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भारतीय रेलवे ने रचा नया इतिहास, 99.6% विद्युतीकरण के साथ आधुनिक युग में प्रवेश

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नई दिल्ली- Indian Railways ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा के 173 वर्ष पूरे करते हुए आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 16 अप्रैल 1853 को मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) से ठाणे के बीच पहली यात्री ट्रेन के संचालन के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज विश्व के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में शामिल हो चुकी है।


ऐतिहासिक शुरुआत से आधुनिक उपलब्धियों तक

1853 में शुरू हुई रेलवे सेवा ने समय के साथ भाप इंजनों से लेकर डीजल और फिर इलेक्ट्रिक ट्रेनों तक का लंबा सफर तय किया है। आज भारतीय रेलवे का ब्रॉड गेज नेटवर्क 99.6% तक विद्युतीकृत हो चुका है, जो इसे दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्क में शामिल करता है।


यात्री और माल परिवहन में रिकॉर्ड वृद्धि

  • वर्ष 2025–26 में लगभग 741 करोड़ यात्रियों ने रेल यात्रा की

  • प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें संचालित हो रही हैं

  • माल परिवहन 1,670 मिलियन टन तक पहुंचा

  • कुल राजस्व लगभग ₹80,000 करोड़ रहा

ये आंकड़े भारतीय रेलवे की विशालता और उसकी मजबूत भूमिका को दर्शाते हैं।

तकनीकी और सुरक्षा में बड़ा सुधार

भारतीय रेलवे ने सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है—

  • ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली Kavach System 3,100 किलोमीटर मार्ग पर लागू

  • 24,400 किलोमीटर पर कार्य जारी

  • AI आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली 1,800 से अधिक स्टेशनों पर

  • डिजिटल सूचना प्रणाली से यात्रियों को रियल-टाइम जानकारी

आधुनिक ट्रेनों और नई सेवाओं का विस्तार

  • Vande Bharat Express से यात्रा में तेजी और आराम

  • 2025–26 में लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की

  • Amrit Bharat Express से किफायती यात्रा सुविधा

  • 60 नई सेवाएं शुरू


हाई-स्पीड रेल और भविष्य की योजनाएं

सरकार ने रेलवे के लिए ₹2.78 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है।
इसके तहत 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें Mumbai Ahmedabad High Speed Rail प्रमुख है।

डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

  • 1,396 स्टेशनों पर डिजिटल नेटवर्क (IP MPLS)

  • 119 स्टेशनों का आधुनिकीकरण

  • ‘RailOne App’ से डिजिटल सेवाओं की शुरुआत

  • 35 गती शक्ति कार्गो टर्मिनल शुरू


निष्कर्ष

भारतीय रेलवे ने 173 वर्षों में एक लंबा और प्रेरणादायक सफर तय किया है।
आज यह न केवल देश की जीवन रेखा है, बल्कि आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति और सामाजिक एकता का मजबूत आधार भी है।


भारत में महिला-नेतृत्व विकास- सशक्तिकरण से नेतृत्व तक

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सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही 

रायपुर- भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।

भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।

“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 

प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।

दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।

शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।

महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।
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अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है। महिलाएँ आज न केवल अपने परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यही “Women-Led Development” का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति का आधार बनती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश के युवाओं, खेलों और जल-संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च माह के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए विश्व की चुनौतियों, युवाओं की सहभागिता, खेलों में उपलब्धियों, जल-संरक्षण और सौर ऊर्जा क्रांति से जुड़ी प्रेरक कहानियों पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान विश्व परिस्थितियाँ कोरोना संकट के बाद भी शांति और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। पड़ोसी देशों में युद्ध और संघर्ष से पेट्रोल और डीज़ल जैसी आवश्यकताओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और केवल सरकारी सूचना पर भरोसा करें।

युवाओं की सक्रिय भागीदारी और शिक्षा में नवाचार

प्रधानमंत्री ने ज्ञान भारतम सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि देश भर के नागरिक प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर रहे हैं। इस पहल में अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और लद्दाख से हजारों पांडुलिपियाँ ऐप के माध्यम से साझा की गई हैं।

युवा संगठन MY Bharat के माध्यम से देश के युवाओं को नीति निर्माण और बजट प्रक्रिया में जोड़ने का प्रयास हो रहा है। लगभग 12 लाख युवाओं ने इस बजट क्विज़ में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने युवाओं के विचारों की सराहना की, जो किसान कल्याण, महिला नेतृत्व, हरित भारत, खेल प्रतिभा और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

खेलों में उपलब्धियाँ और नई प्रेरणाएँ

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम की रणजी ट्रॉफी जीत और अन्य खेल उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से गोलवीर सिंह (उत्तर प्रदेश) और अनाहत सिंह (स्क्वैश) की अंतरराष्ट्रीय सफलताओं का उल्लेख किया। उन्होंने योग और फिटनेस पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।

जल-संरक्षण और पर्यावरणीय प्रयास

प्रधानमंत्री ने ‘जल संचय अभियान’ और ‘अमृत सरोवर अभियान’ के तहत देश भर में किए गए जल संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने त्रिपुरा के वांगमुन गाँव, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले, और तेलंगाना के मुढ़िगुंटा गाँव के उदाहरण साझा किए, जहाँ समुदाय ने मिलकर जल संकट कम किया।

मछली पालन और महिला उद्यमिता में सफलता

प्रधानमंत्री ने ओडिशा की सुझाता भुयान, लक्षद्वीप की हव्वा गुलजार, कर्नाटक के शिवलिंग सतप्पा जैसे उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्होंने मछली पालन और सौर ऊर्जा में नवाचार करके परिवार और समाज की सेवा की।

सौर ऊर्जा क्रांति और स्वावलंबन

प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत देशभर में सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग और इससे लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पूर्वोत्तर के उदाहरण साझा किए, जहाँ लोगों ने सौर पंप और सोलर पैनल अपनाकर अपने जीवन और व्यवसाय को बेहतर बनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि ‘मन की बात’ अब केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशवासियों के बीच साझा संवाद बन गया है। उन्होंने सभी से प्रेरक कहानियाँ साझा करने का आग्रह किया और देशवासियों को स्वस्थ, खुशहाल और सतर्क रहने की शुभकामनाएँ दीं।


देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



छत्तीसगढ़ को मिला देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार

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उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से किया गया सम्मानित

बेंगलुरु में आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में मिला पुरस्कार

रायपुर- छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को बधाई दी है। यह पुरस्कार राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है।

यह पुरस्कार बेंगलुरु, कर्नाटक में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वंे नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में दिया गया। उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रभारी संयुक्त संचालक नीरज शाहा ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) – 25 वर्षों में ग्रामीण विकास का एक स्तंभ

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मुख्य तथ्य

  • PMGSY के तहत अब तक 8,25,114 किमी ग्रामीण सड़कें स्वीकृत की गईं, जिनमें से 7,87,520 किमी पूर्ण हो चुकी हैं।

  • PMGSY–III के तहत 1,22,393 किमी सड़कें स्वीकृत हुईं, और 1,01,623 किमी (83%) निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुकी हैं।

  • PMGSY–IV (2024–29) के दौरान 25,000 गांवों को जोड़ने के लिए 62,500 किमी सड़कें बनाई जाएंगी, जिसके लिए 70,125 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

  • OMMAS, e-MARG, GPS ट्रैकिंग और तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी की जाती है, जो जिम्मेदारी और सड़क की टिकाऊपन सुनिश्चित करती है।

परिचय

सड़क बुनियादी ढांचा ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह आर्थिक और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाता है, कृषि आय बढ़ाता है, उत्पादक रोजगार के अवसर प्रदान करता है और गरीबी में कमी लाने में योगदान करता है। 2025 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) अपने 25 वर्ष पूरे कर रही है।

25 दिसंबर 2000 को शुरू की गई यह योजना पहले से अनकनेक्टेड ग्रामीण गांवों को सालभर चालू रहने वाली सड़कें प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। PMGSY ने समय के साथ कृषि विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, तथा गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

PMGSY के विभिन्न चरण

  1. Phase I (2000): 1,63,339 ग्रामीण गांवों को सभी मौसम में चलने योग्य सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई।

  2. Phase II (2013): मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करना और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों का उन्नयन।

  3. RCPLWEA (2016): 44 लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म प्रभावित जिलों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाकर सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।

  4. Phase III (2019): 1,25,000 किमी के माध्यमिक मार्ग और प्रमुख ग्रामीण लिंक का उन्नयन। अब तक 1,22,393 किमी स्वीकृत और 1,01,623 किमी पूर्ण।

  5. Phase IV (2024–29): 25,000 ग्रामीण गांवों को जोड़ने के लिए 62,500 किमी सड़कें बनाई जाएंगी, जिसमें विशेष श्रेणी के क्षेत्र, ट्राइबल क्षेत्र और आकांक्षी जिले शामिल हैं।

उन्नत तकनीक का उपयोग

  • OMMAS (Online Management, Monitoring, and Accounting System): वास्तविक समय में निर्माण और वित्तीय प्रगति की निगरानी।

  • e-MARG (Electronic Maintenance of Rural Roads): सड़क निर्माण के पांच वर्षों के लिए रखरखाव और प्रदर्शन आधारित भुगतान।

  • GPS ट्रैकिंग: सभी निर्माण मशीनरी और वाहनों पर निगरानी, गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

तकनीकी मानक और नवाचार

  • इको-फ्रेंडली सामग्री: फ्लाई ऐश, स्लैग, कचरा, प्लास्टिक, क्रंब रबर बिटुमेन, जियोसिंथेटिक्स आदि।

  • नवीन निर्माण तकनीक: कोल्ड मिक्स तकनीक, फुल डेप्थ रीक्लेमेशन, प्लास्टिक का पुन: उपयोग।

  • तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली:

    1. क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्ता जांच।

    2. राज्य गुणवत्ता निरीक्षण (SQMs)।

    3. राष्ट्रीय गुणवत्ता निरीक्षण (NQMs) द्वारा अचानक ऑडिट।

निष्कर्ष

2025 में PMGSY ने 25 साल पूरे किए, और यह ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लगभग 96 प्रतिशत सड़कें पूर्ण होने के साथ, योजना ने ग्रामीण पहुंच, बाजार कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और समावेशी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

PMGSY ने डिजिटल निगरानी प्रणालियों, उन्नत तकनीकों और तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, टिकाऊपन और जलवायु प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित की है। यह योजना सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप न केवल सड़क निर्माण बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता, गरीबी उन्मूलन और समावेशी ग्रामीण परिवर्तन को भी बढ़ावा देती है।

शीतकालीन सत्र से पहले PM मोदी का संबोधन: लोकतांत्रिक ऊर्जा, नीति-केन्द्रित बहस और राष्ट्रहित पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद परिसर में 2025 के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले मीडिया को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह सत्र केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि राष्ट्र की तीव्र प्रगति की यात्रा में नई ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह सत्र देश की प्रगति को गति देने के लिए चल रहे प्रयासों में नई ऊर्जा का संचार करेगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने लगातार अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं की जीवंतता और भावना को प्रदर्शित किया है। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने रिकॉर्ड मतदान को राष्ट्र की लोकतांत्रिक शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया। उन्होंने महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को भी अत्यंत उत्साहजनक और प्रेरणादायक बताया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नया विश्वास और नई उम्मीद जगाती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हो रही हैं, विश्व यह देख रहा है कि यह लोकतांत्रिक ढांचा देश की आर्थिक क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत ने सिद्ध किया है कि लोकतंत्र डिलीवर कर सकता है।” मोदी ने जोर देकर कहा, “भारत की आर्थिक प्रगति जिस गति से नए आयाम छू रही है, वह हमें आत्मविश्वास देती है और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए नई शक्ति प्रदान करती है।”

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि सत्र का केंद्र राष्ट्रीय हित, रचनात्मक बहस और नीतिगत परिणाम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वह देश के लिए क्या सोच रखती है और क्या देने के लिए प्रतिबद्ध है। विपक्ष से लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान करते हुए, उन्होंने सार्थक और गंभीर मुद्दे उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने चेताया कि चुनावी हार की निराशा को संसद की कार्यवाही पर हावी नहीं होने देना चाहिए। वहीं, चुनावी जीत के अहंकार से भी सावधान करते हुए उन्होंने कहा, “शीतकालीन सत्र में संतुलन, जिम्मेदारी और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित गरिमा झलकनी चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने सूचित बहस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सदस्यों को यह देखना चाहिए कि क्या अच्छा चल रहा है उसे और बेहतर कैसे बनाया जाए, और जहां आवश्यकता हो वहां सही, रचनात्मक आलोचना प्रस्तुत की जाए ताकि नागरिकों को सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा, “यह काम कठिन है, लेकिन देश के लिए अनिवार्य है।”

पहली बार चुने गए और युवा सांसदों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कई सांसदों को — चाहे वे किसी भी दल के हों — अपनी बात रखने और अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि इन सांसदों को उचित मंच उपलब्ध कराया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा, “संसद और देश, दोनों को नए भारत की नई पीढ़ी की ऊर्जा और विचारों का लाभ मिलना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद नीतियों और डिलीवरी का स्थान है, न कि नाटक या नारेबाज़ी का। “नारे और नाटक के लिए दुनिया में जगहों की कमी नहीं है। लेकिन संसद में हमारा फोकस नीति पर होना चाहिए और हमारी नीयत स्पष्ट होनी चाहिए।”

उन्होंने इस सत्र के विशेष महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सत्र राज्यसभा के नए माननीय सभापति के मार्गदर्शन की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने सभापति को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संसदीय प्रक्रियाएं और मजबूत होंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधारों ने नागरिकों के बीच भरोसे का मजबूत माहौल बनाया है और यह सुधार अब अगली पीढ़ी के सुधारों के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया जाएगा।

हालिया संसदीय प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के समय में संसद को कभी चुनावों की तैयारी के मैदान के रूप में तो कभी चुनावी हार की निराशा निकालने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “देश ने इन तरीकों को स्वीकार नहीं किया है। अब समय आ गया है कि वे अपनी रणनीति और दृष्टिकोण बदलें। यदि आवश्यकता हो तो मैं उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के टिप्स देने के लिए भी तैयार हूँ।”

उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि हम सभी इन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे। और मैं देश को आश्वस्त करता हूँ कि भारत प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने पुनः दोहराया कि “देश नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा में यह सदन नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियां शुरू—1 नवम्बर को करेंगे पांच महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत

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रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। 01 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी नया रायपुर अटल नगर में राज्योत्सव स्थल में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा वे शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन और प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग सेंटर एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड “शांति शिखर” का शुभारंभ और सत्य सांई हॉस्पिटल में हृदय का ऑपरेशन कराने वाले बच्चों से चर्चा करेंगे।

अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने आज नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।मनोज पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 31 अक्टूबर की रात्रि राजधानी रायपुर पहुंचेंगे और अगले दिन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान नए विधानसभा भवन के लोकार्पण और राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर सभाएं होंगी। इन आयोजनों के लिए सभी तैयारियां शुरू कर दी जाए। बैठक में कलेक्टर गौरव सिंह ने प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर की जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन, कमिश्नर रायपुर महादेव कावरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेंद सिंह सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।  

अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान और पार्किंग की व्यवस्था कर ली जाए। इसी प्रकार राज्योत्सव मेला स्थल और अन्य कार्यक्रमों के स्थल पर पार्किंग, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि नया रायपुर के चौक-चौराहों को व्यवस्थित और सौंदर्यीकरण कर ली जाए। राज्योत्सव मेला स्थल में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए को सेक्टरों में बांटकर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। कार्यक्रम के दौरान सतत् रूप से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाए। इसी प्रकार साउंड सिस्टम उच्च गुणवत्तायुक्त हो। साथ ही दूर संचार विभाग के अधिकारियों को संचार व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए।

राज्योत्सव मेला स्थल पर मुख्य मंच के सामने तीन विशाल डोम बनाएं जा रहे हैं। जिनमें 60 एलईडी स्क्रीनिंग लगाए जाएंगे। मेला स्थल पर लोगों बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही है। लोगों के प्रवेश के लिए दो द्वार होंगे। एक द्वार विभागीय प्रदर्शनी के लिए होगा। विभागीय प्रदर्शनी में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्य मंच के नजदीक ही डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मेला स्थल पर प्रधानमंत्री आवास का मॉडल भी बनाया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्योत्सव मेला स्थल के दोनों तरफ 20-20 हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य शहरों से रायपुर पहुंचने वाले मार्गों पर भी पार्किंग, पेयजल आदि की व्यवस्था की जा रही है। राज्योत्सव मेला स्थल पर 300 शौचालय बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बैड का हॉस्पिटल तथा आईसीयू बनाया जा रहा है। इसके अलावा 25 एम्बुलेंस और पर्याप्त संख्या में फायर ब्रिगेड वाहन की व्यवस्था की जा रही है।


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