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सरकारी कार्यों में हिंदी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सरकारी प्रतिष्ठानों में हिंदी को अपनाने के लिए अधिक सशक्त प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास और प्रासंगिकता के लिए भाषा का व्यावहारिक उपयोग सरकारी कार्यों में अत्यंत आवश्यक है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री ने कहा कि कोई भी भाषा तब तक स्थायी रूप से विकसित नहीं हो सकती जब तक उसका रोज़गार से जुड़ाव न हो। उन्होंने शासन प्रणाली में हिंदी के एक कार्यक्षमता और संप्रेषण माध्यम के रूप में महत्व को रेखांकित किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकारी संस्थानों में भाषाई वातावरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय विभागों में हिंदी का उपयोग लगातार बढ़ा है, और अब प्रशासनिक दस्तावेज़ों, संचार और प्रशिक्षण सामग्री में हिंदी को बढ़-चढ़कर अपनाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि द्विभाषी दस्तावेज़ीकरण बढ़ाने में विभागों को अतिरिक्त कार्यभार का सामना करना पड़ता है, इसलिए हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देते समय व्यावहारिकता का ध्यान रखना होगा।

मंत्री ने यह भी कहा कि मिज़ोरम जैसे क्षेत्र, जिन्हें पहले हिंदी भाषाई क्षेत्र से बाहर माना जाता था, अब वहाँ भी हिंदी शिक्षा और संवाद की मांग बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कई सेवाओं में भर्ती के दौरान अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों का ज्ञान होना अब एक अतिरिक्त योग्यता माना जा रहा है। यह बदलाव व्यापक सामाजिक और व्यावसायिक रुझानों को दर्शाता है, जहाँ द्विभाषी कौशल से रोज़गार की संभावनाएँ बेहतर होती हैं।

बैठक के दौरान तीन प्रकाशनों — DoPT की कौशल पत्रिका, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सोपान, और सलाहकार समिति की सदस्य अंबुजा माल्खेडकर द्वारा लिखित कर्नाटक की श्रेणियां — का विमोचन करते हुए, मंत्री ने कहा कि प्रशासन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में ज्ञान-आधारित हिंदी साहित्य को और बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विभाग उन अधिकारियों को पहचानें और प्रोत्साहित करें जो हिंदी में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, और यह सुनिश्चित करें कि वेबसाइटें, दस्तावेज़ तथा सार्वजनिक सामग्री हिंदी में उपलब्ध हों।

समिति सदस्यों ने कई सुझाव प्रस्तुत किए, जैसे — विभागीय कार्यवाहियों में हिंदी का उपयोग बढ़ाना, विज्ञान संचार को हिंदी में प्रोत्साहित करना, और सोशल मीडिया के माध्यम से डिजिटल सामग्री का विस्तार करना। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों द्वारा उपलब्ध तकनीकी संसाधन अधिकारियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। डॉ. सिंह ने सदस्यों को औपचारिक बैठकों से इतर भी सुझाव भेजने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि भाषा उपयोग और नीति में कहीं कमी या त्रुटि दिखाई दे तो विभाग को अवगत कराएँ।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के हानि पर आधारित नहीं होना चाहिए। उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों के कई अधिकारियों की सराहना की, जो दस्तावेज़ीकरण में अत्यंत सटीक हिंदी का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी और क्षेत्रीय दोनों भाषाओं को मजबूत बनाया जाना चाहिए ताकि विविधता बनी रहे और संप्रेषण अधिक समावेशी हो सके।

कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि हिंदी का वास्तविक विकास तभी संभव है जब इसका रोज़गार से संबंध स्थापित हो, और उन्होंने शिक्षा नीति तथा कॉर्पोरेट नियुक्तियों के अनुभवों का उल्लेख किया। मंत्री ने सहमति जताते हुए कहा कि भाषा तभी प्रासंगिक होती है जब वह काम, सीखने और गतिशीलता के नए अवसर प्रदान करे। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी अभिभावकों और समुदायों में हिंदी की बढ़ती मांग इस प्रवृत्ति को दर्शाती है।

बैठक का समापन इस व्यापक सहमति के साथ हुआ कि प्रशासन में हिंदी के उपयोग को बढ़ाया जाएगा, जबकि भारत की बहुभाषिक पहचान को भी संरक्षित रखा जाएगा। सरकारी प्रयासों का उद्देश्य हिंदी की उपस्थिति को शासन में गहरा करना, आधिकारिक जानकारी को हिंदी में सुलभ बनाना और मंत्रालयों एवं विभागों में भाषाई प्रक्रियाओं पर सतत संवाद सुनिश्चित करना है।


कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा विशेष अभियान 5.0 के तहत स्वच्छता और दक्षता सुधार की दिशा में प्रभावी पहल

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माननीय प्रधानमंत्री जी के ‘स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और कार्यस्थल की दक्षता बढ़ाने’ के विज़न को साकार करने के उद्देश्य से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा इसके संबद्ध एवं अधीनस्थ संगठन “विशेष अभियान 5.0” के मुख्य चरण में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक चल रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी और कार्य संस्कृति में सुधार लाना है।

अब तक विभाग के सभी अधिकारियों, संबद्ध तथा अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा देशभर में उत्साहपूर्वक भागीदारी की गई है। 585 से अधिक स्वच्छता स्थलों पर सफाई अभियान आयोजित किए जा चुके हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे X (ट्विटर) और फेसबुक पर #SpecialCampaign5.0 से जुड़ी जागरूकता और प्रचार गतिविधियों ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। अभियान के दौरान कार्यस्थल के समग्र सुधार और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्यालय अनुभव सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। हाल ही में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने नॉर्थ ब्लॉक से कर्तव्य भवन-3 (नई दिल्ली) में स्थानांतरित होकर एक आधुनिक कार्य परिसर में काम आरंभ किया है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर संवाद, सहयोग और टीमवर्क को प्रोत्साहन मिला है।

रिकॉर्ड प्रबंधन (Records Management)

2 अक्टूबर 2025 से अभियान के आरंभ के बाद से अब तक –

  • 52,112 भौतिक फाइलें और 2,474 ई-फाइलें की समीक्षा की गई है।

  • 20,391 फाइलें निरस्त (weeded out) की गई हैं।

  • जिन ई-फाइलों पर कार्य पूरा हो चुका था, उन्हें बंद भी कर दिया गया है।

कार्यालयों में स्पेस प्रबंधन और कार्यस्थल के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए कुल 16 स्वच्छता अभियानों का आयोजन किया गया।
कचरे/स्क्रैप की नीलामी से अब तक ₹2,80,890/- का राजस्व प्राप्त हुआ है और लगभग 8,228 वर्गफुट क्षेत्र को उपयोग के लिए खाली कराया गया है।

लंबित मामलों का निस्तारण (Disposal of Pendency)

अभियान के दौरान अब तक निम्नलिखित लंबित मामलों का निपटारा किया गया है:

  • 350 सार्वजनिक शिकायतें

  • 105 सार्वजनिक शिकायत अपीलें

  • 15 सांसद संदर्भ

  • 1 अंतर-मंत्रालयीय संदर्भ (कैबिनेट प्रस्ताव)

  • 7 पीएमओ संदर्भ

विशेष अभियान 5.0 के दौरान आयोजित गतिविधियाँ (Special Activities/Events)

  • स्वच्छ भारत दिवस (2 अक्टूबर 2025) के अवसर पर DoPT की सचिव ने गृह कल्याण केंद्र (GKK), लोधी रोड, नई दिल्ली में स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया।
    इस अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित किया गया, जिसमें विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
    इस दिन सफाई मित्रों और विद्यालय के बच्चों को उनके योगदान के लिए उपहार और सम्मान प्रदान किए गए।

  • साइबर सुरक्षा पर दो कार्यशालाएँ 17 और 23 सितंबर 2025 को आयोजित की गईं, जिनमें कर्मचारियों के बीच साइबर स्वच्छता जागरूकता फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

  • नारा लेखन प्रतियोगिता, स्वच्छता क्विज़ और निबंध लेखन प्रतियोगिता जैसी जागरूकता गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं, जिनमें कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विशेष अभियान 5.0 के माध्यम से कार्यालयों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता, उत्पादकता में वृद्धि, तेज़ निर्णय-प्रक्रिया, और पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत विकास के उपायों को प्रोत्साहन मिला है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, विशेष अभियान 5.0 के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है और इसे सफल एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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