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अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह -ऐतिहासिक दस्तावेजों से होंगे नागरिक रूबरू

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महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय की आर्ट गैलरी में लगेगी दुर्लभ अभिलेखों की प्रदर्शनी, 9 जून को होगा विशेष व्याख्यान

रायपुर- संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह के अवसर पर 8 से 12 जून 2026 तक राजधानी रायपुर में विशेष प्रदर्शनी एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय स्थित आर्ट गैलरी में होगा, जहां आम नागरिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों को ऐतिहासिक अभिलेखों और दस्तावेजों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। प्रदर्शनी में नीति, नियम और शासन संबंधी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों के छायाचित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। इन अभिलेखों के माध्यम से प्रदेश और देश के प्रशासनिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण झलक देखने को मिलेगी। प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 5 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

इतिहास और स्मृति के संरक्षण पर होगा विशेष व्याख्यान

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह के अंतर्गत 9 जून 2026 को विशेष व्याख्यान कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। न्याय के लिए अभिलेखागार, अधिकार, स्मृति और भविष्य विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में अभिलेखों के महत्व, उनके संरक्षण और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली के विशेषज्ञ दीपक तथा भुवनेश्वर, (ओडिशा) के सत्यनारायण मिश्र विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार साझा करेंगे। दोनों विशेषज्ञ अभिलेखागारों की उपयोगिता, ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण की चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अवसर

आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शनी और व्याख्यान कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों तथा अभिलेख संरक्षण में रुचि रखने वाले नागरिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को अभिलेखागारों की भूमिका, ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।

आयोजन का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना

पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, रायपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा अभिलेखागारों के महत्व को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना है। नागरिक 8 से 12 जून तक आर्ट गैलरी, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर पहुंचकर इस विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।

PMML ने लॉन्च किया डिजिटल आर्काइव्स: शोधकर्ताओं के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों तक आसान पहुंच

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प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML)—जो स्वतंत्रता के बाद से अब तक सभी भारतीय प्रधानमंत्रियों की विरासत को संरक्षित करने वाला देश का प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है—ने अपने विशाल अभिलेखीय संसाधनों तक पहुंच को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। PMML दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ अभिलेख संग्रहों में से एक का संरक्षक है, जिसमें 1,300 से अधिक व्यक्तियों और संगठनों से संबंधित 2.5 करोड़ से अधिक दस्तावेज शामिल हैं। आधुनिक और समकालीन भारतीय इतिहास का अध्ययन करने वाले शोधकर्ता और विद्वान इन अभिलेखों का नियमित रूप से उपयोग करते हैं।

एक ऐतिहासिक पहल के तहत, PMML अपनी दुर्लभ अभिलेखीय सामग्री—जिसमें व्यक्तिगत कागजात, पत्राचार, भाषण, डायरी और समाचार लेख शामिल हैं—का व्यापक डिजिटलीकरण कर रहा है। यह रूपांतरण न केवल नाजुक दस्तावेजों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है, बल्कि वास्तविक शोधकर्ताओं के लिए सीमित रिमोट एक्सेस भी संभव बनाता है। अक्सर उपयोग किए जाने वाले दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा पहले ही डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है।

रिमोट एक्सेस को सुगम बनाने के लिए एक विशेष आईटी प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया गया है। पंजीकृत शोधकर्ता अब ऑनलाइन अनुरोध जमा कर सकते हैं और अनुमति मिलने पर आवश्यक दस्तावेजों को अपने डेस्कटॉप पर केवल देखने के लिए प्राप्त कर सकते हैं, बिना PMML परिसर में आए।

PMML के डिजिटल आर्काइव्स का शुभारंभ तकनीक के माध्यम से अनमोल ऐतिहासिक संसाधनों के संरक्षण और विश्वभर के शोधकर्ताओं व ज्ञान-प्रेमियों के लिए आसान पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

PMML के निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा कि यह पहल संस्थान की उच्च-गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देने और आधुनिक व समकालीन भारत के अध्ययन को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे अभिलेखीय सामग्री तक पहुँच पहले से कहीं अधिक सरल और प्रभावी हो सकेगी।

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