Media24Media.com: #IndianDemocracy

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #IndianDemocracy. Show all posts
Showing posts with label #IndianDemocracy. Show all posts

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन, डाक टिकटों के जरिए दिखाई गई भारत की एकता और लोकतंत्र की झलक

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा प्रधानमंत्री संग्रहालय के सहयोग से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत: डाक टिकटों के माध्यम से भारत की एकता और लोकतंत्र का उत्सव” शीर्षक से भव्य फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन 14 से 17 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने किया।

उद्घाटन के बाद  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वहां उपस्थित डाक टिकट संग्राहकों (फिलाटेलिस्ट), डिजाइनरों और विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने भारत की समृद्ध डाक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की।

डाक टिकटों में दिखी भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत

इस प्रदर्शनी में भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक घटनाओं और डाक परंपराओं को दर्शाने वाले डाक टिकटों का विशेष संग्रह प्रदर्शित किया गया है।
इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विषय प्रमुख आकर्षण हैं, जो दर्शकों को एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

अपने संबोधन में  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि यह आयोजन डाक विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय की टीम को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि स्वतंत्रता से लेकर अमृत काल और आगे शताब्दी काल तक भारत की यात्रा में डाक विभाग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और आगे भी बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग और संग्रहालय मिलकर देशभर में ऐसी प्रदर्शनी आयोजित करेंगे, जिससे भारत की समृद्ध विरासत को और व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

विशेष चित्र पोस्टकार्ड जारी

इस अवसर पर तीन विशेष चित्र पोस्टकार्ड सेट जारी किए गए, जो निम्न अवसरों को समर्पित हैं:

  • प्रधानमंत्री संग्रहालय का चौथा स्थापना दिवस

  • डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल 2026)

  • भारतीय संविधान

 एमओयू के जरिए सहयोग को नई दिशा

कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग और प्रधानमंत्री संग्रहालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य सांस्कृतिक और डाक विरासत को बढ़ावा देना है। इसके तहत देशभर में प्रदर्शनी, जागरूकता कार्यक्रम और संयुक्त रूप से डाक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। साथ ही संग्रहालय में इंडिया पोस्ट का विशेष काउंटर स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।

प्रधानमंत्री पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन

अपने दौरे के दौरान  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें उनके जीवन, नेतृत्व और प्रमुख योजनाओं को प्रदर्शित किया गया है।

निष्कर्ष

यह फिलाटेलिक प्रदर्शनी न केवल भारत की डाक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि देश की एकता, लोकतंत्र और विविधता को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। यह पहल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

लखनऊ में आज से शुरू होगा 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर होगा मंथन

No comments Document Thumbnail

लखनऊ- उत्तर प्रदेश विधानसभा, लखनऊ में आज से तीन दिवसीय 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का शुभारंभ हो रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा किया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना स्वागत भाषण देंगे। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।

इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय भी विशिष्ट अतिथियों को संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, विधान परिषद एवं विधानसभा के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

आज से 21 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस सम्मेलन के दौरान विधायी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन के प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में तकनीक का उपयोग, विधायकों की क्षमता निर्माण के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन को सशक्त बनाना तथा जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

सम्मेलन का समापन 21 जनवरी 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ होगा। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना उपस्थित रहेंगे और संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन से पूर्व आज ही लखनऊ में भारत के विधायी निकायों के सचिवों का 62वां सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है।

प्रणब मुखर्जी को याद करते हुए: प्रधानमंत्री मोदी का भावपूर्ण संदेश

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने  मुखर्जी को एक महान राजनेता और असाधारण ज्ञान के धनी विद्वान के रूप में स्मरण किया, जिन्होंने दशकों तक सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ भारत की सेवा की।

पोस्ट में, मोदी ने कहा:

“प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। वे एक महान राजनेता और असाधारण गहराई के विद्वान थे, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन के दशकों में अटूट समर्पण के साथ भारत की सेवा की। प्रणब दा की बुद्धिमत्ता और सोच की स्पष्टता ने हर कदम पर हमारे लोकतंत्र को समृद्ध किया। यह मेरा सौभाग्य है कि मैंने उनसे कई वर्षों तक हुए हमारे संवादों के माध्यम से बहुत कुछ सीखा।”

शीतकालीन सत्र से पहले PM मोदी का संबोधन: लोकतांत्रिक ऊर्जा, नीति-केन्द्रित बहस और राष्ट्रहित पर जोर

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद परिसर में 2025 के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले मीडिया को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह सत्र केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि राष्ट्र की तीव्र प्रगति की यात्रा में नई ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह सत्र देश की प्रगति को गति देने के लिए चल रहे प्रयासों में नई ऊर्जा का संचार करेगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने लगातार अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं की जीवंतता और भावना को प्रदर्शित किया है। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने रिकॉर्ड मतदान को राष्ट्र की लोकतांत्रिक शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया। उन्होंने महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को भी अत्यंत उत्साहजनक और प्रेरणादायक बताया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नया विश्वास और नई उम्मीद जगाती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हो रही हैं, विश्व यह देख रहा है कि यह लोकतांत्रिक ढांचा देश की आर्थिक क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत ने सिद्ध किया है कि लोकतंत्र डिलीवर कर सकता है।” मोदी ने जोर देकर कहा, “भारत की आर्थिक प्रगति जिस गति से नए आयाम छू रही है, वह हमें आत्मविश्वास देती है और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए नई शक्ति प्रदान करती है।”

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि सत्र का केंद्र राष्ट्रीय हित, रचनात्मक बहस और नीतिगत परिणाम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वह देश के लिए क्या सोच रखती है और क्या देने के लिए प्रतिबद्ध है। विपक्ष से लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान करते हुए, उन्होंने सार्थक और गंभीर मुद्दे उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने चेताया कि चुनावी हार की निराशा को संसद की कार्यवाही पर हावी नहीं होने देना चाहिए। वहीं, चुनावी जीत के अहंकार से भी सावधान करते हुए उन्होंने कहा, “शीतकालीन सत्र में संतुलन, जिम्मेदारी और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित गरिमा झलकनी चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने सूचित बहस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सदस्यों को यह देखना चाहिए कि क्या अच्छा चल रहा है उसे और बेहतर कैसे बनाया जाए, और जहां आवश्यकता हो वहां सही, रचनात्मक आलोचना प्रस्तुत की जाए ताकि नागरिकों को सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा, “यह काम कठिन है, लेकिन देश के लिए अनिवार्य है।”

पहली बार चुने गए और युवा सांसदों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कई सांसदों को — चाहे वे किसी भी दल के हों — अपनी बात रखने और अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि इन सांसदों को उचित मंच उपलब्ध कराया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा, “संसद और देश, दोनों को नए भारत की नई पीढ़ी की ऊर्जा और विचारों का लाभ मिलना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद नीतियों और डिलीवरी का स्थान है, न कि नाटक या नारेबाज़ी का। “नारे और नाटक के लिए दुनिया में जगहों की कमी नहीं है। लेकिन संसद में हमारा फोकस नीति पर होना चाहिए और हमारी नीयत स्पष्ट होनी चाहिए।”

उन्होंने इस सत्र के विशेष महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सत्र राज्यसभा के नए माननीय सभापति के मार्गदर्शन की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने सभापति को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संसदीय प्रक्रियाएं और मजबूत होंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधारों ने नागरिकों के बीच भरोसे का मजबूत माहौल बनाया है और यह सुधार अब अगली पीढ़ी के सुधारों के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया जाएगा।

हालिया संसदीय प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के समय में संसद को कभी चुनावों की तैयारी के मैदान के रूप में तो कभी चुनावी हार की निराशा निकालने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “देश ने इन तरीकों को स्वीकार नहीं किया है। अब समय आ गया है कि वे अपनी रणनीति और दृष्टिकोण बदलें। यदि आवश्यकता हो तो मैं उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के टिप्स देने के लिए भी तैयार हूँ।”

उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि हम सभी इन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे। और मैं देश को आश्वस्त करता हूँ कि भारत प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने पुनः दोहराया कि “देश नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा में यह सदन नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”


छत्तीसगढ़ विधानसभा का 25 साल का इंतजार खत्म, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए विधानसभा भवन को राज्य को किया समर्पित

No comments Document Thumbnail

रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिला अपना भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन

परंपरा और आधुनिकता का संगम छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन

रायपुर-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के लोकार्पण के साथ ही विधानसभा के खुद के भवन का 25 साल का इंतजार खत्म हो गया। राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में राज्योत्सव के मौके पर छत्तीसगढ़ को अपना भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में नए विधानसभा परिसर में आयोजित लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह हम सबके लिए बहुत गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सदैव लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहरा विश्वास रहा है। राज्य की समृद्धि और खुशहाली के फैसले अब इस भवन में होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां राज्य के हित से जुड़े विधेयकों व मुद्दों पर सार्थक चर्चा से जनता की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पूर्ण होंगी। यह नया भवन छत्तीसगढ़ विधानसभा की परंपरा तथा लोकतंत्र की भावनाओं को और मजबूत करेगी एवं इनका गौरव बढ़ाएंगी। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की धरती छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पिछले 25 वर्षों में गौरवशाली इतिहास रहा है। राज्य सरकार पिछले 21-22 महीनों से मोदी की गारंटी को पूरा करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को अटलजी ने बनाया है और मोदी जी इसे संवारने का काम कर रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है। आज यह भवन, भूमि और मंच अभूतपूर्व समय का साक्षी बन रहा है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। आज के दिन ही 25 वर्ष पहले स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी ने राज्य का निर्माण किया था और आज ही यह अपने निर्माण से विधान तक का सफर पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि नया विधानसभा भवन 80 प्रतिशत स्वदेशी मटेरियल से बना है। सदन में बस्तर के सागौन से निर्मित फर्नीचर और दरवाजे हैं, सीलिंग में धान की बालियों की कलाकारी है। छत्तीसगढ़ को यहां समाहित किया गया है। राज्यपाल रमेन डेका, केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी विधानसभा भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए।   

खूबसूरत इमारत ही नहीं, छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक

छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज 1 नवम्बर के दिन एक नया अध्याय जुड़ा। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिल गया है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है।

कृषि-प्रधान संस्कृति और बस्तर के काष्ठ शिल्प की झलक

‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन

नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा।

324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर

कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं।

हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन

यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है।

500 सीटर ऑडिटोरियम और 200 सीटर सेंट्रल हॉल

विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 200 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है।

तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.