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राष्ट्रीय पटल पर चमका छत्तीसगढ़, 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने हासिल किया प्रथम स्थान

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पंचायती राज मंत्रालय 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ के युवा लीडर्स को सहभागितापूर्ण शासन में उत्कृष्टता के लिए करेगा पुरस्कृत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।"

युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

देशभर के EMRS प्राचार्यों की प्रतिभाओं और नेतृत्व कौशल को सशक्त बनाने के लिए NESTS ने आयोजित की 2nd EMRS प्राचारकों की राष्ट्रीय सम्मेलन

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राष्ट्रीय आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा समाज (NESTS) ने 16–17 दिसंबर 2025 को डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में "2nd EMRS प्राचारक सम्मेलन ऑन स्कूल्स के प्रभावी प्रबंधन" का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) के प्राचार्य और प्राचार्य-इन्-चार्ज शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य रेजिडेंशियल स्कूलों में शैक्षणिक नेतृत्व, प्रशासनिक प्रणालियों और संस्थागत प्रशासन को सुदृढ़ करना था।

सम्मेलन का उद्घाटन आदिवासी मामलों के मंत्री जुयल ओराम ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके, वरिष्ठ अधिकारी और NESTS के अधिकारी भी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र में NESTS के अतिरिक्त आयुक्त ने सम्मेलन के उद्देश्यों को साझा किया और EMRS के प्राचार्यों की भूमिका को रेखांकित किया।

दिन 1 के मुख्य आकर्षण:

पहले दिन शैक्षणिक सुधारों, नेतृत्व विकास और संस्थागत प्रशासन पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। मुख्य सत्रों में शामिल थे:

  • CBSE के “दो परीक्षा प्रणाली” पर डॉ. सन्मय भारद्वाज द्वारा विवरण।

  • रेजिडेंशियल स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर जितेन्द्र नागपाल द्वारा मार्गदर्शन।

  • भवनों के रखरखाव और निर्माण एजेंसियों से हेरिटेज लेना पर ए.डी.पी. केशरी और प्रमोद अग्रवाल द्वारा प्रशिक्षण।

  • प्राचार्यों के नेतृत्व गुण और स्कूल संस्कृति निर्माण पर मनोज कुमार श्रीवास्तव।

  • अल्पसंख्यक और वंचित छात्रों के सशक्तिकरण पर डॉ. संजीव कौर, CEO, Teach India Foundation।

  • APAR ऑनलाइन पोर्टल का डेमोंस्ट्रेशन जी. अरुमुगम द्वारा।

दिन 2 के मुख्य आकर्षण:

दूसरे दिन प्रशासनिक दक्षता, शैक्षणिक नेतृत्व, छात्र कल्याण, स्वास्थ्य जागरूकता, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां और वित्तीय प्रशासन पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रमुख सत्र थे:

  • HR मुद्दे और प्रोबेशन क्लियरेंस – जी. अरुमुगम (NESTS)

  • NCC इकाइयों की स्थापना – कर्नल विवेक शुक्ला, NCC

  • प्रभावी पाठ योजना –  हिमांशु चौरसिया और आदित्य दुबे (COGRAD, NVS)

  • सेकेंडरी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन –  प्रमीला मनोहरन (UNICEF)

  • सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का विकास – स्काउट्स और गाइड्स यूनिट्स, कौशल केंद्र और कौशलाय प्रोग्राम।

  • वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता निर्माण – NPS और GeM प्रक्रियाओं पर मार्गदर्शन।

  • छात्र कल्याण – सिक्ल सेल रोग, वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा पर सत्र।

सम्मेलन के अंतिम सत्र में खुली चर्चा आयोजित की गई, जिसमें प्राचार्यों ने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक सिफारिशें दीं।

सम्मेलन का परिणाम:

यह दो दिवसीय सम्मेलन प्राचार्यों की शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक कौशल, वित्तीय प्रबंधन और छात्र कल्याण में सुधार के लिए उपयोगी साबित हुआ। साथ ही, NEP 2020 के अनुरूप सुधारों को लागू करने और आदिवासी छात्रों की समग्र शिक्षा के लिए प्रेरक मंच उपलब्ध कराया। NESTS ने "शिक्षा के माध्यम से आदिवासी परिवर्तन" की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः मजबूत किया।

आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव ‘उद्भव 2025’ सफलतापूर्वक संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समिति (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय ने, 3 से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित 6वीं राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव तथा कला उत्सव – उद्भव 2025 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले के वड्देस्वरम स्थित केएल विश्वविद्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह महोत्सव NESTS द्वारा आयोजित और आंध्र प्रदेश जनजातीय कल्याण आवासीय शैक्षणिक संस्थान समिति (APTWREIS–Gurukulam) द्वारा मेज़बानी किया गया, जिसमें केएल विश्वविद्यालय का व्यापक संस्थागत सहयोग मिला।

समापन समारोह में आंध्र प्रदेश सरकार की माननीय जनजातीय कल्याण तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री जी. संध्या रानी; माननीय सामाजिक कल्याण, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सचिवालय एवं गांव वॉलंटियर विभाग के मंत्री डॉ. डी. एस. स्वामी; तथा आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, सिनेमाटोग्राफी एवं गुंटूर जिले के प्रभारी मंत्री कंदुला दुर्गेश उपस्थित रहे। आंध्र प्रदेश सरकार के सामाजिक कल्याण एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक भी समारोह में उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

अपने संबोधन में माननीय अतिथियों ने जनजातीय छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की जनजातीय शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उद्भव जैसे मंच न केवल भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि जनजातीय युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव विकसित करते हैं।

महोत्सव का संचालन NESTS के कमिश्नर अजीत कुमार श्रीवास्तव (IRAS) तथा आंध्र प्रदेश के सामाजिक एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक (IAS) के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन सचिव एम. गौथमी (IAS), सचिव APTWREIS (गुरुकुलम), ने अपनी टीमों और दोनों संस्थानों के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्यक्रम की सुचारू रूप से व्यवस्था सुनिश्चित की।

कुल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,558 छात्र–छात्राओं ने महोत्सव में भाग लिया, जिनमें 524 पुरुष और 1,024 महिला प्रतिभागी शामिल थे। इनके साथ 45 टीम लीडर, 178 एस्कॉर्ट, 22 कंटिंजेंट मैनेजर, 22 लायज़न अधिकारी, 10 अधिकारी, 19 NESTS अधिकारी एवं कर्मचारी, 137 उप-समिति सदस्य, 48 जूरी सदस्य और 60 राज्य अधिकारी/ APTWREIS अधिकारी भी जुड़े। तीन दिनों तक 49 सांस्कृतिक, साहित्यिक, रचनात्मक और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए—पहले दिन 18, दूसरे दिन 22 और तीसरे दिन 9—जिनमें भारत की विविध जनजातीय समुदायों की प्रतिभा, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली।

समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए। कुल पदक तालिका में तेलंगाना प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का स्थान रहा। कुल 105 प्रथम पुरस्कार, 105 द्वितीय पुरस्कार और 105 तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए, साथ ही सर्वश्रेष्ठ राज्य चैम्पियनशिप का पुरस्कार भी दिया गया। सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह और सहभागिता के सम्मान में प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

उद्भव 2025 के 12 चयनित वर्गों के विजेता अब यशदा, पुणे में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कला उत्सव में ईएमआरएस का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसमें देशभर से टीमें भाग लेंगी। जनजातीय हस्तशिल्प, दृश्य कलाएँ, पारंपरिक प्रस्तुतियाँ और स्वदेशी रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने इस महोत्सव में विशेष आकर्षण जोड़ा, जो जनजातीय समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और कलात्मक परंपराओं को दर्शाता है।

उद्भव 2025 ने माननीय प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के दृष्टिकोण को साकार करते हुए जनजातीय छात्रों को राष्ट्रीय मंच, आत्मविश्वास और अपनी सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान किया। इस महोत्सव ने ईएमआरएस की परिवर्तनकारी भूमिका को भी रेखांकित किया, जो विकासात्मक अंतर को पाटने, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षमताओं को मजबूत करने तथा जनजातीय युवाओं में नेतृत्व गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण है।

छठे संस्करण की सफल पूर्णता के साथ, NESTS ने देशभर के जनजातीय छात्रों के लिए समग्र शिक्षा, सांस्कृतिक सशक्तिकरण और रचनात्मक अवसरों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संगठन स्वदेशी प्रतिभा को पहचान देने और सांस्कृतिक तथा साहित्यिक क्षेत्रों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाले मंचों के विस्तार के लिए समर्पित है।


GI-टैग्ड जनजातीय कला को नई उड़ान: NESTS ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और प्रदर्शनी का शुभारंभ किया

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नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा तीन दिवसीय “GI Tagged Tribal Art Workshop & Exhibition – Cultural Extravaganza” का आज नई दिल्ली में शुभारंभ किया गया। 24–26 नवंबर 2025 तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के 139 चयनित विद्यार्थी, 34 कला एवं संगीत शिक्षक, तथा 10 मास्टर आर्टिसन शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की GI-टैग्ड जनजातीय कला परंपराओं को संरक्षित, संवर्धित और बढ़ावा देना है।

उद्घाटन समारोह

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात् स्वागत भाषण श्री विपिन कुमार, संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), NESTS ने दिया।
प्रो. अनिल कुमार, प्रमुख, जनपद संपदा, IGNCA ने विशिष्ट संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने जनजातीय कला रूपों के गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद

  • बिपिन रतूड़ी, संयुक्त आयुक्त (सिविल), NESTS,

  •  प्रशांत मीणा, अतिरिक्त आयुक्त, NESTS,का संबोधन हुआ।

मुख्य उद्घाटन भाषण अजीत कुमार श्रीवास्तव, आयुक्त, NESTS द्वारा दिया गया, जिन्होंने औपचारिक रूप से कार्यशाला को उद्घाटित किया।
अंत में डॉ. रश्मि चौधरी, सहायक आयुक्त (शैक्षणिक), NESTS ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

EMRS छात्रों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

उद्घाटन सत्र में EMRS विद्यार्थियों ने विभिन्न राज्यों की समृद्ध जनजातीय कला और संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए शानदार प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें शामिल थीं:

  • धीम्सा नृत्य (ओडिशा)

  • जौनसारी नृत्य (उत्तराखंड)

  • मिज़ो फोक डांस (मिज़ोरम)

  • फोक वोकल सोलो (दादरा एवं नगर हवेली)

  • देशभक्ति गीत (मध्य प्रदेश)

इन प्रस्तुतियों ने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

GI-टैग्ड कला रूपों में प्रशिक्षण

प्रसिद्ध GI विशेषज्ञ श्वेता मेनन (Truly Tribal) ने GI-टैग्ड कला के महत्व पर लाइव सत्र लेकर विद्यार्थियों को अवगत कराया। तीन दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को निम्न पारंपरिक GI-मान्यता प्राप्त कला रूपों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

  • गोंड

  • वारली

  • मधुबनी

  • पिथोरा

  • चेरियल

  • रोगन

  • कलमकारी

  • पिछवाई

  • ऐपन

  • रंगवाली पिचौरा

  • कांगड़ा

  • बासौली

  • मैसूर पेंटिंग

  • बस्तर ढोकड़ा

  • कच्छी कढ़ाई

इन कला रूपों का प्रशिक्षण मास्टर आर्टिसन के मार्गदर्शन में दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप पहल

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण—कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने—से प्रेरित है।
इसके माध्यम से EMRS विद्यार्थी पारंपरिक कला में दक्ष होकर युवा जनजातीय कलाकार-उद्यमी के रूप में उभर सकते हैं, जिससे सांस्कृतिक गौरव और आजीविका के नए अवसर दोनों को बढ़ावा मिलता है।

जनजातीय बच्चों का सर्वांगीण सशक्तिकरण

EMRS विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, आत्मविश्वास और सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक कौशल की यह संयुक्त पहल जनजातीय युवाओं में अवसर, सम्मान और विकास की नई धारा स्थापित करती है।

जन सहभागिता

कार्यक्रम में

  • GI-टैग्ड छात्र कला प्रदर्शनी,

  • कला बिक्री,

  • और लाइव आर्ट वर्कशॉप
    का आयोजन किया जा रहा है।

यह प्रदर्शनी 24–26 नवंबर 2025 के दौरान प्रतिदिन सुबह 09:30 बजे से शाम 04:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली है।
कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नागरिकों को भारतीय जनजातीय कला को देखने और समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।


जनजातीय शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु NESTS की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समाज (NESTS) ने 21–22 नवंबर 2025 को आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में “जनजातीय शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ढाँचा निर्माण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यशाला सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों की शैक्षणिक संरचना को मज़बूत करने और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के माध्यम से सतत एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के “शिक्षा द्वारा जनजातीय परिवर्तन” के विज़न को साकार करने पर केंद्रित है।

जनजाति कार्य मंत्रालय की सचिव ने कार्यशाला का उद्घाटन किया, इंजीनियर्स हैंडबुक जारी

कार्यक्रम का उद्घाटन रंजन चोपड़ा, सचिव, जनजाति कार्य मंत्रालय ने किया। उन्होंने EMRS इंजीनियर्स हैंडबुक भी जारी की।
सचिव ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य NESTS, परियोजना टीमों और EMRS निर्माण स्थलों पर कार्यरत इंजीनियरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि EMRS जनजातीय छात्रों और उनके परिवारों में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना जगाते हुए सामाजिक परिवर्तन का माध्यम हैं।

उन्होंने विद्यालयों के निर्माण में सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और सौंदर्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये विद्यालय आशा और अवसर के प्रतीक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि स्थलों से संबंधित चुनौतियाँ हैं, फिर भी परिश्रम, पारदर्शी संवाद और समान अपेक्षाएँ उच्च गुणवत्ता वाले EMRS कैंपस बनाने में सहायक होंगे। यह कार्यशाला तकनीकी सवालों को हल करने, सूचना की खाई को पाटने और समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करेगी।

NESTS के आयुक्त का संबोधन

शुरुआत में NESTS के आयुक्त अजीत के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया:

  • वर्तमान में 499 EMRS स्कूल संचालित हैं,

  • 397 स्कूल भवन पूर्ण हो चुके हैं,

  • शेष विद्यालय निर्माण या पूर्व-निर्माण चरणों में हैं।

उन्होंने समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

“अच्छी गुणवत्ता वाले EMRS का समय पर पूरा न होना मतलब है कि जनजातीय बच्चे स्कूल नहीं जा पाएँगे—जो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।”

कार्यशाला के बारे में

कार्यशाला में PSUs, CPWD, राज्य सरकारों और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के इंजीनियरों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम क्षमता-विकास पर केंद्रित था ताकि EMRS निर्माण कार्य को तेजी और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

सत्रों में निम्न विषय शामिल थे:

  • परियोजना योजना व निगरानी

  • भू-तकनीकी जांच

  • सामग्री परीक्षण

  • अर्थवर्क और रिइनफोर्समेंट

  • जनजातीय क्षेत्रों की चुनौतियों के अनुरूप निर्माण प्रथाएँ

प्रतिभागियों ने भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

IIT, NIT, CBRI, SAI सहित प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया:

  • गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली

  • सामग्री परीक्षण तकनीक

  • प्रभावी परियोजना प्रबंधन

  • क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान

इंटरैक्टिव सत्रों में इंजीनियरों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक समाधान खोजे।

यह कार्यशाला जनजातीय छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत विद्यालय अवसंरचना सुनिश्चित करने की दिशा में NESTS के मिशन का महत्वपूर्ण कदम है। यह जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने की सरकारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।


प्रधानमंत्री मोदी आज करेंगे जनजातीय गौरव दिवस पर नर्मदा जिले में विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, 9,700 करोड़ से अधिक की सौगात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को गुजरात का दौरा करेंगे। लगभग दोपहर 12:45 बजे प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में देवमोगरा मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे। इसके बाद, लगभग 2:45 बजे वे नर्मदा जिले के डेढियापाडा जाएंगे और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस अवसर पर वे 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा सभा को संबोधित करेंगे।

डेढियापाडा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिनका उद्देश्य जनजातीय समुदायों के उत्थान और क्षेत्र के ग्रामीण एवं दूरदराज़ इलाकों में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM–JANMAN) और धरती आबा जनजातिया ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA–JAGUA) के तहत बनाए गए 1 लाख घरों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय छात्रों के लिए निर्मित 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) का उद्घाटन करेंगे; 228 मल्टी-पर्पस सेंटर्स का उद्घाटन करेंगे जो समुदाय-आधारित गतिविधियों के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे; इसके अतिरिक्त असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस, और इंफाल, मणिपुर में जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) भवन का उद्घाटन करेंगे, जो जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री गुजरात के 14 जनजातीय जिलों के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री जनजातीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने हेतु 748 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण की आधारशिला रखेंगे और DA–JAGUA के अंतर्गत 14 जनजातीय मल्टी-मार्केटिंग सेंटर्स (TMMCs) की नींव रखेंगे, जो समुदाय के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। वे 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का भी शिलान्यास करेंगे, जिन पर 2,320 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। यह सरकार की जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाता है।


दूरदराज़ के आदिवासी गाँवों से आई उज्जवल सफलता: 597 EMRS छात्रों ने JEE और NEET में हासिल की कामयाबी

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देश के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों से आने वाले 597 छात्रों ने 2024-25 में JEE Main, JEE Advanced और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह बड़ी छलांग पिछले साल के सिर्फ 16 छात्रों (JEE) और 6 छात्रों (NEET) की तुलना में बेहद प्रेरणादायक है।

यह सफलता Eklavya Model Residential Schools (EMRS) की विशेष शिक्षा और मार्गदर्शन की देन है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें बड़े अवसरों तक पहुँचाने में मदद करती हैं। कुल 230 EMRS स्कूलों में से 101 स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास किया।

प्रेरणादायक उदाहरण:

जतिन नेगी, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला गाँव से, जिन्होंने JEE Advanced में 421वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IIT जोधपुर में B.Tech की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि EMRS में शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की।

पड़वी उर्जस्वीबेन अमृतभाई, गुजरात के खपतिया गाँव की रहने वाली, ने NEET परीक्षा पास की और अब GMERS मेडिकल कॉलेज, जूनागढ़ में MBBS कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मार्गदर्शन और मेहनत ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

EMRS छात्रों का प्रदर्शन (2024–25)

राज्य     JEE Main       JEE Advanced         NEET
आंध्र प्रदेश         17               1            0
छत्तीसगढ़         17               3           18
गुजरात        37               3          173
हिमाचल प्रदेश         3               1            7
झारखंड        6               0              0
कर्नाटक         7               0            0
मध्य प्रदेश      51              10          115
महाराष्ट्र         7               2            7
ओडिशा      10               4            0
तेलंगाना      60              10           24
उत्तर प्रदेश       1               0               0
उत्तराखंड       3               0            0
कुल     219              34          344

EMRS क्या हैं?

Eklavya Model Residential Schools (EMRS) केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित स्कूल हैं। ये स्कूल दूरदराज़ आदिवासी बच्चों को मुफ्त, CBSE-सम्बद्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हॉस्टल सुविधा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

संविधान और कानून की भूमिका

भारत के संविधान ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान बनाए हैं। Articles 15 और 46, और Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 जैसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं कि इन छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें।

विशेष शैक्षिक समर्थन

EMRS छात्रों को IIT-JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल ट्यूटरिंग, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास लैब्स, अटल टिंकरिंग लैब्स और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह मदद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाती है।

जतिन और पड़वी जैसी कहानियां यह दिखाती हैं कि सही शिक्षा, मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्र का बच्चा बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।


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