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उत्तराखंड में आपदा पूर्वानुमान होगा और सशक्त: डॉ. जितेंद्र सिंह ने किए तीन नए वेदर रडारों की घोषणा

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केंद्र सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि उत्तराखंड में सुरकंडा देवी, मुक्तेश्वर और लैंसडौन में पहले ही तीन वेदर रडार लगाए जा चुके हैं और जल्द ही हरिद्वार, पंतनगर और औली में तीन और रडार स्थापित किए जाएंगे। इससे राज्य की रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान क्षमता और मजबूत होगी।

"विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन" को संबोधित करते हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपने भौगोलिक स्वरूप, हिमालयी पारिस्थितिकी और प्राकृतिक अनुभवों के कारण वैश्विक आपदा-रोधक चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद नरेश बंसल, एनडीएमए के सदस्य अग्रवाल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव नितीश कुमार झा, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कमल घनसाला, डीजी दुर्गेश पंत, एसडीएमए उपाध्यक्ष रोहिला सहित विशेषज्ञ, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा ने राज्य को आपदा प्रतिक्रिया और प्रशासन में विशिष्ट पहचान दी है। उन्होंने सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को याद किया, जिसे दो वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक पूरा किया गया था और जिसे वैश्विक आपदा प्रबंधन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में उत्तराखंड में हाइड्रो-मीटियोरोलॉजिकल आपदाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। 2013 की केदारनाथ आपदा और 2021 की चमोली घटना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से पीछे हटते ग्लेशियर, जीएलओएफ का बढ़ता जोखिम, हिमालयी पहाड़ों की नाजुकता, वनों की कटाई और प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में मौसम और आपदा-निगरानी बुनियादी ढांचे को बड़ी मात्रा में बढ़ाया है। राज्य में 33 मौसम वेधशालाएँ, रेडियो-सोंडे और रेडियो-विंड सिस्टम्स, 142 स्वचालित मौसम स्टेशन, 107 वर्षामापक यंत्र, जिला व ब्लॉक स्तर के मॉनिटरिंग सिस्टम तथा किसानों के लिए ऐप-आधारित चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है।

उन्होंने बताया कि तीन वेदर रडार पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और तीन और जल्द स्थापित होंगे, जिससे पूर्वानुमान पद्धति और अधिक सटीक होगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि अचानक होने वाले क्लाउडबर्स्ट की परिस्थितियों को समझने के लिए भारत ने एक विशेष हिमालयी जलवायु अध्ययन कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने बताया कि "नाउकास्ट" प्रणाली—जो तीन घंटे पहले की भविष्यवाणी देती है—अब उत्तराखंड में भी व्यापक रूप से लागू की जा रही है।

उन्होंने एनडीएमए, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत जंगल-आग मौसम सेवाओं का उल्लेख किया और इसे "पूरा-सरकार" और "पूरा-विज्ञान" मॉडल बताया।

कुछ क्षेत्रों में आईएमडी चेतावनियों की अनुपालना न होने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की एक घटना का उल्लेख किया जहाँ एक नए आईएएस अधिकारी ने आईएमडी रेड अलर्ट के बाद तुरंत हाईवे बंद कर बड़ी त्रासदी को टाल दिया।

उन्होंने कहा कि एनडीएमए, पर्यावरण मंत्रालय और शहरी विकास निकायों के भूमि उपयोग नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। नदी तटों और नई हाईवे के पास अवैध खनन को उन्होंने बेहद खतरनाक मानवजनित खतरा बताया।

डॉ. सिंह ने हिमालयी क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में कृषि-स्टार्टअप्स और सीएसआईआर आधारित वैल्यू-एडिशन मॉडलों की चर्चा की। जम्मू-कश्मीर के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे कई तकनीकी और प्रबंधन स्नातक निजी नौकरियाँ छोड़कर इन उद्यमों से जुड़े हैं। उन्होंने इसी मॉडल को उत्तराखंड में भी दोहराने की अपील की।

भारत की वैश्विक आपदा-रोधक क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब पड़ोसी देशों को तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के COP-26 में घोषित 2070 नेट ज़ीरो लक्ष्य की भी चर्चा की।

अंत में, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोजनकर्ताओं को विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी और कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर आपदा-नियंत्रण, जलवायु अनुकूलन और लचीले विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘मिशन मौसम’ की प्रगति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम’ पहल के अंतर्गत चल रही खरीद और स्थापना से संबंधित प्रगति की समीक्षा करना था।

मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समयसीमा में तेजी लाएँ, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।

बैठक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन सहित मंत्रालय और IMD के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे। अधिकारियों ने देश भर में लगाए जा रहे विभिन्न प्रेक्षण एवं रडार प्रणालियों की खरीद, बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और तेज की गई स्थापना समयसीमा की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित मिशन मौसम, भारत की मौसम पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी क्षमताओं में एक बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि खरीद और स्थापना गतिविधियों का समय पर निष्पादन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, आपदा तैयारी को बढ़ाने और अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने IMD और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रियाएँ पारदर्शी, कुशल और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हों। उन्होंने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापना कार्यों को तेज करने और फील्ड-स्तर की प्रगति पर नज़र रखने के लिए उन्नत ट्रैकिंग प्रणालियाँ अपनाने पर भी बल दिया।

डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IMD और मंत्रालय के बीच समन्वित प्रयासों से मिशन मौसम के तहत निर्धारित लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर ही प्राप्त कर लिए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया, बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) की समीक्षा की

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया और विभाग द्वारा विकसित वेब-जीआईएस आधारित बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (Multi-Hazard Early Warning Decision Support System – DSS) की समीक्षा की।

मंत्री ने विभाग द्वारा स्वदेशी, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की, जिससे आपदा प्रबंधन की तैयारी और जनसुरक्षा को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि इस DSS प्रणाली के माध्यम से विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता समाप्त होने और ₹5.5 करोड़ के वार्षिक रखरखाव व्यय से बचाव के कारण लगभग ₹250 करोड़ की लागत बचत हुई है, जो “आत्मनिर्भर भारत” पहल को सशक्त बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” (हर हर मौसम, हर घर मौसम) नामक नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म की भी समीक्षा की, जो गाँव स्तर तक हाइपर-लोकल और स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली अगले 36 घंटे तक प्रति घंटे का पूर्वानुमान, अगले 5 दिनों तक हर 3 घंटे का पूर्वानुमान और अगले 10 दिनों तक हर 6 घंटे का पूर्वानुमान देती है। नागरिक अपने क्षेत्र का मौसम विवरण पिन कोड, स्थान नाम या राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के प्रत्येक हिस्से में नागरिकों को सटीक और समय पर मौसम जानकारी मिल सके।

IMD ने अपने पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनर्गठित किया है, जिससे वास्तविक समय में अलर्ट जारी किए जा सकें। अब पूर्वानुमान की सटीकता में 15–20% की वृद्धि हुई है, तैयारी समय 3 घंटे घटा है, और लीड अवधि 5 से बढ़कर 7 दिन तक हो गई है।

IMD अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तंत्र शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और विकसित किया जाए ताकि नागरिकों को स्पष्ट, क्रियाशील और समय पर अलर्ट मिल सकें, जिससे आपदाओं को रोका जा सके और पर्याप्त तैयारी की जा सके।

मंत्री ने IMD टीम को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 जीतने पर बधाई दी, जो विशाखापट्टनम में आयोजित 28वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान DSS के माध्यम से सार्वजनिक सेवा में डिजिटल तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने विशेष स्वच्छता कार्यक्रम के तहत पुराने फ़ाइलों और ई-वेस्ट के निपटान से ₹30 लाख की आय और 600 वर्ग मीटर कार्यालय क्षेत्र खाली करने के लिए भी विभाग की सराहना की।

इससे पहले, मंत्री ने नई दिल्ली स्थित IMD मुख्यालय “मौसम भवन” में आयोजित विशेष स्वच्छता कार्यक्रम 5.0 में भाग लिया।

“एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत, डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD परिसर में पौधारोपण किया और स्वच्छता कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 50 सफाई मित्रों को सम्मानित किया।

मिशन मौसम के अंतर्गत आधुनिक मौसम उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग जारी है, जो 2030 तक IMD की पूर्वानुमान क्षमता को सशक्त बनाएगा। इससे 5x5 किलोमीटर स्तर तक गंभीर मौसम पूर्वानुमान, डायनेमिक इम्पैक्ट-आधारित फोरकास्टिंग और जोखिम-आधारित प्रारंभिक चेतावनियां संभव होंगी। इसका उद्देश्य है कि 2030 तक हर घर तक समय पर मौसम अलर्ट पहुँचे, जिससे “हर हर मौसम, हर घर मौसम” का विज़न साकार हो सके।

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