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आईएनएस त्रिकंड की केन्या यात्रा संपन्न, भारत-केन्या नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने 10 अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।

यह पोर्ट कॉल पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की केन्या यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान एक औपचारिक समारोह में INSAS राइफल और गोला-बारूद केन्या नौसेना को सौंपे गए।

प्रमुख गतिविधियां:

  • छोटे हथियारों की हैंडलिंग और मेंटेनेंस प्रशिक्षण

  • VBSS (Visit, Board, Search and Seizure) अभ्यास

  • क्रॉस-डेक विजिट और संयुक्त अभ्यास

  • सामुदायिक सेवा और खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

आईएनएस त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने केन्या नौसेना के अधिकारियों से मुलाकात कर सहयोग को और मजबूत किया।

महत्व:

यह यात्रा भारत के MAHASAGAR विजन (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) को दर्शाती है। इससे भारत और केन्या के बीच नौसैनिक सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।



INS त्रिकंड मोंबासा पहुंचा, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोंबासा बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही तैनाती के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। इस दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का केन्या दौरा भी हो रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज के क्रू द्वारा पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया जाएगा, साथ ही केन्या डिफेंस फोर्सेस को आवश्यक सामग्री भी सौंपी जाएगी। INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मोंबासा से प्रस्थान के बाद भारतीय और केन्याई नौसेना के बीच PASSEX (Passage Exercise) आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय और संचालन क्षमता को और मजबूत किया जा सके। यह दौरा भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।



INS त्रिकंड तंजानिया पहुँचा, भारत-तंजानिया समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 03 अप्रैल 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुँचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है।

इस पोर्ट कॉल के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें पेशेवर संवाद और तंजानिया नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण शामिल है, ताकि आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के तहत मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले और योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जो आपसी सद्भाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।

इस यात्रा के दौरान भारत से लाए गए आवश्यक सामग्रियों (क्रिटिकल स्टोर्स) को भी सौंपा जाएगा।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

INS त्रिकंड का यह दौरा भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टि के अनुरूप है।


INS त्रिकंड की मोज़ाम्बिक यात्रा संपन्न, भारत–मोज़ाम्बिक नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड ने 29 मार्च 2026 को मापुटो, मोज़ाम्बिक की अपनी पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरी की।

इस दौरान भारतीय नौसेना और मोज़ाम्बिक नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिससे आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को और मजबूती मिली।

भारत की ओर से मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री मोज़ाम्बिक को सौंपी गई। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. उस्सेने हिलारियो इस्से, भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग सहित अन्य वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, मोज़ाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया।

INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने मोज़ाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की।

पोर्ट कॉल के समापन पर, जहाज ने मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं, जिसके बाद वह अपने निर्धारित ऑपरेशनल तैनाती के लिए आगे बढ़ा।

यह पोर्ट कॉल ‘महासागर’ (MAHASAGAR - क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) की भारत की नीति को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


हिंद महासागर में भारत की ताकत: INS त्रिकंड का शानदार प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का स्टील्थ फ्रिगेट INS त्रिकंड 20 मार्च 2026 को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया से एक सफल और उपयोगी पोर्ट कॉल पूरा करने के बाद रवाना हो गया।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने सेशेल्स के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और भारत के उच्चायुक्त से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान जहाज ने सेशेल्स सरकार को आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और जरूरी सामग्री भी सौंपी।

INS त्रिकंड ने एक्सरसाइज लामीतिये 2026 के पहले त्रि-सेवा संस्करण में भाग लिया, जिसमें भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्स (SDF) के सदस्य शामिल थे। यह इस अभ्यास के 11वें संस्करण में भारतीय नौसेना की पहली भागीदारी है।

अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान, जहाज पर विज़िट, बोर्ड, सर्च एंड सीज़र (VBSS) प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें संयुक्त बोर्डिंग अभ्यास भी शामिल थे। इसके बाद समुद्री चरण में INS त्रिकंड ने SCGS Le Vigilant के साथ अभ्यास किया और भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो तथा SDF के स्पेशल फोर्सेज की संयुक्त टीम द्वारा समुद्र में बोर्डिंग ऑपरेशन किए गए।

इसके पश्चात भारतीय सेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्स के जवानों ने प्रस्लिन द्वीप पर लैंडिंग ऑपरेशन किया। इस दौरान SDF के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज मेजर जनरल माइकल रोसेट, डिप्टी चीफ ब्रिगेडियर जीन अटाला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समुद्री चरण का अवलोकन करने के लिए INS त्रिकंड पर सवार हुए।

यह अभ्यास भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग और आपसी तालमेल (interoperability) को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। “लामीतिये”, जिसका अर्थ क्रियोल भाषा में ‘मित्रता’ है, दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।

यह पोर्ट कॉल भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Region) दृष्टिकोण को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की प्रमुख सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति (First Responder) के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


आईएनएस त्रिकंड ने ग्रीस के साथ समुद्री युद्धाभ्यास में दिखाई ताकत

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भारत-ग्रीस द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास का पहला संस्करण सम्पन्न

भूमध्य सागर- भारतीय नौसेना और हेलेनिक नौसेना (ग्रीस) के बीच आयोजित पहला द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 18 सितम्बर 2025 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह अभ्यास भारत और ग्रीस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अभ्यास दो चरणों में हुआ — 13 से 17 सितम्बर तक सलामिस नौसैनिक अड्डे पर हार्बर फेज़ और 17-18 सितम्बर को समुद्र में संचालनात्मक चरण। भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने किया।

हार्बर फेज़ के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मियों ने आपसी समझ और समन्वय बढ़ाने के लिए कई गतिविधियों में भाग लिया। प्रमुख कार्यक्रमों में क्रॉस-डेक विज़िट्स, पेशेवर बातचीत और हेलेनिक नौसेना के एली क्लास फ्रिगेट HS Themistokles पर आयोजित प्री-सेल कॉन्फ्रेंस शामिल थे। सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान भारत के ग्रीस में राजदूत रुद्रेंद्र टंडन, सलामिस नौसैनिक अड्डे के कमांडर कमोडोर स्पायरीडॉन मैन्टिस, हेलेनिक नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और उनके परिवार भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत की समृद्ध परंपराओं का प्रदर्शन किया गया और दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत किया गया। इसके अतिरिक्त, जहाज के दल ने एथेंस स्थित सेक्रेड रॉक ऑफ़ एक्रोपोलिस का भी भ्रमण किया।

सी फेज़ के दौरान, दोनों नौसेनाओं ने जटिल समुद्री युद्धाभ्यास और सामरिक अभ्यास किए। इनमें नाइट VBSS ऑपरेशन्स (Visit, Board, Search, Seizure), समुद्र में पुनःपूर्ति (Replenishment-at-Sea), संयुक्त पनडुब्बी-रोधी युद्धाभ्यास, समन्वित तोप दागना तथा क्रॉस-डेक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन्स शामिल थे। इन अभियानों ने न केवल दोनों नौसेनाओं की पेशेवर क्षमताओं को प्रमाणित किया, बल्कि चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में संयुक्त रूप से कार्य करने की उनकी क्षमता को भी दर्शाया।

इस पहले द्विपक्षीय अभ्यास का सफल आयोजन भारत और ग्रीस के बीच समुद्री सुरक्षा एवं सहयोगात्मक सहभागिता पर बढ़ते सामरिक सामंजस्य (Strategic Convergence) को रेखांकित करता है। दोनों देश वैश्विक समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में समान हित रखते हैं। यह सहयोग सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान, पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) के विकास और दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।

अभ्यास के समापन के बाद आईएनएस त्रिकंड भूमध्य सागर में अपने अगले चरण के अभियान के लिए रवाना हो गया।


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