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MIFF 2026 में ‘एलिस इन वंडरलैंड’ की खास स्क्रीनिंग ने जगाई पुरानी यादें

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मुंबई में आयोजित 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) 2026 में दर्शकों को एक अनोखा और यादगार अनुभव मिला, जब विश्व प्रसिद्ध एनिमेटेड क्लासिक फिल्म ‘Alice in Wonderland’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस खास प्रस्तुति ने दर्शकों को कल्पना, रोमांच और बचपन की यादों की जादुई दुनिया में पहुंचा दिया।

बड़े पर्दे पर फिर जीवंत हुई वंडरलैंड की दुनिया

प्रसिद्ध लेखक लुईस कैरोल के चर्चित उपन्यास Alice’s Adventures in Wonderland पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन विल्फ्रेड जैक्सन, क्लाइड जेरोनिमी और हैमिल्टन लुस्के ने किया था। यह फिल्म एनीमेशन जगत की सबसे प्रतिष्ठित और कालजयी कृतियों में गिनी जाती है।

फिल्म में छोटी बच्ची एलिस की कहानी दिखाई गई है, जो एक रहस्यमयी और कल्पनाशील दुनिया में प्रवेश करती है। वहां उसकी मुलाकात बात करने वाले फूलों, शरारती चेशायर कैट, हमेशा देर से आने वाले व्हाइट रैबिट और गुस्सैल क्वीन ऑफ हार्ट्स जैसे अनोखे किरदारों से होती है।

संगीत और रंगों का अद्भुत संगम

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका मनमोहक संगीत और रंगीन दृश्य हैं। The Unbirthday Song और Golden Afternoon जैसे लोकप्रिय गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद पसंद किए जाते हैं। संगीत और एनीमेशन का यह मेल फिल्म को एक जादुई अनुभव में बदल देता है।

सात दशक बाद भी बरकरार है जादू

अपनी मूल रिलीज़ के 70 वर्षों से अधिक समय बाद भी ‘Alice in Wonderland’ दुनियाभर के दर्शकों को आकर्षित कर रही है। कल्पना, जिज्ञासा और सपनों की शक्ति को दर्शाने वाली यह फिल्म बच्चों और बड़ों दोनों के दिलों में खास जगह रखती है।

MIFF 2026 की शान बनी क्लासिक फिल्म

ऑस्कर विजेता शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग और अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों की मास्टरक्लास जैसी गतिविधियों के बीच Alice in Wonderland की प्रस्तुति ने MIFF 2026 के कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। यह स्क्रीनिंग दर्शकों को याद दिलाती है कि बेहतरीन कहानियां और शानदार एनीमेशन समय की सीमाओं से परे होते हैं।

मुख्य बातें

  • MIFF 2026 में ‘Alice in Wonderland’ की विशेष स्क्रीनिंग।

  • दर्शकों को बड़े पर्दे पर क्लासिक एनीमेशन देखने का अवसर।

  • लुईस कैरोल के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है फिल्म।

  • 70 साल बाद भी दुनियाभर में बरकरार है फिल्म का आकर्षण।

  • MIFF 2026 के सबसे खास आकर्षणों में शामिल रही स्क्रीनिंग।


सिरपुर की गौरवगाथा पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की लॉन्चिंग, महोत्सव में दर्शकों की मिली वाहवाही

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर सिरपुर की गौरवशाली परंपरा और विरासत पर केंद्रीत लघु  डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनायी गई है। इसका विमोचन सिरपुर महोत्सव के समापन समारोह में  महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की मौजूदगी में किया गया। महज चार मिनट के लघु फिल्म में सिरपुर के गौरव को बेहतरीन ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पटकथा वरिष्ठ पत्रकार व पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम साहू ने लिखी है। उनके द्वारा परिकल्पित इस लघु डाक्यूमेंट्री फिल्म में सिरपुर की  गाथा को आत्मकथा का रूप दिया गया है।वहीं फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल द्वारा  रिकार्डिंग, शूटिंग और एडिटिंग  तथा छायांकन में प्रतीक कुमार टोन्ड्रे ने अहम भूमिका निभाई है। पार्श्व स्वर आकाशवाणी-दूरदर्शन एंकर शशांक खरे नका है। पिपला अध्यक्ष दूजेराम धीवर ने बताया कि इसकी लॉन्चिंग के साथ ही दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और डॉक्यूमेंट्री फिल्म को दर्शकों की ओर से खूब सराहना मिली।

इसमें सिरपुर के प्राचीन मंदिरों, लक्ष्मण मंदिर, गंधेश्वर नाथ महादेव मंदिर, बौद्ध विहारों, ऐतिहासिक महत्व, महानदी की निर्मल जलधारा और सांस्कृतिक वैभव को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

लघु डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से सिरपुर की गौरवगाथा, उसकी ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन की संभावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

महोत्सव में मौजूद अतिथियों और हजारों दर्शकों ने फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और तकनीकी पक्ष की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कहा कि ऐसी फिल्में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभाएंगी।

डॉक्युमेंट्री फिल्म के निर्माताओं ने बताया कि इस लघु फिल्म का उद्देश्य सिरपुर की पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हो सकें। बहुत जल्दी इसका प्रसारण यूट्यूब पर भी उपलब्ध होगा। 

महोत्सव में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों की वाहवाही ने यह साबित कर दिया कि सिरपुर की गौरगाथा लोगों के दिलों को छू गई है।

ज्ञात हो कि इससे पहले यह संस्था पौराणिक नगरी आरंग पर भी डाक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण किये है।जिसे राजा मोरध्वज महोत्सव आरंग महोत्सव में प्रस्तुत किया गया।जिसे मुख्यमंत्री मंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित, सांसद, मंत्रीमंडल,व जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सराहा।

आईएफएफआई 2025: थाईलैंड की फिल्म ‘A Useful Ghost’ ने यादगार अंत के साथ अंतर्राष्ट्रीय सेक्शन को समापन किया

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आईएफएफआई 2025 में अंतर्राष्ट्रीय सेक्शन का समापन थाईलैंड की फिल्म ‘A Useful Ghost’ के साथ यादगार रहा। इस फिल्म की टीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी फिल्म की अनूठी दुनिया, फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और वैश्विक सफर के अनुभव साझा किए।

फिल्म का अनोखा कथानक:

निर्देशक राचापूम बून्बुंचाचोक ने बताया कि फिल्म की कहानी में एक दुखी पति अपनी मृत पत्नी को पुनर्जन्म में… वैक्यूम क्लीनर के रूप में पाता है। इस विचित्र लेकिन प्रतीकात्मक विचार ने फिल्म को वैश्विक दर्शकों के लिए अनोखा बनाया। फिल्म में पर्यावरणीय संदेश भी निहित है: धूल प्रदूषण, जो थाईलैंड में एक गंभीर समस्या है, कहानी में नायिका की मृत्यु का कारण बनता है, और वैक्यूम क्लीनर इस मृत्यु के लिए प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया बनता है।

सिनेमैटोग्राफी और दृश्य भाषा:

सिनेमैटोग्राफर सोंग पासित ने बताया कि फिल्म की दृश्य भाषा गंभीरता और हल्केपन के बीच संतुलन बनाने का deliberate प्रयास है। उन्होंने कहा, “Don’t be afraid not to be cinematic”, यानी फिल्म बनाने में अपरंपरागत और अजीब प्रयोग करने से डरें नहीं। उन्होंने असामान्य कोण, playful composition और गहरे रंगों का उपयोग करके फिल्म को रहस्यपूर्ण और मनोरंजक बनाया।

थाई फिल्म उद्योग की स्थिति:

एसोसिएट प्रोड्यूसर तानाडे आमोर्नपियालेर्क ने बताया कि थाईलैंड में नई फिल्मकारों की लहर उठ रही है, लेकिन साल में सिर्फ लगभग 30 फिल्में थिएटर में रिलीज होती हैं, और हॉलीवुड फिल्में अभी भी बहुमत में हैं। थाईलैंड में जॉनर की विविधता सीमित है, और फिल्मकारों का मानना है कि फिल्म केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज को संदेश भी दे।

अभिनय अनुभव:

अभिनेता विसारुत होमुआन ने साझा किया कि थाईलैंड में अभिनय करना चुनौतीपूर्ण है और यह फिल्म उनके करियर में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उन्होंने कहा कि फिल्म ने उन्हें फिल्म उद्योग में पहचान दिलाई।

फिल्म का वैश्विक प्रभाव:

‘A Useful Ghost’ फिल्म में विरोधाभासों का मिश्रण है—यह हास्यपूर्ण और गूढ़, कल्पनाशील और वास्तविक, संवेदनशील और विचित्र है। इस कारण फिल्म ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ध्यान आकर्षित किया और आईएफएफआई 2025 के अंतर्राष्ट्रीय सेक्शन को एक यादगार और शानदार समापन दिया।

आईएफएफआई का परिचय:

1952 में स्थापित, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और बड़ा सिनेमा उत्सव है। यह एनएफडीसी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा राज्य सरकार द्वारा आयोजित किया जाता है। महोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलियाँ और उच्च-ऊर्जा WAVES फिल्म बाज़ार शामिल हैं, जहाँ विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 56वें संस्करण का आयोजन 20–28 नवम्बर, 2025 को गोवा में हुआ।

त्रिबेनी राय की डेब्यू फिल्म “Shape of Momos” ने IFFI 2025 में सिक्किम की सांस्कृतिक कहानियों को विश्व मंच पर प्रस्तुत किया

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सिक्किम की फिल्ममेकर त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म “Shape of Momos” 56वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, इंडिया (IFFI) के भारतीय पैनोरमा सेक्शन में 27 नवंबर 2025 को प्रदर्शित की गई। स्क्रीनिंग के बाद, निर्देशक त्रिबेनी राय, निर्माता एवं सह-लेखक किसले और मुख्य अभिनेत्री गौमाया गुरुंग ने IFFI मैदान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से बातचीत की।

फिल्म और निर्माता परिचय

सत्यजित राय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट (SRFTI), कोलकाता की पूर्व छात्रा त्रिबेनी राय ने महिलाओं के अनुभवों और पूर्वी हिमालय की सांस्कृतिक-भौगोलिक परतों पर संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए पहचान बनाई है। उनका यह डेब्यू फीचर फिल्म सिक्किम की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी प्रस्तुत करती है।

त्रिबेनी राय ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक बताया। सिक्किम की फिल्म इंडस्ट्री अभी शुरुआती चरण में है और संसाधनों की कमी के कारण पेशेवर कैमरा सेटअप को कोलकाता, काठमांडू या गुवाहाटी से लाना पड़ता है। इसके बावजूद, Shape of Momos पहले ही कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स जैसे बुसान में प्रदर्शित हो चुकी है।

फिल्म का नाम “मॉमोज़” इस लोकप्रिय स्थानीय व्यंजन से प्रेरित है, जो विवाह और अंतिम संस्कार जैसी सभी अवसरों पर साझा किया जाता है। त्रिबेनी के अनुसार, यह फिल्म उनके लोगों के रोज़मर्रा के जीवन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है।

स्वतंत्र आवाज़ और साझा दृष्टिकोण

निर्माता और सह-लेखक किसले ने कहा कि त्रिबेनी की पहली ड्राफ्ट व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित और अत्यंत प्रामाणिक थी। उन्होंने यह भी बताया कि सिक्किम जैसी क्षेत्रों की कहानियाँ मुख्यधारा की भारतीय सिनेमा में अक्सर अंडर-रिप्रेजेंटेड रहती हैं।

नेपाली-भाषा सिनेमा में महिला दृष्टिकोण

मुख्य अभिनेत्री गौमाया गुरुंग ने फिल्म में महिला दृष्टिकोण से कहानी प्रस्तुत होने पर अपनी प्रसन्नता जताई, जो नेपाली फिल्म उद्योग में दुर्लभ है। उन्होंने फिल्म में नायिका के भीतर के भावनात्मक संसार की सही प्रस्तुति की सराहना की।

वितरण चुनौतियाँ और समुदाय निर्माण

टीम ने स्वतंत्र फिल्म वितरण और मार्केटिंग की चुनौतियों पर भी चर्चा की। Shape of Momos का रिलीज़ सिक्किम, उत्तर बंगाल, मेघालय और असम के कुछ हिस्सों तथा देहरादून में प्रस्तावित है। इसके अलावा, फिल्म को इटली में भी थिएटर रिलीज़ मिलने वाली है। त्रिबेनी राय ने सिक्किम में समान सोच वाले स्वतंत्र फिल्ममेकर्स का समर्थन नेटवर्क बनाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

सिक्किम की उभरती फिल्म संस्कृति के लिए मील का पत्थर

त्रिबेनी राय, जिन्हें सिक्किम की पहली महिला फिल्ममेकर माना जाता है, ने राज्य में फिल्म संस्कृति के धीमे विकास पर विचार साझा किया। सीमित संसाधनों और अवसंरचना के बावजूद, युवा फिल्म छात्रों में उत्साह बढ़ रहा है।

त्रिबेनी राय ने कहा, “मुख्यधारा की हिंदी सिनेमा और कुछ वेब सीरीज में पूर्वोत्तर को अक्सर विदेशी या ड्रग-से जुड़ी कहानियों के रूप में दिखाया जाता है। मैं एक ऐसी कहानी बताना चाहती थी जिसमें सिक्किम के आम लोग मुख्य पात्र हों—हम अपने ही कहानी के नायक हैं।”

IFFI का महत्व

1952 में स्थापित, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, इंडिया (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और बड़ा सिनेमा उत्सव है। यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म निर्माण, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच प्रदान करता है। 56वें संस्करण का आयोजन गोवा में 20–28 नवंबर 2025 तक हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अनुपम खेर की मास्टरक्लास: “हार मानना कोई विकल्प नहीं”

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आज गोवा के कला मंदिर, पनजी में आयोजित 56वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) की पहली मास्टरक्लास में प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने सैकड़ों दर्शकों को अपनी प्रतिभा, हास्य और अनुभवों के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। सत्र का विषय था: ‘Giving Up is NOT a Choice’ (हार मानना कोई विकल्प नहीं)।

सारांश और प्रेरक अनुभव

अनुपम खेर ने सत्र की शुरुआत फिल्म सारांश में अपनी मुख्य भूमिका खोने और फिर से पाने की कहानी से की। छह महीने की मेहनत और तैयारी के बाद अचानक भूमिका से हटाए जाने पर खेर काफी निराश हुए, लेकिन निर्देशक महेश भट्ट से अंतिम बार मिलने पर उन्हें पुनः मुख्य भूमिका दी गई। यह अनुभव उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ बन गया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उन्हें हार न मानने का सबक सिखाता है।

जीवन के उदाहरण और सीखें

खेर ने अपने जीवन के कई उदाहरण साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे 14 सदस्यीय परिवार के साथ छोटे से घर में रहते हुए भी उनके दादा का सकारात्मक दृष्टिकोण और खुशमिजाज जीवन ने उनके दृष्टिकोण को आकार दिया। उन्होंने अपने पिता की शिक्षा का उल्लेख किया, जिन्होंने उन्हें बताया कि असफलता केवल एक घटना है, व्यक्ति नहीं।

“अपनी ही बायोपिक के मुख्य पात्र बनो”

सत्र में खेर ने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया कि वे स्वयं पर विश्वास करें और अपने जीवन की कहानी में मुख्य पात्र बनें। उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएं और चुनौतियां ही इसे महान बनाती हैं।

समापन संदेश

अंत में उन्होंने कहा:

“‘Giving up is not a choice’ केवल एक वाक्य नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत, बलिदान और धैर्य चाहिए। यदि आप हार मानते हैं, तो कहानी वहीं समाप्त हो जाती है।”

IFFI के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 1952 में स्थापित हुआ और यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और पुराना फिल्म महोत्सव है। इसे NFDC, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। महोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलियाँ और WAVES फिल्म बाज़ार शामिल हैं, जो फिल्म जगत के लिए विचारों और सहयोग का मंच प्रदान करता है।


अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में तीन फिल्मों की टीमों ने साझा किया अनुभव और दृष्टिकोण

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत (IFFI) में आज एक अनूठा क्रॉस-सांस्कृतिक और क्रॉस-जॉनर संवाद देखने को मिला, जब तीन प्रमुख फिल्मों की टीमों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। ‘निलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’, ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाडी’ और ‘सिकार’ की टीमों ने अपने-अपने अनुभव, चुनौतियाँ और प्रेरणाएँ साझा कीं।

‘सिकार’: असम की पहली अंतरराष्ट्रीय शूट की गई फिल्म

फिल्म ‘सिकार’ के निर्देशक देबांगकर बोरगोहैन ने भावपूर्ण अंदाज में फिल्म के मुख्य अभिनेता और संगीतकार जुबीन गर्ग को याद किया, जिनका हाल ही में निधन हो गया। उन्होंने बताया कि यह जुबीन का अंतिम रिलीज़ होने वाला फिल्म प्रोजेक्ट है। फिल्म का 70% हिस्सा लंदन में शूट किया गया और अधिकांश टीम को दूर से निर्देशन करना पड़ा। देबांगकर ने असम की असली ताकत और गरिमा को दर्शाने की अपनी कोशिशों पर भी प्रकाश डाला।

‘निलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’

इस फिल्म की टीम ने दर्शकों को प्रकृति और जीव-जंतुओं की दुनिया से परिचित कराया। एडलर्स एन.सी., एसोसिएट प्रोड्यूसर ने बताया कि 8K और 12K में शूट की गई यह डॉक्यूमेंट्री बेहद धैर्य और शोध की मांग करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फिल्म पूरी तरह से भारतीय निर्माण है और वैश्विक तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके देशी दृष्टिकोण पेश करती है।

‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाडी’: हास्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संगम

निर्देशक परेश मोखाशी और निर्माता भरत शिटोले ने इस फिल्म की कहानी साझा की, जो 1942 के एक तटीय महाराष्ट्रीयन गांव में स्वतंत्रता संग्राम और द्वितीय विश्व युद्ध के बीच घटित होती है। उन्होंने बताया कि हास्य गंभीर विषयों को और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम बन सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस ने भारतीय सिनेमा की विविधता को उजागर किया—निलगिरिस के प्राकृतिक सौंदर्य से लेकर बॉम्बिलवाडी की हास्यपूर्ण घटनाओं और असम के जीवन की भावनात्मक कहानियों तक। इस सत्र ने यह साबित किया कि IFFI हर क्षेत्र और कहानी को मंच प्रदान करता है और हर फिल्ममेकर अपनी अनूठी दृष्टि को साझा कर सकता है।

IFFI के बारे में

1952 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और बड़ा फिल्म उत्सव है। इसे राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। यह महोत्सव फिल्म उद्योग में नवाचार, विविधता और सहयोग को बढ़ावा देता है और 20–28 नवंबर 2025 तक गोवा के खूबसूरत तटीय दृश्य के बीच आयोजित किया गया।

IFFI 2025 : संगीत, संस्कृति और सिनेमा का भव्य पर्व ‘IFFIESTA’ गोवा में शानदार शुरुआत

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वर्षों के दौरान, IFFI एक साधारण फिल्म महोत्सव से बढ़कर एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव बन गया है—एक ऐसा अनुभव जो सिनेमा, संगीत और जीवन की विविधताओं को एक मंच पर लाता है। पिछले वर्ष IFFIESTA ने इस सांस्कृतिक यात्रा को नई दिशा देते हुए संगीत और कला को IFFI का अभिन्न हिस्सा बनाया।

20 नवंबर को गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनडोर स्टेडियम में दूरदर्शन और WAVES OTT द्वारा आयोजित IFFIESTA के भव्य उद्घाटन के साथ IFFI के 56वें संस्करण ने अपनी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसमें संगीत, संस्कृति और लाइव प्रदर्शनों की अनूठी झलक देखने को मिली।

इस मौके पर कई प्रसिद्ध हस्तियों ने उपस्थित होकर समारोह की शोभा बढ़ाई। इनमें वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर, ऑस्कर विजेता संगीतकार एम. एम. कीरावाणी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एमी बरुआ, फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रवि कोट्टारकारा, दक्षिण कोरिया की प्रसिद्ध गायिका एवं सांसद जेवोन किम, तथा दूरदर्शन के महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपद शामिल रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में डीजी नंबूदिरीपद ने कहा कि पारंपरिक प्रसारण माध्यम अब डिजिटल क्रांति की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने बताया कि Doordarshan भी समय की मांग को देखते हुए अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म WAVES OTT के साथ एक नई यात्रा शुरू कर चुका है, जो परिवारों के लिए सुरक्षित और उत्कृष्ट मनोरंजन प्रदान करेगा।

इसके बाद मंच पर अनुपम खेर ने दूरदर्शन से जुड़ी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी शुरुआत दूरदर्शन से हुई। दूरदर्शन ने ही हमें सिनेमा से परिचित कराया—यह सुगंध आज भी हमारे जीवन में बसी हुई है।”

कार्यक्रम की शुरुआत दक्षिण कोरियाई गायिका जेवोन किम द्वारा वंदे मातरम के भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने भारत की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी के लिए आभार व्यक्त किया और भारत–कोरिया के कंटेंट सहयोग को लेकर उत्साह जताया।

इसके बाद गायक-गीतकार ओशो जैन ने दो घंटे का यादगार लाइव प्रदर्शन प्रस्तुत किया।

आगे क्या? — IFFIESTA के तीन और उत्सवपूर्ण दिन

IFFIESTA 2025 के अगले तीन दिन (22–24 नवंबर) नि:शुल्क प्रवेश के साथ आयोजित होंगे:

दिन 2 : 22 नवंबर

होस्ट: नीतू चंद्रा और निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: The Bandits (India) बनाम Beats of Love (International) – होस्ट: ईशा मलवीया

  • सुरों का एकलव्य: प्रतिभा सिंह बघेल और अतिथि कलाकार

  • वाह उस्ताद: 'मिट्टी की आवाज़' — वुसत इक़बाल ख़ान द्वारा फोक एवं फ्यूज़न

दिन 3 : 23 नवंबर

होस्ट: निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: MH43 (India) बनाम The Swastik (International) – होस्ट: हर्ष लिम्बाचिया

  • सुरों का एकलव्य

  • वाह उस्ताद: ‘सूफ़ी और भक्ति’

दिन 4 : 24 नवंबर

होस्ट: निहारिका रायजादा

  • Battle of Bands: The Vairagis (India Winners) बनाम Knights – होस्ट: हुसैन कुआजरवाला

  • सुरों का एकलव्य

  • देवांचल की प्रेम कथा – हिमाचली लोक नृत्य का विशेष लाइव प्रदर्शन

  • वाह उस्ताद समापन: ‘राग और सिनेमा फ्यूज़न’

सभी कार्यक्रमों का प्रसारण DD Bharati पर लाइव और WAVES OTT पर स्ट्रीम किया जा रहा है, जबकि DD National विशेष highlights दिखा रहा है।

IFFI के बारे में

1952 में शुरू हुआ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव है। NFDC, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और एंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव हर वर्ष विश्वभर की सिनेमा प्रतिभाओं को एक मंच पर लाता है।

56वां संस्करण (20–28 नवंबर) अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मास्टरक्लास, ट्रिब्यूट्स और ऊर्जावान WAVES Film Bazaar के साथ विभिन्न भाषाओं और रचनात्मक प्रयोगों का भव्य संगम प्रस्तुत कर रहा है।


IFFI 2025: वैश्विक सिनेमा का भारत में भव्य संगम

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अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत (IFFI): एक परिचय

1952 से, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत (IFFI) दक्षिण एशिया का एकमात्र FIAPF-मान्यता प्राप्त प्रतिस्पर्धी फीचर फिल्म महोत्सव रहा है, जो इसे वैश्विक सिनेमा मानचित्र पर विशिष्ट स्थान देता है। दुनिया की श्रेष्ठ फिल्मों को भारत तक लाने का उद्देश्य लेकर शुरू हुआ यह महोत्सव आज वैश्विक फिल्मकारों, सिने-प्रेमियों और रचनात्मक पेशेवरों का सबसे जीवंत संगम बन चुका है।

इस वर्ष, IFFI 2025 का आयोजन 20 से 28 नवंबर तक गोवा में किया जा रहा है।

IFFI का मूल दर्शन है—जब संस्कृतियां मिलती हैं, तब श्रेष्ठ सिनेमा जन्म लेता है। हर वर्ष चुने गए उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के चयन से IFFI कलात्मक उत्कृष्टता का मंच बनकर उभरता है। विशेषकर इसका International Cinema खंड विश्व की सबसे प्रखर और मौलिक कहानियों का प्रदर्शन करता है।

2004 में गोवा में अपना स्थायी ठिकाना पाने के बाद, यह महोत्सव राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ESG) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। विविधता, समावेश और रचनात्मकता की भावना IFFI को भारत की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सोच का सच्चा प्रतिबिंब बनाती है।

IFFI 2025: नवाचार, समावेशन और वैश्विक सिनेमाई उत्सव

IFFI के 56वें संस्करण में वैश्विक भागीदारी का विस्तार हुआ है। इस बार—

  • जापान – कंट्री ऑफ फोकस

  • स्पेन – पार्टनर कंट्री

  • ऑस्ट्रेलिया – स्पॉटलाइट कंट्री

240+ फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो 81 देशों से हैं। इनमें शामिल हैं—

  • 13 विश्व प्रीमियर

  • 5 अंतरराष्ट्रीय प्रीमियर

  • 44 एशियाई प्रीमियर

उद्घाटन फिल्म होगी — The Blue Trail (Gabriel Mascaro द्वारा), जिसे बर्लिनाले 2025 में सिल्वर बेयर ग्रैंड ज्यूरी प्राइज़ मिला।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं और चयन

तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें पाँच महाद्वीपों से 32 उत्कृष्ट फिल्में शामिल हैं।
IFFI में कान्स, बर्लिन, वेनिस, लोकार्नो, TIFF, बुसान और IFFR जैसे सर्वश्रेष्ठ वैश्विक महोत्सवों की पुरस्कार-विजेता फिल्में भी दिखाई जाएँगी।

क्यूरेटेड सेक्शंस

इस वर्ष IFFI में कुल 9 विशेष क्यूरेटेड सेक्शन हैं, जैसे—

  • Docu-Montage

  • From the Festivals

  • Rising Stars

  • Experimental Films

  • Restored Classics

  • UNICEF Section

  • Cinema of the World

कुल 15 प्रतिस्पर्धी और क्यूरेटेड खंड होंगे।

शताब्दी वर्ष श्रद्धांजलि

IFFI 2025 निम्न महान कलाकारों के 100 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें सम्मानित करेगा—

  • गुरु दत्त

  • राज खोसला

  • ऋत्विक घटक

  • पी. भानुमति

  • भूपेन हजारिका

  • सलील चौधरी

उनकी क्लासिक फिल्मों के पुनर्स्थापित संस्करण भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

रजनीकांत के 50 वर्ष: स्वर्ण जयंती

सुपरस्टार रजनीकांत को सिनेमा में 50 वर्ष पूरे होने पर IFFI 2025 में विशेष सम्मान दिया जाएगा।

इंडियन पैनोरमा 2025

  • 25 फीचर फिल्में

  • 20 गैर-फीचर फिल्में

  • 5 डेब्यू फीचर फिल्में

ओपनिंग फीचर फिल्म — अमरन (तमिल)
ओपनिंग नॉन-फीचर फिल्म — काकोरी

महिलाएँ, नए फिल्मकार और उभरती प्रतिभाएँ

इस वर्ष IFFI में—

  • 50 से अधिक महिला निर्देशक

  • 50 से अधिक डेब्यू फिल्में

Best Debut Indian Director Award — ₹5,00,000
Best Web Series Award — ₹10,00,000

Creative Minds of Tomorrow (CMOT)

  • 799 प्रविष्टियाँ

  • 124 चयनित प्रतिभाएँ

  • 48-घंटे फिल्म निर्माण चुनौती

मास्टरक्लास और पैनल चर्चाएँ

अतिथि वक्ताओं में शामिल—

  • विद्यु विनोद चोपड़ा

  • अनुपम खेर

  • बॉबी देओल

  • आमिर खान

  • सुहासिनी मणिरत्नम

  • पीट ड्रेपर

  • स्रीकर प्रसाद

  • हॉलिवुड के Christopher Corbould OBE

मुख्य विषय – कहानी लेखन, अभिनय, एडिटिंग, सिनेमैटोग्राफी, VFX और AI का भविष्य।

WAVES Film Bazaar 2025

IFFI का को-प्रोडक्शन बाजार, एशिया का सबसे बड़ा और प्रभावशाली फिल्म मार्केट—

  • 19वाँ संस्करण

  • 20–24 नवंबर

  • 10+ देशों के पवेलियन

  • Screenwriters’ Lab

  • Work-in-Progress Lab

  • Viewing Room

  • 300+ प्रोजेक्ट्स

  • $20,000 के पुरस्कार

यह फिल्म निर्माताओं, निर्माताओं और निवेशकों को जोड़ने का प्रमुख मंच है।

IFFIESTA – सांस्कृतिक महोत्सव (पहली बार)

21–24 नवंबर 2025
लाइव संगीत, बैंड परफॉर्मेंस, थिएटर और सांस्कृतिक कार्यक्रम।

लाइन-अप में—

  • ओशो जैन लाइव

  • बैटल ऑफ बैंड्स

  • सुरों का एकलव्य

  • वाह उस्ताद

  • देवांचल की प्रेमकथा

CinemAI Hackathon – पहली बार AI फिल्म हैकाथॉन

  • 48 घंटे की AI फिल्म चुनौती

  • 10 चयनित टीमें

  • ₹4 लाख तक के पुरस्कार

  • विजेता फिल्में IFFI में प्रीमियर होंगी

IFFI: विकास की विरासत और प्रभाव

  • संस्कृति और सिनेमा का संगम
  • IFFI भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने वाली प्रमुख सरकारी पहल है।
  • फिल्म को-प्रोडक्शन और बाजार
  • Film Bazaar ने अनेक भारतीय परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों तक पहुँचाया है।
  • AVGC-XR उद्योग को बढ़ावा
  • IFFI तकनीक, VFX, AI और नई रचनात्मक तकनीकों को प्रदर्शित करता है।
  • गोवा में पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
  • IFFI के कारण गोवा फिल्म पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना है।

निष्कर्ष

56वाँ IFFI एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब सिनेमा का भविष्य परंपरा, तकनीक और नवाचार के मिश्रण से नया आकार ले रहा है।
IFFI 2025 सिनेमा की उस शक्ति का उत्सव है जो दुनिया भर के लोगों, संस्कृतियों और कहानियों को जोड़ती है।

जैसे-जैसे गोवा इस भव्य आयोजन की तैयारी करता है, IFFI एक बार फिर साबित कर रहा है कि यह केवल फिल्म महोत्सव नहीं, बल्कि एक सतत—विकसित होती सांस्कृतिक यात्रा है।



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