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कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहीं बबीता यादव, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

रायपुर- संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।



रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

दिव्यांग व्यक्तियों सहित नागरिकों के लिए सुलभ कानूनी सेवाओं और डिजिटल न्यायालय अवसंरचना पर सरकार की पहल

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सरकार ने आम जनता और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और शीघ्र कानूनी सेवाएँ सुनिश्चित करने के कई कदम उठाए हैं।

लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज (LSA) अधिनियम, 1987 समाज के कमजोर वर्गों, जिनमें दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल हैं, को मुफ़्त और सक्षम कानूनी सेवाएँ प्रदान करने का प्रावधान करता है।

NALSA का विशेष कार्यक्रम

NALSA दिव्यांग व्यक्तियों के लिए NALSA (Legal Services to the Mentally Ill and Persons with Intellectual Disabilities) Scheme, 2024 लागू कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य मानसिक रोगियों और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों की विशिष्ट कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएँ प्रदान करना है।

  • इस योजना के तहत प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में ‘Manonyay’ (LSUM) – मानसिक रोगियों और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवा इकाई स्थापित की गई है।

  • केवल लद्दाख और दादरा एवं नगर हवेली को छोड़कर सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में यह इकाई मौजूद है।

जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना विकास

सरकार एक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों की अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के संसाधनों को बढ़ावा दे रही है। इसमें शामिल हैं:

  • न्यायालय हॉल का निर्माण

  • न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ

  • वकीलों के लिए हॉल

  • डिजिटल कंप्यूटर रूम

  • शौचालय परिसर

योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित अवसंरचना का डिज़ाइन दिव्यांग-अनुकूल होना चाहिए। भवन डिज़ाइन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा समय-समय पर निर्धारित मानकों/सुलभता मानकों के अनुरूप होते हैं।

eCourts परियोजना – चरण III

  • इस परियोजना में 24 घटक हैं, जिनमें दिव्यांग व्यक्तियों सहित नागरिकों के लिए मजबूत और सुलभ डिजिटल अवसंरचना विकसित करने के महत्वपूर्ण उपाय शामिल हैं।

  • दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुविधाजनक ICT सक्षम उपकरण प्रदान किए गए हैं।

  • 752 न्यायालयों (उच्च न्यायालयों सहित) की वेबसाइटों को S3WaaS प्लेटफ़ॉर्म (Secure, Scalable and Sugamya Website as a Service) पर स्थानांतरित किया गया, जिससे वेबसाइट दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ हो।

  • S3WaaS प्लेटफ़ॉर्म में अंशतः और पूरी तरह दृष्टिबाधित नागरिकों के लिए सामग्री की आसान दृश्यता जैसी विशेषताएँ शामिल हैं।

यह जानकारी कानून और न्याय मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में दी।

UPSC का बड़ा निर्णय: सभी दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलेगा पसंद का परीक्षा केंद्र

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समान पहुंच और परीक्षाओं में सुगमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने यह निर्णय लिया है कि बेंचमार्क दिव्यांगजन (PwBD) उम्मीदवारों को उसकी सभी परीक्षाओं में ‘पसंद का केंद्र’ (Centre of Choice) आवंटित किया जाएगा। दिव्यांग उम्मीदवारों द्वारा अक्सर झेली जाने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों और विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने सुनिश्चित किया है कि हर PwBD आवेदक को वही परीक्षा केंद्र दिया जाए, जिसे उसने आवेदन पत्र में अपनी पसंद के रूप में अंकित किया है।

इस पहल के बारे में बात करते हुए UPSC के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा:

“पिछले पाँच वर्षों के परीक्षा केंद्र डेटा के विश्लेषण के बाद हमने देखा कि दिल्ली, कटक, पटना, लखनऊ जैसे कुछ केंद्र अत्यधिक आवेदकों की संख्या के कारण बहुत जल्दी अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुँच जाते हैं। इससे PwBD उम्मीदवारों के सामने कठिनाइयाँ आती हैं, और उन्हें ऐसे केंद्र चुनने पड़ते हैं जो उनके लिए सुविधाजनक नहीं होते। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि इस निर्णय के साथ अब प्रत्येक PwBD उम्मीदवार को उसकी पसंद का केंद्र सुनिश्चित रूप से मिलेगा, जिससे UPSC परीक्षाओं के दौरान उन्हें अधिकतम सुविधा और सुगमता प्राप्त होगी।”

इस पहल को लागू करने के लिए आयोग ने निम्नलिखित रणनीति अपनाई है:

  1. प्रत्येक केंद्र की मौजूदा क्षमता का उपयोग पहले PwBD और गैर-PwBD दोनों प्रकार के उम्मीदवारों के लिए किया जाएगा।

  2. केंद्र की पूर्ण क्षमता भर जाने पर वह केंद्र गैर-PwBD उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा; हालाँकि PwBD उम्मीदवार उस केंद्र को चुनना जारी रख सकेंगे।

  3. UPSC अतिरिक्त क्षमता की व्यवस्था करेगा ताकि किसी भी PwBD उम्मीदवार को उसकी पसंद का केंद्र देने में कोई बाधा न हो।


अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें यह सिखाता है कि सक्षम समाज वही है जो सबको साथ लेकर चलता है — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर कहा कि दिव्यांगजन  हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनो के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस समाज को यह समझने का अवसर देता है कि दिव्यांगजन किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और प्रगतिशील समाज वही है जो सभी को बराबरी के अवसर प्रदान करे और किसी भी व्यक्ति को उसकी शारीरिक सीमाओं के कारण पीछे नहीं रहने दे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सहायता उपकरण, कौशल-विकास, रोजगार अवसर, सामाजिक सुरक्षा और अनुकूल वातावरण निर्माण के लिए अनेक योजनाएँ सुदृढ़ रूप से लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में समान और सशक्त भागीदारी दिलाने का है, ताकि वे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और उनके साथ सम्मानजनक, सहयोगपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार अपनाएँ। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन तभी वास्तविक रूप से सशक्त होंगे जब समाज और शासन मिलकर ऐसी परिस्थितियाँ तैयार करें, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संदेश देता है।

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए सरकार संकल्पित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए पूर्णतः संकल्पित है। उन्होंने कहा कि रायपुर में 5 एकड़ भूमि में दिव्यांगजनों के लिए सर्व-सुविधायुक्त पार्क का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग बच्चों से बड़ी आत्मीयता के साथ भेंट की और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कोंपलवाणी और अर्पण दिव्यांग संस्था में अध्ययनरत बच्चों ने मुख्यमंत्री सहित उपस्थित अतिथियों के समक्ष साइन लैंग्वेज का सुंदर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के इशारों को दोहराते हुए उनसे साइन लैंग्वेज में गुड मॉर्निंग और गुड आफ्टरनून जैसे शब्द सीखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांगजनों के विकास के लिए सराहनीय कार्य हो रहा है। दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऋण की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक ने रायपुर में दिव्यांग पार्क बनाए जाने की घोषणा की थी, और अब रायपुर में 5 एकड़ भूमि पर यह सर्व-सुविधायुक्त दिव्यांग पार्क विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग बच्चों के साथ दीपावली मिलन कार्यक्रम के आयोजन हेतु छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन की सराहना की। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन द्वारा जनसेवा के कार्यों के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया जा रहा है। पूर्व में एसोसिएशन द्वारा मरीजों के लिए एम्बुलेंस भी प्रदान की गई थी, जिसका लाभ अनेक जरूरतमंद लोगों को प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष छत्तीसगढ़ निर्माण का 25वां वर्ष है, जिसे हम रजत जयंती वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है। उसी दिशा में हमें विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ना है। इस हेतु राज्य सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। सभी के सहयोग से इस लक्ष्य को हम अवश्य प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर–विशाखापत्तनम तथा रायपुर–धनबाद मार्गों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

महाराष्ट्र और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि मैं सांसद के रूप में दिव्यांगजनों के लिए गठित सोशल जस्टिस स्टैंडिंग कमेटी का सदस्य रहा हूँ। संसद में दिव्यांग बिल के लिए हमने व्यापक अध्ययन किया था। बिल पारित होने के पश्चात दिव्यांगजनों को मिलने वाली सुविधाओं में तीन गुना वृद्धि हुई। राज्यपाल रहते हुए मुझे दिव्यांगजनों के लिए कार्य कर रही संस्थाओं में जाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की चुनौतियों को सामान्यजन अक्सर समझ नहीं पाते।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस बार जीएसटी दरों में कमी के कारण दीपावली का उत्सव और अधिक भव्य रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया, जिसकी हम आज रजत जयंती मना रहे हैं।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत छत्तीसगढ़ का योजनाबद्ध विकास निरंतर हो रहा है। सभी के सहयोग से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि दिव्यांगजनों के साथ दीपावली मिलन का आयोजन उत्तम सोच का प्रतीक है। खुशियां बांटने से बढ़ती हैं, और यह देखकर प्रसन्नता होती है कि एसोसिएशन जनसेवा में सक्रिय है तथा समाज के अन्य लोगों को भी इससे जोड़ रही है।

मुख्यमंत्री के समक्ष पैरों से पेंटिंग करने वाले दिव्यांग चित्रकार गोकर्ण पाटिल ने अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने उनकी कला की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों को गर्म कपड़ों का वितरण भी किया।

इस अवसर पर विधायक इंद्र कुमार साहू, रायपुर की महापौर मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अंजय शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारीगण, कोंपलवाणी और अर्पण दिव्यांग संस्था के बच्चे तथा गणमान्यजन उपस्थित थे।

अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट में दिव्यांगों के लिए शिक्षा और कौशल विकास में तीन नई पहलें लॉन्च

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गोवा- अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट के दूसरे दिन, सुनने, पढ़ने और लिखने में दिव्यांग व्यक्तियों की पहुंच बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई, जो समावेशी शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, भारत सरकार, ने इन पहलों का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में ताहा हाज़िक, सचिव, SCPD गोवा; ऋचा शंकर, DDG; प्रवीण कुमार, CMD, ALIMCO; कुमार राजू, निदेशक, भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC); जसबीर सिंह, उप सचिव;अनुपम शुक्ला,देबला भट्टाचार्य, उप सचिव; और एस.के. महतो, सेवानिवृत्त उप सचिव उपस्थित रहे।

इन पहलों से सरकार की यह प्रतिबद्धता झलकती है कि दिव्यांगों के लिए बाधा-मुक्त शिक्षा प्रणाली तैयार की जाए और उन्हें वैश्विक शिक्षा एवं पेशेवर अवसरों में पूरी भागीदारी का अवसर मिले।

पहली पहल: IELTS प्रशिक्षण हैंडबुक

पहली प्रमुख पहल “IELTS Training Handbook for Persons with Disabilities” की लॉन्चिंग थी। इसे Believe in the Invisible (BITI) ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के समर्थन से विकसित किया है।

  • इस हैंडबुक की लेखिका अंजली व्यास, BITI की सह-संस्थापक और ब्रिटिश काउंसिल–सर्टिफ़ाइड IELTS ट्रेनर हैं।

  • यह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समावेशी, संरचित और लर्नर-फ्रेंडली पहला संसाधन है।

  • यह हैंडबुक स्व-अध्ययन गाइड और प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मैनुअल दोनों के रूप में कार्य करती है।

  • यह सुनने, पढ़ने, लिखने और बोलने के चारों IELTS मॉड्यूल के लिए अनुकूलित रणनीतियाँ, व्यावहारिक उपकरण, समय प्रबंधन मार्गदर्शन, व्याकरण और शब्दावली निर्माण सहायता, और ISL (भारतीय सांकेतिक भाषा) वीडियो लिंक प्रदान करती है।

यह प्रकाशन समावेशी शिक्षा और वैश्विक भाषा कौशल प्रशिक्षण में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दूसरी पहल: ISLRTC प्रशिक्षण और प्रमाणन

भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC), नई दिल्ली, ने DEPwD की कौशल प्रशिक्षण पहल के तहत ISL इंटरप्रिटेशन (CISLI) / SODA (Siblings of Deaf Adults) और CODA (Children of Deaf Adults) के लिए Recognition of Prior Learning (RPL) – Certification Course का आयोजन किया।

  • यह कोर्स 11 अगस्त से 29 अगस्त 2025 तक ऑफ़लाइन मोड में ISLRTC, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।

  • 17 प्रतिभागियों ने इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया।

  • ग्रेडिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर की गई और प्रमाणपत्र वितरण समारोह 3 दिसंबर 2025, अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आयोजित किया जाएगा।

तीसरी पहल: ASL और BSL में विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रम

ISLRTC ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) और ब्रिटिश साइन लैंग्वेज (BSL) में विशेषीकृत बेसिक ट्रेनिंग प्रोग्राम की भी घोषणा की।

  • यह चार सप्ताह (1 माह) का प्रशिक्षण कार्यक्रम ISLRTC, नई दिल्ली में 3 दिसंबर 2025 से शुरू होगा।

  • इसका उद्देश्य ISL पेशेवरों को ASL और BSL के मूल तत्व, व्याकरण, वाक्य रचना और शब्दावली से परिचित कराना और अंतरराष्ट्रीय मंचों में उनके पेशेवर अवसरों को मजबूत करना है।

  • इस पहल से ISLRTC की भूमिका बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय श्रवण-असक्षम आगंतुकों को भारतीय संस्कृति और विरासत का अनुभव प्राप्त होगा।

सारांश

ये तीन पहलों एक समान दृष्टिकोण को दर्शाती हैं: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ, समावेशी और सशक्त मार्ग तैयार करना ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीख सकें, संवाद कर सकें और प्रगति कर सकें।


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