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भारत का विनिर्माण क्षेत्र: 2026-27 बजट के साथ नई औद्योगिक क्रांति

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प्रमुख निष्कर्ष (Key Takeaways)

  • FY 2025-26 की पहली तिमाही में विनिर्माण GVA वृद्धि 7.72% और दूसरी तिमाही में 9.13% रही।

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योग भारत के विनिर्माण मूल्य का 46.3% योगदान दे रहे हैं।

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण विस्तार पर जोर।

  • समुद्री खाद्य, माइक्रोवेव ओवन, फुटवियर और विमान निर्माण जैसे क्षेत्रों में कस्टम ड्यूटी छूट।

  • MSME को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ SME ग्रोथ फंड और ₹2,000 करोड़ आत्मनिर्भर भारत फंड टॉप-अप।

परिचय (Introduction)

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में धीमी वृद्धि के बावजूद, भारत ने मजबूत घरेलू नीतियों और आर्थिक आधार के कारण बेहतर प्रदर्शन किया।

विनिर्माण क्षेत्र भारत के 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का मुख्य आधार है। बजट 2026-27 ने निवेश, नवाचार, बुनियादी ढाँचा और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नए उपाय किए हैं।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन

औद्योगिक और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी

  • FY 2025-26 के पहले आधे हिस्से में औद्योगिक GVA 7% बढ़ा।

  • दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8% बढ़ा, जो दो वर्षों में सबसे अधिक था।

  • विनिर्माण क्षेत्र में 8.1% वृद्धि हुई।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर वाहन और परिवहन उपकरणों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

व्यापारिक विश्वास और मांग

  • PMI जनवरी 2026 में 55.4 रहा (50 से ऊपर वृद्धि दर्शाता है)।

  • RBI सर्वे के अनुसार, उद्योगों को मांग बढ़ने और लागत कम होने की उम्मीद है।

 मुख्य उद्योगों की भूमिका

  • सीमेंट: FY25 में उत्पादन ~453 मिलियन टन

  • स्टील: कच्चा स्टील उत्पादन 11.7% बढ़ा

  • कोयला: उत्पादन 1,047.52 मिलियन टन

  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल: 58,617 हजार टन उत्पादन

वैश्विक विनिर्माण में भारत की स्थिति

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योगों का योगदान 46.3%

  • औद्योगिक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (CIP) में भारत की रैंक 37वीं

  • FY26 में निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा (USD 634.3 बिलियन)

 MSME की भूमिका

  • विनिर्माण उत्पादन में योगदान: 35.4%

  • निर्यात में योगदान: 48.58%

  • GDP में योगदान: 31.1%

  • रोजगार: 32.82 करोड़ लोग

बजट 2026-27: विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल

रणनीतिक और उभरते क्षेत्र

  • 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों का पुनर्विकास

  • Biopharma SHAKTI योजना (₹10,000 करोड़)

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

  • रासायनिक पार्क

  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट योजना (₹40,000 करोड़)

  • दुर्लभ पृथ्वी खनिज कॉरिडोर

  • खेल उपकरण निर्माण योजना

  • कंटेनर निर्माण योजना (₹10,000 करोड़)

  • टेक्सटाइल मिशन और मेगा टेक्सटाइल पार्क

  • MSME के लिए SME ग्रोथ फंड

कर और सीमा शुल्क सुधार

  • कई क्षेत्रों में बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट

  • निर्यात के लिए इनपुट आयात सीमा बढ़ाई गई

  • भरोसेमंद निर्माताओं के लिए ड्यूटी भुगतान में सुविधा

  • विमान और रक्षा क्षेत्र के लिए कच्चे माल पर ड्यूटी छूट

सरकारी योजनाएँ और निवेश

PLI योजना

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो में निवेश बढ़ा

  • मोबाइल फोन निर्माण में भारत वैश्विक केंद्र बना

 राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन

  • GDP में विनिर्माण का हिस्सा 25% करने का लक्ष्य

  • 143 मिलियन रोजगार सृजन लक्ष्य

  • निर्यात लक्ष्य USD 1.2 ट्रिलियन

निवेश और नवाचार

  • FY26 में GFCF का हिस्सा 30%

  • सरकारी पूंजीगत खर्च ₹3.07 लाख करोड़ से ₹11.21 लाख करोड़

  • निजी निवेश ₹14.6 लाख करोड़

  • ₹1 लाख करोड़ RDI फंड

  • 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

नवाचार और वैश्विक रैंकिंग

  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंक 66 से 38

  • पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिजाइन में शीर्ष रैंकिंग

  • AI, क्वांटम, बायोटेक, रक्षा और ऊर्जा में अग्रणी शोध

बुनियादी ढाँचा सुधार

  • PM GatiShakti और National Logistics Policy

  • औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी

  • बेहतर लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक नए विस्तार चरण में प्रवेश कर चुका है।
आत्मनिर्भर भारत और 2047 के आर्थिक लक्ष्य के लिए विनिर्माण प्रमुख इंजन बन रहा है।
सरकार की नीतियाँ, निवेश, नवाचार और बुनियादी ढाँचा सुधार भारत को वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।


स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तीसरे चरण (PLI 1.2) का शुभारंभ

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नई दिल्ली- भारत सरकार का इस्पात मंत्रालय "स्पेशलिटी स्टील के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना" के तीसरे चरण (पीएलआई 1.2) की शुरुआत करने जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” दृष्टि के तहत एक प्रमुख पहल है। इस अवसर पर माननीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक भी उपस्थित रहेंगे।

स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना को जुलाई 2021 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹6,322 करोड़ की कुल लागत के साथ स्वीकृति दी गई थी। इस योजना का उद्देश्य भारत को उच्च मूल्य एवं उन्नत श्रेणी के इस्पात उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। योजना का लक्ष्य निर्धारित उत्पाद श्रेणियों में उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहन देना है, जिससे देश में वैल्यू एडिशन बढ़े और रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस एवं अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम हो।

अब तक इस योजना के अंतर्गत ₹43,874 करोड़ का निवेश प्रतिबद्ध किया गया है, जिसमें से ₹22,973 करोड़ का निवेश पहले ही किया जा चुका है, और पहले दो चरणों में 13,000 से अधिक रोजगार सृजित किए जा चुके हैं।

यह योजना 22 उप-श्रेणियों को कवर करती है, जिनमें सुपर अलॉय, सीआरजीओ, अलॉय फोर्जिंग्स, स्टेनलेस स्टील (लॉन्ग और फ्लैट), टाइटेनियम अलॉय और कोटेड स्टील शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत 4% से 15% तक की प्रोत्साहन दरें निर्धारित की गई हैं, जो वित्त वर्ष 2025–26 से पांच वर्षों के लिए लागू होंगी, जबकि भुगतान वित्त वर्ष 2026–27 से शुरू होगा। इसके साथ ही मूल्य निर्धारण का आधार वर्ष भी अद्यतन कर वित्त वर्ष 2024–25 किया गया है ताकि वर्तमान रुझानों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके।

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