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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Google का बड़ा कदम, भारत में सीधे अधिकारियों को दी जाएगी जानकारी

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नई दिल्ली- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Google ने भारत में एक अहम कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने कहा है कि भारत से जुड़े Child Sexual Abuse Material (CSAM) के मामलों में संबंधित जानकारी सीधे Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) को उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लागू करने पर सरकार के साथ बातचीत चल रही है।

अब तक ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग की प्रक्रिया में अमेरिका स्थित National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) की भूमिका रही है। Google के अनुसार, उसके प्लेटफॉर्म पर CSAM की पहचान होने पर सामग्री को हटाया जाता है और संबंधित रिपोर्टिंग प्रक्रिया शुरू की जाती है।

भारत सरकार की ओर से टेक कंपनियों से बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी भारतीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों तक तेजी से पहुंचाने पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में Google ने I4C के साथ सीधे जानकारी साझा करने के प्रस्ताव की पुष्टि की है।

Google का कहना है कि वह ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान, उसे हटाने और उसकी रिपोर्टिंग के लिए लगातार काम कर रहा है। यह कदम भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और ऐसे मामलों में कार्रवाई को लेकर टेक कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को और मजबूत कर सकता है।

साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए FIU-IND और I4C के बीच समझौता

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नई दिल्ली- भारत में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने में दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, जिसके साथ नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह MoU दोनों एजेंसियों को परिचालन संबंधी जानकारी विकसित करने, जांच एजेंसियों को सहयोग देने, वित्तीय अपराधों की रोकथाम, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और संपत्ति की रिकवरी में मदद करेगा।

समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रभावी फीडबैक तंत्र स्थापित करना है। साथ ही, वित्तीय संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और ‘रेड फ्लैग’ संकेतकों का विकास और प्रसार भी किया जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह कदम साइबर अपराधों के खिलाफ ‘पूरे सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

FIU-IND के बारे में:

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया देश की केंद्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी प्राप्त, विश्लेषित और साझा करती है तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई का समन्वय करती है।

I4C के बारे में:

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए एक समन्वित ढांचा और प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। I4C ने नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), साइबर-पुलिस और सस्पेक्ट रजिस्ट्री जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो विभिन्न एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने में सहायक हैं।

केंद्र और राज्यों की संयुक्त पहल: साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर में साइबर पुलिस स्टेशनों का तेज़ विस्तार

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‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए अपराधों की रोकथाम, पता लगाना, जाँच और अभियोजन, तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की स्थापना का दायित्व मुख्य रूप से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) का है। केंद्र सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह जारी करके और विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्रदान कर उनकी क्षमता-वृद्धि में सहयोग करती है।

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) अपनी रिपोर्ट “Data on Police Organizations” में साइबर सेल और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों का वार्षिक डाटा प्रकाशित करता है। नवीनतम रिपोर्ट वर्ष 2024 की है। पिछले पाँच वर्षों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कुल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या 169 (2020) से बढ़कर 459 (2024) हो गई है। विस्तृत विवरण परिशिष्ट में दिया गया है।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख पहलें

1. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना

गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समग्र और समन्वित तरीके से निपटने के लिए I4C की स्थापना की है।

2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

  • वेबसाइट: cybercrime.gov.in

  • सभी प्रकार के साइबर अपराध, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग हेतु बनाया गया है।

  • यहाँ दर्ज शिकायतों पर आगे की कार्रवाई संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की एजेंसियाँ करती हैं।

3. नागरिक वित्तीय साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)

  • वर्ष 2021 में शुरू की गई।

  • वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग और फंड्स को फ्रीज कराने में मदद करती है।

  • इसके लिए हेल्पलाइन 1930 संचालित की गई है।

4. साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC)

  • I4C में स्थापित अत्याधुनिक केंद्र।

  • इसमें विभिन्न बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटरों, टेलीकॉम, आईटी इंटरमीडियरीज और राज्यों की LEAs के प्रतिनिधि मिलकर कार्य करते हैं।

5. संयुक्त साइबर समन्वय टीमें (JCCTs)

मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम और गुवाहाटी — इन सात क्षेत्रों में साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स को ध्यान में रखते हुए JCCTs स्थापित की गई हैं।

6. ‘समन्वय’ प्लेटफ़ॉर्म

  • यह MIS, डेटा रिपॉजिटरी और समन्वय मंच है।

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए साइबर अपराध डेटा, विश्लेषण और इंटरस्टेट लिंक तैयार करता है।

  • इसके माध्यम से अब तक 16,840 आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हुई है और 1,05,129 साइबर जाँच सहायता अनुरोध पूरे किए गए हैं।

7. राज्यों में S4C/R4C केंद्र

  • राज्यों को I4C की तर्ज पर S4C/R4C स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।

  • अब तक बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में S4C स्थापित हो चुके हैं।

परिशिष्ट: राज्य/केंद्रशासित प्रदेश अनुसार साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या (2020–2024)

कुल संख्या: 169 (2020) → 459 (2024)
(डेटा: BPR&D — Data on Police Organizations, 2020–2024)

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।


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