Media24Media.com: #HandloomAndHandicrafts

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #HandloomAndHandicrafts. Show all posts
Showing posts with label #HandloomAndHandicrafts. Show all posts

राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन 2026 कल से गुवाहाटी में, भारत को वैश्विक वस्त्र केंद्र बनाने पर होगा मंथन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा असम सरकार के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन 2026 कल, 8 जनवरी 2026 से गुवाहाटी, असम में प्रारंभ होगा। दो दिवसीय यह सम्मेलन “भारत के वस्त्र: विकास, विरासत और नवाचार की बुनाई” विषय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वस्त्र मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र से जुड़े नीतिगत मुद्दों, निवेश, सततता, निर्यात, अवसंरचना विकास और तकनीकी उन्नयन पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है। यह सम्मेलन सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक भारत को एक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसका फोकस निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर है, जो “विकास भी, विरासत भी” की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

8 जनवरी 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र के दौरान एक प्रदर्शनी और पवेलियन का भी उद्घाटन किया जाएगा, जिसमें भारत की वस्त्र शक्ति, नवाचार और समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा।

सम्मेलन में अवसंरचना और निवेश, भारत के वस्त्र निर्यात का विस्तार, कच्चा माल और रेशे, तकनीकी वस्त्र और नई पीढ़ी के फाइबर, तथा हथकरघा और हस्तशिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन जैसे प्रमुख विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क, सततता एवं पर्यावरणीय अनुपालन, तकनीकी वस्त्र, नवाचार तथा एकीकृत मूल्य-श्रृंखला विकास जैसी प्रमुख पहलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री एवं अधिकारी सम्मेलन में भाग लेकर श्रेष्ठ प्रथाओं, चुनौतियों और नीतिगत सुझावों को साझा करेंगे, ताकि क्षेत्रीय और जिला स्तर पर वस्त्र मूल्य-श्रृंखला को और सुदृढ़ किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, 8 जनवरी 2026 को ही “भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के वस्त्र क्षेत्र को सशक्त और सुदृढ़ करना” विषय पर एक विशेष कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों के वस्त्र मंत्री, संसद सदस्य तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। यह कॉन्क्लेव उत्तर-पूर्व की रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प और बांस-आधारित वस्त्रों की अपार संभावनाओं को उजागर करने पर केंद्रित होगा, जिसमें विशेष रूप से एरी, मूगा और मल्बरी रेशम, महिला-नेतृत्व वाले उद्यम, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर जोर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का सम्मेलन केंद्र–राज्य सहयोग को सुदृढ़ करने और एक प्रतिस्पर्धी, सतत एवं समावेशी वस्त्र क्षेत्र के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होने की उम्मीद है।


मणिपुर के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने पर बल — ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

No comments Document Thumbnail

पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज मणिपुर के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और मणिपुर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का उद्देश्य चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, समावेशी विकास के नए अवसरों की पहचान करना और राज्य की विकास प्राथमिकताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण के साथ संरेखित करना था।

मणिपुर पोलो का पुनरुद्धार और खेल-पर्यटन को बढ़ावा

बैठक में विशेष रूप से मणिपुर पोलो के पुनरुद्धार पर चर्चा की गई, जिसे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक अवसर दोनों के प्रतीक के रूप में देखा गया। सिंधिया ने कहा कि मणिपुर को एक बार फिर “भारत की पोलो राजधानी” के रूप में स्थापित करने के लिए विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों और सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह पहल खेल-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करेगी, स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाएगी और मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

शिल्पकारों और बुनकर समुदायों का सशक्तिकरण

मंत्री ने राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प और हैंडलूम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने 250 मिनी और 200 मेगा उत्पादन इकाइयों की स्थापना और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को समर्थन देने की घोषणा की। सिंधिया ने कहा कि इससे न केवल पारंपरिक शिल्प को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा होंगे।

अवसंरचना, कनेक्टिविटी और कृषि आधारित आजीविका

बैठक में एक इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रौद्योगिकी और डिजाइन संस्थान शामिल होगा। मंत्री ने “वाइब्रेंट विलेजेज” को पीएम गति शक्ति ढांचे से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि ग्रामीण पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और अंतिम छोर तक पहुंच को सुदृढ़ किया जा सके।

कृषि क्षेत्र में, उन्होंने अगले चार वर्षों में 10,000 हेक्टेयर में पाम ऑयल की खेती का लक्ष्य तय किया ताकि आत्मनिर्भर कृषि-आधारित आजीविका को बढ़ावा मिल सके।

तेज क्रियान्वयन और परिणामोन्मुख विकास

सिंधिया ने सभी परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में तेज क्रियान्वयन और परिणाम-आधारित प्रगति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि MDoNER एक “सक्रिय सुगमकर्ता” की भूमिका निभाता रहेगा, ताकि मणिपुर का विकास समावेशी और सतत बना रहे।

निरंतरता और प्रतिबद्धता

यह तीसरी समीक्षा बैठक इस वर्ष पहले आयोजित दो बैठकों की श्रृंखला को आगे बढ़ाती है, जिनमें पर्यटन, खेल, पोलो सर्किट, लोकतक झील पुनर्जीवन, बुनाई क्लस्टर और वाइब्रेंट विलेजेज पर केंद्रित चर्चा हुई थी।

इन निरंतर प्रयासों के माध्यम से सिंधिया ने यह स्पष्ट किया कि अपनी समृद्ध संस्कृति, उद्यमशीलता भावना और सामुदायिक शक्ति के बल पर मणिपुर आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के तहत आत्मनिर्भरता और विकास का प्रतीक बन रहा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.