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पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन के लिए एनएलडीएसएल और पंजाब सरकार के बीच समझौता

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एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय ने 7 जुलाई, 2026 को यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) के माध्यम से पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की दृश्यता बढ़ाना, परिचालन दक्षता में सुधार करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रियल-टाइम लॉजिस्टिक्स डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान के माध्यम से डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। इस पहल से राज्य के उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निर्यातकों तथा अन्य लॉजिस्टिक्स हितधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस सहयोग के तहत एनएलडीएसएल, यूएलआईपी के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण सुनिश्चित कर पंजाब सरकार को एक डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग देगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, नीतिगत एवं परिचालन संबंधी निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा तथा विनिर्माण, कृषि और निर्यात केंद्र के रूप में पंजाब की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

यूएलआईपी विभिन्न सरकारी प्रणालियों से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा को एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में यह 12 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 46 प्रणालियों को 142 एपीआई के माध्यम से जोड़ता है, जिनमें 2,000 से अधिक डेटा फील्ड शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 260 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं तथा 450 करोड़ से अधिक एपीआई लेनदेन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापकता, विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाते हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परिवहन, वेयरहाउसिंग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, लोक निर्माण विभाग, नागरिक उड्डयन तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक इंटरैक्टिव यूएलआईपी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पंजाब की आवश्यकताओं के अनुरूप यूएलआईपी के उपयोग के मामलों की पहचान करना, लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का समाधान करना, आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता बढ़ाना तथा राज्य में कारोबार सुगमता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला के दौरान एनएलडीएसएल ने अपने प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म—लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB), कोयला शक्ति–स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड, ट्रैक योर ट्रांसपोर्ट (TYT), ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) और लॉजिस्टिक्स ई-मार्केटप्लेस (LeMP)—का प्रदर्शन किया। इन प्लेटफॉर्मों ने दिखाया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स डेटा किस प्रकार परिसंपत्ति ट्रैकिंग, परिचालन योजना, अंतर-विभागीय समन्वय और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।

यह समझौता पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पर एनएलडीएसएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ताकायुकी कानो तथा पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक जसप्रीत सिंह, आईएएस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह, आईएएस भी उपस्थित रहे।

यह पहल राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक तथा एनएलडीएसएल के अध्यक्ष रजत कुमार सैनी, आईएएस के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल एकीकरण और सहयोगात्मक प्रशासन के माध्यम से लॉजिस्टिक्स दक्षता को मजबूत करना है।

एनआईसीडीसी देश में ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज़ और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से भारत के औद्योगिक परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। 20 औद्योगिक स्मार्ट शहरों की सफलता के बाद एनआईसीडीसी को भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एनआईसीडीसी पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का भी क्रियान्वयन कर रहा है।

एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL), जो एनआईसीडीसी की लॉजिस्टिक्स शाखा है, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है। 30 दिसंबर, 2015 को स्थापित एनएलडीएसएल, NICDC Industrial Development Trust (NICDIT) और जापान की NEC Corporation का एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


बजट 2026-27 में SEZ को बढ़ावा, घरेलू बिक्री पर रियायती शुल्क की बड़ी राहत

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके तहत पात्र SEZ निर्माण इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) में सीमित मात्रा में उत्पादों की बिक्री रियायती शुल्क दरों पर करने की अनुमति दी जाएगी।

मुख्य बिंदु

  • SEZ इकाइयों को अब बिना पूरी कस्टम ड्यूटी के बोझ के देश में बिक्री की सुविधा

  • बिक्री की मात्रा निर्यात के अनुपात तक सीमित होगी

  • देश में कुल 368 SEZ (फरवरी 2026 तक)

  • 2025-26 में SEZ निर्यात 11.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक (32% वृद्धि)

SEZ क्या हैं?

SEZ (Special Economic Zones) ऐसे विशेष क्षेत्र होते हैं जो:

  • ड्यूटी-फ्री एरिया होते हैं

  • निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के लिए बनाए जाते हैं

  • यहां उद्योगों को टैक्स छूट, आसान नियम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है

सरकार का नया कदम क्यों अहम है?

  • उद्योगों को अधिक उत्पादन और बेहतर उपयोग (capacity utilisation) का मौका

  • निर्यात लागत में कमी

  • वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा

  • घरेलू बाजार में भी सीमित अवसर

SEZ का प्रदर्शन

  • 31.73 लाख से अधिक रोजगार (दिसंबर 2025 तक)

  • कुल निवेश: ₹7.86 लाख करोड़

  • निर्यात में लगातार वृद्धि

अन्य प्रमुख सुधार

  • सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए विशेष SEZ (गुजरात, कर्नाटक)

  • सिंगल विंडो क्लीयरेंस

  • ड्यूटी-फ्री आयात और जीएसटी में छूट

  • बेहतर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

 सरकार का यह कदम SEZ को भारत के आर्थिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश आकर्षण का मजबूत आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


फुटवियर उद्योग में बढ़ती आत्मनिर्भरता: राष्ट्रपति मुर्मु ने FDDI दीक्षांत समारोह में नवाचार, निर्यात और उद्यमिता पर दिया जोर

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी भूमिका को और विस्तार देने में सक्षम बन रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत फुटवियर सेक्टर को ‘चैंपियन सेक्टर’ का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र और प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत फुटवियर उत्पादन और खपत में विश्व में दूसरे स्थान पर है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान भारत का फुटवियर निर्यात 2500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि आयात लगभग 680 मिलियन डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि भारत का फुटवियर निर्यात आयात से लगभग चार गुना अधिक है, जो दर्शाता है कि भारत विश्व के प्रमुख फुटवियर निर्यातकों में से एक है। उन्होंने कहा कि निर्यात को और बढ़ाने के लिए फुटवियर उद्योग का विस्तार आवश्यक है। इससे छात्रों के लिए उद्यमी बनने, रोजगार सृजन करने या प्रतिष्ठानों में रोजगार पाने के अधिक अवसर बनेंगे।

राष्ट्रपति ने FDDI और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थैम्पटन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते के तहत सहयोग के एक और आयाम को मजबूत करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह MoU सतत सामग्री और सर्कुलर इकोनॉमी प्रथाओं पर विशेष जोर देता है, जो दोनों देशों की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि फुटवियर डिजाइन का क्षेत्र अनेक महत्वपूर्ण आयामों से जुड़ा है। उन्होंने स्नातक हो रहे छात्रों को सलाह दी कि वे व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें और अपने कार्य के माध्यम से समाज और राष्ट्र के बहुआयामी विकास में योगदान दें। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने डिजाइन के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य और सुविधा में सुधार लाएं; रोजगार सृजन में योगदान दें; विकास यात्रा में पिछड़े लोगों को आर्थिक अवसरों से जोड़ें; निर्यात को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करें; गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के माध्यम से भारत के ब्रांड एंबेसडर बनें; और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दें।


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