 मीट्रिक टन मूंग, 3,25,680 मीट्रिक टन उड़द और 18,50,700 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दी। ये खरीद मूल्य समर्थन योजना के तहत क्रमशः ₹289.34 करोड़, ₹2,540.30 करोड़ और ₹9,860.53 करोड़ की लागत से की जाएंगी। वहीं, मध्य प्रदेश में खरीफ 2025–26 सीजन के दौरान मूल्य हानि भुगतान योजना (PDPS) के तहत 22,21,632 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद ₹1,775.53 करोड़ की लागत से की जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन मंजूरियों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, उनकी आय की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाजार की अस्थिरता से बचाव करना है — यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों की आय और सम्मान की सुरक्षा करना है। खरीफ 2025–26 सीजन में इन राज्यों में दलहन और तिलहन की रिकॉर्ड खरीद कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगी, किसानों को निश्चित आय सुनिश्चित करेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।

मंत्री चौहान ने यह भी बताया कि सरकार ने नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद की व्यवस्था की है, जिससे देश दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि खरीद का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और इसके लिए सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26: छत्तीसगढ़ में पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ धान खरीदी व्यवस्था शुरू

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प्रदेश के हर अन्नदाता को उसके परिश्रम का पूरा मूल्य मिले, यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की विस्तृत नीति घोषित की है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के हितों और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

खाद्य विभाग की सचिव रीना कंगाले ने जानकारी दी कि धान की खरीदी 3100 प्रति क्विंटल की दर पर की जाएगी। धान उपार्जन का कार्य 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। इस वर्ष भी प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा।

धान खरीदी का सम्पूर्ण कार्य छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) के माध्यम से किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु चावल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की नोडल एजेंसी छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड होगी। धान खरीदी केवल उन्हीं प्राथमिक कृषि साख समितियों और लेम्पस के माध्यम से होगी जो मार्कफेड के कम्प्यूटरीकरण कार्यक्रम से जुड़ी होंगी।

प्रदेश के सभी जिलों में विगत वर्ष संचालित 2739 खरीदी केन्द्रों और नए स्वीकृत केन्द्रों के माध्यम से खरीदी होगी। इसके साथ ही 55 मंडियों और 78 उपमंडियों का उपयोग धान उपार्जन केन्द्र के रूप में किया जाएगा।

धान खरीदी के लिए आवश्यक साख-सीमा की व्यवस्था मार्कफेड द्वारा राज्य शासन के निर्देशानुसार की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर भुगतान में कोई विलंब न हो।

प्रदेश में धान उपार्जन प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत एवं पारदर्शी होगी। किसान अपने निकटस्थ समितियों में पंजीकरण कर एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से धान विक्रय कर सकेंगे। पोर्टल पर ऋण पुस्तिका आधारित फार्म आईडी से खरीदी की अनुमति दी जाएगी।

भारत सरकार कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टैक पंजीयन आईडी के आधार पर एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल में कराए पंजीयन फार्मर आईडी से होगा किसान लिंकिंग खरीदी एवं समिति में एग्रीस्टैक पंजीयन होने से समिति में ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता नहीं होगी।

धान खरीदी प्रक्रिया में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को जारी रखा गया है, जिससे पारदर्शिता और वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित की जा सके। केवल किसान स्वयं, या उनके माता-पिता, पति/पत्नी, या पुत्र/पुत्री ही धान विक्रय कर सकेंगे। विशेष परिस्थितियों में एसडीएम द्वारा प्रमाणित “विश्वसनीय व्यक्ति” को अधिकृत किया जा सकेगा।

धान खरीदी के लिए किसानों को टोकन जारी कर नियंत्रित और व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सीमांत व लघु किसानों को दो टोकन और दीर्घ किसानों को तीन टोकन दिए जाएंगे। अंतिम दिन नई पर्ची जारी नहीं होगी और शाम 5 बजे तक पहुँचे धान की खरीदी उसी दिन की जाएगी।

धान की खरीदी 50:50 अनुपात में नये और पुराने जूट बोरे (Gunny Bags) में की जाएगी। नये जूट बोरे मार्कफेड द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता से क्रय किए जाएंगे। पुराने बारदानों को उपयोग योग्य बनाकर नीले रंग में “Used Bag allowed for KMS 2025-26” का स्टेंसिल लगाया जाएगा।

सभी उपार्जन केन्द्रों में कांटे-बांट का विधिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसानों को पारदर्शी प्रक्रिया का भरोसा दिलाने के लिए सत्यापन प्रमाणपत्र खरीदी केन्द्रों पर प्रदर्शित किए जाएंगे। धान की नमी 17% से अधिक नहीं होनी चाहिए। हर केन्द्र पर आर्द्रतामापी यंत्र उपलब्ध रहेंगे।

धान के संग्रहण हेतु ऐसे केन्द्र चुने जाएंगे जो ऊँचे एवं जलभराव-रहित हों। सभी केन्द्रों में पॉलिथीन कवर, सीमेंट ब्लॉक, और ड्रेनेज सुविधा अनिवार्य रूप से होगी ताकि बारिश में धान सुरक्षित रहे।

किसानों के खाते में भुगतान पीएफएमएस सिस्टम के माध्यम से सीधे किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि राशि केवल किसान के खाते में ही अंतरण हो; किसी अन्य व्यक्ति के खाते में भुगतान नहीं किया जाएगा।

हर उपार्जन केन्द्र में कम्प्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, और नेटवर्क सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। डाटा-एंट्री ऑपरेटरों का नियोजन 6 माह के लिए ₹18,420 प्रतिमाह के मानदेय पर किया जाएगा। सभी खरीदी केन्द्रों के डाटा का अपलोडिंग 72 घंटे के भीतर अनिवार्य किया गया है। धान खरीदी प्रारंभ होने से पूर्व सभी केन्द्रों का निरीक्षण, उपकरणों की जांच और सॉफ्टवेयर ट्रायल रन 31 अक्तूबर तक पूरा किया जाएगा। एनआईसी और मार्कफेड की टीम द्वारा यह तैयारी सुनिश्चित की जाएगी।


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