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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

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छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

'चिरायु' की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

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धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन

लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू

​रायपुर- कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत

​धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन

चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

​पहचान से लेकर घर वापसी तक

इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"

लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां

त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'

धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

ऑपरेशन दृष्टि: रांची में सेना के मेगा आई कैंप से 300 से अधिक लोगों की लौटी रोशनी

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रांची- भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा टीम ने ऑपरेशन दृष्टि के तहत रांची के नामकुम स्थित सैन्य अस्पताल में 15 से 19 जून 2026 तक आयोजित 9वें मेगा सर्जिकल एडवांस्ड आई कैंप को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस पांच दिवसीय शिविर में 2,500 से अधिक मरीजों की जांच की गई और 300 से अधिक दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी की गईं।

शिविर के दौरान 260 से अधिक मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) ऑपरेशन किए गए, जिनमें 100 से अधिक गरीब आदिवासी मरीजों को लाभ मिला। इसके अलावा, आधुनिक मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS), डायबिटिक रेटिनोपैथी का सर्जिकल उपचार और दृष्टि बचाने वाले एंटी-VEGF इंजेक्शन भी उपलब्ध कराए गए।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ऑपरेशन दृष्टि टीम की समर्पण भावना और पेशेवर उत्कृष्टता की सराहना की। उन्होंने इस पहल को “सेवा परमो धर्मः” के संकल्प का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सेना चिकित्सा कोर की विशेषज्ञता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन दृष्टि की शुरुआत से अब तक देशभर में 75,000 से अधिक मरीजों की जांच की जा चुकी है और 3,000 से अधिक दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं।

लाभार्थियों के जीवन में आया नया उजाला

68 वर्षीय एक्का, जो बिहार रेजिमेंट के दिवंगत पूर्व हवलदार जॉन ऑगस्टस एक्का की पत्नी हैं, मोतियाबिंद के कारण अपनी दाईं आंख की दृष्टि लगभग खो चुकी थीं। सफल सर्जरी के बाद उनकी दृष्टि बहाल हो गई।

इसी तरह, रांची की 63 वर्षीय आदिवासी महिला एलिजा बेथ को भी उन्नत मोतियाबिंद सर्जरी का लाभ मिला। सेना से कोई संबंध न होने के बावजूद उन्हें आधुनिक नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

झारखंड के 50 वर्षीय आदिवासी निवासी अशोक देशमुख की भी सफल मोतियाबिंद सर्जरी की गई। सेना से संबद्ध न होने के बावजूद उन्हें सैनिकों और पूर्व सैनिकों के समान उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई।

देशभर में फैल रहा है ऑपरेशन दृष्टि का दायरा

इस शिविर का उद्घाटन सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक (DGAFMS) वाइस एडमिरल आरती सरीन ने किया था। ऑपरेशन दृष्टि के राष्ट्रीय विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

शिविर की सर्जिकल टीम का नेतृत्व ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा, प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ, आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली कैंट ने किया।

दिसंबर 2024 में देहरादून से शुरू हुआ ऑपरेशन दृष्टि अब जयपुर, बागडोगरा, उधमपुर, लक्षद्वीप, भुज, गोरखपुर, लेह-लद्दाख और अब रांची तक पहुंच चुका है। रांची इस मिशन का नौवां केंद्र बना है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • 2,500+ मरीजों की जांच

  • 300+ नेत्र सर्जरी

  • 260+ मोतियाबिंद ऑपरेशन

  • 100+ आदिवासी मरीजों को लाभ

  • 75,000+ लोगों की जांच (अब तक)

  • 3,000+ दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी

ऑपरेशन दृष्टि आज देश के सबसे बड़े और निरंतर चलने वाले सैन्य चिकित्सा जनसेवा अभियानों में से एक बन चुका है, जो समाज के हर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुंचाने का कार्य कर रहा है।


ऑपरेशन दृष्टि के तहत रांची में मेगा एडवांस्ड सर्जिकल आई कैंप शुरू, 200 से अधिक लोगों की रोशनी लौटाने का लक्ष्य

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रांची- भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की एक विशेष नेत्र चिकित्सा टीम ने ऑपरेशन दृष्टि के तहत झारखंड के रांची स्थित सैन्य अस्पताल नामकुम में मेगा एडवांस्ड सर्जिकल आई कैंप का शुभारंभ किया है। यह शिविर 15 से 19 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 200 से अधिक लाभार्थियों को निःशुल्क उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराकर उनकी दृष्टि बहाल करना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

यह विशेष सर्जिकल टीम ब्रिगेडियर डॉ. संजय कुमार मिश्रा, सलाहकार एवं विभागाध्यक्ष (नेत्र रोग), आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली के नेतृत्व में कार्य कर रही है। शिविर में मोतियाबिंद के लिए फेकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification), ग्लूकोमा के लिए मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS) तथा विट्रियो-रेटिनल रोगों के लिए एंटी-VEGF इंट्राविट्रियल इंजेक्शन जैसी अत्याधुनिक प्रक्रियाएं की जा रही हैं।

शिविर में पूर्व सैनिकों, सेवारत सैनिकों के आश्रितों और जरूरतमंद नागरिकों की व्यापक जांच की जा रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों के शामिल होने की संभावना है।

इस मिशन को सफल बनाने के लिए भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों द्वारा अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण रांची पहुंचाए गए हैं, जिससे क्षेत्र में उच्च स्तरीय नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक वाइस एडमिरल आरती सरीन ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मिशन भारतीय सेना और वायुसेना की दोहरी भूमिका को दर्शाता है, जो एक ओर देश की सीमाओं की सुरक्षा करती हैं और दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य भी करती हैं।

ऑपरेशन दृष्टि भारतीय सशस्त्र बलों का एक प्रमुख जनसेवा कार्यक्रम है, जो अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञता को मानवीय सेवा से जोड़ता है। रांची से पहले इस पहल के तहत लेह, लद्दाख, लक्षद्वीप, भुज, कच्छ और बागडोगरा सहित देश के विभिन्न दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में आठ सफल उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूर्ण, सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने आज सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में अपनी सफल यात्रा के 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने “10 Years of PMSMA – A Decade of Care” थीम के तहत देशव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया।

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए ने देशभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री द्वारा 9 जून 2016 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2022 में शुरू की गई विस्तारित पीएमएसएमए (E-PMSMA) रणनीति के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी की जाती है तथा प्रसव के 45 दिनों बाद तक उनका फॉलो-अप किया जाता है। एसएमएस अलर्ट और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को और मजबूत किया गया है।

जे.पी. नड्डा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 1990 के बाद से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत तथा नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 90.6 प्रतिशत तथा प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले दस वर्षों में पीएमएसएमए के तहत 7.5 करोड़ से अधिक प्रसवपूर्व जांचें की गई हैं तथा लगभग 1.2 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई है। इससे समय पर उपचार और विशेषज्ञ हस्तक्षेप संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पीएमएसएमए से जुड़े हुए हैं, जिससे दूरदराज और आकांक्षी जिलों में भी विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पीएमएसएमए के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी किया। साथ ही 9 जून 2026 से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया गया है।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉ. यवान जे. एफ. ह्यूटिन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार

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विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल

पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

एक ही छत के नीचे जांच और दवा

​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।

​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।

​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना

प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जनऔषधि केंद्रों से सस्ती दवाइयों का सहारा, युवाओं की सेवा से मरीजों को राहत

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नई दिल्ली- देशभर में किफायती दवाइयाँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) परिसर में स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध करा रहा है। यहां कार्यरत युवा फार्मासिस्ट मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनकी चिंता को राहत में बदल रहे हैं।

अक्टूबर 2024 में केंद्र खुलने के बाद से सीनियर फार्मासिस्ट संगीता यहां कार्यरत हैं। उनका कहना है कि जब मरीज डॉक्टर की पर्ची लेकर आते हैं तो अक्सर दवाइयों के खर्च को लेकर चिंतित होते हैं। लेकिन जब उन्हें कम कीमत पर दवाइयाँ मिलती हैं तो उनकी आधी चिंता दूर हो जाती है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

केंद्र पर रोजाना लगभग 150–200 मरीज दवाइयाँ लेने आते हैं। सुबह के समय सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। युवा कर्मचारी पर्चियों की जांच, दवाइयों का स्टॉक, बिलिंग और मरीजों को जानकारी देने का काम तेजी और जिम्मेदारी से करते हैं।

फार्मासिस्ट वरुण अग्रवाल का कहना है कि अब लोग जेनेरिक दवाइयों के बारे में अधिक जागरूक हो रहे हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों को इन सस्ती दवाइयों से काफी राहत मिल रही है। वहीं, इंदिरा गांधी अस्पताल स्थित जनऔषधि केंद्र के मैनेजर पीयूष के अनुसार, इस मिशन का हिस्सा बनना केवल दवाइयाँ देना नहीं बल्कि मरीजों को राहत देना भी है।

दिल्ली में लगभग 600 जनऔषधि केंद्रों में से करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी युवा हैं। ये केंद्र न केवल किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं बल्कि युवाओं को समाज सेवा का अवसर भी दे रहे हैं।




भारतीय नौसेना की मानवीय पहल: लक्षद्वीप में संयुक्त सेवाओं का बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर सफलतापूर्वक संपन्न

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भारतीय नौसेना ने 16 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप द्वीपसमूह में आयोजित पाँच दिवसीय संयुक्त सेवाओं के बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर का सफल समापन किया। यह शिविर कवरत्ती, अगत्ती, अमिनी, एंड्रोथ और मिनिकॉय द्वीपों में आयोजित किया गया, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला। इस पहल ने दूरदराज़ द्वीपीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

12 जनवरी 2026 को उद्घाटित इस चिकित्सा शिविर को लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र का भरपूर सहयोग मिला। शिविर में कुल 4,719 मरीजों ने विशेषज्ञ और सुपर-स्पेशलिस्ट परामर्श का लाभ उठाया। यह लक्षद्वीप में अपने प्रकार का पहला और अब तक का सबसे बड़ा चिकित्सा शिविर रहा, जिसमें उन्नत चिकित्सा सेवाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशलिटी क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ-साथ मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, नेत्र रोग, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा, रेडियोलॉजी और सामुदायिक चिकित्सा के विशेषज्ञ शामिल थे।

तेज़ी से चिकित्सा टीमों और अत्याधुनिक उपकरणों की तैनाती, तथा प्रत्येक द्वीप पर पूर्ण रूप से कार्यशील चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना ने तीनों सेवाओं के बीच उच्च स्तर के समन्वय और संयुक्तता को दर्शाया। वायु और समुद्री मार्ग से चिकित्सा कर्मियों और संवेदनशील उपकरणों का सुव्यवस्थित परिवहन इस समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।

शिविर के दौरान 51 सामान्य शल्य क्रियाएँ, 71 मोतियाबिंद ऑपरेशन, 50 से अधिक एंडोस्कोपी, 50 से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच, 250 से अधिक अल्ट्रासाउंड परीक्षण, 100 से अधिक दंत प्रक्रियाएँ और कई त्वचा रोग संबंधी उपचार किए गए। सभी सेवाएँ और दवाइयाँ पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की गईं, जिससे मरीजों को मुख्य भूमि के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आई।

स्थायी योगदान के रूप में भारतीय नौसेना ने अगत्ती और अमिनी के स्वास्थ्य केंद्रों को दो ईसीजी मशीनें भी भेंट कीं। इसके साथ ही, जन जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें निवारक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली, कैंसर जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) प्रशिक्षण शामिल था।

लक्षद्वीप के लोगों और प्रशासन द्वारा अत्यंत सराहा गया यह संयुक्त चिकित्सा शिविर अपने व्यापक प्रभाव, पेशेवर निष्पादन और मानवीय संवेदनशीलता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस पहल के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर देश के दूरस्थ क्षेत्रों में नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।


आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना से जनता हो रही लाभान्वित

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मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक लगभग पौने दो लाख मरीजों का इलाज

महासमुंद- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। योजना का मुख्य लक्ष्य शहरी स्लम क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में नगर पालिका परिषद महासमुंद के विभिन्न वार्डों में नियमित स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी अशोक सलामे की देखरेख में शिविरों का संचालन सुचारू रूप से किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट मैनेजर धर्मेन्द्र भारद्वाज ने बताया कि महासमुंद जिले के शहरी क्षेत्रों में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक लगभग पौने दो लाख मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें से 50 हजार से अधिक नागरिकों के मुफ्त लैब टेस्ट कराए गए हैं तथा डेढ़ लाख से अधिक मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। शिविरों में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन की टीम द्वारा मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श और जांच की सुविधा दी जाती है। योजना के अंतर्गत 170 प्रकार की आवश्यक दवाइयां तथा 41 प्रकार की लैब जांच पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके साथ ही नगर के सफाई मित्रों के लिए भी प्रति माह नियमित स्वास्थ्य जांच की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे उनके स्वास्थ्य संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत मोबाइल चिकित्सा दल शहर के विभिन्न वार्डों में पहुंचकर नागरिकों को उनके घर के पास ही उच्चतम स्वास्थ्य परामर्श, जांच और दवाइयों की सुविधा प्रदान कर रहा है।


एएमआरआईटी फार्मेसी के 10 वर्ष पूरे: स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने किया समारोह का उद्घाटन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एएमआरआईटी (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी की 10वीं वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सस्ती दवाओं की उपलब्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सार्वजनिक क्षेत्र की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

2015 में स्थापना के बाद से, एएमआरआईटी फार्मेसियों ने जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं को 50% से 90% तक की छूट पर उपलब्ध कराकर मरीजों, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लोगों के इलाज की लागत को काफी कम किया है।

सभा को संबोधित करते हुए, नड्डा ने एएमआरआईटी के सफल संचालन के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को बधाई दी। उन्होंने याद किया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और न्यायपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया था। इसी दृष्टि के साथ जन औषधि और एएमआरआईटी जैसी पहल शुरू की गईं, ताकि दवाएं और चिकित्सा उपकरण कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि एएमआरआईटी आज एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें 255 से अधिक फार्मेसियाँ संचालित हैं, और इसे पूरे देश में 500 आउटलेट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि जहाँ आज हर एम्स में एएमआरआईटी फार्मेसी उपलब्ध है, अब लक्ष्य इसे हर मेडिकल कॉलेज और हर जिला अस्पताल तक पहुँचाना है ताकि किफायती दवाएं देश के हर नागरिक तक पहुंच सकें।

एएमआरआईटी फार्मेसी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रांडेड दवाओं पर 50% की औसत छूट से अब तक 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। लगभग ₹17,000 करोड़ की एमआरपी वाली दवाएं अब तक वितरित की गई हैं, जिससे मरीजों को लगभग ₹8,500 करोड़ की बचत हुई है।

उन्होंने एएमआरआईटी फार्मेसियों के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा के मार्गदर्शन में एएमआरआईटी की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और न्यायसंगत दवा पहुँचाना है।

उन्होंने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और एएमआरआईटी नेटवर्क की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि पूरा एचएलएल और एएमआरआईटी परिवार नेटवर्क के विस्तार, सिस्टम सुधारने और संचालन को और मजबूत करने के लिए “जोश, जूनून और जज़्बात” के साथ कार्य करता रहेगा।

धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए अनीता थम्पी ने स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और एचएलएल व एएमआरआईटी टीमों की प्रतिबद्धता की भी सराहना की, जिनकी मेहनत से सस्ती दवाएं लोगों तक पहुँची हैं।

इस अवसर पर नड्डा ने देशभर में 10 नई एएमआरआईटी फार्मेसियों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने AMRIT ITes – Eco Green Version 2.0 नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया, जो संचालन को अधिक पारदर्शी, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा।

कार्यक्रम के दौरान एएमआरआईटी के दस वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक जारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती दवाएं पहुँचाने के लिए मोबाइल फार्मेसी वैन का भी शुभारंभ किया गया। इसके अलावा, दवाओं की उपलब्धता, कीमत और नजदीकी एएमआरआईटी फार्मेसी की जानकारी देने के लिए एक 24×7 नेशनल कॉन्टैक्ट सेंटर का उद्घाटन किया गया।

पृष्ठभूमि

एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड, एएमआरआईटी का कार्यान्वयन एजेंसी, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न सार्वजनिक उपक्रम है। यह गर्भनिरोधक उत्पादों, अस्पताल उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों, डायग्नोस्टिक सेवाओं (हिंदलैब्स), खुदरा फार्मेसी (AMRIT), एचएलएल फार्मेसी, आईवियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, प्रोक्योरमेंट और कंसल्टेंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करती है। एचएलएल 7 अत्याधुनिक फैक्ट्रियों, 5 सहायक कंपनियों और एक कॉर्पोरेट आरएंडडी केंद्र का संचालन करता है, जो भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

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