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प्रधानमंत्री ने असम में 11 वर्षों में विकास और शांति पर लेख साझा किया

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम में पिछले 11 वर्षों में शांति, संस्कृति और बुनियादी ढांचे में हुए महत्वपूर्ण सुधारों पर एक लेख साझा किया।

संघ लोक सेवा मंत्रालय (Union MoS) पबित्रा मरगेरिता द्वारा X पर किए गए पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, PMO India हैंडल ने कहा:

“केंद्रीय राज्य मंत्री @PmargheritaBJP ने असम में पिछले 11 वर्षों में शांति, संस्कृति और बुनियादी ढांचे में हुए महत्वपूर्ण सुधारों के बारे में लिखा है।

उन्होंने एक ऐसे विकास मॉडल को रेखांकित किया है जो आर्थिक विकास को पारिस्थितिकीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करता है, क्योंकि राज्य ‘विकसित असम’ की दिशा में steady रूप से आगे बढ़ रहा है, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बिलासपुर को राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम

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डबल इंजन सरकार का निर्णायक कदम—बिलासपुर बनेगा छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बिलासपुर के विकास का नया रोडमैप तय

राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर बिलासपुर को प्रमुख स्थान दिलाने की बड़ी शुरुआत: केंद्र–राज्य समन्वय से बिलासपुर के विकास को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रस्तुत किया बिलासपुर का 15 वर्षीय विकास विज़न

रायपुर- छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने आज यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि आने वाले दशक में बिलासपुर राज्य का अगला ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक ने बिलासपुर के समग्र विकास के लिए एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक अभियान का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। बैठक में जिस प्रकार केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्ज हुई, उसने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर का विकास केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता का विषय बन चुका है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल , विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण सभी एक ही मंच पर  उपस्थित थे। इस संयुक्त उपस्थिति ने यह शक्तिशाली संदेश दिया कि बिलासपुर का विकास दिल्ली और रायपुर—दोनों स्तरों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से आगे बढ़ेगा और योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान और क्रियान्वयन में गति लाने के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छा-शक्ति पूरी तरह सक्रिय है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में स्वयं बिलासपुर के अगले 10–15 वर्षों के शहरी विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल वर्तमान समस्याओं पर नहीं, बल्कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, आवास, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और समग्र नगर नियोजन पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “नाली से लेकर नगर नियोजन तक” कोई भी विषय चर्चा से बाहर नहीं छोड़ा गया। यही संदेश यह स्थापित करता है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि बारीकी से जमीन पर लागू होने योग्य योजना बना रही है। इस दृष्टिकोण ने मुख्यमंत्री की छवि एक दूरदर्शी शहरी विकास नेता के रूप में और सुदृढ़ की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी संकेत दिया कि बिलासपुर को सिर्फ एक बड़े शहर के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नए आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य हब विकसित किया जाएगा। लॉजिस्टिक सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसरों के साथ बिलासपुर को मध्य भारत का प्रमुख शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।आने वाले वर्षों में बिलासपुर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक नगरीय सुविधाएँ, स्वच्छता व्यवस्था, सस्टेनेबल शहरी ढांचा और रोजगार सृजन के नए अवसर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। इससे न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र को नई आर्थिक दिशा मिलेगी।

बैठक में जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी ने समावेशी राजनीति का स्पष्ट संदेश दिया। विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्थापित किया कि बिलासपुर का विकास शहर के भविष्य का सामूहिक संकल्प है। वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि बिलासपुर विकास रोडमैप के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। 

केंद्र–राज्य समन्वय के इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की शहरी विकास योजनाएँ अब सीधे राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ चुकी हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हाउसिंग, नगरीय परिवहन और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, जिससे बिलासपुर को विशेष लाभ मिलेगा।

बैठक में बताया गया कि बिलासपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन बनेगा। औद्योगिक निवेश, शहरी रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से यहाँ विकास की नई लहर उत्पन्न होने जा रही है।

बिलासपुर के विकास का यह अभियान प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। शहरी विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना पर केंद्रित यह एजेंडा डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुखी पहल की पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर का विकास केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकल्प है। डबल इंजन सरकार की ताकत के साथ बिलासपुर अब राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

महासमुंद-राजिम मार्ग सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए 147 करोड़ रुपए स्वीकृत

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महासमुंद- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य की सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पांच जिलों के लगभग 174 किलोमीटर लंबी सड़कों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राजिम–फिंगेश्वर–महासमुंद मार्ग के 35.5 किमी हिस्से के उन्नयन के लिए 146.86 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। 


इस संबंध में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने केंद्र एवं राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार की यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगी। बेहतर सड़कें न केवल यातायात को सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। उन्होंने आगे कहा कि महासमुंद से फिंगेश्वर और राजिम तक मार्ग का उन्नयन कार्य क्षेत्र की जनता के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। दोनों जिलों को जोड़ने वाले इस सड़क के माध्यम से व्यापार सहित अन्य गतिविधियां जुड़ी हुई है। लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के लोगों द्वारा भी काफी समय से इस मार्ग के उन्नयन की मांग की जा रही थी। राजिम पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल है। आगामी दिनों में यहां लगने वाले मेला में भीड़ उमड़ती है। महासमुंद से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु राजीवलोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते हैं, जिनका सफर अब सुगमता से पूरा होगा।

आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

महासमुंद को राजिम से जोड़ने वाले यह मार्ग आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से 35 किमी का सफर अब कम समय में और सुगमता से पूरा होगा। महासमुंद और गरियाबंद दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में नई गति आएगी। फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण जो महासमुंद की सीमा के आसपास हैं वें चिकित्सकीय सुविधा के लिए महासमुंद मेडिकल कॉलेज भी आते हैं। इन सभी के लिए यह काफी लाभदायक साबित होगा।

महाराष्ट्र में रेलवे अवसंरचना को अभूतपूर्व बढ़ावा, बजट आवंटन और परियोजनाओं में रिकॉर्ड वृद्धि

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पिछले पाँच वर्षों में महाराष्ट्र में रेलवे अवसंरचना और सुरक्षा कार्यों के लिए बजट आवंटन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहाँ वर्ष 2009–14 के दौरान औसतन ₹1,171 करोड़ प्रति वर्ष का आवंटन था, वहीं 2025–26 में यह बढ़कर ₹23,778 करोड़ हो गया है, जो 20 गुना से भी अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि राज्य में रेल कनेक्टिविटी, क्षमता विस्तार और सुरक्षा को प्राथमिकता दिए जाने का स्पष्ट संकेत है।


नई रेल लाइनों के निर्माण में तीन गुना से अधिक वृद्धि

नई रेल पटरियों के निर्माण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2009–14 के दौरान महाराष्ट्र में कुल 292 किमी नई रेल लाइनें चालू हुईं, यानी औसतन 58.4 किमी प्रति वर्ष। वहीं 2014–25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 2,292 किमी हो गया, जो औसतन 208 किमी प्रति वर्ष है—तीन गुना से अधिक वृद्धि।

मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में क्षमता विस्तार

मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 120 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें और 3,200 से अधिक लोकल ट्रेनें संचालित होती हैं। इस भारी यात्री दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, दादर, जोगेश्वरी, कल्याण, वसई रोड, पनवेल–कलंबोली, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), विरार, दहानू रोड और मीरा रोड जैसे प्रमुख स्टेशनों पर नए प्लेटफॉर्म, पिट लाइन और स्टेबलिंग लाइन का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, 34 स्टेशनों पर 15-कार ईएमयू ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म विस्तार का कार्य जारी है।

MUTP परियोजनाओं से बदलेगी मुंबई की तस्वीर

मुंबई उपनगरीय नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) के तहत MUTP-II (₹8,087 करोड़), MUTP-III (₹10,947 करोड़) और MUTP-IIIA (₹33,690 करोड़) को मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं में CSMT–कुर्ला, मुंबई सेंट्रल–बोरीवली, बोरीवली–विरार, विरार–दहानू रोड, पनवेल–करजत, कल्याण–आसनगांव, कल्याण–बदलापुर सहित कई नए और अतिरिक्त रेल कॉरिडोर शामिल हैं, जो मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में यात्री सुविधाओं और समयबद्धता में बड़ा सुधार लाएंगे।

यात्री क्षमता बढ़ाने के लिए नई लोकल ट्रेनें

यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए MUTP-III और IIIA के तहत 12 डिब्बों वाली 238 नई लोकल ट्रेन रेकों को मंजूरी दी गई है, जिन पर ₹19,293 करोड़ की लागत आएगी। इनके लिए खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

महाराष्ट्र में 89,780 करोड़ रुपये की 38 रेल परियोजनाएं

1 अप्रैल 2025 तक महाराष्ट्र में पूरी तरह या आंशिक रूप से शामिल कुल 38 रेलवे परियोजनाएं (नई लाइन, गेज परिवर्तन और दोहरीकरण) स्वीकृत हैं। इनकी कुल लंबाई 5,098 किमी और अनुमानित लागत ₹89,780 करोड़ है। इनमें से 2,360 किमी लंबाई का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है।

हाल में पूरी और प्रगति पर प्रमुख परियोजनाएं

पुणे–मिरज–लोंडा दोहरीकरण, मनमाड–जलगांव तीसरी लाइन, पनवेल–रोहा दोहरीकरण, उदना–जलगांव दोहरीकरण और दौंड–गुलबर्गा परियोजनाएं हाल ही में पूरी हुई प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं।
इसके अलावा, इंदौर–मनमाड नई लाइन, वर्धा–भुसावल तीसरी व चौथी लाइन, गोंदिया–बल्लारशाह दोहरीकरण और वधावन पोर्ट–पालघर परियोजनाएं राज्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास को नई गति देंगी।

बुलेट ट्रेन और वेस्टर्न डीएफसी को भी रफ्तार

महाराष्ट्र में हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना ने भी गति पकड़ ली है। 100% भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और पुलों व अन्य संरचनाओं का निर्माण जारी है।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का लगभग 178 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से होकर गुजरता है, जिसमें से 76 किमी पहले ही चालू हो चुका है। इससे जेएनपीटी बंदरगाह से दिल्ली-एनसीआर तक माल परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजनाओं की स्वीकृति यातायात संभावनाओं, सामाजिक-आर्थिक लाभ, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और उपलब्ध संसाधनों जैसे कई मानकों पर आधारित होती है। वहीं परियोजनाओं के पूरा होने में भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, भूगर्भीय परिस्थितियां और कानून-व्यवस्था जैसे कारक अहम भूमिका निभाते हैं।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में रेलवे अवसंरचना का यह व्यापक विस्तार राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति और यात्रियों की सुविधा के लिए एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां और विकास पहल

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रायपुर- प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।

मंत्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रूपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। 

नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।

मंत्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।

नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।

120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटलबॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कालोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफार्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये है। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुँच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतुरियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है। कॉमन हज़ार्डस, अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा विकसित की गई है, यह औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान है। नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। इससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगेतथा उद्योगों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा। कॉमन हजारडस वेस्ट अप्रैल 2025 से पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगी। इसकी लैंडफिल क्षमता 60,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। जिससे दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए सुधार वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं। ऋण मुक्त संस्थान इसकी स्पष्ट मिसाल हैं। विकास को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हुआ है। नागरिक केंद्रित सुधारों को सभी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल सेवाओं से सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। सेवा वितरण में समय और लागत दोनों की बचत हुई है। नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। नवा रायपुर विकास का केंद्र बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न अंग बनाया गया है। तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। प्राकृ तिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। नवा रायपुर अटल नगर इन सभी प्रयासों का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। ऋण मुक्त, निवेश अनुकूल और भविष्य तैयार शहर के रूप में इसकी पहचान बनी है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियाँ छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सैरांग रेलवे स्टेशन ने संभाला पहला डायरेक्ट ऑटोमोबाइल रेक, मिजोरम में ऑटो क्षेत्र और कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

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 सैरांग रेलवे स्टेशन ने पहली बार डायरेक्ट इनवर्ड ऑटोमोबाइल रेक को संभाला, जिसमें चंगसारी (गुवाहाटी के पास) से 119 मारुति कारें लाई गईं। यह ऐतिहासिक कदम ऐजॉल में वाहन उपलब्धता को बढ़ाएगा, लंबी सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगा और मिजोरम के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को—जिसमें डीलर, सेवा प्रदाता और ग्राहक शामिल हैं—लाभ पहुंचाएगा। यह राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भारतीय रेलवे की कनेक्टिविटी विस्तार, क्षेत्रीय विकास और समावेशी वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ऑटोमोबाइल अनलोडिंग

बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन मिजोरम के लिए एक प्रमुख बुनियादी ढांचा उपलब्धि है। चुनौतीपूर्ण भूभाग के माध्यम से सावधानीपूर्वक बनाई गई इस लाइन की लंबाई 51.38 किमी है और इसमें 45 सुरंगें हैं। यह रेलवे लाइन क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों के साथ सामरिक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह लाइन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 सितंबर 2025 को उद्घाटित की गई थी। इस अवसर पर उन्होंने ऐजॉल (सैरांग) और दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के बीच राजधानी एक्सप्रेस, ऐजॉल (सैरांग) और गुवाहाटी के बीच मिजोरम एक्सप्रेस, और ऐजॉल (सैरांग) और कोलकाता के बीच एक एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस कदम के साथ मिजोरम का भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित हुआ।

नए ट्रेन सेवाओं के प्रति यात्री प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। तीनों ट्रेनों की उच्च बैठने की दर रही:

  • सैरांग–आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस: 147%

  • सैरांग–गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस: 115%

  • सैरांग–कोलकाता एक्सप्रेस: 139%

यात्री इन ट्रेनों को सुविधाजनक, किफायती और समय की बचत वाला मानते हैं। रेल कनेक्टिविटी ने प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक यात्रा को आसान बनाया है और पास के राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाई है।

बैराबी-सैरांग लाइन पर माल ढुलाई का संचालन उद्घाटन के तुरंत बाद शुरू हुआ। 14 सितंबर 2025 को पहली बार 21 सीमेंट वैगन असम से ऐजॉल भेजे गए। इसके बाद इस मार्ग से सीमेंट, निर्माण सामग्री, ऑटोमोबाइल, रेत और पत्थर के टुकड़े जैसे आवश्यक वस्त्र ढोए गए।

सैरांग से पहली पार्सल खेप 19 सितंबर 2025 को बुक की गई, जब एन्थुरियम फूल पार्सल वैन (सैरांग–आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस) के माध्यम से भेजे गए। 17 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 17 रेक्स हैंडल किए गए। ये विकास दिखाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक कॉरिडोर बन रही है, परिवहन लागत को कम कर रही है और मिजोरम के आर्थिक और बुनियादी ढांचा विकास का समर्थन कर रही है।

नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का तेजी से हो रहा विकास - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है और बस्तर अब विकास की दिशा में सशक्त गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय आज जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक समृद्ध राज्य है, किंतु माओवाद की समस्या प्रारंभ से ही राज्य के विकास में एक बड़ी बाधा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण अब माओवाद के अंत की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नियद नेल्ला नार योजना के दायरे को 5 किलोमीटर से बढ़ाकर 10 किलोमीटर तक विस्तारित किया गया है, जिसके माध्यम से 403 गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचने लगी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि माओवाद के कारण बंद पड़े स्कूल अब पुनः खुल रहे हैं। सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित कर अंदरूनी इलाकों को आवागमन की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। माओवाद से मुक्त गांवों में जनहितकारी योजनाओं का पूर्ण सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप विकास के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी तथा आगामी वर्ष और बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में एक नया इतिहास रच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा और बस्तर पुनः खुशहाल बनेगा। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा ने भी संबोधित किया और बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए खिलाड़ियों को बधाई दी। विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह के अंत में सांसद  महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।

इस मौके पर केबिनेट मंत्री  केदार कश्यप, सांसद भोजराज नाग, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, विधायक विक्रम उसेंडी, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु DoNER मंत्रालय द्वारा आठ उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित

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उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय (DoNER) ने 31 जनवरी 2025 को आठ उच्च-स्तरीय कार्यबल (High-Level Task Forces – HLTFs) का गठन किया, ताकि प्रमुख क्षेत्रों— कृषि एवं बागवानी, खेल प्रोत्साहन, पर्यटन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, आर्थिक कॉरिडोर विकास, पशु-आधारित आवश्यक प्रोटीन में आत्मनिर्भरता, निवेश प्रोत्साहन, तथा बुनियादी ढांचा एवं संपर्क—के लिए रणनीतियाँ और सिफारिशें तैयार की जा सकें।

अब तक HLTFs की कुल 23 बैठकें हो चुकी हैं।

ये कार्यबल पूरे उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र (NER) के लिए कार्य करते हैं। प्रत्येक कार्यबल की अध्यक्षता किसी एक उत्तर-पूर्वी राज्य के माननीय मुख्यमंत्री/ राज्यपाल द्वारा की जाती है, जबकि अन्य तीन उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्री और माननीय मंत्री (DoNER) इसके सदस्य होते हैं। अंतर-राज्यीय समन्वय संरचित परामर्श के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है, जिसमें संयोजक राज्य सभी सहभागी राज्यों से इनपुट एकत्र करता है और सामूहिक निर्णय लेने में सहयोग करता है।

पूर्वोत्तर विकास सेतु (Poorvottar Vikas Setu) पोर्टल, जिसे DoNER मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है, NER में परियोजनाओं के प्रस्तुतिकरण और मूल्यांकन के लिए एक व्यापक सिंगल-विंडो डिजिटल सिस्टम के रूप में कार्य करता है। इस पोर्टल पर राज्य सरकारें और केंद्रीय एजेंसियाँ अपनी कंसेप्ट नोट/ DPRs अपलोड करती हैं, जिससे परियोजना प्रस्तावों का सुव्यवस्थित प्रसंस्करण संभव होता है। यह प्रणाली त्वरित परीक्षण, मंत्रालयों के बीच परामर्श, और निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाती है, क्योंकि यह मैनुअल प्रक्रियाओं को समाप्त कर पारदर्शी एवं संरचित वर्कफ़्लो सुनिश्चित करती है।

यह पोर्टल स्वीकृत प्रस्तावों के खिलाफ धनराशि जारी करने से संबंधित मांगों के प्राप्ति और प्रसंस्करण, एकीकृत निगरानी एवं समन्वय तंत्र के रूप में भी कार्य करता है। इसके माध्यम से मंत्रालय, विभाग और राज्य प्राधिकरण अपने प्रस्तावों की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं, और क्रियान्वयन प्रगति को अपडेट कर सकते हैं। इससे जवाबदेही मजबूत होती है, योजनाओं में अभिसरण बढ़ता है, दोहराव कम होता है, और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के तेज विकास के लिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई संभव होती है।

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत, गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में चयनित "वाइब्रेंट विलेजेज" को समग्र विकास गतिविधियों के लिए प्रस्तावित किया है। हस्तक्षेपों का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचा निर्माण, आजीविका समर्थन, और बेहतर सेवा वितरण पर है।

DoNER मंत्रालय परियोजना नियोजन और क्रियान्वयन को मज़बूत करने के लिए तकनीक-सक्षम प्रणालियों का प्रभावी उपयोग कर रहा है, विशेष रूप से PM गतिशक्ति पोर्टल का। राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत कंसेप्ट नोट्स को इस पोर्टल के माध्यम से संरेखित किया जाता है, जिससे किसी भी संभावित दोहराव को रोका जा सके। यह पोर्टल स्वीकृति पूर्व परीक्षण और पूर्णता के बाद समीक्षा दोनों का समर्थन करता है, जिससे अभिसरण, पारदर्शिता और निगरानी में सटीकता बढ़ती है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से की सौजन्य मुलाकात

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छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य मुलाकात की। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में रेलवे से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों रेल सुविधाओं के विस्तार, नए रेल प्रोजेक्ट्स की प्रगति, तथा प्रगतिरत परियोजनाओं की पूर्णता के संबंध में  विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।मुख्यमंत्री साय ने आग्रह किया कि   स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए, ताकि नागरिकों, उद्योगों और व्यापारियों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ मिल सकें। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे मंत्रालय छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी आज करेंगे जनजातीय गौरव दिवस पर नर्मदा जिले में विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, 9,700 करोड़ से अधिक की सौगात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को गुजरात का दौरा करेंगे। लगभग दोपहर 12:45 बजे प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में देवमोगरा मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे। इसके बाद, लगभग 2:45 बजे वे नर्मदा जिले के डेढियापाडा जाएंगे और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस अवसर पर वे 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा सभा को संबोधित करेंगे।

डेढियापाडा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिनका उद्देश्य जनजातीय समुदायों के उत्थान और क्षेत्र के ग्रामीण एवं दूरदराज़ इलाकों में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM–JANMAN) और धरती आबा जनजातिया ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA–JAGUA) के तहत बनाए गए 1 लाख घरों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय छात्रों के लिए निर्मित 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) का उद्घाटन करेंगे; 228 मल्टी-पर्पस सेंटर्स का उद्घाटन करेंगे जो समुदाय-आधारित गतिविधियों के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे; इसके अतिरिक्त असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस, और इंफाल, मणिपुर में जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) भवन का उद्घाटन करेंगे, जो जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री गुजरात के 14 जनजातीय जिलों के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री जनजातीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने हेतु 748 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण की आधारशिला रखेंगे और DA–JAGUA के अंतर्गत 14 जनजातीय मल्टी-मार्केटिंग सेंटर्स (TMMCs) की नींव रखेंगे, जो समुदाय के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। वे 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का भी शिलान्यास करेंगे, जिन पर 2,320 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। यह सरकार की जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाता है।


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