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राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका एवं भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराने की होगी व्यवस्था

राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीक आधारित समाधान एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश

राजस्व मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए।

बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

बैठक में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, विशेष सचिव इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय NAKSHA और LandStack संगोष्ठी: शहरी भूमि रिकॉर्ड और डिजिटल संपत्ति अधिकारों में तकनीकी क्रांति

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भूमि संसाधन विभाग (DoLR), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार 3 दिसंबर 2025 को भारत मंडप, नई दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करने जा रहा है। यह संगोष्ठी GeoSmart India 2025 सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और इसका उद्देश्य शहरी भूमि रिकॉर्ड में भू-स्थानिक (Geospatial) प्रौद्योगिकियों के अपनाने को तेज करना और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना है।

संगोष्ठी के प्रमुख आकर्षण:

  1. NAKSHA पायलट समीक्षा और विस्तार:

    157 से अधिक शहरों में सटीक भूमि मानचित्रण के लिए आधुनिक हवाई सर्वेक्षण और फीचर एक्सट्रैक्शन तकनीकों का उपयोग करने वाले NAKSHA पायलट कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। इसमें तकनीकी चुनौतियों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में डेटा सटीकता और मौजूदा कैडस्ट्रल मैप्स के साथ संरेखण पर चर्चा होगी।

  2. भविष्य का डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र – LandStack:

    LandStack को भारत की एकीकृत डिजिटल भूमि प्रणाली के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र होंगे। इसमें आधारभूत परतों, कैडस्ट्रल मैप्स, भू-स्थानिक डेटा और प्रशासनिक रिकॉर्ड के एकीकरण की चुनौतियों पर विचार-विमर्श होगा।

  3. UrPro कार्ड और कानूनी ढांचा:

    UrPro कार्ड, एक भरोसेमंद डिजिटल संपत्ति दस्तावेज़, को एकीकृत करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कानूनी और संस्थागत संरेखण पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य पंजीकरण, म्यूटेशन, संपत्ति कर और भवन अनुमति प्रणाली में नागरिकों को सुरक्षित और हस्तांतरणीय डिजिटल संपत्ति अधिकार प्रदान करना है।

  4. प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और इंटरऑपरेबिलिटी:

    WebGIS प्लेटफ़ॉर्म और क्लाउड सेवाओं का पूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें AI/ML विश्लेषण, 3D मानचित्रण और क्लाउड भू-स्थानिक सेवाओं का उपयोग कर शहरी भूमि प्रशासन में पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही बढ़ाने पर चर्चा होगी।

यह संगोष्ठी सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें पुरानी प्रणालियों को पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित डिजिटल भूमि प्रशासन में बदलने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जो विकसित भारत के विज़न को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है।

सुधार से विश्वास तक: चारों श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, दिखाया विकास का नया मॉडल

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नीति से नीयत तक - छत्तीसगढ़ का सुधार मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण

DPIIT की BRAP रैंकिंग में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, निवेशकों के लिए भरोसे का केंद्र बना राज्य

रायपुर-छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी पहचान सुधार और विकास के नए प्रतीक के रूप में दर्ज कराई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उद्योग संगम’ में राज्य को बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की चारों प्रमुख श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ अब न केवल नीति निर्माण में बल्कि नीति क्रियान्वयन में भी अग्रणी राज्यों की पंक्ति में शामिल हो चुका है।

यह उपलब्धि उस परिवर्तन यात्रा की गवाही है जो छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में तय की है। कभी BRAP रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाला यह राज्य आज गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यह परिवर्तन केवल अंकों का सुधार नहीं, बल्कि शासन की सोच और दृष्टिकोण में आए मूलभूत परिवर्तन का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने सुशासन, पारदर्शिता और भरोसे पर आधारित प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया है। इस ढांचे ने न केवल निवेशकों का विश्वास जीता है बल्कि सामान्य नागरिकों के जीवन को भी सुगम और सशक्त बनाया है। राज्य सरकार ने सुधारों को केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जन-जीवन में उतारकर एक नए विकास मॉडल का निर्माण किया है।

राज्य ने BRAP के अंतर्गत अब तक 434 सुधार लागू किए हैं — जो ‘Ease of Doing Business’ के साथ-साथ ‘Ease of Living’ को सशक्त बनाने की दिशा में उसके सतत प्रयासों को दर्शाते हैं। इन सुधारों का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि उस वातावरण का निर्माण करना है जहाँ उद्योग, समाज और प्रशासन एक साथ प्रगति करें।

इन्हीं सुधारों में एक ऐतिहासिक कदम रहा ‘जन विश्वास अधिनियम’, जिसके तहत छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बना जिसने छोटे कारोबारी अपराधों को डीक्रिमिनलाइज किया। इस अधिनियम ने सरकार और उद्योग जगत के बीच भरोसे का पुल बनाया है। अब कारोबारियों के लिए शासन एक सहयोगी के रूप में सामने आ रहा है। यह बदलाव राज्य में उद्यमिता संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन देने वाला सिद्ध हुआ है।

इसी तरह एक और ऐतिहासिक पहल के रूप में छत्तीसगढ़ ने भूमि अभिलेखों के स्वचालित म्यूटेशन की शुरुआत की। यह कदम राज्य को देश का पहला ऐसा प्रदेश बनाता है जहाँ जमीन पंजीयन के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण स्वतः हो जाता है। इससे न केवल प्रक्रियाएँ सरल हुई हैं बल्कि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिली है। यह सुधार पारदर्शिता, दक्षता और समय की बचत तीनों का बेहतरीन उदाहरण है।

राज्य सरकार ने औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी कई क्रांतिकारी सुधार लागू किए हैं। दुकानों और प्रतिष्ठानों को अब 24×7 संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और व्यापारिक लचीलापन भी सुनिश्चित हुआ है। इसके अतिरिक्त फ्लैटेड इंडस्ट्री के लिए FAR में वृद्धि, भूमि उपयोगिता बढ़ाने हेतु सेटबैक में कमी, और फैक्ट्री लाइसेंस की वैधता 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने के साथ ऑटो-रिन्यूअल सुविधा प्रदान की गई है। ये कदम राज्य को आधुनिक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं।

इन सुधारों ने मिलकर छत्तीसगढ़ को एक भरोसेमंद, स्थिर और पारदर्शी औद्योगिक केंद्र बना दिया है। अब निवेशक केवल संभावनाएँ नहीं, बल्कि निश्चितता देखते हैं। प्रक्रियाओं में सरलीकरण और नीतिगत स्पष्टता ने ‘Ease of Doing Business’ को वास्तविकता में बदल दिया है।

इन उल्लेखनीय सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और निवेश आयुक्त ऋतु सेन (IAS) को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तियों का, बल्कि उस टीम भावना और संस्थागत प्रयासों का भी है जिसने राज्य को यह मुकाम दिलाया।

यह गौरवपूर्ण क्षण पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणादायी है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि सही नीयत, सटीक नीति और मजबूत नेतृत्व के बल पर कोई भी राज्य देश के औद्योगिक नक्शे पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।

बीते 10 महीनों में ₹7.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हुए …

DDWS ने विशेष अभियान 5.0 सफलतापूर्वक संपन्न किया, लंबित मामलों और स्वच्छता में दिखाया उत्कृष्ट प्रदर्शन

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नई दिल्ली-पीने के पानी और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने विशेष अभियान 5.0 (SC 5.0) को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जो 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के अभियान का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, लंबित मामलों का निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार और व्यापक स्वच्छता पहल को बढ़ावा देना था।

अभियान का प्रतीकात्मक शुभारंभ 2 अक्टूबर 2025 को DDWS सचिव के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में Pt. दीनदयाल अंत्योदय भवन, CGO कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली स्थित Sanitation Park में स्वच्छता अभियान के साथ किया गया, जिससे सभी संचालन स्तरों पर दक्षता और पारदर्शिता की प्रतिबद्धता प्रदर्शित हुई।

इस अभियान में स्थान और रिकॉर्ड प्रबंधन में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई। 120 वर्ग फुट कार्यालय स्थान को मुक्त किया गया और 100 भौतिक फाइलें सफलतापूर्वक हटा दी गईं, जिससे रिकॉर्ड व्यवस्थित हुए और भौतिक अव्यवस्था कम हुई। इसके अतिरिक्त, अयोग्य संपत्तियों और स्क्रैप, जिसमें ई-वेस्ट भी शामिल है, का व्यवस्थित निपटान कर ₹3,73,706 की आय प्राप्त की गई, और इस मापदंड में लक्ष्य की पूर्णता और उससे अधिक हासिल हुई।

विभाग ने 410 (84%) सार्वजनिक शिकायतों (PG) और 50 PG अपीलों का निपटान किया। विशेष रूप से, 16 VIP संदर्भों, 3 PMO संदर्भों और 2 राज्य सरकार संदर्भों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

DDWS सचिव,अशोक के. के. मीना ने अभियान की प्रगति की व्यक्तिगत समीक्षा की, जिसमें 10 अक्टूबर 2025 को Pt. दीनदयाल अंत्योदय भवन में स्थित DDWS कार्यालय का दौरा शामिल था।

विभाग ने यह भी दोहराया कि वह पूरे वर्ष विशेष अभियान 5.0 की गति और उत्साह को बनाए रखेगा, ताकि दक्षता, संगठन और उत्तरदायित्व में हासिल हुई उपलब्धियां कार्य संस्कृति का स्थायी हिस्सा बनें।



DPIIT ने विशेष अभियान 5.0 सफलतापूर्वक संपन्न किया, स्वच्छता और कार्यक्षमता में 100% लक्ष्य प्राप्त

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नई दिल्ली-भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और इसकी संबद्ध संस्थाओं ने विशेष अभियान 5.0 को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिसे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के समग्र मार्गदर्शन में लागू किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता के सिद्धांतों को संस्थागत बनाना और सभी कार्यालयों में लंबित मामलों का समय पर निपटान सुनिश्चित करना था।

इस अभियान के दौरान, DPIIT के अंतर्गत भारतीय रबर मटेरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट (IRMRI) ने “Waste to Wealth” पहल को लागू किया। इस पहल में पुराने रबर स्क्रैप का उपयोग करके एक सड़क खंड और एक्सेस रोड का निर्माण किया गया। क्रम्ब रबर सीमेंट कंक्रीट (CRCC), जो सीमेंट कंक्रीट में 10–15% अपशिष्ट रबर कण मिलाकर तैयार किया गया, का उपयोग किया गया। इस नवाचारी मिश्रण ने सड़क की स्थायित्व और टिकाऊपन बढ़ाया और टायर निपटान की चुनौती का समाधान किया। सड़क के प्रदर्शन की मजबूती, लोच और टिकाऊपन वैज्ञानिक रूप से निगरानी की गई। यह पर्यावरण-हितैषी दृष्टिकोण सतत अवसंरचना के लिए दोहराने योग्य मॉडल प्रस्तुत करता है और अभियान की नवाचार और सर्कुलर अर्थव्यवस्था में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

DPIIT ने अपने स्वच्छता लक्ष्यों में 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त की, देशभर में 70 स्थानों पर फैले 500 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (CTUs) पर अभियान चलाया। हर चिन्हित स्थल को सफलतापूर्वक कवर किया गया, जिससे विभाग की साफ-सुथरे और कुशल कार्यस्थलों के प्रति प्रतिबद्धता उजागर हुई।

स्वच्छता अभियान के अतिरिक्त, DPIIT ने अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों में भी उल्लेखनीय प्रगति की। विभाग ने 1,572 भौतिक फाइलों की समीक्षा की (लक्ष्य का 100%), और 1,119 फाइलें हटा दीं, जिससे 11,235 वर्ग फुट कार्यालय स्थान मुक्त हुआ और ₹17,69,569 की आय स्क्रैप निपटान से प्राप्त हुई। सार्वजनिक शिकायत निवारण, अपील, ई-फाइल और भौतिक फाइलों की समीक्षा, और स्वच्छता अभियानों के मापदंडों में DPIIT ने लगभग 100% लक्ष्य पूर्णता हासिल की, जो जवाबदेही और प्रभावी रिकॉर्ड प्रबंधन पर विभाग की निरंतर प्राथमिकता को दर्शाता है। इसके साथ ही, कर्मचारियों की सुविधा और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कार्यालय पर्यावरण में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

अभियान 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया गया, जबकि 15 से 30 सितंबर 2025 तक इसकी तैयारी की गई थी। इस अवधि के दौरान DPIIT के प्रयासों ने स्वच्छता, व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित मामलों के त्वरित निपटान के प्रति जागरूकता बढ़ाई। लक्ष्यों की लगभग पूर्णता सुनिश्चित करके, DPIIT ने सरकारी कार्य में कुशलता, जवाबदेही और स्वच्छता की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

DDWS और BISAG-N के बीच समझौता: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के लिए बनेगा GIS-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

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नई दिल्ली- जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज नई दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। BISAG-N, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है।

यह साझेदारी देश में जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के लिए एक GIS-एकीकृत निर्णय सहायता प्लेटफ़ॉर्म (Decision Support Platform) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता कार्यक्रमों में डेटा-आधारित निर्णय, पारदर्शिता और कुशल निगरानी को सशक्त बनाएगा।

समारोह की अध्यक्षता अशोक के. के. मीना, सचिव, DDWS ने की। इस अवसर पर स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव (JJM) और विनय ठाकुर, विशेष महानिदेशक, BISAG-N ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते का आदान-प्रदान किया।कमल किशोर सोन, अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक (NJJM) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सचिव अशोक के. के. मीना ने इस अवसर पर कहा कि,

“पेयजल और स्वच्छता मिशनों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के लिए जियोस्पेशियल तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। BISAG-N के साथ यह सहयोग JJM और SBM(G) को अत्याधुनिक GIS क्षमताओं से लैस करेगा, जिससे रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और बेहतर नीति-निर्णय संभव होंगे।”

नए प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं (RPWSS) का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक योजना को यूनिक स्कीम आईडी प्रदान की जाएगी। यह प्रणाली घर-घर जल आपूर्ति की सूक्ष्म निगरानी और अन्य ग्रामीण अवसंरचना योजनाओं के साथ समन्वय (convergence) को मजबूत करेगी।

समझौते के तहत BISAG-N प्लेटफ़ॉर्म के डेटाबेस डिज़ाइन, मानचित्र निर्माण, डेटा माइग्रेशन, सॉफ़्टवेयर विकास और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसी सभी तकनीकी सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें डिजिटल फोटोग्रामेट्री, वेक्टर डेटा कैप्चर, थीमैटिक मैपिंग और ग्राउंड कंट्रोल सर्वेक्षण जैसी उन्नत तकनीकें भी शामिल होंगी।

यह पहल प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप होगी, जिससे जल एवं स्वच्छता अवसंरचना का अन्य क्षेत्रों की परिसंपत्तियों के साथ एकीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग, सेवा वितरण में सुधार और ग्रामीण विकास की गति को बढ़ावा मिलेगा।

यह सहयोग भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विज़न से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य समावेशी और सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। DDWS और BISAG-N का यह संयुक्त प्रयास ग्रामीण जल और स्वच्छता सेवाओं की प्रभावी योजना, निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।


ग्राम पंचायतों में डिजिटल शासन की नई मिसाल: NAeG 2025 पुरस्कार विजेताओं का सम्मान

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ग्रामीण स्तर पर डिजिटल शासन में अग्रणी कदम: ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2025 से सम्मानित किया गया

आज ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2025 के तहत एक नए स्थापित श्रेणी में सम्मानित किया गया, जो डिजिटल सेवा वितरण में ग्राम स्तर की पहलों को समर्पित है। यह पुरस्कार 28वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG), विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं MoS (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) द्वारा प्रदान किए गए। सम्मेलन का उद्घाटन दिन  मेंएन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश ने किया और उद्घाटन भाषण दिया।

पुरस्कार विजेता ग्राम पंचायतें

देशभर से 1.45 लाख से अधिक प्रविष्टियों के कठोर बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद, निम्नलिखित ग्राम पंचायतों को “ग्राम पंचायतों में सेवा वितरण को गहरा करने के लिए ग्राम स्तर की पहल” श्रेणी में सम्मानित किया गया:

  • गोल्ड अवार्ड: रोहिणी ग्राम पंचायत, धुले जिला, महाराष्ट्र – सरपंच डॉ. आनंदराव पवारा

  • सिल्वर अवार्ड: वेस्ट माजलिशपुर ग्राम पंचायत, पश्चिम त्रिपुरा जिला, त्रिपुरा – सरपंच श्रीमती अनीता देब दास

  • ज्यूरी अवार्ड: पलसाना ग्राम पंचायत, सूरत जिला, गुजरात – सरपंच श्री प्रवीनभाई परशोत्तमभाई आहि्र

  • ज्यूरी अवार्ड: सुआकटी ग्राम पंचायत, केन्दुज्हर जिला, ओडिशा – सरपंच श्रीमती कौतुक नाइक

प्रत्येक पुरस्कार में ट्रॉफी, प्रमाणपत्र और वित्तीय प्रोत्साहन शामिल है:

  • गोल्ड: ₹10 लाख

  • सिल्वर: ₹5 लाख
    ये राशि नागरिक-केंद्रित पहलों को सुदृढ़ करने के लिए पुनः निवेशित की जाएगी।

पुरस्कार विजेता पंचायतों की विशेषताएँ:

  1. रोहिणी ग्राम पंचायत, महाराष्ट्र

    • राज्य की पहली पूर्णत: पेपरलेस ई-ऑफिस प्रणाली अपनाने वाली पंचायत।

    • 1,027 ऑनलाइन सेवाएँ और 100% घरेलू डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित।

    • रियल-टाइम शिकायत निवारण और मासिक SMS आउटरीच के माध्यम से हर नागरिक को शासन निर्णयों से जोड़ा गया।

  2. वेस्ट माजलिशपुर ग्राम पंचायत, त्रिपुरा

    • नागरिक चार्टर-आधारित पंचायत शासन का आदर्श मॉडल।

    • जन्म, मृत्यु, विवाह प्रमाणपत्र, व्यापार लाइसेंस, संपत्ति रिकॉर्ड और MGNREGS जॉब कार्ड जैसी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध।

    • हर अनुरोध का डिजिटल मॉनिटरिंग, जवाबदेही, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित।

  3. पलसाना ग्राम पंचायत, गुजरात

    • डिजिटल गुजरात और ग्राम सुविधा पोर्टल्स के माध्यम से QR/UPI आधारित संपत्ति कर भुगतान, ऑनलाइन शिकायत निवारण और पारदर्शी कल्याण वितरण।

    • प्रति वर्ष 10,000+ नागरिक ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाते हैं।

    • यह दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी सीधे जीवन की सुविधा में सुधार करती है।

  4. सुआकटी ग्राम पंचायत, ओडिशा

    • ओडिशा वन और सेवा ओडिशा प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवश्यक सेवाओं का डिजिटलीकरण।

    • 24/7 नागरिक पहुंच और रियल-टाइम ट्रैकिंग।

    • महिला नेतृत्व और समावेशी सेवा वितरण को सुनिश्चित कर, प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार और नागरिक के बीच अंतिम दूरी को पाटता है।

यह पहली बार का सम्मान DARPG और ग्राम पंचायत मंत्रालय (MoPR) के सहयोग से स्थापित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि सुव्यवस्था सबसे अच्छे तरीके से डिजिटल शासन के माध्यम से प्रदान की जाती है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, जो DARPG, MeitY और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया और IIM विशाखापत्तनम इसे ज्ञान साझेदार के रूप में समर्थन दे रहा है, का थीम है:
“विकसित भारत: सिविल सेवा और डिजिटल परिवर्तन”।

23 सितंबर, 2025 को, विवेक भारद्वाज, सचिव, ग्राम पंचायत मंत्रालय की अध्यक्षता में एक समर्पित सत्र “ग्राम पंचायतें और ई-गवर्नेंस में ग्राम स्तर की नवाचार” पर आयोजित होगा, जिसमें इन सफल पहलों को देशभर के पंचायतों के लिए दोहराए जाने योग्य मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।


28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन 2025: विकसित भारत के लिए सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के सहयोग से, 28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) 2025 आयोजित कर रहे हैं। इस वर्ष का थीम है: “विकसित भारत: सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण”

उद्घाटन और प्रमुख अतिथि

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और डॉ. जितेन्द्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मचारी, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

सम्मेलन में पवन कल्याण, उपमुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और एन. लोकेश, आईटी एवं मानव संसाधन विकास मंत्री, आंध्र प्रदेश भी उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025

सम्मेलन के दौरान 19 उत्कृष्ट पहलों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा:

  • 10 स्वर्ण, 6 रजत, और 3 जूरी पुरस्कार।

  • पुरस्कार छह श्रेणियों में – केंद्रीय, राज्य, जिला प्राधिकरण, ग्राम पंचायत और शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थान को प्रदान किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित और सतत ई-सेवा प्रदान करने के नवाचारी और रूपांतरकारी तरीकों पर चर्चा करना है।

सम्मेलन संरचना और विषय

  • 6 मुख्य सत्र (Plenary Sessions) और 6 उप-सत्र (Breakout Sessions)।

  • लगभग 70 वक्ता विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे, जैसे:

    • विशाखापत्तनम को आईटी हब के रूप में विकसित करना

    • विकसित भारत के लिए एआई: समावेशी और स्केलेबल समाधान

    • सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

    • ई-गवर्नेंस में साइबर सुरक्षा

    • सेवा वितरण में उत्कृष्टता और मानक निर्धारण

    • एग्री स्टैक: कृषि के लिए डिजिटल समाधान

    • स्वर्ण पुरस्कार विजेताओं द्वारा ई-गवर्नेंस पहलों में उत्कृष्टता

    • ग्राम पंचायत स्तर पर नवाचार

    • आंध्र प्रदेश सरकार की ई-गवर्नेंस पहल

    • डिजिटल सशक्तिकरण के लिए नवाचार

    • अंतर्राष्ट्रीय अंडरसी केबल और एआई डेटा सेंटर

सम्मेलन में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। एक प्रदर्शनी (Exhibition) भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत की ई-गवर्नेंस में उपलब्धियों और पिछले वर्षों के पुरस्कार विजेताओं की फोटो प्रदर्शनी दिखाई जाएगी

सम्मेलन में संबोधन देंगे:

  • वी. श्रीनिवास, सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग

  • एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

  • के. विजयानंद, मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार

  • सरिता चौहान, संयुक्त सचिव, DARPG द्वारा विशाखापत्तनम घोषणा 2025 प्रस्तुत की जाएगी।


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