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छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, एक दिन में 46 नए मरीज मिले

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प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 298 पहुंचा, रायपुर में सबसे ज्यादा 19 नए मामले; 113 मरीज एक्टिव

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में एक दिन में 46 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही 1 जनवरी से 8 सितंबर 2026 तक राज्य में स्वाइन फ्लू के कुल 298 मामले सामने आ चुके हैं।

रायपुर में सबसे ज्यादा मामले

राजधानी रायपुर संक्रमण के मामले में सबसे आगे है। यहां एक दिन में 19 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जिले में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 127 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं।

कई जिलों में मिले नए मरीज

ताजा आंकड़ों के अनुसार दुर्ग में 4, बिलासपुर और कोरबा में 3-3, जबकि बलौदाबाजार, बस्तर, महासमुंद और राजनांदगांव में 2-2 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा जांजगीर-चांपा, कोंडागांव, मुंगेली और सरगुजा में भी नए मामले सामने आए हैं। पांच संक्रमित मरीज दूसरे राज्यों से संबंधित हैं।

113 मरीज अभी एक्टिव

प्रदेश में फिलहाल 113 एक्टिव मरीज हैं। इनमें 81 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 32 मरीज होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार संक्रमित मरीजों की निगरानी कर रहा है।

लक्षण दिखने पर रहें सतर्क

स्वाइन फ्लू एक H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी शामिल हैं। सांस लेने में परेशानी या लक्षण गंभीर होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू से किसी मौत की सूचना नहीं है। हालांकि बढ़ते मामलों को देखते हुए निगरानी और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

H1N1 को लेकर केंद्र अलर्ट: जेपी नड्डा ने की समीक्षा, दिल्ली में अस्पतालों की तैयारियों का लिया जायजा

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नई दिल्ली- देश में H1N1 इन्फ्लुएंजा की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति, अस्पतालों की तैयारियों और इन्फ्लुएंजा की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह भी बैठक में शामिल हुए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने और मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया है।

H1N1 की स्थिति पर केंद्र की पैनी नजर

बैठक के दौरान देश में इन्फ्लुएंजा की राष्ट्रीय निगरानी और महामारी विज्ञान संबंधी स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही Influenza-like Illness (ILI) और Severe Acute Respiratory Infection (SARI) के ट्रेंड पर भी चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों और प्रयोगशालाओं से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर इन्फ्लुएंजा के मामलों में होने वाले किसी भी असामान्य बढ़ोतरी या एक जगह पर मामलों के समूह यानी क्लस्टर की समय रहते पहचान करने पर जोर दिया।

जेपी नड्डा ने अधिकारियों को लगातार सतर्कता, मजबूत निगरानी और पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए।

दिल्ली के अस्पतालों की तैयारियों की भी समीक्षा

बैठक में दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अस्पतालों की क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।

इस दौरान मुख्य रूप से इन व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई:

  • अस्पतालों में उपलब्ध बेड

  • क्रिटिकल केयर सुविधाएं

  • ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड

  • वेंटिलेटर की उपलब्धता

  • जरूरी दवाइयां

  • जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाएं

  • अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री

  • मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने की व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में पर्याप्त surge capacity बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव न पड़े।

गंभीर मरीजों के लिए रेफरल सिस्टम मजबूत करने पर जोर

जेपी नड्डा ने कहा कि ऐसे मरीज जिन्हें विशेषज्ञ या गंभीर चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, उनके लिए सीमलेस रेफरल सिस्टम होना जरूरी है।

इसका मतलब है कि यदि किसी अस्पताल में मरीज की स्थिति के मुताबिक जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे बिना अनावश्यक देरी के बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में भेजने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।

जल्द पहचान और समय पर जांच जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन्फ्लुएंजा के मामलों की जल्दी पहचान, समय पर टेस्टिंग और उचित इलाज को मजबूत करने पर जोर दिया।

उन्होंने मौजूदा निगरानी और लैब नेटवर्क का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए, ताकि बीमारी के ट्रेंड को लगातार ट्रैक किया जा सके और किसी भी असामान्य स्थिति का पता शुरुआती स्तर पर ही चल जाए।

10 जुलाई को राज्यों को भेजी गई थी एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने की सलाह दे चुका है। 10 जुलाई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर Acute Respiratory Illness (ARI) को लेकर निगरानी और तैयारियां मजबूत करने को कहा था।

राज्यों को सलाह दी गई थी कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों पर लगातार नजर रखी जाए।

लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी तैयारियों के साथ-साथ जन-जागरूकता और बचाव के उपायों पर भी जोर दिया।

लोगों को खास तौर पर:

  • श्वसन संबंधी स्वच्छता बनाए रखने,

  • नियमित रूप से हाथों की सफाई करने,

  • सांस से जुड़ी समस्या होने पर सावधानी बरतने,

  • लगातार या गंभीर लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने

की सलाह दी गई है।

यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर चेतावनी वाले लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

डेंगू और मलेरिया पर भी नजर

बैठक में केवल H1N1 या इन्फ्लुएंजा ही नहीं, बल्कि डेंगू और मलेरिया जैसी अन्य मौसमी बीमारियों की स्थिति और रोकथाम पर भी चर्चा हुई।

जेपी नड्डा ने राज्य सरकारों से मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए proactive और preparedness-oriented approach अपनाने को कहा।

उन्होंने स्थानीय निकायों और नगर पार्षदों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय स्तर पर लोगों को बीमारी की रोकथाम, संक्रमण के प्रसार और नियंत्रण के उपायों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया।

TB की पहचान में स्थानीय निकायों की भूमिका का उदाहरण

बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में टीबी के मामलों की पहचान में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसमें स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी और whole-of-government approach की भूमिका रही है।

जेपी नड्डा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों तक सही और evidence-based जानकारी पहुंचाई जा सकती है। साथ ही इससे समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

H1N1 क्या है?

H1N1 इन्फ्लुएंजा एक प्रकार का वायरल फ्लू है, जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। मौसमी इन्फ्लुएंजा की तरह इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं।

कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, खासकर जब सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण विकसित हों। इसलिए लगातार या गंभीर श्वसन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सरकार ने कहा- स्थिति पर लगातार निगरानी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत संबंधित बीमारियों की स्थिति पर लगातार और करीबी निगरानी रखी जा रही है।

केंद्र सरकार राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर रही है, ताकि मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जा सके।

निष्कर्ष

H1N1 और मौसमी इन्फ्लुएंजा को लेकर केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। जेपी नड्डा की समीक्षा बैठक में दिल्ली समेत पूरे देश की निगरानी व्यवस्था, अस्पतालों की क्षमता, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, दवाओं और टेस्टिंग सुविधाओं की समीक्षा की गई।

सरकार का जोर फिलहाल घबराहट पर नहीं बल्कि निगरानी, समय पर जांच, बेहतर अस्पताल तैयारियों और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और स्थानीय निकायों से भी मौसमी बीमारियों के खिलाफ सक्रिय और समन्वित तरीके से काम करने को कहा है।

बेंगलुरु के स्कूल में फ्लू का प्रकोप, 500 से अधिक छात्र बीमार; ऑफलाइन कक्षाएं अस्थायी रूप से बंद

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बेंगलुरु- बेंगलुरु के रिचर्ड्स टाउन स्थित क्लेरेंस हाई स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और कर्मचारियों के फ्लू जैसे लक्षणों से प्रभावित होने के बाद स्कूल प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कुछ दिनों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। स्कूल के अनुसार, 500 से अधिक विद्यार्थी और 21 कर्मचारी बुखार, सर्दी, खांसी और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों से प्रभावित बताए गए हैं।

दो H1N1 मामलों की पुष्टि

स्कूल प्रशासन ने बताया कि H1N1 के दो मामलों की पुष्टि हुई है और एक कर्मचारी का अस्पताल में उपचार चल रहा है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोका जा सके।

हालांकि, इस मामले में कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। स्वास्थ्य आयुक्त गुरुदत्त हेगड़े के अनुसार, करीब 500 विद्यार्थियों के H1N1 संक्रमित होने की खबर सही नहीं है। उन्होंने कहा कि दो शिक्षकों में H1N1 की पुष्टि हुई है, जबकि किसी विद्यार्थी के H1N1 पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं हुई है। फ्लू जैसे लक्षण वाले विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर उठे सवाल

स्कूल प्रशासन ने विद्यालय के आसपास साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। स्कूल के आसपास मौजूद कुछ स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और दुकानों के कारण कचरा जमा होने तथा स्वच्छता संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया गया है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिक निकाय से आसपास के क्षेत्र की सफाई और खाद्य विक्रेताओं के निरीक्षण की मांग की है।

नागरिक अधिकारियों ने स्कूल के आसपास सफाई और सैनिटाइजेशन की कार्रवाई भी की है। प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

स्कूल 19 अगस्त से दोबारा खुलने की तैयारी में

स्कूल प्रशासन के अनुसार, एहतियाती तौर पर ऑफलाइन कक्षाएं 18 अगस्त तक स्थगित रखी गईं और इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई जारी रही। स्कूल ने बताया है कि स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी के बाद 19 अगस्त से स्कूल दोबारा खोलने की योजना है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर आराम करना, संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

बेंगलुरु की यह घटना स्कूलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य निगरानी और संक्रमण नियंत्रण की तैयारियों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

कांकेर में मलेरिया का कहर: एक और महिला की मौत, अब तक 4 की गई जान, 10 से अधिक छात्र भर्ती

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 कांकेर/भानुप्रतापपुर। बस्तर अंचल के कांकेर जिले में मलेरिया का प्रकोप जानलेवा होता जा रहा है। छात्रावास के तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद अब भानुप्रतापपुर ब्लॉक के चिच गांव में एक महिला ने मलेरिया के कारण दम तोड़ दिया। जिले में मलेरिया से मौतों का आंकड़ा बढ़कर चार पहुंच गया है। संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांकेर पहुंचकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।


तेज बुखार के बाद इलाज के दौरान महिला ने तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, चिच गांव निवासी राकेश्वरी कोला (पति-...) को बीते कुछ दिनों से तेज बुखार आ रहा था। जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर मितानिन कार्यकर्ता द्वारा दवाइयां दी गई थीं, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। मंगलवार देर रात गंभीर हालत में परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में भर्ती 10 छात्र, 2 की हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर
जिले के विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले 10 से अधिक छात्र-छात्राएं फिलहाल मलेरिया से पीड़ित हैं और अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इनमें से दो छात्रों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य टीमों द्वारा छात्रावासों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने ली हाई लेवल बैठक, बस्तर संभाग में अलर्ट जारी
मलेरिया के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की। उन्होंने प्रभावित इलाकों में त्वरित जांच, पर्याप्त दवा वितरण, फॉगिंग और घर-घर सर्वे के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, धरातल पर रोजाना सामने आ रहे नए मामलों से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

कोरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट किए गए 108 किलो फल, दुकानों पर छापेमारी

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​बैकुंठपुर/कोरिया- कोरिया जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले फल विक्रेताओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के निर्देश पर और कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले की अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर के नेतृत्व में टीम ने पिछले तीन दिनों 27 मई से 29 मई तक, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताबड़तोड़ निरीक्षण किया। इस दौरान भारी मात्रा में सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट कराए गए, वहीं दुकानदारों को सख्त हिदायत भी दी गई। अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, 27 मई को अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से हुई। यहाँ टीम ने 6 फल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी मात्रा में खराब फल पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। इस दौरान ​22 किलोग्राम आम, ​4 किलोग्राम सेब, ​14 दर्जन केले, ​1 किलोग्राम संतरा और 500 ग्राम अनार नष्ट कराया गया। इसी तरह से ​28 मई को कार्रवाई के दूसरे दिन टीम पटना पहुँची, जहाँ 9 फल दुकानों की जाँच की गई। टीम ने सभी दुकानदारों को सड़े एवं खराब फल न बेचने तथा दुकानों में स्वच्छता बनाए रखने की सख्त समझाइश दी। कार्रवाई के तीसरे दिन आज ​29 मई को जिला मुख्यालय में दोबारा कार्रवाई की गई। आज मुख्यालय के अलग-अलग क्षेत्र में फिर से 5 फल दुकानों का सघन जांच किया गया। यहाँ नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 77 किलोग्राम से अधिक फल और केले नष्ट कराए गए। जिनमें ​65 किलोग्राम तरबूज, 12 किलोग्राम आम, 0​1 किलोग्राम सेब, ​2 दर्जन केले, 0​1 किलोग्राम अंगूर और 0​1 किलोग्राम चुकंदर शामिल है। 

अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि, लोगों के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं है। गर्मी के इस मौसम में सड़े-गले और हानिकारक रसायनों से पकाए गए फल बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी फल विक्रेताओं को अपनी दुकानों में साफ-सफाई रखने और केवल गुणवत्तापूर्ण फल ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, विभाग का यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इस कार्रवाई में नमूना सहायक प्रमोद पैकरा और निधि जायसवाल का योगदान रहा।


दिल्ली में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर, राजधानी घुटन की चपेट में

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राजधानी दिल्ली में शुक्रवार सुबह वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में “बहुत खराब” से “खतरनाक” श्रेणी में पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर यह स्तर 300 से भी ऊपर दर्ज किया गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ITO, नरेला, आनंद विहार जैसे क्षेत्रों में AQI 330+ तक पहुंच गया है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से कृषि पराली जलने, ठहरी हुई हवाओं और ठंड की शुरुआत के कारण उत्पन्न हुई है। इन तीनों कारकों ने मिलकर राजधानी के वातावरण में प्रदूषक कणों को फंसा दिया है।

बिज़नेस टुडे के अनुसार, पराली जलने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे दिल्ली-NCR में धुंध और स्मॉग की परत और गहरी होती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण स्तर श्वसन रोगियों, बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मास्क पहनें, घर से बाहर निकलने से बचें, और एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।

सरकार ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए आपात बैठक बुलाई है और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं।


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