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डॉ. सुकांत मजूमदार ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और शिक्षा में सुधार का किया वर्णन

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केंद्रीय राज्य मंत्री, शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास, डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। इस अवसर पर डॉ. मजूमदार ने कहा कि विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक कानूनी वेतन रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है। यह अधिनियम सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विकास पहलों का समन्वय और सैचुरेशन-आधारित सेवाएं सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे ग्रामीण भारत का आधार समृद्ध, लचीला और आत्मनिर्भर बन सके।

उन्होंने आगे कहा कि संसद ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 पारित कर दिया है, जो भारत के ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे में निर्णायक सुधार को दर्शाता है। यह अधिनियम रोजगार को केवल एक कल्याणकारी हस्तक्षेप से निकालकर समग्र विकास का एकीकृत उपकरण बनाने पर केंद्रित है।

मंत्री ने जोर दिया कि यह कानून ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करेगा, शासन और जवाबदेही तंत्र को आधुनिक बनाएगा, और वेतन रोजगार को सतत और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ेगा, जिससे समृद्ध और लचीला ग्रामीण भारत सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान:

मंत्री ने बताया कि VB–G RAM G ढांचा ग्रामीण शिक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने वाले कार्यों को सीधे लागू करने में सक्षम है, जैसे कि शारीरिक सुविधाओं और बुनियादी सुविधाओं की लंबित आवश्यकताओं को पूरा करना। इसमें सरकारी स्कूलों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान, कंपाउंड दीवार, शौचालय और किचन शेड के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल है, जो सुरक्षित, कार्यात्मक और बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण सुनिश्चित करेंगे।

इसी प्रकार, आंगनवाड़ी भवनों और शौचालयों का निर्माण और रखरखाव प्रारंभिक बाल शिक्षा की नींव को मजबूत करेगा और सेवाओं की गरिमा, स्वच्छता और निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

डॉ. मजूमदार ने यह भी बताया कि ग्रामीण पुस्तकालय भवनों और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों का समावेश औपचारिक शिक्षा से परे सीखने के अवसरों का विस्तार करता है, और ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और वयस्क शिक्षार्थियों को ज्ञान संसाधनों और व्यावसायिक मार्गों तक पहुँच प्रदान करता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के पारित होने से भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया युग शुरू हुआ है। कानूनी रोजगार को 125 दिनों तक बढ़ाना, विकेंद्रीकृत और भागीदारीपूर्ण योजना लागू करना, जवाबदेही मजबूत करना, और सैचुरेशन-आधारित विकास संस्थागत करना, यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सशक्तिकरण, समावेशी विकास और समृद्ध, लचीला ग्रामीण भारत बनाने का रणनीतिक उपकरण बनाता है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

जनजातीय शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु NESTS की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समाज (NESTS) ने 21–22 नवंबर 2025 को आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में “जनजातीय शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ढाँचा निर्माण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यशाला सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों की शैक्षणिक संरचना को मज़बूत करने और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के माध्यम से सतत एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के “शिक्षा द्वारा जनजातीय परिवर्तन” के विज़न को साकार करने पर केंद्रित है।

जनजाति कार्य मंत्रालय की सचिव ने कार्यशाला का उद्घाटन किया, इंजीनियर्स हैंडबुक जारी

कार्यक्रम का उद्घाटन रंजन चोपड़ा, सचिव, जनजाति कार्य मंत्रालय ने किया। उन्होंने EMRS इंजीनियर्स हैंडबुक भी जारी की।
सचिव ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य NESTS, परियोजना टीमों और EMRS निर्माण स्थलों पर कार्यरत इंजीनियरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि EMRS जनजातीय छात्रों और उनके परिवारों में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना जगाते हुए सामाजिक परिवर्तन का माध्यम हैं।

उन्होंने विद्यालयों के निर्माण में सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और सौंदर्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये विद्यालय आशा और अवसर के प्रतीक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि स्थलों से संबंधित चुनौतियाँ हैं, फिर भी परिश्रम, पारदर्शी संवाद और समान अपेक्षाएँ उच्च गुणवत्ता वाले EMRS कैंपस बनाने में सहायक होंगे। यह कार्यशाला तकनीकी सवालों को हल करने, सूचना की खाई को पाटने और समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करेगी।

NESTS के आयुक्त का संबोधन

शुरुआत में NESTS के आयुक्त अजीत के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया:

  • वर्तमान में 499 EMRS स्कूल संचालित हैं,

  • 397 स्कूल भवन पूर्ण हो चुके हैं,

  • शेष विद्यालय निर्माण या पूर्व-निर्माण चरणों में हैं।

उन्होंने समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

“अच्छी गुणवत्ता वाले EMRS का समय पर पूरा न होना मतलब है कि जनजातीय बच्चे स्कूल नहीं जा पाएँगे—जो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।”

कार्यशाला के बारे में

कार्यशाला में PSUs, CPWD, राज्य सरकारों और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के इंजीनियरों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम क्षमता-विकास पर केंद्रित था ताकि EMRS निर्माण कार्य को तेजी और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

सत्रों में निम्न विषय शामिल थे:

  • परियोजना योजना व निगरानी

  • भू-तकनीकी जांच

  • सामग्री परीक्षण

  • अर्थवर्क और रिइनफोर्समेंट

  • जनजातीय क्षेत्रों की चुनौतियों के अनुरूप निर्माण प्रथाएँ

प्रतिभागियों ने भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

IIT, NIT, CBRI, SAI सहित प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया:

  • गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली

  • सामग्री परीक्षण तकनीक

  • प्रभावी परियोजना प्रबंधन

  • क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान

इंटरैक्टिव सत्रों में इंजीनियरों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक समाधान खोजे।

यह कार्यशाला जनजातीय छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत विद्यालय अवसंरचना सुनिश्चित करने की दिशा में NESTS के मिशन का महत्वपूर्ण कदम है। यह जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने की सरकारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।


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