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WTO MC14 में भारत की मजबूत पैरवी, समानता और सर्वसम्मति आधारित व्यापार प्रणाली पर जोर

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याउंडे (कैमरून)- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दूसरे दिन WTO सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने चर्चा की। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

बैठक में गोयल ने कहा कि सर्वसम्मति (consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया WTO की विश्वसनीयता की आधारशिला है और किसी भी सदस्य देश को उसकी सहमति के बिना नियमों में बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि WTO को वर्तमान चुनौतियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

भारत के प्रमुख मुद्दे

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security)

  • पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH)

  • विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM)

  • कॉटन से जुड़े मुद्दे

भारत ने कहा कि इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वैश्विक व्यापार प्रणाली में मौजूद असमानताओं (asymmetries) को दूर करना आवश्यक है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • डिस्प्यूट सेटलमेंट सिस्टम की कमजोरी पर चिंता

  • छोटे देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता

  • पारदर्शिता का दुरुपयोग कर व्यापारिक दबाव बनाने के खिलाफ चेतावनी

  • सभी देशों को समान अवसर देने पर जोर

भारत का रुख

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने WTO सुधार प्रक्रिया को समयबद्ध और ठोस आधार पर आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया:

  • पारदर्शी

  • समावेशी

  • सदस्य-प्रेरित (member-driven) होनी चाहिए

द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने:

  • अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

  • व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की

WTO MC14 में भारत ने वैश्विक व्यापार में संतुलन, समान अवसर और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।


डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का याउंडे, कैमरून में शुभारंभ

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विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून की राजधानी याउंडे में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ने की। इस अवसर पर WTO की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद मंत्रियों ने WTO के मूलभूत मुद्दों और उसके सिद्धांतों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि WTO में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-प्रधान प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को केंद्र में रखते हुए संगठन के मूल सिद्धांतों—जैसे भेदभाव-रहित व्यवस्था, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता—को बनाए रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के पहले दिन के दौरान पीयूष गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री महामहिम डायोन नगुटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को मजबूत करने सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने WTO की महानिदेशक से भी मुलाकात कर MC14 के एजेंडे पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी MC14 के दौरान चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मैक्सिको, पेरू, रूस, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडे के साथ-साथ व्यापार संबंधों को बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। चिली और पेरू के साथ भारत-चिली तथा भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं की प्रगति पर बातचीत हुई। वहीं यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ हाल ही में संपन्न FTA वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और रात्रिभोज के साथ हुआ।

Central Board of Indirect Taxes and Customs ने World Trade Organization में साझा किए भारत के व्यापार सुविधा सुधार

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भारत सरकार के Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) ने World Trade Organization (WTO) में जेनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन के साथ मिलकर 24 फरवरी 2026 को व्यापार सुविधा पर विशेष सत्रों का आयोजन किया। यह कार्यक्रम WTO की ट्रेड फैसिलिटेशन समिति की बैठक के अवसर पर आयोजित किया गया।

सीबीआईसी सत्रों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विशेष सचिव एवं सदस्य (सीमा शुल्क) सुरजीत भुजबल ने किया। कार्यक्रम में दो प्रमुख सत्र — व्यापार सुविधा और क्षमता निर्माण — आयोजित किए गए, जिनमें WTO के ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट (TFA) के अंतर्गत भारत द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों को रेखांकित किया गया। यह आयोजन जुलाई 2026 में होने वाली भारत की 8वीं ट्रेड पॉलिसी रिव्यू की तैयारी के क्रम में भी महत्वपूर्ण रहा। इसमें लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत ने WTO-TFA की सभी प्रतिबद्धताओं को समयसीमा के भीतर पूरा कर 100% अधिसूचना दी है। अब भारत राष्ट्रीय व्यापार सुविधा कार्ययोजना (NTFAP 3.0) के तहत “TFA Plus” उपायों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका उद्देश्य न्यूनतम आवश्यकताओं से आगे जाकर वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप सुधार करना है।

व्यापार सुविधा सत्र में भारतीय सीमा शुल्क विभाग ने ‘समग्र-सरकार दृष्टिकोण’ (Whole-of-Government Approach) के तहत फेसलेस, कॉन्टैक्टलेस और पेपरलेस कस्टम्स इकोसिस्टम की दिशा में किए गए डिजिटल सुधारों को प्रस्तुत किया। प्रमुख पहलों में शामिल हैं:

  • सिंगल विंडो इंटरफेस के साथ व्यापक स्वचालित कस्टम्स प्रणाली

  • सशक्त जोखिम प्रबंधन प्रणाली (RMS)

  • अधिकृत आर्थिक परिचालक (AEO) कार्यक्रम

  • पूर्व-आगमन कस्टम्स प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज ऑफ ओरिजिन डेटा (EODES)

  • इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ECTS)

  • आधुनिक कस्टम्स नियंत्रण प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • समन्वित सीमा प्रबंधन (CBM) और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर (VTC)

क्षमता निर्माण सत्र में भारत द्वारा विकासशील और अल्प-विकसित देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ विशेषज्ञता साझा करने की पहल को रेखांकित किया गया। National Academy of Customs, Indirect Taxes and Narcotics (NACIN) और Central Revenue Control Laboratory (CRCL) को विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) द्वारा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र और क्षेत्रीय कस्टम्स प्रयोगशाला के रूप में मान्यता प्राप्त है। 2022 से अब तक NACIN ने 65 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे लगभग 30 देशों के 1,800 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को लाभ हुआ। CRCL ने भी 300 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

सुरजीत भुजबल ने कहा कि पिछले दशक में कस्टम्स प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण ने व्यापार वृद्धि और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के गहन एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय कस्टम्स का डिजिटल इकोसिस्टम व्यापारियों, बैंकों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को जोड़ता है, जिससे लेनदेन लागत कम हुई है और क्लीयरेंस समय में तेजी आई है। विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को सरल दस्तावेजीकरण, अग्रिम निर्णय (Advance Rulings) और AEO कार्यक्रम से लाभ हुआ है।

वर्ष 2026 के लिए CBIC के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (EoDB) सुधारों में एकल, परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो के माध्यम से कस्टम्स क्लीयरेंस, भरोसा-आधारित प्रणाली, और विश्वसनीय आयातकों के लिए जोखिम प्रणाली में मान्यता जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही, ₹10 लाख की मूल्य सीमा को हटाकर कूरियर निर्यात को प्रोत्साहन, अंतरराष्ट्रीय कूरियर शिपमेंट के लिए रिटर्न-टू-ओरिजिन (RTO) सुविधा, और ई-कॉमर्स निर्यात रिटर्न के लिए सरलीकृत जोखिम-आधारित ढांचा भी प्रमुख सुधारों में शामिल हैं।

WTO में भारत के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. सेंथिल पांडियन ने कहा कि भारत ने व्यापार सुविधा सुधारों को अपनी व्यापार नीति का केंद्रीय स्तंभ बनाया है। United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific (UNESCAP) के ग्लोबल सर्वे 2023 के अनुसार, भारत ने 93% से अधिक का व्यापार सुविधा कार्यान्वयन स्कोर प्राप्त किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अग्रणी और दक्षिण एशिया में सर्वोच्च है।

यह आयोजन WTO को राष्ट्रीय अनुभवों और तकनीकी सहयोग के आदान-प्रदान के मंच के रूप में पुनः सुदृढ़ करता है। “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना के साथ भारत ने विकासशील देशों की व्यापार सुविधा क्षमताओं को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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