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मार्च 2027 तक पूरे होंगे छत्तीसगढ़ के दो बड़े भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट, सड़क संपर्क और व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य में सड़क संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन तेज होगा और व्यापार एवं औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

सरकार के अनुसार, दोनों हाईवे परियोजनाएं छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों से बेहतर ढंग से जोड़ेंगी, जिससे यात्रियों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी अधिक सुगम और सुरक्षित होगी। इससे यात्रा का समय कम होगा, परिवहन लागत में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

इन परियोजनाओं के पूरा होने से उद्योग, कृषि और खनिज क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण किसानों और उद्यमियों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, जबकि औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन भी तेज और किफायती होगा।

भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह सड़क नेटवर्क क्षेत्रीय विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी ला रही हैं।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी और मजबूत होगी तथा राज्य के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु ₹18,907 करोड़ आवंटित, 26,474 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य

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भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) तथा अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के अंतर्गत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दी गई, जिसमें पीएमजीएसवाई और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के तहत राज्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने की।

समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों तथा राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों (SRRDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity) पर विशेष जोर

सचिव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए शेष वंचित क्षेत्रों तक ग्रामीण सड़क संपर्क सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे पीएमजीएसवाई-I तथा पीएम-जनमन (PM-JANMAN) के अंतर्गत शेष सभी असंबद्ध बस्तियों को शीघ्र जोड़ने की दिशा में कार्य करें। विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की बस्तियों को प्राथमिकता देने को कहा गया। उन्होंने सभी पात्र ग्रामीण क्षेत्रों तक हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने, क्रियान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सड़क अवसंरचना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए सचिव ने संबंधित राज्यों को कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

भाग लेने वाले राज्यों ने अपनी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं और मंत्रालय को आश्वस्त किया कि सभी लंबित कार्य और वार्षिक लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

गुणवत्ता और डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने पर बल

समीक्षा का एक प्रमुख विषय ग्रामीण सड़क परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता रहा। सचिव ने कहा कि टिकाऊ और विश्वसनीय ग्रामीण संपर्क सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और प्रभावी रखरखाव व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

राज्यों से फील्ड स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और परियोजना क्रियान्वयन के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

बैठक में ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म के सार्वभौमिक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान की रीयल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। इसके व्यापक उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आगे की रणनीति

बैठक के समापन पर सचिव ने राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने, परियोजना माइलस्टोन का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकारों, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

राज्यों ने भी क्रियान्वयन में तेजी लाने, अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करने तथा देश की प्रत्येक पात्र बस्ती तक हर मौसम में सड़क संपर्क का लाभ पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कर्नाटक और केरल के राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता व रखरखाव की समीक्षा, नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश

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नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा सहित National Highways Authority of India (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और परियोजना ठेकेदारों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान गडकरी ने कर्नाटक में 7,926 किलोमीटर और केरल में 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने समय पर कार्य पूर्ण करने, उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि राजमार्ग बुनियादी ढांचा टिकाऊ और प्रभावी बन सके। साथ ही, जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने और आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने मानसून से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात के सुचारू संचालन के लिए निवारक उपायों और मजबूत प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों को मानसून के लिए अग्रिम योजना बनाने के निर्देश भी दिए, जिसमें जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण उपाय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना शामिल है, ताकि बाधाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) – 25 वर्षों में ग्रामीण विकास का एक स्तंभ

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मुख्य तथ्य

  • PMGSY के तहत अब तक 8,25,114 किमी ग्रामीण सड़कें स्वीकृत की गईं, जिनमें से 7,87,520 किमी पूर्ण हो चुकी हैं।

  • PMGSY–III के तहत 1,22,393 किमी सड़कें स्वीकृत हुईं, और 1,01,623 किमी (83%) निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुकी हैं।

  • PMGSY–IV (2024–29) के दौरान 25,000 गांवों को जोड़ने के लिए 62,500 किमी सड़कें बनाई जाएंगी, जिसके लिए 70,125 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

  • OMMAS, e-MARG, GPS ट्रैकिंग और तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी की जाती है, जो जिम्मेदारी और सड़क की टिकाऊपन सुनिश्चित करती है।

परिचय

सड़क बुनियादी ढांचा ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह आर्थिक और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाता है, कृषि आय बढ़ाता है, उत्पादक रोजगार के अवसर प्रदान करता है और गरीबी में कमी लाने में योगदान करता है। 2025 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) अपने 25 वर्ष पूरे कर रही है।

25 दिसंबर 2000 को शुरू की गई यह योजना पहले से अनकनेक्टेड ग्रामीण गांवों को सालभर चालू रहने वाली सड़कें प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। PMGSY ने समय के साथ कृषि विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, तथा गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

PMGSY के विभिन्न चरण

  1. Phase I (2000): 1,63,339 ग्रामीण गांवों को सभी मौसम में चलने योग्य सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई।

  2. Phase II (2013): मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करना और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों का उन्नयन।

  3. RCPLWEA (2016): 44 लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म प्रभावित जिलों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाकर सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।

  4. Phase III (2019): 1,25,000 किमी के माध्यमिक मार्ग और प्रमुख ग्रामीण लिंक का उन्नयन। अब तक 1,22,393 किमी स्वीकृत और 1,01,623 किमी पूर्ण।

  5. Phase IV (2024–29): 25,000 ग्रामीण गांवों को जोड़ने के लिए 62,500 किमी सड़कें बनाई जाएंगी, जिसमें विशेष श्रेणी के क्षेत्र, ट्राइबल क्षेत्र और आकांक्षी जिले शामिल हैं।

उन्नत तकनीक का उपयोग

  • OMMAS (Online Management, Monitoring, and Accounting System): वास्तविक समय में निर्माण और वित्तीय प्रगति की निगरानी।

  • e-MARG (Electronic Maintenance of Rural Roads): सड़क निर्माण के पांच वर्षों के लिए रखरखाव और प्रदर्शन आधारित भुगतान।

  • GPS ट्रैकिंग: सभी निर्माण मशीनरी और वाहनों पर निगरानी, गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

तकनीकी मानक और नवाचार

  • इको-फ्रेंडली सामग्री: फ्लाई ऐश, स्लैग, कचरा, प्लास्टिक, क्रंब रबर बिटुमेन, जियोसिंथेटिक्स आदि।

  • नवीन निर्माण तकनीक: कोल्ड मिक्स तकनीक, फुल डेप्थ रीक्लेमेशन, प्लास्टिक का पुन: उपयोग।

  • तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली:

    1. क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्ता जांच।

    2. राज्य गुणवत्ता निरीक्षण (SQMs)।

    3. राष्ट्रीय गुणवत्ता निरीक्षण (NQMs) द्वारा अचानक ऑडिट।

निष्कर्ष

2025 में PMGSY ने 25 साल पूरे किए, और यह ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लगभग 96 प्रतिशत सड़कें पूर्ण होने के साथ, योजना ने ग्रामीण पहुंच, बाजार कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और समावेशी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

PMGSY ने डिजिटल निगरानी प्रणालियों, उन्नत तकनीकों और तीन-स्तरीय गुणवत्ता प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, टिकाऊपन और जलवायु प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित की है। यह योजना सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप न केवल सड़क निर्माण बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता, गरीबी उन्मूलन और समावेशी ग्रामीण परिवर्तन को भी बढ़ावा देती है।

उत्तर बिहार में 13.3 किमी कोसी पुल: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने और जीवन बदलने वाली कनेक्टिविटी

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कोसी नदी के किनारे, जहाँ दशकों से लोग बाढ़, कटाव और लंबी घुमावदार यात्राओं से जूझते रहे हैं, वहाँ अब एक नया सपना आकार ले रहा है। 13.3 किलोमीटर लंबा भेज़ा–बकौर कोसी पुल अब अपने अंतिम निर्माण चरण में है। पुल के चालू होने के बाद यह कोसी नदी पुल 44 किलोमीटर की यात्रा दूरी घटाएगा, और मधुबनी और सुपौल के बाढ़ प्रभावित, पिछड़े क्षेत्रों को सीधे एनएच-27 और पटना से जोड़ देगा। इसके साथ ही नेपाल और पूर्वोत्तर से जुड़े मार्ग भी सहज होंगे, जिससे सीमा-पार व्यापार, क्षेत्रीय वाणिज्य और लंबे समय से प्रतीक्षित निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह विकास भारतमाला परियोजना फेज-I के तहत बिहार में BRT योजना के ईपीसी मोड में हो रहा है। ₹1101.99 करोड़ के निवेश से यह पुल क्षेत्र में कनेक्टिविटी बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना का वित्तीय वर्ष 2026–2027 में पूरा होने का लक्ष्य है।

तीर्थयात्रियों को भी भगवती उचैठ, बिदेश्वर धाम, उग्रतारा मंदिर और सिंहेश्वर स्थान जैसे पवित्र स्थलों तक आसान पहुँच मिलेगी। किसान बाढ़ के दौरान फंसे रहने का डर नहीं महसूस करेंगे। छात्र बिना डर स्कूल पहुँच सकेंगे। व्यापारी समय पर माल पहुंचा सकेंगे। छोटे व्यवसाय बढ़ेंगे; परिवहन सेवाएँ फलें-फूलेंगी; स्थानीय युवाओं को नए रोजगार मिलेंगे।

एक ऐसा क्षेत्र जो कभी उफनती नदी के संघर्षों से परिभाषित होता था, अब यह पुल संभावनाओं की नई राह खोल रहा है। और जब कोसी पुल के अंतिम हिस्से नदी के ऊपर उठ रहे हैं, उत्तर बिहार के लोग एक ही भावना में एकजुट हैं – उनका जीवन बदलने वाला है।


त्वरित तथ्य:

  • परियोजना की लंबाई: 13.300 किमी

  • अनुमानित निर्माण लागत: ₹1101.99 करोड़

  • पूरा होने की तिथि: वित्तीय वर्ष 2026-2027

मधुबनी, सुपौल, साहर्सा और आसपास के जिलों के लोगों के लिए यह पुल केवल लोहे और कंक्रीट का ढांचा नहीं है। यह जीवनरेखा है, आशा की एक अविच्छिन्न कड़ी है, जो कोसी के बाढ़ क्षेत्र की चुनौतियों में फंसी समुदायों की यात्रा को आसान बनाएगी।

स्थानीय दृष्टिकोण:

  • रोशन कुमार, साहर्सा के एक स्कूल शिक्षक: “अभी भेज़ा पहुँचने के लिए मुझे लगभग 70 किलोमीटर ज्यादा यात्रा करनी पड़ती है। पहले हमें दरभंगा या फूलपरास होकर 150–200 किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती थी। पुल खुलने के बाद साहर्सा से मधुबनी की दूरी लगभग 70 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह सिर्फ पुल नहीं, बल्कि समय, पैसे और ऊर्जा की बचत है।”

  • पंकज, मेडिकल शॉप के मालिक: “बाढ़ के समय मरीजों को अस्पताल ले जाना कठिन था। अब एम्बुलेंस आधे घंटे में पार कर सकेगी। यह सम्मान और सुरक्षा है।”

  • नेहा, 11वीं कक्षा की छात्रा: “पहले लोग नदी पार करने से डरते थे। अब सब बदल जाएगा। हम सुरक्षित स्कूल पहुँच पाएंगे और हमारा क्षेत्र राज्य के बाकी हिस्सों से जुड़ा महसूस करेगा।”

यह पुल केवल यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है।

राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक में सड़क, परिवहन और राजमार्ग परियोजनाओं का मूल्यांकन

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राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक आज आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन और राजमार्ग विभाग (MoRTH) की परियोजनाओं के साथ-साथ रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना था।

बैठक में तीन परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें एक सड़क/हाईवे परियोजना और दो रेलवे परियोजनाएं शामिल थीं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक एवं सामाजिक नोड्स तक अंतिम मील कनेक्टिविटी और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। ये परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने, यात्रा समय घटाने और परियोजना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने की संभावना रखती हैं।

परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण:

रेल मंत्रालय (MoR):

  1. पुनरख – कीउल स्टेशन के बीच तीसरी और चौथी लाइन (बिहार)

    • लंबाई: लगभग 49.57 किमी

    • क्षेत्र: पटना और लखीसराय जिले

    • महत्व: राज्य के प्रमुख औद्योगिक और कृषि गलियारों में रेलवे क्षमता और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना

    • लाभार्थी: Ultratech Cement Plant, ACC Cement, NTPC Barauni, NTPC Super Thermal Power Plant, Carriage Repair Workshop, SJVN Power Plant और अन्य छोटे और मध्यम उद्योग

    • अतिरिक्त लाभ: पर्यटन स्थलों (बापू टॉवर, महावीर मंदिर, गांधी संग्रहालय, खुदा बक्स़ लाइब्रेरी, कुम्हार पार्क, तख़त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब, गोल घर, बिहार संग्रहालय) की पहुंच में सुधार

  2. सिलघाट – डेकर्गाओं नई BG लाइन (असम)

    • लंबाई: लगभग 27.50 किमी

    • महत्व: ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ना

    • लाभ: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-15 और NH-715 के साथ मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी

    • उद्देश्य: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH):

  1. ओल्ड पुणे नाका से बोरमानी नाका तक 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर (NH-65, महाराष्ट्र)

    • लंबाई: लगभग 9.66 किमी

    • परियोजना: भरतमाला परियोजना (चरण-I) के तहत

    • उद्देश्य: शहरी ट्रैफिक कम करना, यात्रा समय घटाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और वाहनों के उत्सर्जन को कम करना

    • लाभ: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करना, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करना

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने की। बैठक में परियोजनाओं की संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और कनेक्टिविटी में सुधार पर विशेष चर्चा हुई।

ये पहलें पीएम गति शक्ति के तहत भारत में एकीकृत और दक्ष लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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