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भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

चक्रवात ‘दितवाह’ के बाद भारतीय नौसेना का त्वरित HADR अभियान: ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ के तहत श्रीलंका को बड़ी राहत

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चक्रवाती तूफान ‘दितवाह’ से श्रीलंका में उत्पन्न प्रभाव के मद्देनज़र भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ के तहत व्यापक मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियान शुरू किया है। श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (IFR-2025) में भाग लेने के लिए कोलंबो में मौजूद आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी को त्वरित आवश्यकताओं के आधार पर तुरंत राहत पहुँचाने के लिए तैनात किया गया। इन जहाज़ों ने प्रभावित समुदायों के वितरण हेतु राहत सामग्री सौंपी है।

जहाज़ों पर मौजूद हेलीकॉप्टरों को प्रभावित क्षेत्रों की हवाई टोह लेने तथा जारी खोज एवं बचाव अभियानों को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई श्रीलंकाई नागरिकों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया।

इन प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाते हुए, भारतीय नौसेना ने 01 दिसंबर 2025 को आईएनएस सुकोन्या को त्रिंकोमाली भेजा। यह जहाज़ आवश्यक राहत सामग्री लेकर पहुँचा है ताकि श्रीलंका के लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए चल रहे प्रयासों को और मजबूती मिल सके। भारतीय और श्रीलंकाई अधिकारियों के बीच घनिष्ठ समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सहायता सामग्री समय पर और प्रभावी ढंग से पहुँचे।

भारतीय नौसेना की यह त्वरित प्रतिक्रिया एक बार फिर यह साबित करती है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता (First Responder) है। यह भारत की अपने साझीदार देशों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दोहराता है, जो भारत सरकार की ‘महासागर’ दृष्टि और ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अनुरूप है। भारतीय नौसेना मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए पूर्ण रूप से तत्पर है और श्रीलंका के लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।


भारत का स्वदेशी सामरिक सामर्थ्य प्रदर्शित: आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी ने श्रीलंका में IFR 2025 में किया हिस्सा

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भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant और स्वदेशी निर्मित फ्रिगेट INS Udaygiri श्रीलंका नौसेना द्वारा कोलंबो में 27 से 29 नवंबर 2025 तक आयोजित International Fleet Review (IFR) 2025 में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह कार्यक्रम श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कई देशों के युद्धपोत, प्रतिनिधिमंडल और पर्यवेक्षक शामिल हो रहे हैं।

यह यात्रा दोनों भारतीय युद्धपोतों की पहली विदेश तैनाती है, जो क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। स्वदेशी और राष्ट्र गौरव INS Vikrant की पहली अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भारत के बढ़ते सामरिक प्रभाव, साझेदार देशों के साथ सहयोग और भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में स्थिरता, शांति और सुरक्षा के प्रति समर्पण को उजागर करती है।

हाल ही में कमीशन किए गए INS Udaygiri की भागीदारी भारत की उन्नत स्वदेशी जहाज़ निर्माण क्षमता और IOR में संतुलित तथा विस्तारित नौसैनिक उपस्थिति का संकेत देती है।

कोलंबो प्रवास के दौरान, दोनों जहाज कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों जैसे—औपचारिक फ्लीट रिव्यू, शहर परेड, सामुदायिक सहभागिता गतिविधियाँ, और पेशेवर नौसैनिक संवाद—में हिस्सा लेंगे। इसके अतिरिक्त, IFR 2025 के दौरान जहाजों को जनता के लिए भी खोला जाएगा।


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