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भारतीय तटरक्षक बल के लिए चौथे नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) की कील रखी गई

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मुंबई- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए बनाए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से चौथे पोत की कील रखने (Keel Laying) की रस्म आज मुंबई में संपन्न हुई। यह पोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है।

अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक प्रणालियों से लैस यह पोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की स्वदेशी रक्षा एवं समुद्री निर्माण क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह परियोजना भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इन छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को संपन्न हुआ था।

इन अत्याधुनिक पोतों के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तटीय सुरक्षा और समुद्री कानून प्रवर्तन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, यह परियोजना भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में संभाला कार्यभार

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वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने पर फ्लैग ऑफिसर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में विभिन्न कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, विभूति और किरण की कमान संभाली तथा फ्रिगेट त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की भी कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन किया गया।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा तथा रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यूनाइटेड किंगडम के स्नातक हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक (नेवल प्लान्स), निदेशक (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) और प्रधान निदेशक DSCT जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

फ्लैग रैंक में पदोन्नति के बाद उन्होंने 2018 में असिस्टेंट कंट्रोलर (कैरियर प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट कंट्रोलर (वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने वेस्टर्न फ्लीट की कमान संभाली और बाद में नेशनल डिफेंस अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया।

उन्होंने 25 मई 2024 को वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में उन्होंने नौसेना की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

पदभार ग्रहण से पहले वे अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया।

वाइस एडमिरल अजय कोचर का परिवार उनकी पत्नी रेमन, जो विज्ञापन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक कलाकार हैं, और उनके दो बच्चों से मिलकर बना है। उनकी पुत्री सबा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा पुत्र करण एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं।

DRDO और भारतीय नौसेना की बड़ी कामयाबी, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का दम दिखाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Navy ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर से किया गया।

इस परीक्षण की खास बात यह रही कि एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों को एक साथ (salvo) लॉन्च किया गया, जो भारत के लिए पहली बार है। दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी परीक्षण मानकों को पूरी तरह हासिल किया।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

NASM-SR मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें:

  • उन्नत सीकर और एवियोनिक्स सिस्टम

  • फाइबर-ऑप्टिक आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक

  • सटीक गाइडेंस और कंट्रोल तकनीक

जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे दुश्मन के जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती हैं।

सटीक निशाना और सफल परीक्षण

इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने वॉटरलाइन हिट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, यानी जहाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सटीक वार किया। परीक्षण की निगरानी चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई।

कई संस्थानों का संयुक्त प्रयास

इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) सहित DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, नौसेना, वायुसेना और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की समुद्री सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

वहीं DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत की सराहना की।

क्या है महत्व?

यह परीक्षण भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे:

  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

  • दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला संभव होगा

  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा

कुल मिलाकर, यह सफलता भारत को आधुनिक और शक्तिशाली रक्षा तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाती है।

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 शुरू, भविष्य की रणनीति और सुरक्षा पर मंथन

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नई दिल्ली- Indian Navy का बहुप्रतीक्षित कमांडर्स सम्मेलन 01/2026 नौ सेना भवन में शुरू हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, ऑपरेशनल एवं क्षेत्रीय कमांडर तथा मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

नौसेना प्रमुख का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑपरेशनों की बढ़ती गति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नौसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार (Combat Ready) रहना चाहिए। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एक “Future Ready Force” तैयार करना समय की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक दृष्टिकोण

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दोहराया। उन्होंने मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एक मजबूत, समन्वित और विश्वसनीय रणनीति विकसित की जा सके।

 सम्मेलन में प्रमुख चर्चाएं

सम्मेलन के दौरान कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया—

  • संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations)

  • समुद्री और तटीय क्षमता में वृद्धि

  • जहाजों की मरम्मत और रखरखाव

  • बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा उपाय

  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मानव संसाधन विकास

  • नवाचार और आत्मनिर्भरता (Indigenisation)

 सीडीएस का महत्वपूर्ण संदेश

जनरल अनिल चौहान (Chief of Defence Staff) ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 देश की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक योजना और भविष्य की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष आने वाले समय में भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।


‘दुनागिरी’ युद्धपोत भारतीय नौसेना को सौंपा गया, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को मिला बड़ा बल

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‘दुनागिरी’ (यार्ड 3023), नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पांचवां और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता में निर्मित दूसरा जहाज, 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म हैं, जो समुद्री क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

‘दुनागिरी’ पूर्व INS दुनागिरी (लींडर श्रेणी) का आधुनिक स्वरूप है, जिसने 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक 33 वर्षों तक देश की सेवा की। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टेल्थ, फायरपावर, ऑटोमेशन और सर्वाइवेबिलिटी में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस जहाज को वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और वारशिप ओवरसीइंग टीम (कोलकाता) की निगरानी में बनाया गया। P17A फ्रिगेट्स स्वदेशी जहाज डिजाइन, स्टेल्थ, सुरक्षा और युद्ध क्षमता में नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ की अवधारणा के तहत इसे निर्धारित समयसीमा में तैयार किया गया।

इन जहाजों में उन्नत हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल, MF-STAR रडार, MRSAM सिस्टम, 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम, साथ ही पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं। यह CODOG (कंबाइंड डीजल या गैस) प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिसमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन का संयोजन होता है।

‘दुनागिरी’ पिछले 16 महीनों में नौसेना को सौंपी गई पांचवीं P17A श्रेणी की जहाज है। पहले चार जहाजों के निर्माण से प्राप्त अनुभव के कारण इसका निर्माण समय घटाकर 80 महीने कर दिया गया, जो पहले जहाज ‘नीलगिरी’ के 93 महीनों की तुलना में कम है।

इस परियोजना में 75% स्वदेशीकरण हासिल किया गया है और इसमें 200 से अधिक MSMEs शामिल रहे हैं। इससे लगभग 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह उपलब्धि देश की डिजाइन, निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है और भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भर भारत के प्रति दृढ़ संकल्प को मजबूत करती है।

संशोधक’ सर्वे वेसल भारतीय नौसेना को सौंपा गया, समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

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भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया अंतिम सर्वे वेसल (लार्ज) जहाज ‘संशोधक’ (यार्ड 3028), जिसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता में बनाया गया है, 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

चार सर्वे वेसल (लार्ज) जहाजों के निर्माण का अनुबंध 30 अक्टूबर 2018 को किया गया था। इसी श्रेणी के अन्य जहाज—INS संधायक, INS निर्देशाक और INS इक्षाक—को क्रमशः 3 फरवरी 2024, 18 दिसंबर 2024 और 6 नवंबर 2025 को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

ये जहाज भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। ‘संशोधक’ तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने में सक्षम है, जिसमें बंदरगाहों के मार्गों का अध्ययन और नेविगेशनल चैनलों का निर्धारण शामिल है। इसके अलावा, यह रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए समुद्र विज्ञान एवं भू-भौतिकीय डेटा भी एकत्र करेगा।

लगभग 3400 टन के विस्थापन और 110 मीटर लंबाई वाले इस जहाज में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जैसे डेटा अधिग्रहण एवं प्रोसेसिंग सिस्टम, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), डीजीपीएस लॉन्ग-रेंज पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार। दो डीजल इंजनों से संचालित यह जहाज 18 नॉट से अधिक गति प्राप्त कर सकता है।

इस जहाज की कील जून 2022 में रखी गई थी और जून 2023 में इसे लॉन्च किया गया। डिलीवरी से पहले इसने बंदरगाह और समुद्र में व्यापक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

‘संशोधक’ में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसकी डिलीवरी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत सरकार और भारतीय नौसेना के सतत प्रयासों का प्रमाण है, साथ ही यह MSMEs और भारतीय उद्योग के सहयोग से देश की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने का उदाहरण भी है।

रक्षा मंत्रालय ने BEL के साथ 1,950 करोड़ रुपये का समझौता किया, स्वदेशी माउंटेन रडार से वायु रक्षा को मिलेगी मजबूती

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आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया के तहत भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ एक महत्वपूर्ण पूंजीगत खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारतीय वायुसेना के लिए दो माउंटेन रडार, उनसे जुड़े उपकरणों और आवश्यक अवसंरचना की खरीद के लिए लगभग 1,950 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

यह अनुबंध ‘बाय (इंडियन–इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के अंतर्गत 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में MoD और BEL के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह माउंटेन रडार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रडार विकास प्रतिष्ठान द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है तथा इसका निर्माण BEL द्वारा किया जाएगा। इन रडारों की स्थापना और कमीशनिंग से देश की वायु रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, इस खरीद से विदेशी उपकरणों पर निर्भरता भी कम होगी।

रक्षा मंत्रालय ने 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय ने 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में कुल 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये अनुबंध टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद और P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के डिपो स्तर निरीक्षण से संबंधित हैं।

टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली

भारतीय सेना के लिए 445 करोड़ रुपये की लागत से टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद का अनुबंध रूस की कंपनी JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया। यह समझौता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों के खिलाफ भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगी। साथ ही, यह समझौता भारत-रूस के रणनीतिक रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

P8I विमान का निरीक्षण

भारतीय नौसेना के P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों के डिपो स्तर निरीक्षण के लिए 413 करोड़ रुपये का अनुबंध बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड (बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी) के साथ ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के तहत किया गया, जिसमें 100% स्वदेशी सामग्री शामिल है। यह अनुबंध देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा के माध्यम से P8I बेड़े के रखरखाव को सुनिश्चित करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

इन समझौतों से भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

कैडेट ट्रेनिंग शिप ‘कृष्णा’ का 16 फरवरी को लॉन्च, भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण में बड़ी उपलब्धि

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चेन्नई-भारतीय नौसेना के लिए निर्माणाधीन तीन कैडेट ट्रेनिंग शिप (CTS) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली (चेन्नई) में लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपरा के अनुसार, अनुपमा चौहान ने जहाज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों और एलएंडटी शिपबिल्डिंग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण

यह जहाज एलएंडटी द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। इस जहाज को वर्ष 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की योजना है।

कैडेट्स के प्रशिक्षण में होगा उपयोग

इन कैडेट ट्रेनिंग शिप्स का उपयोग समुद्र में अधिकारी कैडेट्स (महिला कैडेट्स सहित) के प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा, जो भूमि पर बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर चुके होंगे। इसके अलावा मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स को भी इन जहाजों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम

यह उपलब्धि भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है, जिससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी।



डीआरडीओ ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 03 फरवरी, 2026 को लगभग 10:45 बजे ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है। यह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में सक्षम बनाती है, जिससे भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त प्राप्त होगी।

इस परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। ग्राउंड बूस्टर मोटर द्वारा प्रणाली को वांछित मैक संख्या तक पहुँचाने के बाद नोज़ल-रहित बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर तथा फ्यूल फ्लो कंट्रोलर ने सफलतापूर्वक कार्य किया। प्रणाली के प्रदर्शन की पुष्टि उड़ान के दौरान प्राप्त डेटा के माध्यम से की गई, जिसे बंगाल की खाड़ी के तट पर चांदीपुर ITR द्वारा तैनात अनेक ट्रैकिंग उपकरणों ने रिकॉर्ड किया।

इस प्रक्षेपण की निगरानी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) तथा ITR, चांदीपुर शामिल हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SFDR तकनीक के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी।
वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण में शामिल सभी टीमों को शुभकामनाएँ दीं।


भारत-ब्रुनेई रक्षा सहयोग की नई शुरुआत: संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत-ब्रुनेई संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) की पहली बैठक 09 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान एवं संयुक्त प्रशिक्षण का विस्तार, समुद्री सुरक्षा सहयोग—विशेषकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)—क्षमता निर्माण, रक्षा उद्योग सहयोग एवं तकनीकी साझेदारी के अवसर शामिल थे।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और ब्रुनेई के रक्षा मंत्रालय की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने की। बैठक से पूर्व, सह-अध्यक्षों ने रक्षा सहयोग पर JWG की स्थापना हेतु संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToR) पर हस्ताक्षर किए।

ToR पर हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। JWG एक रचनात्मक मंच के रूप में कार्य करेगा, जिसके माध्यम से वर्तमान रक्षा संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया जाएगा।

दोनों पक्षों ने रक्षा साझेदारी में बढ़ते गति को स्वागत योग्य बताया और JWG तंत्र के अंतर्गत एक संरचित रोडमैप लागू करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान, ब्रुनेई की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की। उन्होंने DPSU भवन का भी दौरा किया, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हाल ही में उद्घाटित अत्याधुनिक परिसर है। यह भवन सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जहां सहयोग, नवाचार और भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा: भारत वैश्विक संतुलन और जिम्मेदारी का भरोसेमंद साझेदार बन रहा है

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि, तकनीकी क्षमताएँ और सिद्धांत आधारित विदेश नीति ने इसे बदलते वैश्विक परिदृश्य में संतुलन और जिम्मेदारी की आवाज़ बना दिया है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और ग्लोबल साउथ के देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं।

मंत्री ने जोर दिया कि भारत सांस्कृतिक मूल्यों, जिम्मेदारी, रणनीतिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ आज के वैश्विक मुद्दों को आकार दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश द्वारा अपनाई गई पारदर्शी नीतियाँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित रुख भारत की विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।

 सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीतिक सुधार

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, सीमा-पार चरमपंथियों का समर्थन, मौजूदा स्थिति में हस्तक्षेप, समुद्री दबाव और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में सुधार केवल विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता हैं। ये सुधार संस्थाओं की अनुकूलन क्षमता बढ़ाते हैं, सशस्त्र बलों की चुस्ती और तत्परता में वृद्धि करते हैं, और देश को अपनी दिशा तय करने का आत्मविश्वास देते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुरक्षा, आधुनिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • सीमा और समुद्री अवसंरचना को मजबूत करना

  • सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण नई तकनीकों, प्लेटफ़ॉर्म और संरचनाओं के माध्यम से

  • खरीद प्रक्रियाओं में सुधार ताकि गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो

  • आत्मनिर्भरता के माध्यम से रक्षा उद्योग में नवाचार और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना

  • स्टार्टअप्स, डीप-टेक और R&D में निवेश

  • सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता

सशक्त और लचीला भारत

रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षमता के साथ-साथ लचीलापन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारतीय सशस्त्र बल देश की लचीलापन की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनका कौशल, तत्परता और अनुशासन भारत को पड़ोसी चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने कहा, "भारत शांति और संवाद में विश्वास करता है, लेकिन जब देश और नागरिकों की सुरक्षा की बात आती है, तो कोई समझौता नहीं करता।"

सशस्त्र बलों का व्यापक योगदान

राजनाथ सिंह ने बताया कि सशस्त्र बल केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं हैं।

  • आपदा के समय नागरिक प्रशासन का समर्थन

  • समुद्री हितों की सुरक्षा

  • अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करना, संयुक्त अभ्यास और शांति संचालन के माध्यम से

  • पेशेवरता और विश्वास निर्माण

इसलिए सशस्त्र बलों में सुधार और आधुनिकीकरण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक भविष्य में निवेश हैं।

वैश्विक शांति और मानव कल्याण में योगदान

मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार केवल अलग-थलग कार्य नहीं हैं, बल्कि भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाने में मदद कर रहे हैं जो वैश्विक शांति और मानव कल्याण को मजबूत करे।

उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति, सुरक्षा और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने से विश्व को कई लाभ होंगे:

  1. स्थिर भारत, स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान देगा

  2. डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर समावेशी और पारदर्शी शासन का मॉडल प्रस्तुत करता है

  3. एथिकल एप्रोच से उभरती तकनीकों (AI, साइबर, अंतरिक्ष) में मानक स्थापित होंगे

  4. शांति, जलवायु और मानवतावादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय सहयोग में नैतिक वजन जोड़ती है

डिजिटल और ग्रीन पहलाओं का शुभारंभ

EKAM: AI as a Service – iDEX ADITI 2.0

  • सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी AI समाधान

  • डेटा सुरक्षा और मिलिट्री ऑपरेशनल डोctrines के लिए कस्टमाइज्ड प्लेटफ़ॉर्म

Prakshepan

  • मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी ऐप

  • भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की भविष्यवाणी

  • दूरदराज क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन के लिए चेतावनी प्रणाली

AI Handbook for Military Leaders

  • कमांड, कंट्रोल, इंटेलिजेंस, युद्ध प्रणाली और ऑटोनोमस प्लेटफ़ॉर्म में AI का उपयोग

Digitalisation 3.0 – From Boots to Bytes & Towards AI Readiness

  • भारतीय सेना का तकनीकी रूपांतरण

  • 100 डिजिटल एप्लिकेशन, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर

ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट (Ladakh, Chushul)

  • 4,500 मीटर ऊँचाई पर

  • फॉसिल ईंधन DG सेट्स की जगह

  • वार्षिक 1,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ

  • सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

  • रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार

  • अन्य वरिष्ठ सैन्य, कूटनीतिक, शैक्षिक और तकनीकी प्रतिनिधि

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी सीमाओं पर रणनीतिक विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 27 नवंबर 2025 से आयोजित हुआ।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025’ का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (27 नवंबर, 2025) नई दिल्ली में भारतीय सेना के तीसरे संस्करण के सेमिनार, ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025’ के उद्घाटन सत्र में शिरकत की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने भारत की संप्रभुता की रक्षा में पेशेवर दक्षता और देशभक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। हर सुरक्षा चुनौती, चाहे वह पारंपरिक हो, सशस्त्र विद्रोह विरोधी हो या मानवीय मिशन, हमारे बलों ने अद्वितीय अनुकूलन क्षमता और संकल्प दिखाया है। ऑपरेशन सिंदूर की हाल की सफलता हमारे आतंकवाद विरोधी और निवारक रणनीति का निर्णायक क्षण है। दुनिया ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को देखा, बल्कि यह भी महसूस किया कि भारत शांति की प्राप्ति के लिए मजबूती के साथ, परंतु जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के लिए नैतिक स्पष्टता भी रखता है।

अपने परिचालनात्मक कर्तव्यों से परे, भारतीय सशस्त्र बल राष्ट्रीय विकास के स्तंभ बने हुए हैं। सीमाओं को मजबूत करने के अलावा, उन्होंने बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी, पर्यटन और शिक्षा के माध्यम से सीमा क्षेत्रों के विकास में भी योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज का भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नए शक्ति केंद्रों, तकनीकी विघटन और बदलती गठबंधनों द्वारा पुनःनिर्मित हो रही है। साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और संज्ञानात्मक युद्ध जैसे नए प्रतिस्पर्धा क्षेत्रों ने शांति और संघर्ष की रेखाओं को धुंधला कर दिया है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम के हमारी सभ्यता के दृष्टिकोण से, हमने यह दिखाया है कि रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक जिम्मेदारी सह-अस्तित्व में रह सकती हैं। हमारी कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बल मिलकर ऐसा भारत प्रस्तुत करते हैं जो शांति चाहता है, लेकिन अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने के लिए दृढ़ और सक्षम है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि सेना ‘दशक परिवर्तन’ (Decade of Transformation) के तहत मापनीय परिणामों के माध्यम से खुद को बदल रही है। यह संरचनाओं में सुधार कर रही है, डोक्ट्रिन्स को पुनः निर्देशित कर रही है और सभी क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार और मिशन-कुशल बनने के लिए क्षमताओं को पुनः परिभाषित कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि ये रक्षा सुधार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि सेना युवाओं और मानव संसाधन में निवेश कर रही है। यह शिक्षा, NCC के विस्तार और खेल के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति का संचार कर रही है। उन्होंने कहा कि युवा महिला अधिकारियों और सैनिकों के योगदान का विस्तार, उनके कार्य और चरित्र दोनों में, समावेश की भावना को बढ़ावा देगा। इससे और अधिक युवा महिलाएँ भारतीय सेना में शामिल होंगी और अन्य पेशों में भी कदम रखेंगी।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025 की चर्चाएँ और परिणाम नीति-निर्माताओं को हमारे राष्ट्रीय नीति के भविष्य के स्वरूप को आकार देने में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा व्यक्त किया कि हमारे सशस्त्र बल उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत रहेंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संकल्प और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेंगे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को में भारतीय समुदाय से किया संवाद

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को के रबात में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया। इस दौरान भारतीय समुदाय ने ऑपरेशन सिंदूर में सशस्त्र बलों की निर्णायक कार्रवाई की सराहना की। रक्षा मंत्री ने दोहराया कि सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार थे और पंहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले के बाद उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी गई थी। उन्होंने कहा कि भारत की कार्रवाई संतुलित और गैर-उत्तेजक थी और रामचरितमानस का उद्धरण देते हुए कहा, “हमने धर्म देखकर नहीं, कर्म देखकर मारा है।”

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा पिछले दशक में हासिल की गई बहुआयामी प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में 11वें स्थान से 4वें स्थान तक उभरकर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है और जल्द ही शीर्ष तीन में प्रवेश करने के लिए तैयार है।

उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति, ज्ञान अर्थव्यवस्था में तेजी, स्टार्टअप वृद्धि (18 से 118 यूनिकॉर्न), और रक्षा उद्योग की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित किया। रक्षा उद्योग का उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये, और निर्यात 23,000 करोड़ रुपये से अधिक, 100 से अधिक देशों को किया जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने भारतीय समुदाय के परिश्रम, समर्पण और ईमानदारी की सराहना की और स्वामी विवेकानंद के शब्द याद दिलाए कि भारतीय संस्कृति में चरित्र ही व्यक्ति का वास्तविक मूल्य तय करता है। प्रवासी समुदाय ने भारत की मजबूत आर्थिक नींव और बढ़ती सैन्य शक्ति पर गर्व व्यक्त किया।


17 सितंबर 1949 से 2025 तक : आईडीएसई की 76 वर्ष की उपलब्धियों का उत्सव

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भारतीय रक्षा अभियंता सेवा (IDSE) का 76वां स्थापना दिवस मनाया गया

भारतीय रक्षा अभियंता सेवा (IDSE), जो रक्षा मंत्रालय (MoD) के अंतर्गत एक संगठित ग्रुप ‘ए’ कैडर है, ने 17 सितंबर 2025 को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में अपना 76वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि थे।

अपने संबोधन में रक्षा सचिव ने आईडीएसई कैडर अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वस्तरीय अवसंरचना के माध्यम से राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए वे उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहें तथा बदलते समय के अनुरूप नई प्रौद्योगिकियों को अपनाएं।

रक्षा सचिव के संबोधन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय के वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी इस आयोजन में उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि आईडीएसई की औपचारिक स्थापना 17 सितंबर 1949 को हुई थी, जो भारत की रक्षा अभियंत्रण यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही है। इस कैडर के अधिकारी देशभर के सैन्य स्टेशनों पर तैनात रहते हैं और वे रक्षा अवसंरचना के निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसमें आवासीय परिसर, तकनीकी एवं प्रशासनिक भवन, हवाई पट्टियां, हैंगर, नौसैनिक जेट्टी, अस्पताल और सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल तथा डीआरडीओ के लिए विशेष सुविधाओं का विकास शामिल है।


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