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IICA मानेसर में “Meet the Legend” श्रृंखला के तहत न्यायिक विशेषज्ञों का विशेष सत्र, PGIP प्रतिभागियों को मिला महत्वपूर्ण मार्गदर्शन

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मानेसर स्थित Indian Institute of Corporate Affairs (IICA) में पोस्ट ग्रेजुएट इनसॉल्वेंसी प्रोग्राम (PGIP) के 7वें बैच के लिए “Meet the Legend” श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष और ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। लगभग तीन घंटे चले इस मास्टरक्लास में दो प्रतिष्ठित न्यायिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।

इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में J. P. Singh, न्यायिक सदस्य, GST अपीलीय न्यायाधिकरण और Balesh Kumar, सदस्य, अपीलीय न्यायाधिकरण (PMLA, FEMA, PBPTA, NDPSA और SAFEMA) उपस्थित रहे।

GST और IBC के संबंध पर विस्तृत चर्चा

अपने संबोधन में जे.पी. सिंह ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) की संरचना और इसका Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के तहत चल रही दिवालिया कार्यवाही के साथ संबंध का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने “सप्लाई”, “कंसिडरेशन”, टैक्सेबल इवेंट, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) तथा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म जैसे मूलभूत GST सिद्धांतों को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने अंतर-राज्य और अंतर-राज्यीय लेनदेन को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों जैसे Swiss Ribbons Pvt. Ltd. v. Union of India और Ghanashyam Mishra & Sons Pvt. Ltd. v. Edelweiss Asset Reconstruction Co. Ltd. का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि एक बार जब समाधान योजना स्वीकृत हो जाती है, तो उसमें शामिल न किए गए सभी दावे, जिनमें वैधानिक बकाया भी शामिल हैं, समाप्त माने जाते हैं।

सत्र के दौरान CIRP प्रक्रिया में व्यावहारिक अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जैसे कि नई GST पंजीकरण की आवश्यकता, IRP/RP द्वारा रिटर्न दाखिल करना, ITC की उपलब्धता तथा IBC की धारा 14 के तहत मोराटोरियम का वसूली कार्यवाही पर प्रभाव।

IBC और PMLA के बीच कानूनी समन्वय पर प्रकाश

दूसरे वक्ता बलेश कुमार ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) और IBC के बीच संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) की अवधारणा को समझाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की तीन प्रमुख अवस्थाओं — प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन — की व्याख्या की।

उन्होंने National Company Law Tribunal (NCLT) और PMLA प्राधिकरणों के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जटिलताओं पर भी चर्चा की, विशेषकर उन मामलों में जहाँ कॉरपोरेट देनदार CIRP के तहत हो और उसकी संपत्तियों पर अटैचमेंट की कार्यवाही चल रही हो।

उन्होंने IBC की धारा 32A के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह प्रावधान समाधान प्रक्रिया की सुरक्षा और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बनाया गया है। उन्होंने Manish Kumar v. Union of India सहित कई न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालयों द्वारा लगातार ऐसे सिद्धांत विकसित किए जा रहे हैं जो दिवालिया समाधान और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों के उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।

प्रतिभागियों को मिले व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान PGIP प्रतिभागियों को विभिन्न कानूनों के बीच समन्वय से उत्पन्न चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के व्यावहारिक तरीकों के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। इस चर्चा ने यह भी रेखांकित किया कि प्रभावी समाधान प्रक्रिया के लिए टैक्सेशन, दिवालिया कानून और प्रवर्तन कानूनों के बीच संबंधों की गहरी समझ आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में सेंटर फॉर PGIP के प्रमुख सुधाकर शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त किया और उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए प्रशंसा की।

“IICA की ‘Meet the Legend’ श्रृंखला” प्रतिभागियों को देश के अग्रणी न्यायिक और नियामकीय विशेषज्ञों से जोड़कर अकादमिक उत्कृष्टता और पेशेवर क्षमता निर्माण के अपने उद्देश्य को निरंतर आगे बढ़ा रही है।


बाल दिवस की तैयारी में उत्साह, चरौदा स्कूल में बच्चों की बाल कैबिनेट की बैठक

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आरंग-शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में शनिवार को ‘सुरक्षित शनिवार’ के तहत विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने योगाभ्यास, इमला लेखन और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में भाग लिया।इस अवसर पर बाल कैबिनेट प्रभारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल के मार्गदर्शन में बाल कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी बाल मंत्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यालय में अनुशासन, साफ-सफाई, नियमित उपस्थिति और बाल दिवस के आयोजन पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान बच्चों ने सर्वसम्मति से बाल दिवस को हर्षोल्लास से मनाने का निर्णय लिया।बैठक में संस्था प्रमुख के. के. परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर प्रसाद साहू और शिक्षिका संगीता पाटले उपस्थित थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।



रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी के छात्रों को प्रेरित किया; ऑपरेशन सिंदूर में भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को बताया सफलता की मिसाल

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16 अक्टूबर, 2025 को पुणे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिम्बायोसिस स्किल्स और प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित किया और उन्हें विश्वास और धैर्य जैसे गुणों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमता का उज्ज्वल प्रमाण है, जो सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिससे देश में आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण प्रणाली विकसित हुई है।”

रक्षा मंत्री ने छात्रों को बताया कि जब सरकार ने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम शुरू किया, तो शुरुआत में यह कठिन लगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए और इन प्रयासों के परिणाम सकारात्मक दिखाई देने लगे।

राजनाथ सिंह ने कहा, “हमने प्रतिज्ञा की कि हम रक्षा क्षेत्र को बदलेंगे, क्योंकि स्वतंत्रता के बाद हम हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहे। हमने भारत में हथियार बनाने की राजनीतिक इच्छा और कानून नहीं होने के कारण हथियार खरीदने की आदत डाल ली थी। अब हमारा संकल्प है कि भारत अपने सैनिकों के लिए स्वदेशी हथियार बनाए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने बड़ी मात्रा में मेड-इन-इंडिया उपकरणों का उपयोग करके निर्धारित लक्ष्य हासिल किए।”

युवा पीढ़ी के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में वार्षिक रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें लगभग 33,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र द्वारा योगदान किया गया। उन्होंने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य हासिल करने का भरोसा जताया।

रक्षा मंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि रचनाकार, नवप्रवर्तक और राष्ट्रीय विकास में योगदानकर्ता बनें। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता केवल डिग्री हासिल करने में नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज के लाभ के लिए लागू करने में है।

कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “अब यह दौर नहीं रहा कि ‘आप क्या जानते हैं?’ बल्कि अब सवाल है, ‘आप क्या कर सकते हैं?’ जो ज्ञान लागू नहीं किया जा सकता, वह अधूरा है। कौशल, सीखने और करने के बीच का पुल है।”

तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि जो AI का उपयोग करेंगे, वही उन लोगों की जगह लेंगे जो नहीं करेंगे। तकनीक केवल उपकरण होनी चाहिए, इंसानी संवेदनशीलता, मूल्य और नैतिकता का विकल्प नहीं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया और बाहरी दबावों से निपटने के लिए युवाओं को अपने सपनों का पालन करने और तुलना में फंसने से बचने की सलाह दी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जैसे भारत अपने अमृत काल में प्रवेश कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, वैसे ही छात्र भी अपने जीवन के सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं। “अगले 20-25 वर्ष केवल आपके करियर नहीं, बल्कि राष्ट्र के भाग्य को भी आकार देंगे। अपनी महत्वाकांक्षा से देश के परिवर्तन को ऊर्जा दें।”

इस अवसर पर रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक के School of Defence and Aerospace Technology का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। इस अवसर पर राज्य सरकार के अन्य मंत्री और विश्वविद्यालय के कुलपति भी उपस्थित थे।

शिक्षा मंत्रालय और अटल इनोवेशन मिशन ने लॉन्च किया विकसित भारत बिल्डथॉन 2025

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नई दिल्ली-शिक्षा मंत्रालय, अटल इनोवेशन मिशन और नीति आयोग के सहयोग से विकसित भारत बिल्डथॉन 2025 की शुरुआत की गई। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा छात्र नवाचार अभियान है, जिसका उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को जोड़ना और उन्हें Viksit Bharat @2047 के विज़न की दिशा में प्रेरित करना है।

इस बिल्डथॉन में छात्रों को टीम बनाकर रचनात्मक सोच विकसित करने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए आइडिया और प्रोटोटाइप बनाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के चार प्रमुख राष्ट्रीय महत्व वाले विषय हैं:

  • आत्मनिर्भर भारत – स्वावलंबी प्रणाली और समाधान तैयार करना

  • स्वदेशी – देशी विचार और नवाचार को बढ़ावा देना

  • वोकल फॉर लोकल – स्थानीय उत्पादों, शिल्प और संसाधनों को बढ़ावा देना

  • समृद्धि – स्थायी विकास और समृद्धि के मार्ग बनाना

इसमें पूरे देश के छात्र, शिक्षक और स्कूल भाग लेने के लिए आमंत्रित हैं। यह सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर रचनात्मकता, नवाचार और समस्या समाधान कौशल दिखाने का प्लेटफॉर्म है।

बिल्डथॉन की विशेषताएँ:

  • दुनिया की सबसे बड़ी लाइव नवाचार गतिविधि में छात्रों का सहयोग

  • हैंड्स-ऑन और अनुभव आधारित सीखना, जो NEP 2020 के अनुरूप है

  • समावेशी भागीदारी, विशेष रूप से अभिलाषी जिलों, आदिवासी और दूरदराज क्षेत्रों पर ध्यान

स्कूल अपने छात्रों के नवाचार के फोटो और वीडियो सबमिट करेंगे। एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल इन एंट्रीज़ का मूल्यांकन करेगा और शीर्ष छात्र टीमों को पुरस्कार और दीर्घकालिक समर्थन प्रदान किया जाएगा। इसमें कॉर्पोरेट मेंटरशिप और संसाधन भी शामिल हैं।

कार्यक्रम का समय सारणी:

  • 23 सितंबर 2025: लॉन्च

  • 23 सितंबर – 6 अक्टूबर 2025: रजिस्ट्रेशन

  • 6 अक्टूबर – 12 अक्टूबर 2025: तैयारी गतिविधियाँ

  • 13 अक्टूबर 2025: पूरे देश में लाइव बिल्डथॉन

  • 14 – 31 अक्टूबर 2025: स्कूलों द्वारा एंट्री सबमिशन

  • नवंबर 2025: एंट्री का मूल्यांकन

  • दिसंबर 2025: विजेताओं की घोषणा

विकसित भारत बिल्डथॉन 2025 केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो युवा मनों में नवाचार की ज्वाला प्रज्वलित करता है, आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करता है और छात्रों को देश की विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में योगदान देने का अवसर देता है।

हर छात्र को इस आंदोलन में भाग लेने और भविष्य के नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।


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