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10 साल से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे शशिकांत ने मुख्यमंत्री से लगाई इलाज की गुहार, कहा—इलाज कराइए या इच्छा मृत्यु की अनुमति दीजिए

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धमतरी- धमतरी जिले के शशिकांत भरत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से अपने इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। करीब 10 वर्षों से बिस्तर पर जीवन गुजार रहे शशिकांत ने सरकार से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित ESIC अस्पताल में बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनका समुचित इलाज हो और वे अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य जीवन जी सकें।

शशिकांत के मुताबिक वे धमतरी के भटगांव ITI में कंप्यूटर प्रशिक्षण की पढ़ाई कर रहे थे। 11 नवंबर 2016 को जेठोनी त्योहार की छुट्टी के दौरान वे अपने गांव देवपुर लौट रहे थे। रास्ते में दुकली (गचकन्हार) गांव के पास उनके साथ एक हादसा हुआ, जिसके बाद उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी की गंभीर समस्या हुई है। हादसे के बाद से वह लगातार बिस्तर पर हैं और रोजमर्रा के कामों के लिए भी अपने माता-पिता पर निर्भर हैं।

शशिकांत ने बताया कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। पिछले 10 वर्षों से बीमारी और शारीरिक पीड़ा के बीच जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण आ सके।

उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी समस्या रखने के लिए कई बार प्रयास किया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए वे करीब पांच बार प्रयास कर चुके हैं। एक बार सुशासन तिहार के दौरान धमतरी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री निवास जाकर भी कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

शशिकांत के मुताबिक 11 जनवरी 2023 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष भी अपनी समस्या रखी थी। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रखने का अवसर मिला। शशिकांत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या सुनी, उनका आवेदन लिया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

अब शशिकांत ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा, विधायक अंबिका मरकाम और छत्तीसगढ़ के नागरिकों से भी अपील की है कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और इलाज की व्यवस्था कराने में सहयोग करें।

शशिकांत ने अपने वीडियो को अपने चैनल पर साझा करने वाले पत्रकार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार के माध्यम से उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सकी। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और यदि इलाज संभव नहीं है तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दिलाने में मदद की जाए।

https://youtu.be/ERH5go9ywuc

शशिकांत की अपील अब सरकार और प्रशासन से यही है कि उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मामले में तत्काल मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार की व्यवस्था की जाए, ताकि पिछले एक दशक से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे इस युवक को बेहतर जीवन की उम्मीद मिल सके।

नोट: यह वीडियो शशिकांत भरत द्वारा साझा की गई जानकारी और उनकी अपील पर आधारित है।

मलेरिया पर निर्णायक प्रहार जारी, एक भी मृत्यु न हो यही हमारा लक्ष्य : स्वास्थ्य मंत्री

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प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

रायपुर- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने  कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10  मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए  प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह ग्राम की ऐतिहासिक उपलब्धि : जिले के खड़गवां सीएचसी को मिला ISO प्रमाणपत्र

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रायपुर-छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए सरगुजा संभाग का पहला ISO प्रमाणित कोल्ड चेन प्वाइंट बनने का गौरव मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां ने हासिल किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह ग्राम खड़गवां में उनके सतत प्रयासों और दिशा-निर्देशों के परिणाम स्वरूप संभव हुई है। वहीं इस सफलता के पीछे सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम की निरंतर मेहनत का अहम योगदान रहा।

कोल्ड चेन प्वाइंट खड़गवां को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकताओं के पूर्ण अनुपालन में पाया गया है, जिसके चलते इसे ISO सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता का प्रतीक माना जा रहा है। इस प्रमाणन के साथ खड़गवां सीएचसी ने टीकों और रसद के सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप भंडारण की नई मिसाल कायम की है। यहां सभी टीके CFC मुक्त और WHO प्रमाणित CCE तिथि वाले उपकरणों में अनुशंसित तापमान पर सुरक्षित रखे जाते हैं। आरआई टीकों और रसद की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी बनाने के लिए ईवीआईएन (eVIN) के माध्यम से ऑनलाइन वास्तविक समय में स्टॉक अपडेट किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। 

दिन में दो बार तापमान दर्ज कर टीकों की प्रभावकारिता सुनिश्चित की जाती है, वहीं वेब-आधारित डेटा लॉगर प्रणाली से उच्चस्तरीय सतत निगरानी भी की जाती है।

टीकों की आपूर्ति में FIFO (First In First Out) ) और  EEFO (Earliest Expiry First Out) दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है, जिससे शून्य अपव्यय (Zero Wastage) सुनिश्चित हो रहा है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार VVM  (Vaccine Vial Monitor) आधारित आपूर्ति प्रणाली भी लागू की गई है।

टीकों के भंडारण हेतु एक अलग ICE Pack Conditioning Area,  निर्बाध बिजली आपूर्ति व्यवस्था, उचित रैंकिंग सिस्टम वाला सूखा भंडारण क्षेत्र, और प्रशिक्षित व दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता से यह केंद्र सरगुजा संभाग का मॉडल स्वास्थ्य संस्थान बन गया है। कोल्ड चेन प्वाइंट में  NCCMIS सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपकरणों का सटीक प्रबंधन किया जा रहा है, साथ ही टीकाकरण अपशिष्ट निपटान प्रणाली को भी वैज्ञानिक और पर्यावरण हितैषी तरीके से अपनाया गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने AIIMS बिलासपुर के 3वें स्थापना दिवस समारोह में की अध्यक्षता

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बिलासपुर- केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश में AIIMS बिलासपुर के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर अनुराग ठाकुर (लोकसभा सांसद), हर्ष महाजन (राज्यसभा सांसद), जय राम ठाकुर (पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता हिमाचल प्रदेश) और कोल. डॉ. धनी राम शांदिल (स्वास्थ्य मंत्री, हिमाचल प्रदेश) भी उपस्थित थे।

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, “उन्नत MRI, CT स्कैनर, PET-CT, एंडोस्कोपी और ब्रोंकोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ, केवल तीन वर्षों में AIIMS बिलासपुर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आसपास के राज्यों के लोग भी यहां इलाज के लिए आ रहे हैं, जो इस संस्थान में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।”

उन्होंने सरकार की गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दोहराया और न्यूक्लियर मेडिसिन, कैंसर केयर और रीनल ट्रांसप्लांट्स में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले लोग PGI चंडीगढ़ तक यात्रा करते थे, लेकिन अब AIIMS बिलासपुर क्षेत्र की उच्च स्तरीय चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करता है।

चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान देते हुए मंत्री ने बताया कि AIIMS बिलासपुर के लिए हाल ही में 127 पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 29 फैकल्टी और 98 नॉन-फैकल्टी पद शामिल हैं। चयन समिति एक वर्ष तक सक्रिय रहेगी और कम से कम चार साक्षात्कार दौर आयोजित कर इन पदों को शीघ्र भरने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने 500-बेड विश्राम सदन की योजना की घोषणा की ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों के लिए आवास सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, ₹165 करोड़ आवासीय क्वार्टर और छात्रावास निर्माण के लिए तथा ₹5 करोड़ इनडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

AIIMS ब्रांड की प्रतिष्ठा बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने अन्य AIIMS संस्थानों की सफलताओं को दोहराने और नई नवाचार पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने NITI आयोग और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के सहयोग से एक टीम के गठन की भी घोषणा की, जो सभी AIIMS संस्थानों का दौरा करेगी और भविष्य की विकास योजना बनाएगी।

जगत प्रकाश नड्डा ने पिछले 11 वर्षों में चिकित्सा शिक्षा में वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में अब 808 मेडिकल कॉलेज हैं और वार्षिक UG सीटें 35,000 से बढ़कर 1.25 लाख हो गई हैं। पिछले कैबिनेट में प्रधानमंत्री ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,000 नई UG और PG सीटों को मंजूरी दी थी। अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 75,000 मेडिकल सीटें सरकारी संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएंगी।

कार्यक्रम के दौरान AIIMS बिलासपुर का कुलगीत जारी किया गया, जो संस्थान की भावना और मूल्यों का प्रतीक है। इसके अलावा, उपलब्धियों के लिए विशेष पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उत्कृष्ट छात्रों को सम्मानित किया गया।

AIIMS बिलासपुर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स: 1.5 टेस्ला MRI, 128-SLICE CT स्कैनर, PET-CT, SPECT-CT और रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी।

  • विशेषीकृत देखभाल: कैंसर ट्रीटमेंट, रेडियोथेरेपी, ऑनकोलॉजी यूनिट और फंक्शनल कैथ लैब।

  • आपातकालीन सेवाएँ: 64 ICU बिस्तर, ब्रोंकोस्कोपी सुइट, LMO प्लांट से निरंतर ऑक्सीजन।

  • ट्रांसप्लांट और सर्जरी: 8 सफल किडनी ट्रांसप्लांट, शीघ्र ही कॉर्नियल ट्रांसप्लांट यूनिट।

  • शोध और प्रयोगशालाएँ: एंडोक्राइनोलॉजी और इम्यूनोलॉजी लैब, क्षेत्रीय वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब (₹19.83 करोड़)।

  • मरीज सहायता: 3 अमृत/जन औषधि फार्मेसियाँ, 250-बेड विश्राम सदन निर्माणाधीन।

  • शिक्षा और प्रशिक्षण: आधुनिक लेक्चर हॉल, सिमुलेशन और स्किल लैब।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: छात्रावास (540+ क्षमता), आवासीय क्वार्टर, रूफटॉप सोलर, इनडोर स्टेडियम।

भविष्य की योजनाओं में बोन मैरो ट्रांसप्लांट ब्लॉक, ऑटोप्सी ब्लॉक, ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर सेंटर, रोबोटिक सर्जरी यूनिट और ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इस अवसर पर अंकिता मिश्रा बुंदेला (संयुक्त सचिव PMSSY), प्रो. नरेंद्र कुमार अरोड़ा (अध्यक्ष AIIMS बिलासपुर), प्रो. दयानंद शर्मा (कार्यकारी निदेशक AIIMS बिलासपुर) और ले. कर्नल परांजपे (रजिस्ट्रार) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


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