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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों को लेकर आयुष मंत्रालय की अहम बैठक

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नई दिल्ली में आज आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, योग गुरु तथा योग संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के सफल आयोजन के लिए योजना और समन्वित क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। उन्होंने कहा कि योग आज केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है, जो लोगों को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित कर रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है, जिससे योग को वैश्विक पहचान मिली है।

मंत्री ने सभी मंत्रालयों से “whole-of-government approach” अपनाने का आह्वान करते हुए 21 जून को होने वाले कॉमन योग प्रोटोकॉल में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, स्कूलों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य संस्थानों में योग को शामिल करने, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय दूतावास और मिशन IDY 2026 के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने जापान में चल रहे योग अभ्यास कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसमें लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली है।

आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ अब एक वैश्विक स्वास्थ्य अभियान बन चुका है।

वहीं एच. आर. नागेंद्र ने बताया कि पिछले वर्ष 26 करोड़ से अधिक लोगों ने योग दिवस में भाग लिया था और इस वर्ष यह संख्या 30 करोड़ से पार जाने की उम्मीद है।

बैठक में IDY 2026 के लिए विभिन्न योजनाओं, गतिविधियों और रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें युवाओं की भागीदारी, डिजिटल पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

आयुष मंत्रालय ने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों और व्यापक भागीदारी के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को और भी भव्य और सफल बनाया जाएगा।

नागोया प्रोटोकॉल के तहत IRCC जारी करने में भारत बना वैश्विक अग्रणी

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भारत ने नागोया प्रोटोकॉल (Access and Benefit-sharing - ABS) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCCs) जारी करने में वैश्विक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है। विश्वभर में जारी कुल 6,311 प्रमाणपत्रों में से भारत ने 3,561 IRCCs जारी किए हैं, जो कुल का 56 प्रतिशत से अधिक है।

ABS क्लियरिंग-हाउस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 142 पंजीकृत देशों में से केवल 34 देशों ने अब तक IRCCs जारी किए हैं। इस सूची में भारत के बाद फ्रांस (964), स्पेन (320), अर्जेंटीना (257), पनामा (156) और केन्या (144) का स्थान है। यह उपलब्धि जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के न्यायसंगत एवं पारदर्शी उपयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नागोया प्रोटोकॉल के तहत, किसी देश द्वारा आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच देने पर IRCC जारी करना आवश्यक होता है। ये प्रमाणपत्र इस बात का आधिकारिक प्रमाण होते हैं कि संसाधनों के उपयोग के लिए पूर्व सूचित सहमति (Prior Informed Consent) प्राप्त की गई है और उपयोगकर्ता एवं प्रदाता के बीच पारस्परिक रूप से सहमत शर्तें तय की गई हैं। इनकी जानकारी ABS क्लियरिंग-हाउस में दर्ज की जाती है।

IRCCs का उपयोग अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग तक जैविक संसाधनों के उपयोग की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभों का उचित और न्यायपूर्ण वितरण किया जाए।

भारत की यह उपलब्धि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत प्रभावी ABS ढांचे के कार्यान्वयन का परिणाम है, जिसे राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड/केंद्र शासित प्रदेश परिषदों और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं और मजबूत संस्थागत तंत्र ने आवेदन प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया है।

यह उपलब्धि वैश्विक जैव विविधता शासन में भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है और जैविक संसाधनों के न्यायसंगत एवं समान लाभ-साझाकरण को बढ़ावा देने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा रेड सैंडर्स संरक्षण हेतु ₹14.88 करोड़ की एबीएस राशि जारी

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) के अंतर्गत आंध्र प्रदेश वन विभाग को ₹14.88 करोड़ (USD 1.65 मिलियन) की राशि जारी की है। यह राशि रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) के संरक्षण, सुरक्षा, पुनर्जनन, अनुसंधान एवं विकास, जागरूकता सृजन तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए निर्धारित की गई है। यह लाभ-साझेदारी योगदान 29 फॉर्म-I आवेदनों से प्राप्त हुआ है।

इस नवीनतम निर्गम के साथ, भारत में अब तक की कुल एबीएस राशि ₹143 करोड़ (USD 15.8 मिलियन) से अधिक हो गई है। अब तक एनबीए द्वारा रेड सैंडर्स संरक्षण और लाभ दावेदारों के लिए आंध्र प्रदेश को ₹104 करोड़ (USD 12.5 मिलियन) से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों को भी ₹15 करोड़ (USD 1.8 मिलियन) से अधिक की एबीएस राशि प्रदान की गई है।

रेड सैंडर्स, अपने विशिष्ट गहरे लाल रंग की लकड़ी के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है और यह पूर्वी घाटों के सीमित क्षेत्रों—विशेष रूप से अनंतपुर, चित्तूर, कडप्पा, प्रकाशम और कर्नूल जिलों (आंध्र प्रदेश) में स्थानिक (एंडेमिक) रूप से पाया जाता है। यह लाभ-साझेदारी राशि 1,115 टन रेड सैंडर्स लकड़ी की नीलामी से प्राप्त हुई है, जिसे राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा जब्त किया गया था और बाद में स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड और पीईसी लिमिटेड जैसी केंद्रीय सरकारी एजेंसियों द्वारा नीलाम किया गया।

उल्लेखनीय है कि रेड सैंडर्स की एबीएस राशि के माध्यम से एनबीए ने संरक्षण, सतत उपयोग, आनुवंशिक सुधार और मूल्य संवर्धन से जुड़े अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया है। ये परियोजनाएं आईसीएफआरई–आईएफजीटीबी, आईसीएफआरई–आईडब्ल्यूएसटी और सीएसआईआर–आईआईसीबी जैसे प्रतिष्ठित सरकारी अनुसंधान संस्थानों द्वारा संचालित की गईं।

आंध्र प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों में किए गए फील्ड सर्वेक्षणों के दौरान 1,513 आनुवंशिक संसाधनों का जियो-रेफरेंस्ड लक्षणों सहित दस्तावेजीकरण किया गया तथा 15,000 से अधिक खड़े पेड़ों में विविधता और प्रजनन व्यवहार का आकलन किया गया। उत्कृष्ट संसाधनों से बीज एकत्र कर एक्स-सीटू संरक्षण किया गया तथा राष्ट्रीय रेड सैंडर्स फील्ड जीन बैंक की स्थापना के प्रयास जारी हैं। ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर), उन्नत अंकुरण तथा उच्च सफलता वाली वनस्पतिक प्रवर्धन तकनीकों को मानकीकृत कर सुदृढ़ किया गया। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीड प्रोडक्शन एरिया के प्रारंभिक दिशा-निर्देश भी विकसित किए गए।

रेड सैंडर्स की छाल और हार्टवुड से साबुन, क्रीम, लिप केयर उत्पाद और वुड कोटिंग्स जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद सफलतापूर्वक विकसित किए गए। विशेष रूप से Royalseema RS Soap® का ट्रेडमार्क (ट्रेडमार्क नं. 5870030) पंजीकृत किया गया तथा Royal Red लिपस्टिक ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों को पूरा किया। यह शोध को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे आईसीएफआरई–वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर द्वारा विकसित किया गया।

यह पहल न्यायसंगत और समान लाभ-साझेदारी, अवैध व्यापार की रोकथाम तथा जैव विविधता शासन में सामूहिक कार्रवाई को सुदृढ़ करने के प्रति एनबीए की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एबीएस से प्राप्त धनराशि को संरक्षण, वैज्ञानिक नवाचार और समुदाय-आधारित विकास में पुनर्निवेश कर एनबीए रेड सैंडर्स के पारिस्थितिक, आनुवंशिक और सामाजिक-आर्थिक मूल्यों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। ये प्रयास इस स्थानिक प्रजाति को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखते हुए जैव विविधता शासन में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करते हैं।

आयुष मंत्रालय ने WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन 2025 का कर्टेन रेज़र किया; 100+ देशों की भागीदारी, भारत फिर बनेगा वैश्विक केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन (17–19 दिसंबर 2025, भारत मंडपम) के लिए कर्टेन रेज़र प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

जनस्वास्थ्य में पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करेगा समिट: आयुष मंत्री

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने गर्व व्यक्त किया कि भारत 2023 में गुजरात में पहली सफल मेजबानी के बाद एक बार फिर इस वैश्विक समिट की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समिट पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की दृष्टि "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" को साकार करता है।

इस वर्ष समिट की थीम है—

“Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Well-being”

इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि व पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ भाग लेंगे।

Ashwagandha पर विशेष कार्यक्रम

मंत्री ने बताया कि आयुष मंत्रालय अश्वगंधा पर एक विशेष साइड इवेंट आयोजित करेगा, जिसमें इसके पारंपरिक व आधुनिक उपयोगों, वैज्ञानिक प्रमाणों और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा होगी।

भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका

जाधव ने कहा कि आयुर्वेद, योग–नौचिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी विश्वभर में भरोसेमंद स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रहे हैं।
जामनगर, गुजरात में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना इसका प्रमाण है।

WHO की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा—समिट बनेगा वैश्विक रोडमैप

WHO की वरिष्ठ सलाहकार और SEARO की पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा कि यह समिट पारंपरिक, पूरक व स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र में वैज्ञानिक व संतुलित रूप से जोड़ने के लिए 10-वर्षीय वैश्विक रोडमैप तय करेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अरबों लोग आज भी पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर हैं, इसलिए शोध, नवाचार और नियमन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

Ashwagandha पर 3-दिवसीय विशेषज्ञ सत्र

17–19 दिसंबर के दौरान आयोजित
“Ashwagandha: From Traditional Wisdom to Global Impact”
सत्र में वैश्विक विशेषज्ञ इसके तनाव-निरोधी, न्यूरो-प्रोटेक्टिव, और इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी गुणों पर चर्चा करेंगे।

PM करेंगे समिट के समापन कार्यक्रम में शिरकत

मंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक समिट के समापन सत्र में भारत के प्रधानमंत्री भी उपस्थित रहेंगे।

उच्च स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिव (आयुष) वैद्य राजेश कोटेचा, PIB के प्रमुख महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, तथा आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत ने समिट की आधिकारिक काउंटडाउन की शुरुआत की

आज का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम 9–10 नवंबर 2025 को आयोजित राजनयिक स्वागत समारोह के बाद आयोजित किया गया, जिसमें WHO–India सहयोग और समिट के वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई थी।

कर्टेन रेज़र के साथ ही भारत ने द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन की उल्टी गिनती शुरू कर दी है, और वैश्विक स्तर पर समग्र, समावेशी एवं सतत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को पुनः सुदृढ़ किया है।


रेड सैंडर्स संरक्षण हेतु भारत की सबसे बड़ी ABS पहल

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भारत के जैव-विविधता संरक्षण प्रयासों को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (NBA) ने प्रतिष्ठित रेड सैंडर्स के संरक्षण हेतु आंध्र प्रदेश वन विभाग को ₹38.36 करोड़ और आंध्र प्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड को ₹1.48 करोड़ जारी किए हैं। इसके साथ ही भारत के एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) वितरण ₹110 करोड़ के प्रभावशाली स्तर को पार कर चुके हैं, जो देश में जैव-विविधता आधारित सबसे बड़े लाभ-साझेदारी वितरणों में से एक है।

विश्वभर में अपनी गहरी लाल लकड़ी के लिए विख्यात रेड सैंडर्स प्राकृतिक रूप से केवल पूर्वी घाट के चुनिंदा क्षेत्रों में, विशेषकर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर, चित्तूर, कडप्पा, प्रकाशम और कुरनूल जिलों में पाई जाती है। आंध्र प्रदेश वन विभाग द्वारा नीलाम या जब्त रेड सैंडर्स लकड़ी तक विनियमित पहुंच के माध्यम से कुल ₹87.68 करोड़ की लाभ-साझेदारी राशि उत्पन्न की गई।

अब तक, NBA ने रेड सैंडर्स के संरक्षण, सुरक्षा और अनुसंधान हेतु आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा के वन विभागों और आंध्र प्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड को ₹49 करोड़ से अधिक जारी किए हैं। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के 198 किसानों को ₹3 करोड़ और तमिलनाडु के 18 किसानों को ₹55 लाख वितरित किए गए हैं।

आंध्र प्रदेश वन विभाग को जारी वर्तमान ₹38.36 करोड़ की राशि अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों को सशक्त करेगी, संरक्षण उपायों को बढ़ाएगी, रेड सैंडर्स वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्रोत्साहित करेगी, जैव-विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से आजीविका के अवसर बढ़ाएगी और दीर्घकालिक निगरानी कार्यक्रम को मजबूत करेगी — जो इस प्रतिष्ठित प्रजाति के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अलावा, NBA ने आंध्र प्रदेश जैव-विविधता बोर्ड द्वारा ₹2 करोड़ की लागत से एक लाख रेड सैंडर्स पौध तैयार करने की एक बड़ी पहल को भी मंजूरी दी है। प्रारंभिक राशि पहले ही जारी की जा चुकी थी, और शेष ₹1.48 करोड़ अब बोर्ड को हस्तांतरित कर दिए गए हैं। ये पौधे बाद में किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वन क्षेत्र के बाहर पेड़ (ToF) कार्यक्रम को बल मिलेगा और इस दुर्लभ प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास के बाहर भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

यह ऐतिहासिक पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग किस प्रकार भारत की जैव-विविधता उपलब्धियों को सीधे समर्थन दे सकता है, वैश्विक जैव-विविधता सिद्धांतों को प्रभावी रूप से लागू करने में भारत के नेतृत्व को उजागर कर सकता है, तथा संरक्षण-आधारित लाभों को स्थानीय समुदायों, किसानों और जैव-विविधता संरक्षकों तक पहुंचा सकता है। NBA राज्य जैव-विविधता बोर्डों, वन विभागों, जैव-विविधता प्रबंधन समितियों और स्थानीय हितधारकों के साथ मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की समृद्ध जैव-विविधता धरोहर की रक्षा के लिए कार्य करता रहेगा।


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