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ग्रामीण तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए RuTAG 2.0 की वार्षिक समीक्षा बैठक IIT गुवाहाटी में सम्पन्न

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भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA), प्रो. अजय कुमार सूद ने ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) 2.0 की दूसरी वार्षिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह पहल प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) की ओर से चलाई जा रही है। बैठक 13 और 14 नवंबर 2025 को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) गुवाहाटी में आयोजित की गई। बैठक में डॉ. पर्विंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, OPSA और डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक ‘G’, OPSA एवं RuTAG समन्वयक भी शामिल हुए।

बैठक के उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रो. सशिंद्र कुमार काकोटी, IIT गुवाहाटी के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिन्होंने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण तकनीकों को बढ़ावा देने और सतत आजीविका के लिए नवाचार की दिशा में संस्थान की पहल को रेखांकित किया। डॉ. कौर ने RuTAG 2.0 की 2024-25 की प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें सात केंद्रों की उपलब्धियों और राज्य विभागों, उद्योगों और सामुदायिक संगठनों के साथ सहयोग का विस्तार शामिल था। प्रो. देवेंद्र जलीहल, निदेशक, IIT गुवाहाटी; डॉ. हफ़्सा अहमद, वैज्ञानिक ‘D’, OPSA; और डिबोजित पाठक, तकनीकी स्टाफ, OPSA भी सत्र में उपस्थित रहे।

अपने मुख्य भाषण में प्रो. सूद ने ग्रामीण भारत में जीवन स्तर सुधारने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “RuTAG हमारे अनुसंधान संस्थानों को ग्रामीण समुदायों की जरूरतों से जोड़ता है और यह सुनिश्चित करता है कि वैज्ञानिक ज्ञान सशक्तिकरण का एक उपकरण बने। जब ग्रामीण भारत स्थानीय विकसित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होगा, तो यह आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत करेगा।” उन्होंने RuTAG केंद्रों में गुणवत्ता, मानकीकरण और सहयोग बनाए रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. पर्विंदर मैनी ने कहा, “जब वैज्ञानिक प्रयास स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित होते हैं, तो यह ग्रामीण आजीविका को बदल सकता है। अगले चरण में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि RuTAG के तहत विकसित हर तकनीक लोगों तक स्थायी और प्रभावी तरीके से पहुंचे।” उन्होंने स्व-सहायता समूहों, सूक्ष्म उद्यमों और स्थानीय नवाचारकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. जलीहल ने RuTAG 2.0 से उन तकनीकों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया जिनका क्षेत्रीय परिनियोजन और मापनीय प्रभाव स्पष्ट हो। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम परिपक्वता की स्थिति तक पहुंच चुका है और केंद्रों को वास्तविक ग्रामीण चुनौतियों को हल करने वाले समस्या विवरणों का चयन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाधान केवल प्रोटोटाइप तक सीमित न रहें, बल्कि व्यापक रूप से अपनाए जाएं।

PSA प्रो. सूद ने RuTAG 2.0 वार्षिक प्रगति रिपोर्ट 2024-25 जारी की, जिसमें कृषि, पशुपालन, पश्च-फसल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल शुद्धिकरण और ग्रामीण हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में 56 से अधिक चल रहे परियोजनाओं का विवरण है, जिनमें कई प्रोटोटाइप और क्षेत्रीय परिनियोजन चरणों तक पहुंच चुकी हैं। प्रो. सूद ने IIT गुवाहाटी में कृषि एवं जलवोल्टिक्स नवाचार केंद्र (CIAAV) और वेलनेस-प्रोडक्ट नवाचार के लिए एकीकृत सुविधा (IFWPI) का भी उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य कृषि और जलवोल्टिक्स, वेलनेस-उत्पाद विकास में अंतरविषयक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिससे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता और आजीविका सृजन को सुदृढ़ किया जा सके।

एक ग्रासरूट नवाचार और स्टार्टअप प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें RuTAG केंद्रों और RuTAG 2.0 कार्यक्रम के तहत साझेदार संगठनों द्वारा विकसित तकनीक और प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए। ड्रोन-आधारित ग्रामीण अनुप्रयोगों का भी School of Agro and Rural Technology (SART), IIT गुवाहाटी में प्रदर्शन किया गया।

समीक्षा सत्रों के दौरान सभी सात RuTAG केंद्रों (IIT गुवाहाटी, SKUAST-कश्मीर, IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT रुड़की, ICAR-NAARM हैदराबाद और IIT मद्रास) ने अपनी वार्षिक प्रगति प्रस्तुत की और क्षेत्रीय कार्यान्वयन से मिली अंतर्दृष्टियाँ साझा की। चर्चा का फोकस प्रमाणित तकनीकों को स्केल करने, अंतर-केंद्र सहयोग बढ़ाने और सरकारी विभागों, उद्योग और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी स्थापित करने पर रहा।

साइडलाइन पर एक हितधारक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), उत्तर प्रदेश सरकार, North East Centre for Technology Application and Reach (NECTAR), Assam Science Technology and Environment Council (ASTEC), NABARD और Assam State Rural Livelihoods Mission (ASRLM) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन RuTAG 2.0 की रणनीतिक रोडमैप पर विचार-विमर्श के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य सहयोगी विज्ञान, नवाचार और साझेदारियों के माध्यम से ग्रामीण विकास को और अधिक उन्नत बनाना है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने IIT गुवाहाटी में NEST क्लस्टर का शुभारंभ किया, असम में ₹635 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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केंद्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी में “नॉर्थ ईस्टर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NEST) क्लस्टर” का शुभारंभ किया और असम में ₹635 करोड़ की कई परिवर्तनकारी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

यह आयोजन असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा वैज्ञानिक और उद्यमी समुदाय की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

असम में ₹635 करोड़ की विकास परियोजनाओं की आधारशिला

सिंधिया ने कहा कि “असम उभरते हुए उत्तर-पूर्व का धड़कता दिल है, जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी निरंतरता, साहस और सृजनशीलता का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि असम अब भारत के पूर्वोत्तर पुनर्जागरण का द्वार होने के साथ-साथ नवाचार और संपर्कता का केंद्र बन रहा है।

इन परियोजनाओं में प्रमुख हैं:

  • 65 नए माध्यमिक विद्यालय भवनों का निर्माण – ₹455 करोड़

  • चायगांव–उकियुम सड़क का उन्नयन – ₹102.69 करोड़

  • सिलोंजन–धनसिरी पर घाट पर RCC पुल का निर्माण – ₹20.59 करोड़

  • रामफलबिल (कोकराझार) में औद्योगिक एस्टेट का विकास – ₹14.40 करोड़

  • लखीबाजार (बक्सा) में औद्योगिक एस्टेट का विकास – ₹18.40 करोड़

उन्होंने कहा, “हर ईंट जो रखी जा रही है, हर कक्षा जो बन रही है — यह आकांक्षाओं की पूर्ति के प्रति एक वादा है।”

IIT गुवाहाटी में “NEST क्लस्टर” — पूर्वोत्तर का नवाचार केंद्र

₹22.98 करोड़ की लागत से स्थापित NEST क्लस्टर पूर्वोत्तर भारत के नवाचार तंत्र का केंद्रीय केंद्र बनेगा। यह चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा —

  1. ग्रासरूट इनोवेशन (स्थानीय नवाचार)

  2. सेमीकंडक्टर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

  3. बाँस आधारित प्रौद्योगिकियाँ

  4. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक

यह क्लस्टर, DoNER मंत्रालय की युवा-केंद्रित पहलों जैसे NE-SPARKS और अष्टलक्ष्मी दर्शन के पूरक के रूप में कार्य करेगा, जिसके तहत देशभर के 3,200 छात्र पूर्वोत्तर का दौरा करेंगे, जबकि 800 पूर्वोत्तर छात्र ISRO जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं में शैक्षणिक भ्रमण करेंगे।

अनुसंधान और नवाचार की नई दिशा

IIT गुवाहाटी के प्रदर्शनी क्षेत्र का दौरा करते हुए मंत्री ने छात्रों और शोधकर्ताओं से बातचीत की, जिन्होंने 6G संचार, बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर, बाँस ऊतक संवर्धन और कम लागत वाले MRI सिस्टम जैसी परियोजनाएँ प्रस्तुत कीं।

उन्होंने बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर परियोजना की प्रशंसा करते हुए कहा —
“यदि आप इसे आगे बढ़ा लेते हैं, तो यही भविष्य होगा।”

कार्यक्रम में कामरूप जिले की 30 ग्रामीण महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल खिलौने बनाने का प्रशिक्षण पूरा किया है।

असम में मोदी युग का परिवर्तन

सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर-पूर्व का कायाकल्प हुआ है —
“लैंडलॉक्ड से लैंड-लिंक्ड” बनकर यह क्षेत्र अब भारत के विकास का अग्रदूत बन चुका है।

उन्होंने बताया कि 10% ग्रॉस बजटरी सपोर्ट नीति के माध्यम से क्षेत्र में ₹6.2 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे विकास, उद्यमिता और सशक्तिकरण को बल मिला है।

उन्होंने बोगीबील ब्रिज, भूपेन हजारिका सेतु, सेला टनल और जोगीघोपा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्होंने असम की कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है।

विकसित पूर्वोत्तर, विकसित भारत

मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर अब भारत का “पूर्वी द्वार” बन चुका है।
उन्होंने असम के लोकाचार — “Xobhe xokolore loi thoka xomaj” (सबको साथ लेकर चलने वाला समाज) — की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज शुरू की गई हर परियोजना उस भावना को और मजबूत करती है।

माँ कामाख्या के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि असम शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के बल पर विकसित भारत @2047 की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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