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विशेष लेख-सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम

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जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान 3.0, विधानसभा परिसर में सीएम विष्णु देव साय और डॉ. रमन सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा

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लोकतंत्र के मंदिर से पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का सशक्त संदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।

कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान मंत्रालयों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय पर दिया जोर

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तेजी से पूरा करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच निर्बाध समन्वय पर बल दिया।

10 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी तटीय स्वच्छता अभियान 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' की तैयारियों की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकतम राष्ट्रीय प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों को तकनीकी नवाचार, जनभागीदारी और अंतर-विभागीय सहयोग के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर- विज्ञान केंद्र में आयोजित इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी सहित संबंधित वैज्ञानिक विभागों एवं संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछली समन्वय बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक विभागों को अलग-अलग संस्थानों के रूप में नहीं, बल्कि एकीकृत वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद, ज्ञान का आदान-प्रदान, संयुक्त पहल और समन्वित कार्यान्वयन से नवाचार को गति मिलेगी, सुशासन मजबूत होगा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचेगा।

बैठक का प्रमुख विषय 10 से 19 सितंबर 2026 तक देशभर के समुद्री तटों पर आयोजित होने वाला 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान रहा। मंत्री ने इस राष्ट्रव्यापी पहल की जनजागरूकता रणनीति एवं तैयारियों की समीक्षा की। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनजागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ना है। इस अभियान में वैज्ञानिक संस्थान, सरकारी एजेंसियां, स्वयंसेवी संगठन, शैक्षणिक संस्थान तथा स्थानीय समुदाय व्यापक स्तर पर भागीदारी करेंगे।

बैठक में विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों की संचार रणनीति की भी समीक्षा की गई, ताकि पिछले 12 वर्षों, विशेषकर वर्तमान सरकार के पिछले दो वर्षों की वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके। विभागों ने वीडियो, वृत्तचित्र, विषयगत अभियान, इन्फोग्राफिक्स, सफलता की कहानियों तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की योजनाएं प्रस्तुत कीं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन, अनुसंधान विकास एवं नवाचार योजना सहित विभिन्न प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की रणनीति प्रस्तुत की। जनभागीदारी बनाए रखने और वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चरणबद्ध प्रसार योजना तैयार की गई है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने जानकारी दी कि सीएसआईआर अपने स्थापना दिवस के अवसर पर पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक व्यापक प्रकाशन जारी करने की तैयारी कर रहा है। डिजिटल माध्यमों पर सफलता की कहानियों का नियमित प्रसार तथा "इनोवेशन इन एक्शन" व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संवाद को और सुदृढ़ किया जाएगा।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने बताया कि उसने सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, कृषि जैव प्रौद्योगिकी, अनुसंधान अवसंरचना, जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप तथा सतत विकास में अपने योगदान को प्रदर्शित करने वाली विषयगत प्रकाशनों की श्रृंखला शुरू की है। विभाग #DBTQuest जनसहभागिता अभियान के माध्यम से ज्ञान-आधारित गतिविधियों द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ा रहा है तथा समन्वित सोशल मीडिया पहलों के जरिए जनसंपर्क का विस्तार कर रहा है।

बैठक में विज्ञान विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। सीएसआईआर, इसरो, डीएसटी, डीबीटी, बार्क तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के संयुक्त कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी विकास साझेदारियों, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार मंचों तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समन्वित कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। विभागों ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच नियमित संवाद तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी भी दी।

बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें SARAL_AI मंच के व्यापक उपयोग, विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं की अधिक भागीदारी तथा अनुसंधान परियोजनाओं से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यमों से आम जनता तक पहुंचाने के उपायों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त ESTIC-2026, इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF)-2026, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक आयोजनों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विभागों ने इन कार्यक्रमों में शोधकर्ताओं, उद्योगों, स्टार्टअप, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तैयारियों एवं जनसंपर्क योजनाओं की जानकारी दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र अब ऐसे नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अनुसंधान उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और जनसहभागिता को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विभागों के बीच बढ़ता सहयोग विज्ञान को अधिक सुलभ, अधिक प्रभावी तथा देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बैठक के दौरान मंत्री ने प्रशासनिक कार्य निष्पादन, संस्थागत समन्वय तथा विज्ञान प्रशासकों की क्षमता निर्माण से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की और विभागों से श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करते हुए वैज्ञानिक तंत्र में सहयोगात्मक सुशासन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' अभियान का शुभारंभ किया

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' के तहत आयोजित वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अहमदाबाद में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज केवल गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में ही नागरिकों द्वारा एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त अहमदाबाद शहर में 50 लाख पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य हरित पर्यावरण का निर्माण करना, स्वच्छ वायु एवं शुद्ध जल सुनिश्चित करना तथा भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि 1.25 करोड़ पौधे लगाने का अभियान अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने बहुत कम समय में जन आंदोलन का रूप ले लिया है और पूरा देश उनके "People, Planet with Progress" के मंत्र को आत्मसात कर रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पिछले सात वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) ने देशभर में सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली में भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि लगाए जा रहे पौधे भारत की पारिस्थितिकी के अनुरूप देशी प्रजातियों के हैं और इनमें अनेक वृक्षों की आयु 100 वर्ष से अधिक होती है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक रूप से अहमदाबाद को एक हरित शहर में परिवर्तित करना है।

शाह ने बताया कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में पहले 12 ऑक्सीजन पार्क थे, जबकि आज 61 नए ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया गया है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 73 हो गई है। वहीं अहमदाबाद नगर निगम ने एक ही दिन में 101 ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया है।

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने वैज्ञानिक पहल के तहत एक विशेष वाहन सेवा शुरू की है, जिसके माध्यम से वृक्षारोपण के इच्छुक नागरिकों के घर तक पौधे पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह वृक्षारोपण अभियान अहमदाबाद का तापमान अन्य शहरों की तुलना में कम से कम 5 प्रतिशत तक घटाने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सबसे प्रभावी पहल है। उन्होंने सभी नागरिकों से एक-एक पौधा लगाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ओजोन परत की रक्षा में योगदान देने का आह्वान किया।

शाह ने कहा कि साणंद, गांधीनगर, कलोल और अहमदाबाद शहर ने मिलकर गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को 11.23 प्रतिशत तक बढ़ाया है और वर्ष 2029 तक इसे 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।

उन्होंने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 20 प्रतिशत हरित क्षेत्र का लक्ष्य प्राप्त करना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक सोलर रूफटॉप स्थापना गांधीनगर में हुई है। उन्होंने अहमदाबाद और गांधीनगर के नागरिकों से अपील की कि कोई भी घर, अपार्टमेंट या छत सोलर रूफटॉप से वंचित न रहे।

शाह ने बताया कि आज 22 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा सात परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। उन्होंने कहा कि 325 नई एएमटीएस और बीआरटीएस बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और आज के बाद अहमदाबाद में प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी बस नहीं बचेगी।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में अब तक ₹28,492 करोड़ की विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें घाटलोडिया में ₹7,030 करोड़, वेजलपुर में ₹2,670 करोड़, साबरमती में ₹2,149 करोड़, नारणपुरा में ₹3,262 करोड़, साणंद में ₹2,800 करोड़, गांधीनगर उत्तर में ₹4,300 करोड़ तथा कलोल में ₹2,003 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने अहमदाबाद शहर एवं गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि वे अपनी आवासीय सोसायटियों के किसी भी कोने को वृक्षों से वंचित न रहने दें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को अधिक हरित और रहने योग्य बनाना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रत्येक घर में सोलर रूफटॉप स्थापित करने का भी आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण पर रील्स/वीडियो बनाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जीतेंगे नकद इनाम

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पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की अनोखी पहल 

आरंग/रायपुर- पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़' ने एक बेहद अनूठा और आकर्षक जनजागरण अभियान शुरू किया है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत को पहचानते हुए संस्था ने युवाओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यावरण से जोड़ने के लिए एक 'वीडियो बनाओ, इनाम पाओ' प्रतियोगिता की घोषणा की है। इस अभियान का डिजिटल मीडिया पार्टनर www.media24media.com है।

संस्था का मुख्य ध्येय वाक्य है:

​"जब तक पौधा, पेड़ न बन जाए। तरु-मित्र बनकर फर्ज निभाएं।"

​ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका 

​इस अभियान के तहत कंटेंट क्रिएटर्स और रील्स बनाने वाले युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के महत्व पर केंद्रित वीडियो बनाने होंगे। चयनित उत्कृष्ट वीडियो क्रिएटर्स को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों की श्रेणी इस प्रकार है:-

पुरस्कार राशि 

मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से प्रथम पुरस्कार ₹ 2001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र, पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से 

द्वितीय पुरस्कार ₹ 1501/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र एवं मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से ही 

तृतीय पुरस्कार ₹ 1001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र

प्रतियोगिता के नियम और शर्तें: 

​ वीडियो की अवधि: रील्स या वीडियो की लंबाई 30 से 60 सेकंड के बीच होनी चाहिए।

​अपलोड और टैगिंग: वीडियो बनाने के बाद इसे अपने इंस्टाग्राम आईडी पर पोस्ट करना होगा। पोस्ट करते समय #piplawelfarefoundation और facebook पर Media24Media पेज पर  अनिवार्य रूप से टैग करना होगा।

​अंतिम तिथि: प्रविष्टि टैग करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की गई है (जो आवश्यकतानुसार परिवर्तनीय है)।

​ विशेष प्राथमिकता: वीडियो में 'पीपला फाउंडेशन' का लोगो इस्तेमाल करने वाले क्रिएटर्स को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।

नियम व व्यवस्था 

​आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से एक  जनजागरण अभियान है। इसमें विजेताओं के चयन का सर्वाधिकार संस्था के पास सुरक्षित रहेगा और किसी भी स्तर पर कोई दावा-आपत्ति या चुनौती मान्य नहीं होगी।

व्हाट्सएप पर करें संपर्क: 

प्रतियोगिता और अभियान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए प्रतिभागी केवल व्हाट्सएप नंबर 9753896810 पर संपर्क कर सकते हैं।

​संस्था ने प्रदेश के सभी ऊर्जावान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पर्यावरण प्रेमियों से इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और धरती को हरा-भरा बनाने में अपना डिजिटल योगदान देने की अपील की है।

मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नई दिल्ली में अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन: अरावली ग्रीन वॉल को मजबूत करना” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन” शीर्षक से संकला फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का विमोचन भी किया।

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना

भूपेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और भारत की UNCCD के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप शुरू की है।

इस पहल के तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि की पहचान की गई है, और 2.7 मिलियन हेक्टेयर में हरियाली कार्य प्रारंभ किया गया है, जो गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में फैला हुआ है। परियोजना का कार्य 29 अरावली जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल हों।

हरियाणा में संरक्षण और पुनर्वनीकरण

मंत्री ने बताया कि हरियाणा में नौरंगपुर से नूह तक लगभग 97 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि, जो अत्यधिक अपक्षयग्रस्त है, वनरोपण के लिए चिन्हित की गई है और इसे बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया गया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता के बाद अरावली की सुरक्षा और पुनर्वनीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और तब के हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सक्रिय समर्थन से संभव हुआ।

अरावली की पारिस्थितिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता

मंत्री ने कहा कि अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जिसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है। अरावली पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा चार टाइगर रिज़र्व्स और 18 संरक्षित क्षेत्रों द्वारा सुनिश्चित की जा रही है, जबकि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त हरित हस्तक्षेप भी किए जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत ने वन्यजीवन संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। देश में दुनिया की सात बड़ी बिल्लियों में से पांच प्रजातियाँ और विश्व की करीब 70% बाघ जनसंख्या पाई जाती है, जो लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया गया है और सरकार इस कार्य को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन और रिपोर्ट

सम्मेलन में नीति निर्माता, वन अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रैक्टिशनर और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग लेते हुए अरावली की पारिस्थितिक महत्ता और पुनर्स्थापन के मार्गों पर विचार-विमर्श किया।

विमोचित रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिक, समुदाय-केंद्रित और पैमाने पर लागू होने योग्य ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया है कि पुनर्स्थापन कार्य क्षेत्रीय पैमाने पर, डेटा-संचालित, समुदाय-केंद्रित और बहु-विषयक होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल अलग-थलग प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि क्षेत्र में व्यापक अपक्षय और पारिस्थितिक दबाव विद्यमान हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

उद्घाटन सत्र में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तनमय कुमार, महानिदेशक वनों सुशील कुमार अवस्थी, भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और संकला फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

यह सम्मेलन अरावली क्षेत्र की सुरक्षा, हरित पहल और पारिस्थितिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया और श्री सक्ति अम्मा की 50 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा के इस अवसर का हिस्सा बनकर गहन प्रसन्नता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक गरिमा इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और राम नाथ कोविंद सहित, हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी पिछले माह इस मंदिर के दर्शन किए।

सक्ति अम्मा की धर्म के प्रति प्रतिबद्धता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक सेवा तक विस्तृत है। उन्होंने श्रीपुरम में संचालित विभिन्न परोपकारी गतिविधियों की सराहना की, जिनमें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियाँ, जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था, विद्यार्थियों को साइकिल वितरण जैसी दीर्घकालिक पहलें तथा प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने वाला अन्नदान कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने इन पहलों को सच्ची भक्ति की भावना से की गई उत्कृष्ट सेवाएँ बताया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि श्रीपुरम परिसर में 50,000 से अधिक वृक्ष लगाए गए हैं तथा समीपवर्ती कैलासगिरि पहाड़ियों पर कई लाख पौधे रोपे गए हैं। उन्होंने इसे धरती माता और मानवता के लिए एक ऐतिहासिक योगदान बताया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहलों को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला कदम कहा। उन्होंने जोड़ा कि पर्यावरण की रक्षा स्वयं में एक दिव्य सेवा है।

इस बात पर जोर देते हुए कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानव सेवा में निहित है, उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों का उल्लेख किया— “प्रेम से बड़ा कोई तप नहीं है।” उन्होंने कहा कि समाज से प्रेम करना और उसकी सेवा करना ही सर्वोच्च आध्यात्मिक साधना है।

उपराष्ट्रपति ने सक्ति अम्मा को वर्तमान युग की एक महान आध्यात्मिक विभूति बताया, जो अपने जीवन और कर्मों के माध्यम से “प्रेम ही ईश्वर है” के सिद्धांत को साकार करते हुए समाज में धर्म और आध्यात्मिक चेतना का पोषण कर रही हैं।

इससे पूर्व दिन में, उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में नारायणी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने देवी लक्ष्मी से सभी के लिए शांति, समृद्धि और सुख की प्रार्थना की।

भारत–यूरोपीय संघ (EU) आइडियाथॉन: “समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने” पर सहयोगी पहल सफलतापूर्वक सम्पन्न

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भारत–EU ट्रेड और टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के कार्य समूह 2, हरित और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अंतर्गत आयोजित “समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने” विषयक भारत–EU आइडियाथॉन का समापन 10 दिसंबर 2025 को भुवनेश्वर सिटी नॉलेज इनोवेशन क्लस्टर (BCKIC), कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT-DU), भुवनेश्वर, ओडिशा में आयोजित अंतिम समारोह के साथ हुआ। यह आयोजन भारतीय प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) और भारत में यूरोपीय संघ प्रतिनिधिमंडल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक सहयोगी पहल का प्रतीक था।

डॉ. पर्विंदर माइनि, वैज्ञानिक सचिव, OPSA ने मुख्य भाषण में कहा कि इस आइडियाथॉन ने भारतीय और यूरोपीय संस्थानों के समन्वित प्रयासों को प्रदर्शित किया है, जिससे समुद्री प्लास्टिक नियंत्रण के लिए प्रारंभिक स्तर की नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा, “इस आइडियाथॉन ने दिखाया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच समन्वित वैज्ञानिक सहयोग प्रभावशाली और पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों को जन्म दे सकता है। युवा नवप्रवर्तकों ने रचनात्मकता, वैज्ञानिक सटीकता और सामुदायिक दृष्टिकोण के माध्यम से इस वैश्विक चुनौती का सामना करने की प्रतिबद्धता दिखाई।”

सुश्री सिग्ने राटसो, उप महानिदेशक, अनुसंधान और नवाचार निदेशालय, यूरोपीय आयोग ने अपनी बात रखते हुए TTC तंत्र के अंतर्गत सहयोगी अनुसंधान को मजबूत करने के लिए EU की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “हमें प्रसन्नता है कि भारत और EU इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि नदी और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और मानव स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।”

डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक ‘G’, OPSA ने उद्घाटन भाषण में कहा कि आइडियाथॉन ने दोनों क्षेत्रों के वैज्ञानिक विशेषज्ञता, नवाचार और प्रारंभिक उद्यमशील सोच का संगम सुनिश्चित किया। समारोह का स्वागत भाषण डॉ. हाफ्सा अहमद, वैज्ञानिक ‘D’, OPSA ने दिया।

किनचित बिहानी, अनुसंधान एवं नवाचार सलाहकार, EU प्रतिनिधिमंडल ने आइडियाथॉन की मुख्य गतिविधियों जैसे डिज़ाइन-थिंकिंग कार्यशालाएँ, मार्गदर्शन सत्र और पिच प्रशिक्षण को प्रस्तुत किया। निएंके बुइस्मैन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग इकाई प्रमुख, यूरोपीय आयोग ने समापन भाषण में प्रस्तुत विचारों की उच्च गुणवत्ता की सराहना की और कहा कि इस पहल ने TTC फ्रेमवर्क के अंतर्गत भारत–EU साझेदारी की मजबूती को और बढ़ाया।

अंतिम चरण में चयनित टीमों ने तीन चुनौती क्षेत्रों में अपने समाधान प्रस्तुत किए:

  • चुनौती 1: समुद्री प्लास्टिक की पहचान और ट्रैकिंग

  • चुनौती 2: प्रभावी और पैमाने पर लागू होने वाली निकासी तकनीकों का विकास

  • चुनौती 3: जागरूकता बढ़ाना और समुदायों को रोकथाम में संलग्न करना

जूरी में भारतीय और यूरोपीय विशेषज्ञ शामिल थे। निर्णायक प्रक्रिया के बाद शीर्ष तीन विजेता टीमों की घोषणा की गई:

  • चुनौती 1: Ocean Resilience India

  • चुनौती 2: Nautilus Nexus

  • चुनौती 3: TrashTrek App

प्रत्येक विजेता टीम को INR 5,00,000 नकद पुरस्कार और समाधान के आगे विकास के लिए इनक्यूबेशन समर्थन प्रदान किया गया। प्रमाणपत्र विजेताओं और अंतिम चयनित टीमों को भी प्रदान किए गए।

इस कार्यक्रम में भारत और यूरोपीय संघ के 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, इटली, बेल्जियम, स्लोवेनिया, साइप्रस और लातविया से अधिकारी, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्योग और नागरिक समाज संगठन शामिल थे। यह आइडियाथॉन भारत और EU की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वे समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए टिकाऊ, नवाचारपूर्ण और सामुदायिक-केंद्रित तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। TTC कार्य समूह 2 आगे भी भारत–EU सहयोग को बढ़ावा देगा और भविष्य की संयुक्त पहलों का समर्थन करेगा।

कोपरा जलाशय को मिलेगा रामसर स्थल का दर्जा, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने भेजा प्रस्ताव

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रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कोपरा जलाशय को राज्य सरकार ने प्रस्तावित रामसर स्थल घोषित करने की दिशा में बड़ी पहल की है। प्राकृतिक और मानव निर्मित विशेषताओं से युक्त यह जलाशय पूरे क्षेत्र के लिए जलसंसाधन, सिंचाई और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान

वन मंत्री कश्यप ने उम्मीद जताई है कि कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। गौरतलब है कि कोपरा जलाशय मुख्य रूप से वर्षा जल और आसपास के छोटे नालों से भरता है। यह जलाशय स्थानीय ग्रामीणों की जल आवश्यकताओं को पूरा करता है और किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। जलाशय के आसपास की भूमि अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है, जिससे क्षेत्र के कई गाँवों और छोटे कस्बों की कृषि पूरी तरह इस जलाशय पर निर्भर है।

यहाँ की जैव विविधता मानी जाती है अत्यधिक समृद्ध 

इसके अलावा यह क्षेत्र वर्षभर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों, जलचर जीवों और वनस्पतियों का सुरक्षित आवास बना रहता है। खासकर प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या यहाँ हर वर्ष दर्ज की जाती है। जलाशय में मछलियाँ, जलीय पौधे, उभयचर, सरीसृप और अनेक प्रकार के कीट-पतंगे बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इसकी जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है।

दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए उपयुक्त स्थल

राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के अनुसार कोपरा जलाशय रिवर टर्न, कॉमन पोचार्ड और इजिप्शियन वल्चर जैसे दुर्लभ व महत्वपूर्ण पक्षियों के संरक्षण के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह जलाशय रामसर मानदंड संख्या 02, 03 और 05 की पूर्णता करता है, जो इसे एक उत्कृष्ट वेटलैंड इकोसिस्टम का उदाहरण साबित करता है।

स्वीकृति मिलने पर पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा

इसी महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे रामसर स्थल घोषित करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण मिलेगा और इसका वैज्ञानिक, पर्यावरणीय तथा पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा।

ग्रामीण आजीविका के विकास  को मजबूत करने की तैयारी

सरकारी योजनाओं के तहत इस क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका विकास से जुड़ी गतिविधियों को और मजबूत करने की तैयारी है, ताकि स्थानीय आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड के नैनीताल में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में की शिरकत

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 भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (4 नवम्बर, 2025) उत्तराखंड के नैनीताल में आयोजित कुमाऊँ विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव होती है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता और कौशल का विकास करना नहीं, बल्कि उनके नैतिक बल और चरित्र को भी सशक्त बनाना होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा हमें आत्मनिर्भर बनाती है, साथ ही यह हमें विनम्र बनना और समाज एवं देश के विकास में योगदान देना भी सिखाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा को वंचित वर्गों की सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्य में समर्पित करें। उन्होंने कहा कि यही सच्चा धर्म है, जो उन्हें संतोष और खुशी प्रदान करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। सरकार निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कई नीतिगत पहल कर रही है। इन पहलों से युवाओं के लिए अनेक अवसर पैदा हो रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों को चाहिए कि वे युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान के प्रभावी उपयोग के लिए बहुविषयक (multidisciplinary) दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्हें विश्वास है कि विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रगति करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि हिमालय जीवनदायिनी संसाधनों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सजग प्रयास कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में कुमाऊँ विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारियाँ भी हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे आसपास के गांवों का दौरा करें, वहाँ की समस्याओं को समझें और यथासंभव उनके समाधान के लिए कार्य करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कुमाऊँ विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के युवा इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्हें विश्वास है कि अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर वे इस भूमिका को सफलतापूर्वक निभाएँगे।

इससे पूर्व, राष्ट्रपति ने नैना देवी मंदिर, नैनीताल में पूजा-अर्चना की तथा श्री नीम करौली बाबा आश्रम, कैंची धाम में दर्शन भी किए।

भारत वैश्विक वन क्षेत्र में 9वें स्थान पर पहुंचा: पर्यावरण संरक्षण में बड़ी उपलब्धि

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भारत ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा बाली में जारी ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट (GFRA) 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब कुल वन क्षेत्र के मामले में दुनिया में 9वें स्थान पर पहुंच गया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

पिछले मूल्यांकन में भारत 10वें स्थान पर था। इसके अलावा, भारत ने वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भी दुनिया में अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है, जो सतत वन प्रबंधन और पारिस्थितिक संतुलन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह उल्लेखनीय प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करती है, जो वन संरक्षण, वृक्षारोपण और समुदाय आधारित पर्यावरणीय कार्रवाई पर केंद्रित हैं।

प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और पर्यावरण चेतना पर उनके लगातार जोर ने देशभर के लोगों को वृक्षारोपण और संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया है।

यह बढ़ती जनभागीदारी हरित और सतत भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर रही है। मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि मोदी सरकार की योजनाओं, नीतियों, वन संरक्षण और विस्तार के प्रयासों तथा राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रमों का परिणाम है।

IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस में भारत ने विज्ञान और परंपरा का संगम पेश किया

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अबू धाबी- केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उच्चस्तरीय राउंडटेबल संवाद में भाग लिया। इस सत्र का विषय था: ‘Nature's Promise for Climate and People’, जिसमें पर्यावरण और जलवायु संकट से निपटने के लिए विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के बेहतर समाकलन पर चर्चा हुई।

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ और स्थानीय ज्ञान सदियों से स्थिरता और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की मिसाल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘Mission LiFE’ इसी ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संरक्षण में व्यवहारिक रूप देने का प्रयास है।

मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि नीलगिरि के Toda जनजाति चींटियों के घोंसले देखकर मानसून का पूर्वानुमान लगाते हैं, जबकि अंडमान के Jarawas मछलियों के व्यवहार से चक्रवात का अंदाजा लगाते हैं। इसके अलावा, राजस्थान में स्टेप वेल्स और Silver Drops जैसी जल संरक्षण तकनीकें सतत जीवन शैली का प्रमाण हैं।

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, “विज्ञान और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं, और इन दोनों का संगम ही स्थायी और प्रभावी समाधान की कुंजी है। आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के संयोजन से हम सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक कार्यों में बदल सकते हैं।”

भारत की यह पहल विकास और विरासत के साथ-साथ नवाचार का एक जीवंत उदाहरण है, जो वैश्विक स्तर पर प्रकृति-आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है।



भूपेन्द्र यादव ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत असोल भट्टी में पौधारोपण किया

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सेवा पर्व 2025 के तहत, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने आज असोल भट्टी वन्यजीव अभयारण्य (ABWLS), नई दिल्ली में एक पौधा लगाया। यह वृक्षारोपण कार्यक्रम सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और यह राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के तहत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों, केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, दिल्ली राज्य सरकार के वन विभाग (GNCTD) और 132 इको टास्क फोर्स (ETF), राजपूत रेजिमेंट के अधिकारियों ने भाग लिया, जो ABWLS में तैनात हैं।

भूपेन्द्र यादव ने छात्रों और ETF कर्मियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें प्रकृति की देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण को समाज में एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने देश के लिए हरित और सतत भविष्य की दिशा में सहयोग को और मजबूत किया।

कार्यक्रम का समापन सेवा पर्व के तहत सामुदायिक गतिविधियों को जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नागरिकों को ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के माध्यम से अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।

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