Media24Media.com: #GoldenJubilee

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #GoldenJubilee. Show all posts
Showing posts with label #GoldenJubilee. Show all posts

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर ने स्वर्ण जयंती मनाई, आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य में 50 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा

No comments Document Thumbnail

जयपुर- भारत के प्रमुख आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा संस्थान राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर ने आज अपनी स्वर्ण जयंती मनाई, जो आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में 50 वर्षों की विशिष्ट सेवा का प्रतीक है। इस स्मृति कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा सहित आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में संस्थान की यात्रा को रेखांकित किया गया, जो 1976 में एक आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में स्थापना से लेकर वर्तमान में भारत के पहले आयुर्वेद डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय बनने तक पहुँची है। संस्थान ने शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, पांडुलिपि विज्ञान और रोगी देखभाल के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक जीवंत सेतु है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों की यह उपलब्धि केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि आयुर्वेद के माध्यम से जनस्वास्थ्य के प्रति समर्पण, अनुसंधान और सेवा की निरंतर यात्रा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ऐतिहासिक रूप से आयुर्वेद की समृद्ध भूमि रहा है, जो औषधीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से समृद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने और आयुर्वेद, योग तथा पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में राष्ट्रीय नेतृत्व की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि NIA देश के प्रमुख आयुर्वेद संस्थानों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने संस्थान के बुनियादी ढांचे के विस्तार, अकादमिक उत्कृष्टता और भविष्य उन्मुख विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण जयंती को नए संकल्प का क्षण बताते हुए कहा कि आने वाले दशकों में NIA को वैश्विक आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों को संस्थान की विरासत में योगदान के लिए बधाई दी।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्षों की यात्रा आयुर्वेद के विद्वानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की पीढ़ियों के अटूट समर्पण को दर्शाती है, जिन्होंने इस प्राचीन विज्ञान को संरक्षित और विकसित किया है। उन्होंने NIA को भारत की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली का आधार स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में मजबूती से एकीकृत किया गया है। उन्होंने बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं का उल्लेख करते हुए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और जामनगर में WHO के पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक केंद्र के उन्नयन को इस क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी कदम बताया।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आयुष को प्रमाण आधारित, वैज्ञानिक रूप से मान्य और वैश्विक रूप से स्वीकार्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि NIA जैसे संस्थान उन्नत अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य पहल, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रोगी-केंद्रित मॉडल के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए मंत्री जाधव ने संस्थान के भूमि और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए निरंतर समर्थन की अपेक्षा जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NIA “हील इन इंडिया” विज़न में महत्वपूर्ण योगदान देगा और समग्र कल्याण का वैश्विक केंद्र बनेगा।

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्वर्ण जयंती राजस्थान और देश दोनों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि 1976 में एक आयुर्वेद कॉलेज से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बनने तक की यात्रा इसकी अकादमिक उत्कृष्टता और सेवा भावना को दर्शाती है।

उन्होंने आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चिकित्सा को जनस्वास्थ्य के लिए मजबूत करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और NIA को विश्व स्तरीय आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें औषधीय पौधों के संरक्षण, शिक्षा और अनुसंधान के लिए “धन्वंतरी उपवन” औषधीय पौधा उद्यान का उद्घाटन, उन्नत सिमुलेशन प्रयोगशाला और नया ऑपरेशन थिएटर ब्लॉक शामिल हैं, जिससे संस्थान में क्लिनिकल प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमता और रोगी सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसके अलावा, बाह्य रोगी सेवाओं के विस्तार और रोगियों की सुविधा के लिए नया ओपीडी ब्लॉक “सुश्रुत भवन” का उद्घाटन किया गया। संस्थान के पॉडकास्ट स्टूडियो से पहला आधिकारिक पॉडकास्ट भी लॉन्च किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन एपिसोड रिकॉर्ड किया, जिससे डिजिटल संपर्क, अकादमिक संवाद और जन सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।

स्वर्ण जयंती समारोह ने आयुर्वेद के संरक्षण और विकास के लिए शिक्षा, अनुसंधान और करुणामय रोगी देखभाल के प्रति राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। कार्यक्रम का समापन NIA को आयुर्वेद ज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और प्रमाण आधारित पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया और श्री सक्ति अम्मा की 50 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा के इस अवसर का हिस्सा बनकर गहन प्रसन्नता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक गरिमा इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और राम नाथ कोविंद सहित, हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी पिछले माह इस मंदिर के दर्शन किए।

सक्ति अम्मा की धर्म के प्रति प्रतिबद्धता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक सेवा तक विस्तृत है। उन्होंने श्रीपुरम में संचालित विभिन्न परोपकारी गतिविधियों की सराहना की, जिनमें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियाँ, जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था, विद्यार्थियों को साइकिल वितरण जैसी दीर्घकालिक पहलें तथा प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने वाला अन्नदान कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने इन पहलों को सच्ची भक्ति की भावना से की गई उत्कृष्ट सेवाएँ बताया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि श्रीपुरम परिसर में 50,000 से अधिक वृक्ष लगाए गए हैं तथा समीपवर्ती कैलासगिरि पहाड़ियों पर कई लाख पौधे रोपे गए हैं। उन्होंने इसे धरती माता और मानवता के लिए एक ऐतिहासिक योगदान बताया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहलों को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला कदम कहा। उन्होंने जोड़ा कि पर्यावरण की रक्षा स्वयं में एक दिव्य सेवा है।

इस बात पर जोर देते हुए कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानव सेवा में निहित है, उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों का उल्लेख किया— “प्रेम से बड़ा कोई तप नहीं है।” उन्होंने कहा कि समाज से प्रेम करना और उसकी सेवा करना ही सर्वोच्च आध्यात्मिक साधना है।

उपराष्ट्रपति ने सक्ति अम्मा को वर्तमान युग की एक महान आध्यात्मिक विभूति बताया, जो अपने जीवन और कर्मों के माध्यम से “प्रेम ही ईश्वर है” के सिद्धांत को साकार करते हुए समाज में धर्म और आध्यात्मिक चेतना का पोषण कर रही हैं।

इससे पूर्व दिन में, उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में नारायणी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने देवी लक्ष्मी से सभी के लिए शांति, समृद्धि और सुख की प्रार्थना की।

एनएचपीसी की स्वर्ण जयंती पर मनोहर लाल ने जारी किया 50 रुपये का स्मारक सिक्का और ‘छोटा भीम और बड़ा बांध’ कॉमिक बुक

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-केंद्रीय विद्युत, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज नई दिल्ली में एनएचपीसी (NHPC) के स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 50 रुपये मूल्य का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) उत्तम लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एनएचपीसी लिमिटेड, जो विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत भारत की प्रमुख हाइड्रो पावर नवरत्न कंपनी है, 7 नवम्बर 2025 को अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर रही है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनएचपीसी की 50 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पर बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी यह स्मारक सिक्का एनएचपीसी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में रणनीतिक भूमिका और योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह सिक्का संगठन की सहनशीलता, नवाचार और राष्ट्र सेवा की गौरवशाली यात्रा को सम्मानित करता है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने एनएचपीसी की विशेष प्रकाशन — कॉमिक बुक “छोटा भीम और बड़ा बांध” का भी विमोचन किया। ‘छोटा भीम’ और उसके साथियों पर आधारित यह कॉमिक बच्चों और आम जनता को जलविद्युत की महत्ता और लाभ के बारे में सरल और रोचक ढंग से जानकारी देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

एनएचपीसी के सीएमडी भूपेन्द्र गुप्ता ने इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्री का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी यह ₹50 का स्मारक सिक्का एनएचपीसी की स्वर्ण जयंती पर उसके गौरवशाली योगदान की सराहना करता है और संगठन के लिए आने वाले वर्षों में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने की प्रेरणा देगा।

पिछले पाँच दशकों में एनएचपीसी ने देश के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक जलविद्युत परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है। साथ ही कंपनी ने सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार करते हुए स्वयं को 100% हरित ऊर्जा कंपनी के रूप में स्थापित किया है।

वर्तमान में एनएचपीसी की 30 पावर स्टेशनों से 8333 मेगावाट की स्थापित क्षमता है, जबकि 14 परियोजनाएँ 9704 मेगावाट से अधिक क्षमता के साथ निर्माणाधीन हैं। एनएचपीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और देश को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने में अहम भूमिका निभा रही है।


कोल इंडिया की स्वर्ण जयंती और एसईसीएल की रूबी जयंती पर विशेष डाक आवरण एवं कैशे का विमोचन

No comments Document Thumbnail

रायपुर-साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), जो कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की एक सहायक कंपनी है, ने कोल इंडिया की स्वर्ण जयंती और एसईसीएल की रूबी जयंती (40 वर्ष) के उपलक्ष्य में भारत डाक विभाग द्वारा विशेष डाक आवरण (Special Cover) जारी किया। इस अवसर पर एक विशेष निरस्तीकरण कैशे (Special Cancellation Cachet) भी जारी किया गया।

इस अवसर पर पी. एम. प्रसाद, अध्यक्ष, कोल इंडिया लिमिटेड, एवं हरीश दुहान, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, एसईसीएल उपस्थित रहे। इनके साथ फंक्शनल डायरेक्टर्स, मुख्य सतर्कता अधिकारी, तथा दिनेश कुमार मिस्त्री (IPoS), डीपीएस (मुख्यालय), छ.ग. सर्कल, रायपुर भी मौजूद रहे।

यह विशेष डाक आवरण डाक विभाग, छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के सहयोग से जारी किया गया है। यह एक संग्रहणीय फिलैटेलिक वस्तु (collectible philatelic item) है, जो देश की औद्योगिक और संस्थागत प्रगति की ऐतिहासिक उपलब्धियों को स्मरणीय बनाता है। यह कोल इंडिया की पाँच दशक लंबी विकास यात्रा और एसईसीएल के चार दशक के उत्कृष्ट योगदान को समर्पित एक स्थायी श्रद्धांजलि है।

यह पहल भारत सरकार के “स्पेशल कैम्पेन 5.0” के तहत की गई है, जो संस्थागत स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और सार्वजनिक उपक्रमों की उपलब्धियों को उजागर करने पर केंद्रित है।

कोल इंडिया लिमिटेड, जिसकी स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी, विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ के रूप में कार्य कर रही है और देश की कुल कोयला मांग का 70 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति करती है। अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में कंपनी ने अब तक का सर्वोच्च कोयला उत्पादन, डिस्पैच और ओवरबर्डन रिमूवल (OBR) दर्ज किया, जिससे वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारतीय कोयला क्षेत्र ने 1 बिलियन टन उत्पादन का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया।

एसईसीएल, कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक कंपनियों में से एक है, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में संचालित होती है। एसईसीएल की गेवरा खदान, जो एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान है, परिचालन उत्कृष्टता और तकनीकी नवाचार का प्रतीक है। उत्पादन के साथ-साथ एसईसीएल सतत खनन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति भी समर्पित है। संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पर्यावरण पुनर्स्थापन के क्षेत्र में व्यापक कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियाँ संचालित करती है।

यह विशेष डाक आवरण और कैशे (Cachet) मिलकर कोल इंडिया और एसईसीएल की साझा विरासत को दर्शाते हैं — ऐसी संस्थाएँ जिन्होंने न केवल भारत की प्रगति को ऊर्जा दी है, बल्कि सतत विकास, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के सिद्धांतों को भी दृढ़ता से अपनाया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने CSIR–NIIST के स्वर्ण जयंती समारोह में नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की घोषणा की

No comments Document Thumbnail

तिरुवनंतपुरम- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत का रूपांतरण तकनीक आयातक से नवाचार-आधारित निर्यातक में हो रहा है, जिसे CSIR–राष्ट्रीय अंतर्विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIIST) जैसे संस्थान शक्ति प्रदान कर रहे हैं। ये संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान को स्थिरता और उद्यमिता के साथ जोड़ते हैं।

डॉ. सिंह ने CSIR–NIIST के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के ग्रैंड फिनाले में कहा कि 50 वर्ष पहले संस्थान की स्थापना दक्षिणी प्रायद्वीप के विशाल प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करने के उद्देश्य से की गई थी।

स्वर्ण जयंती के अवसर पर नई सुविधाओं का उद्घाटन:

50 वर्षों की उपलब्धियों को चिह्नित करते हुए, मंत्री ने संस्थान की नई स्वर्ण जयंती बिल्डिंग और CSIR–NIIST इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया। यह केंद्र अनुसंधान विचारों को व्यावहारिक उत्पादों और स्टार्टअप्स में बदलने के लिए बनाया गया है। डॉ. सिंह ने कहा, “कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, इनोवेशन सेंटर स्टार्टअप्स को पोषित करेगा, उद्यमियों का समर्थन करेगा और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को गति देगा।” उन्होंने यह भी बताया कि पहले दस स्टार्टअप्स का इन्क्यूबेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

मंत्री ने कहा कि केरल सरकार ने Bio 360 Life Sciences Park, Thonnakkal में एक प्रस्तावित सेंटर फॉर इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए भूमि आवंटित की है। यह सुविधा बायोटेक्नोलॉजी और जीवन विज्ञान में अनुसंधान को तेज करेगी और लैब में हुई खोजों को जीवन बदलने वाली वास्तविकताओं में बदलने में मदद करेगी।

संस्थान की प्रमुख उपलब्धियां:

डॉ. सिंह ने संस्थान की चार राष्ट्रीय महत्व की नवाचार परियोजनाओं का उल्लेख किया:

  • AIIMS दिल्ली में बायोमेडिकल वेस्ट कन्वर्शन रिग जो संक्रामक कचरे को गैर-विषैले पदार्थ में बदलता है।

  • डायबिटिक और प्री-डायबिटिक लोगों के लिए उपयुक्त “डिज़ाइनर राइस” का विकास।

  • स्वदेशी वैक्सीन वायल मॉनिटर (VVMs), जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई।

  • प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर अनुसंधान।

उन्होंने कहा कि ये पहल सामाजिक प्रभाव वाले विज्ञान का उदाहरण हैं और सीधे स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय मिशनों का समर्थन करती हैं।

संस्थान की वृद्धि और प्रदर्शन:

डॉ. सिंह ने कहा कि NIIST ने पिछले दो वर्षों में अपने संस्थागत बजट में 1.5 गुना वृद्धि की है, जो अब ₹120 करोड़ से अधिक है, और इसका आधा हिस्सा R&D पर खर्च किया गया है। संस्थान ने 28 प्रौद्योगिकियाँ ट्रांसफर की हैं, 65 उद्योग समझौते किए हैं और बाहरी फंडिंग और अनुसंधान उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि संस्थान ने 2024 में IIT गुवाहाटी में 10वां इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल आयोजित कर 40,000 से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ा। “दक्षिण से उत्तर पूर्व तक इस बड़े आयोजन की मेजबानी CSIR–NIIST की एकता और नेतृत्व को दर्शाती है,” उन्होंने कहा।

सरकार, उद्योग और अकादमिया के बीच सहयोग:

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित “whole-of-government” और “whole-of-nation” दृष्टिकोण भारत की वैज्ञानिक प्रगति की कुंजी है। उन्होंने कहा कि हमें सरकार पर निर्भरता से स्वतंत्र, निजी क्षेत्र की भागीदारी वाले स्थायी इकोसिस्टम की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने CSIR और Department of Biotechnology के बीच चल रहे सहयोग और अंतरिक्ष तथा परमाणु क्षेत्रों में निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह एक एकीकृत मॉडल भारत के नवाचार ढांचे का भविष्य है।

वैश्विक नवाचार में भारत की उपलब्धियां:

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की Global Innovation Index रैंकिंग 2014 में 81 से बढ़कर इस वर्ष 38 हो गई है। लगभग 55% पेटेंट अब देशी हैं, जिससे घरेलू क्षमता और आत्मविश्वास का संकेत मिलता है।

विशेष केंद्र और परियोजनाएं:

CSIR–NIIST ने आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र और परफॉर्मेंस केमिकल्स एवं सस्टेनेबल पॉलिमर्स सेंटर के लिए नींव रखी है। इन पहलों का उद्देश्य अनुसंधान को वास्तविक लाभ में बदलना और उद्योग व लोगों के लिए उपयोगी बनाना है। ये राष्ट्रीय मिशनों जैसे पोषण अभियान, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत के साथ मेल खाते हैं।

निष्कर्ष:

डॉ. सिंह ने CSIR–NIIST की टीम को बधाई देते हुए इसे “उद्देश्यपूर्ण उत्कृष्टता की शक्ति केंद्र” बताया और विश्वास जताया कि संस्थान भारत को वैश्विक विज्ञान और नवाचार में अग्रणी बनाने में लगातार योगदान देगा।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.