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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका से पुर्तगाल के लिए रवाना, वैश्विक मंच पर दिखाई भारत की समुद्री शक्ति

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी 25 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन बंदरगाह से लोकायन-26 (Lokayan 26) अभियान के तहत अपनी अगली यात्रा के लिए रवाना हो गया। अमेरिका प्रवास के दौरान पोत ने प्रतिष्ठित SAIL 250 समारोह और इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 में भाग लेकर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका के नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित SAIL 250 कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान पोत पर अनेक गणमान्य अतिथियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया।

इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय नौसेना ने समुद्री सहयोग, पेशेवर आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रमों ने भारत की समुद्री कूटनीति और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

अब आईएनएस सुदर्शिनी पोंटा डेलगाडा (अज़ोरेस, पुर्तगाल) के लिए रवाना हो चुका है। अपनी इस यात्रा के दौरान यह पोत विश्व मंच पर भारत की समुद्री क्षमता, पेशेवर उत्कृष्टता और सद्भावना का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रहा है।


आईएनएस सुदर्शिनी बोस्टन पहुँचा, 'सेल बोस्टन 2026' में भारत का किया प्रतिनिधित्व

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भारतीय नौसेना का सेल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क में Sail4th 250 समारोह में सफल भागीदारी के बाद 12 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन पहुँचा। जहाज ने ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स (Grand Parade of Sails) में भाग लेकर सेल बोस्टन 2026 के शुभारंभ में हिस्सा लिया।

बोस्टन स्थित भारत के महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स और बोस्टन में जहाज के औपचारिक प्रवेश के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर सवार हुए। भारतीय तिरंगा लहराते हुए आईएनएस सुदर्शिनी ने कैसल आइलैंड और सीपोर्ट डिस्ट्रिक्ट जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए बोस्टन फिश पियर पर लंगर डाला।

20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक पाल नौकाओं (Tall Ships) के अंतरराष्ट्रीय बेड़े के साथ आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 2026 ट्रांसओशैनिक अभियान के तहत भारत के समुद्री सद्भावना दूत (Maritime Ambassador of Goodwill) के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। जहाज 12 से 15 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए भी खुला रहेगा।

नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर और न्यूयॉर्क की सफल यात्राओं के बाद सेल बोस्टन 2026 में आईएनएस सुदर्शिनी की भागीदारी भारत-अमेरिका के बढ़ते समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करती है तथा वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करती है।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

आईएनएस सुदर्शिनी का ऐतिहासिक अटलांटिक पार अभियान: लोकायण-26 के तहत एंटीगुआ आगमन, समुद्री सहयोग और कूटनीति को बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी 27 मई 2026 को एंटीगुआ पहुंचा, जहां उसने अपने ऐतिहासिक अटलांटिक महासागर पार अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह यात्रा चल रहे लोकायण-26 अभियान का हिस्सा है। जहाज का स्वागत भारत के मानद महावाणिज्य दूतविजय तेवानी  तथा एंटीगुआ एवं बारबुडा रक्षा बल के रक्षा प्रमुख ब्रिगेडियर टेलबर्ट बेंजामिन ने किया।

ऐतिहासिक अटलांटिक पार यात्रा

INS सुदर्शिनी ने यह पहली बार अटलांटिक महासागर की यात्रा की है। इससे पहले वर्ष 2007 में INS तरंगिणी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगुआ तक का यह चरण इस अभियान का सबसे लंबा भाग रहा, जो 19 दिनों तक चला।

इस दौरान जहाज ने पूरी तरह पालों के सहारे यात्रा की और पारंपरिक समुद्री नौवहन कौशल का प्रदर्शन किया। यात्रा के दौरान चालक दल को भारी समुद्री लहरों और तेज हवाओं जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने अनुशासन, सतर्कता और कुशल संचालन से सफलतापूर्वक पूरा किया।

दस हजार समुद्री मील का मील का पत्थर

इस अभियान के दौरान जहाज ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से रवाना होने के बाद कुल 10,000 समुद्री मील की दूरी भी पूरी कर ली।

समुद्री कूटनीति और सांस्कृतिक सहयोग

भारतीय नौसेना  का यह अभियान समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय मित्रता को सुदृढ़ करने और भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह अभियान “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात “संपूर्ण विश्व एक परिवार है” की भावना को भी दर्शाता है।

आगे की यात्रा

एंटीगुआ में प्रवास के दौरान जहाज का दल पेशेवर संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेगा। इसके बाद यह पोत अमेरिका के नॉरफोक की ओर रवाना होगा, जहां यह आगामी SAIL 250 कार्यक्रमों में भाग लेगा।

यह अभियान पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका में सफल बंदरगाह यात्राओं के बाद अब कैरेबियन और अमेरिकी चरण में आगे बढ़ रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी की लास पालमास यात्रा संपन्न, समुद्री कूटनीति को मिली मजबूती

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 26 अप्रैल 2026 को कैनरी द्वीप समूह के लास पालमास में अपनी तीन दिवसीय ऐतिहासिक पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक संपन्न की। यह यात्रा उसके लोकायन 26 ट्रांसओशैनिक अभियान का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रही। स्पेन के इस द्वीप समूह की यात्रा ने समुद्री कूटनीति और पेशेवर सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसैनिक कमान के प्रमुख सैंटियागो डे कोल्सा ट्रुएबासे मुलाकात की। इस वार्ता में दोनों नौसेनाओं के बीच मजबूत होते संबंधों और बढ़ती साझेदारी पर जोर दिया गया।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज को आम लोगों के लिए भी खोला गया, जहां स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में पहुंचे। आगंतुकों को जहाज का भ्रमण कराया गया, जिसमें भारत की समृद्ध समुद्री विरासत, महासागरीय यात्रा के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मित्रता के भाव को साझा किया गया।

अब आईएनएस सुदर्शिनी अपनी अगली मंजिल मिंडेलो के लिए रवाना हो गया है, जो ट्रांस-अटलांटिक यात्रा से पहले उसका अंतिम अफ्रीकी पड़ाव होगा। अब तक यह जहाज पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में सात पोर्ट कॉल और नौसैनिक सहभागिता पूरी कर चुका है।

यह यात्रा भारतीय नौसेना की “मित्रता और विश्वास के पुल” बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

INS सुदर्शिनी ने फ्रांस में बिखेरा जलवा, भारत की समुद्री ताकत और संस्कृति का प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप INS सुदर्शिनी 7 अप्रैल 2026 को फ्रांस के सेट (Sète) बंदरगाह से रवाना हुआ, जहां उसने प्रतिष्ठित ‘Escale à Sète’ समुद्री महोत्सव में सफल भागीदारी दर्ज की। यह महोत्सव भूमध्यसागर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में से एक है, जिसमें दुनिया भर के जहाज शामिल होते हैं। इस दौरान सुदर्शिनी ने विभिन्न समुद्री गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वर्कशॉप और खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय भाग लेकर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। खास आकर्षण फ्रांसीसी नौसेना की 400वीं वर्षगांठ पर आयोजित हेरिटेज सिटी परेड रही, जिसमें भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल ने ऐतिहासिक सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए अनुशासन और एकता का शानदार प्रदर्शन किया।

इस यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी की रोइंग टीम ने Jeux Maritimes प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। महोत्सव के समापन पर ग्रांडे परेड डे डिपार में जहाज ने अपने पाल खोलकर आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। बंदरगाह प्रवास के दौरान हजारों लोगों ने जहाज का दौरा किया, जिससे भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और समुद्री संबंध और मजबूत हुए। इस दौरान भारतीय राजदूत संजीव सिंगला द्वारा जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। अब INS सुदर्शिनी ‘Lokayan 26’ मिशन के तहत कैसाब्लांका की ओर बढ़ रही है, जहां वह भारत के वैश्विक समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।



आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-26 अभियान के तहत अलेक्जेंड्रिया पहुँची

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी 01 मार्च 2026 को ऐतिहासिक बंदरगाह नगर अलेक्जेंड्रिया पहुँचा, जो उसके जारी अंतरमहासागरीय अभियान ‘लोकायन-26’ की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह आगमन पिछले सप्ताह सफ़ागा से प्रस्थान के बाद पोत के स्वेज नहर से उत्तर की ओर पारगमन के उपरांत हुआ।

तीन मस्तूलों वाला यह बार्क पोत 193 किलोमीटर लंबी  स्वेज नहर से होकर गुजरा, जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले विश्व के ऐतिहासिक समुद्री द्वारों में से एक है। यह पारगमन इस वैश्विक यात्रा में भाग ले रहे प्रशिक्षुओं के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण उपलब्धि रहा।

अलेक्जेंड्रिया में प्रवेश “ब्रिजेज़ ऑफ फ्रेंडशिप” पहल को और सुदृढ़ करता है, जो भारत और मिस्र के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी का उत्सव है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की समृद्ध विरासत कई शताब्दियों पुरानी है। हाल के वर्षों में रक्षा और समुद्री सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं। सुदर्शिनी की यह यात्रा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

आगमन पर पोत का स्वागत मिस्र की नौसेना और भारतीय दूतावास के अधिकारियों द्वारा किया गया। कमांडिंग अधिकारी ने अलेक्जेंड्रिया नौसैनिक अड्डे के कमांडर रियर एडमिरल महमूद अब्देलसत्तार से भेंट की। पोर्ट कॉल के दौरान दल के सदस्य पेशेवर आदान-प्रदान, सामुदायिक संपर्क और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिनका उद्देश्य पारस्परिक सद्भाव को प्रोत्साहित करना, परस्पर संचालन क्षमता को सुदृढ़ करना और दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाना है।


आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-26 अभियान के तहत मिस्र के सफागा पहुँचा

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भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपने जारी लोकायन-26 अभियान के तहत 21 फरवरी 2026 को मिस्र के सफागा बंदरगाह पहुँचा। सलालाह से सफागा तक 1,832 समुद्री मील की दूरी 16 दिनों में तय करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जो जहाज के चालक दल की दृढ़ता, आत्मविश्वास और सहनशक्ति को दर्शाती है।

आगमन पर जहाज का मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद से भेंट की। इन संवादों में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया, जो नौसैनिक सहयोग और अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बंदरगाह प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना मिस्र के नौसैनिक कर्मियों के साथ पेशेवर संवाद करेगी, नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगी और द्विपक्षीय सद्भाव को मजबूत करने के लिए सामुदायिक संपर्क गतिविधियाँ भी करेगी।

अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना इस यात्रा का एक प्रमुख परिचालन चरण था, जहाँ जहाज ने चुनौतीपूर्ण मौसम परिस्थितियों और घने समुद्री यातायात के बीच उच्च स्तर की पेशेवर क्षमता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन किया। सफागा में आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा “ब्रिजेस ऑफ फ्रेंडशिप” पहल के तहत समुद्री संपर्क बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत तथा मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।


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