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डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD के दो Doppler Weather Radars, सौर ऊर्जा प्रणाली और मौसम विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन किया

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 डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के तीन प्रमुख कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इनमें शामिल हैं: रायपुर और मंगलूरु में दो अत्याधुनिक डॉपलर वेदर राडार (DWRs), Mausam Bhawan में नई सौर ऊर्जा प्रणाली, और छात्रों एवं युवाओं के लिए मौसम विज्ञान संग्रहालय।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में IMD ‘मिशन मौसम’ परियोजना को तेजी से लागू कर रहा है, जिसे 14 जनवरी 2025 को IMD के 150 वर्षीय उत्सव पर देश को समर्पित किया गया था। उन्होंने बताया कि देश के राडार नेटवर्क को लगभग तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। अब कुछ ही महीनों में 126 राडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 2027 तक 47 से लगभग तीन गुना बढ़ाने का था।

रायपुर में ड्यूल पोलराइज्ड, सॉलिड-स्टेट पावर एम्पलीफायर आधारित C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो 250 किमी की कवरेज क्षमता के साथ मानसून डिप्रेशन, निम्न दबाव प्रणाली, भारी वर्षा, तूफान, बिजली, ओले, हवाओं और उथल-पुथल का पता लगा सकता है। यह राडार छत्तीसगढ़, आंतरिक ओड़िशा, पूर्व मध्य प्रदेश, दक्षिण पश्चिम झारखंड और पूर्व उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में IMD की भविष्यवाणी क्षमताओं को मजबूत करेगा।

मंगलूरु में दूसरा C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो कर्नाटक, गोवा, दक्षिण कोंकण, उत्तरी लक्षद्वीप और कर्नाटक, केरल, गोवा और दक्षिण महाराष्ट्र के क्षेत्रीय तूफानों और गंभीर मौसम की निगरानी करेगा। यह कर्नाटक का पहला IMD राडार है और पश्चिमी तट पर आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों राडार ‘Make in India’ पहल के तहत विकसित किए गए हैं।

डॉ. सिंह ने मौसम विज्ञान संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। संग्रहालय में ऐतिहासिक मौसम उपकरण, ऊपरी वायु अवलोकन प्रणाली, संचार उपकरण, राडार और उपग्रह घटक प्रदर्शित किए गए हैं।

इसके अलावा, Mausam Bhawan परिसर में 771 kWp सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें 1,315 सौर पैनल शामिल हैं। इस पहल से IMD की ऊर्जा खपत पूरी तरह से पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकेगी, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ दोनों होंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये लॉन्च IMD की भूमिका को मजबूत करते हैं और देश के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देंगे। उन्होंने IMD को “विश्व बंधु” करार दिया क्योंकि यह पड़ोसी देशों को मौसम सेवाएँ और आपदा सलाह प्रणालियाँ उपलब्ध कराता है।

हिमाचल प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन अवसंरचना सुदृढ़ करने पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की बैठक

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और राज्य में मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा तैयारी अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर चर्चा की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश में डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना की गई है, जिससे प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

हाल के बादल फटने और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं के मद्देनज़र, मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों, विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में अतिरिक्त डॉप्लर रडार और स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) स्थापित करने का अनुरोध किया ताकि भविष्य में मौसम से संबंधित चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के इस सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार जलवायु लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण के लिए राज्यों के प्रयासों को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय लगातार देश के मौसम विज्ञान नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, विशेषकर पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि आम जनता और स्थानीय प्रशासन तक समय पर मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सके।

प्रधानमंत्री मोदी की शासन नीति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से सहकारी संघवाद की भावना को निरंतर सशक्त किया है और हर राज्य को समान व न्यायसंगत सहयोग प्रदान किया है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या राजनीतिक दल से संबंधित हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण राज्यों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ कर उन्हें स्थानीय स्तर पर उभरती चुनौतियों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाना है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉप्लर रडार और AWS जैसे उन्नत मौसम संबंधी उपकरण न केवल आपदा तैयारी में बल्कि कृषि, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन अवसंरचनाओं के विस्तार में पूर्ण सहयोग देगी ताकि संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया जा सके और जन सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच वैज्ञानिक ढांचे को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिससे हिमाचल प्रदेश में विकास जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनेगा। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य प्राधिकरणों के बीच घनिष्ठ समन्वय हिमाचल प्रदेश की चरम मौसम घटनाओं से निपटने की क्षमता को और बढ़ाएगा।

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