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संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल-जब मासूम की चौखट पर खुद पहुँचा प्रशासन, दूर हुई आधार की बाधा

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रायपुर- ई-गवर्नेंस (e-Governance) का वास्तविक उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सुशासन, पारदर्शिता और दक्षता स्थापित करना है। इसका असली मकसद तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल बनाना है, ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम, सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सके। सरकारी योजनाएँ जब फाइलों से निकलकर सीधे जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुँचती हैं, तो वह केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की एक खूबसूरत मिसाल बन जाती है। सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला प्रशासन ने हाल ही में कुछ ऐसी ही संवेदनशीलता दिखाई है, जहाँ तमाम बंदिशों और कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे एक मासूम के घर पहुँचकर उसका आधार कार्ड बनाया गया।

मुश्किल हालात और पहचान का संकट

शासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक ऐसे बच्चे की पहचान की गई थी, जिसकी उम्र 5 वर्ष से अधिक होने के बाद भी उसका आधार नामांकन नहीं हो पाया था। इस मासूम का परिवार अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था।बच्चे की माता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, और पिता काफी समय पहले परिवार को छोड़कर अलग हो चुके हैं। देखभाल कर रहे परिजनों ने बिलाईगढ़, भटगांव, सरसीवा और सारंगढ़ के कई आधार केंद्रों के चक्कर लगाए, लेकिन विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को केंद्र तक ले जाकर प्रक्रिया पूरी कराना मुमकिन नहीं हो पा रहा था।

​'होम-सर्विस', मिनटों में हुआ समाधान

जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, तो कलेक्टर ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ई-जिला प्रबंधक (EDM) की टीम तुरंत सक्रिय हुई। निर्देशों का पालन करते हुए आधार ऑपरेटर आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों के साथ सीधे बच्चे के घर पहुँचे। बिना किसी देरी के बच्चे के घर पर ही संवेदनशीलता के साथ आधार नामांकन की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क संपन्न की गई। ई-गवर्नेंस (इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस) का अर्थ नागरिकों और व्यवसायों को सरकारी सेवाएं, जानकारी और संचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग करना है। इसका मुख्य उद्देश्य शासन को "SMART" (सरल, नैतिक, जवाबदेह, उत्तरदायी और पारदर्शी) बनाना और भ्रष्टाचार को कम करना है।

​खुला सरकारी योजनाओं का मार्ग

इस एक दस्तावेज के बन जाने से अब इस मासूम के लिए भविष्य में मिलने वाली सभी सरकारी, सामाजिक और शैक्षणिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने का रास्ता साफ हो गया है। ​इस संवेनदशील पहल से गद्गद होकर आवेदनकर्ता सुमत राम बंजारे और सुमित्रा कुमारी घृतलहरे ने प्रशासन का सहृदय धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब हम थक-हार कर बैठ गए थे, तब प्रशासन ने खुद आगे बढ़कर हमारे बच्चे की सुध ली। कलेक्टर साहब, ईडीएम और ऑपरेटर की इस मानवीय पहल को हम कभी नहीं भूलेंगे। यह केवल एक कार्ड नहीं, हमारे बच्चे के सुरक्षित भविष्य की पहचान है। ​जिला प्रशासन की यह त्वरित और संवेदनशील कार्यशैली यह साबित करती है कि ई-गवर्नेंस का असली मकसद तकनीक के जरिए अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाना है।


सुशासन तिहार: उलखर और बड़े नावापारा में उमड़ा जनसैलाब,मौके पर ही निराकृत हुई ग्रामीणों की समस्याएं

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​रायपुर- ​छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'सुशासन तिहार 2026' के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में  शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 1400 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। उलखर शिविर में जहां 638 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं बड़े नावापारा में 836 ग्रामीणों ने अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण हेतु पंजीयन कराया।

कलेक्टर  ने दोनों ही शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन कर यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग ने नि:शुल्क जांच शिविर लगाया, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा जाल वितरण और समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं तत्काल प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 के वितरण में तत्परता दिखाई, तो खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड सौंपे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने से कई परिवारों के अपने घर का सपना साकार हुआ।

प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ यह शिविर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें उपहार दिए गए और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का मन मोह लिया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने जल बचाने की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर कार्य किया, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सका।

विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव 2025: आदिवासी लोक संस्कृति और पंचायती राज का राष्ट्रीय उत्सव

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पंचायती राज मंत्रालय 23 एवं 24 दिसंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में “पेसा महोत्सव : उत्सव लोक संस्कृति का” नामक दो दिवसीय आयोजन कर रहा है। यह आयोजन पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के अधिनियमन को चिह्नित करने के लिए किया जा रहा है। पेसा दिवस अधिनियम की वर्षगांठ के अवसर पर 24 दिसंबर को मनाया जाएगा। महोत्सव का उद्घाटन आंध्र प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री तथा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री कोनिडाला पवन कल्याण द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज सहित केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

इस आयोजन में सभी 10 पेसा राज्यों से लगभग 2,000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है, जिनमें पंचायत प्रतिनिधि, खिलाड़ी, सांस्कृतिक कलाकार आदि शामिल होंगे। पेसा महोत्सव को पेसा क्षेत्रों से आने वाले आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को मनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है।

24 दिसंबर 2025 को पेसा से संबंधित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें पेसा के क्रियान्वयन की जानकारी के प्रसार और निगरानी के लिए पेसा पोर्टल, राज्यों में क्रियान्वयन की स्थिति के आकलन हेतु पेसा संकेतक, जनजातीय भाषाओं में पेसा पर प्रशिक्षण मॉड्यूल (जागरूकता और जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के लिए) तथा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले पर आधारित एक ई-बुक, जिसमें क्षेत्र के पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और विरासत का दस्तावेजीकरण किया गया है, शामिल हैं।

महोत्सव के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के पेसा ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें सहभागी राज्यों के निर्वाचित प्रतिनिधि पेसा के दस चिन्हित विषयों पर सहभागिता करेंगे। इसके अतिरिक्त, 24 दिसंबर 2025 को सभी 10 पेसा राज्यों में भी विशेष ग्राम सभाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनका उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, परंपरागत प्रथाओं का संरक्षण, आजीविका और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है।

महोत्सव के दौरान खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जो भारत की आदिवासी विरासत की विविधता और जीवंतता को प्रदर्शित करेगी। महोत्सव का मुख्य स्थल विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी परिसर होगा, जबकि गतिविधियाँ रामकृष्ण बीच, इंडोर स्टेडियम, क्रिकेट स्टेडियम और कलावाणी ऑडिटोरियम, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में आयोजित की जाएँगी।

पेसा अधिनियम, 1996 के बारे में

भारत के संविधान के अनुच्छेद 243M(4)(b) के अंतर्गत संसद ने “पंचायतों के उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996” अर्थात पेसा अधिनियम का अधिनियमन किया, जिसके माध्यम से संविधान के भाग-IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया।

अनुसूचित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जिन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 244(1) तथा पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित प्रावधानों से संबंधित है। चूँकि ये क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र कहा जाता है। वर्तमान में पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र 10 राज्यों—आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना—में घोषित हैं।

अंगोला की नेशनल असेंबली में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन

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अंगोला की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम कैरोलिना सेरक्वेइरा ने राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा भारत और अंगोला के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि भारत की परिवर्तनकारी विकास यात्रा अंगोला के लिए प्रेरणा है और भारत के अफ्रीका के प्रति निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की गहरी सराहना की।

अंगोला की संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास भारत और अंगोला को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अंगोला अफ्रीका के सबसे सशक्त लोकतंत्रों में से एक है।

राष्ट्रपति ने दोनों देशों की संसदों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि पारस्परिक समझ और सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।

उन्होंने अंगोला की संसद में महिलाओं के उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संसद में 39 प्रतिशत से अधिक महिला सदस्य होने के साथ, अंगोला समावेशी शासन का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने भारत में हाल ही में पारित किए गए उस कानून का भी उल्लेख किया जो विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लाया गया है।

द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, रक्षा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने अंगोला में बुनियादी ढांचे, सुशासन और कृषि, ऊर्जा तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंगोला अफ्रीका की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में अंगोला की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भूमिका की भी प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब दुनिया संघर्षों और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब वैश्विक दक्षिण के देश विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अंगोला के सांसदों से भारत-अंगोला साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए एक साथ काम करने का आग्रह किया।

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने लुआंडा में डॉ. एंतोनियो आगोस्टिन्हो नेतो की स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. नेतो, जो अंगोला के प्रथम राष्ट्रपति थे, देश की एकता, प्रतिरोध और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं और उन्होंने अंगोला की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति ने साओ मिगेल किला भी देखा, जो 16वीं सदी का औपनिवेशिक युग का दुर्ग है और अब सशस्त्र बलों के संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। यह संग्रहालय अंगोला के सैन्य इतिहास, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करता है।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधन और पुरस्कार वितरण

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज, 17 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'आदि कर्मयोगी अभियान' के राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधन दिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों, जिलों, ब्लॉकों और एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों को सम्मानित किया।

राष्ट्रपति का संबोधन: मुख्य बिंदु

  • समावेशी और सहभागी शासन की प्रतिबद्धता: राष्ट्रपति ने कहा कि यह सम्मेलन हमारे राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाता है कि शासन को वास्तव में सहभागी, समावेशी और जनभागीदारी आधारित बनाना है।

  • आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य: इस अभियान की शुरुआत हर जनजातीय गांव को आत्मनिर्भर और गर्वित बनाने के लिए की गई थी। यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य है कि जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में भागीदारी हो और विकास के लाभ सभी जनजातीय क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचे।

  • ग्राम सभाओं और समुदाय-प्रेरित संस्थाओं का सशक्तिकरण: आदि कर्मयोगी अभियान ग्राम सभाओं और समुदाय-प्रेरित संस्थाओं को सशक्त बनाकर जनभागीदारी की भावना को मजबूत करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज की सार्थक भागीदारी के माध्यम से राष्ट्रीय नीति को प्रभावित किया जा सकता है और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

  • जनजातीय समुदायों का सांस्कृतिक योगदान: राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे जनजातीय समुदाय देश की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी परंपराएं हमें याद दिलाती हैं कि विकास को प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण होना चाहिए।

  • सरकार की पहलें: सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया है, आवासीय विद्यालयों की स्थापना की है और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय युवाओं को मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए हैं। कौशल विकास और आत्म-रोजगार योजनाओं ने पारंपरिक शिल्प, हस्तशिल्प और उद्यमिता को नया impetus दिया है।

  • समावेशी समाज की आवश्यकता: राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे विकसित भारत की यात्रा में हमें यह याद रखना चाहिए कि राष्ट्र और समाज की वास्तविक प्रगति समाज के सभी वर्गों के विकास में है। हमें एक समावेशी समाज बनाना चाहिए जहां सभी नागरिक सार्थक रूप से भाग लें और अपनी किस्मत खुद आकार दें।

इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को 'श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य' का पुरस्कार मिला, बैतूल को 'श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला' का पुरस्कार प्राप्त हुआ, और भिलवाड़ा को 'श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला ब्लॉक' का पुरस्कार मिला।



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