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‘SMILE’ योजना—हाशिए से सम्मान की ओर एक सशक्त पहल

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नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा शुरू की गई SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना आज देश के सबसे वंचित वर्गों—ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों—के जीवन में बदलाव की एक नई कहानी लिख रही है। 12 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लॉन्च की गई यह योजना सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

₹390 करोड़ का निवेश, बदलाव की मजबूत नींव

वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के लिए कुल ₹390 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए ₹265 करोड़ और भिक्षावृत्ति पुनर्वास के लिए ₹125 करोड़ आवंटित किए गए हैं। हर वर्ष बढ़ते बजट से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जमीनी स्तर पर असर—हजारों को मिला नया जीवन

मार्च 2026 तक भिक्षावृत्ति उप-योजना के तहत 31,055 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 9,935 व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका है। इसके अलावा, देश के 17 राज्यों में 21 ‘गरिमा गृह’ संचालित हो रहे हैं, जहाँ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित आवास, भोजन और कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समग्र सहयोग

SMILE योजना, Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 के अनुरूप, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक सहायता देती है। इसके तहत छात्रों को छात्रवृत्ति, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, आयुष्मान भारत TG प्लस के तहत हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ₹5 लाख तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवर मिलता है, जिसमें जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी और हार्मोन थेरेपी भी शामिल हैं।

भिक्षावृत्ति से आत्मनिर्भरता की ओर

इस योजना के अंतर्गत, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान कर उन्हें आश्रय, परामर्श और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।

‘SMILE’—सिर्फ योजना नहीं, बदलाव की सोच

SMILE योजना का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे हालात बनाना है जहाँ व्यक्ति को किसी सहायता की जरूरत ही न पड़े। यह योजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।

निष्कर्ष

SMILE योजना आज एक ऐसी पहल बनकर उभरी है, जो न केवल जीवन बदल रही है, बल्कि समाज में समानता और गरिमा के मूल्यों को भी मजबूत कर रही है। यह योजना साबित करती है कि सही नीतियों और प्रतिबद्धता के साथ, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।

जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वालों पर की जाए कड़ी कार्यवाही- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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निजी हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना: पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए - मुख्यमंत्री साय

केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए।

इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।

बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया।

बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम,  अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव एस. बसवराजू  सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मानव अधिकार दिवस 2025: डॉ. पी. के. मिश्रा ने मानव गरिमा और समावेशी शासन पर दिया जोर

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प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘राष्ट्रीय सम्मेलन: सभी के लिए दैनिक आवश्यकताएँ – जन सेवाएँ और गरिमा’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। अपने मुख्य वक्तव्य में उन्होंने विश्व मानवाधिकार दिवस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देशों—विशेषकर भारत—के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यही वह बिंदु है जहाँ संवैधानिक आदर्श, लोकतांत्रिक संस्थाएँ और सामाजिक मूल्य मिलकर मानव गरिमा की रक्षा करते हैं।

उन्होंने 1948 के मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 25(1) को उद्धृत किया, जिसमें भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और कमजोर परिस्थितियों में सहारा पाने के अधिकार को मूल अधिकार माना गया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि “दैनिक जीवन में गरिमा” पर चिंतन का निमंत्रण है। इस वर्ष की थीम “ह्यूमन राइट्स: आवर एवरीडे एसेंशियल्स” नागरिकों के जीवन में सार्वजनिक सेवाओं की निर्णायक भूमिका को दर्शाती है।

भारत की ऐतिहासिक भूमिका और विकसित होते मानवाधिकार

डॉ. मिश्रा ने भारत द्वारा UDHR के निर्माण में निभाई अहम भूमिका का उल्लेख किया, विशेषकर डॉ. हंसा मेहता के योगदान का, जिनके प्रयास से घोषणा में लिखा गया—“all human beings…”, जो लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम था।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार अब केवल नागरिक और राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, तकनीकी, डिजिटल और पर्यावरणीय अधिकार भी शामिल हो चुके हैं। आज गरिमा का अर्थ है—स्वतंत्रता के साथ-साथ निजता, स्वच्छ पर्यावरण, गतिशीलता और डिजिटल समावेशन तक पहुँच।

भारतीय सभ्यता में गरिमा का दर्शन

उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में धर्म, न्याय, करूणा, सेवा, अहिंसा, और वसुधैव कुटुंबकम जैसे सिद्धांत सदैव मानव गरिमा के केंद्र में रहे हैं। यही मूल्य हमारे संविधान में प्रतिबिंबित होते हैं—सर्वजन मताधिकार, मौलिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे निर्देशक सिद्धांतों में।

2014 से पहले और बाद का बदलाव

डॉ. मिश्रा ने कहा कि 2014 से पहले भारत में अधिकार-आधारित कानून तो बने, लेकिन सेवा वितरण की कमजोरियों ने उनकी विश्वसनीयता को प्रभावित किया।
2014 के बाद सरकार ने सैचुरेशन एप्रोच अपनाई—“कोई भी पात्र लाभार्थी छूटे नहीं”। इससे देश एक बदलाव से गुजरा—
“कागजी अधिकारों” से “कार्यान्वित अधिकारों” की ओर।

डिजिटल ढाँचे, DBT, और विक्सित भारत संकल्प यात्रा जैसे प्रयासों ने इसे और मजबूत किया। बीते दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए—यह भारत की सबसे बड़ी मानवाधिकार उपलब्धियों में से एक है।

मानव गरिमा को सुनिश्चित करने के चार स्तंभ

1. घर में गरिमा

  • प्रधानमंत्री आवास योजना

  • जल जीवन मिशन

  • स्वच्छ भारत अभियान

  • सौभाग्य योजना

  • उज्ज्वला योजना

इन पहलों ने करोड़ों परिवारों की जीवन-गुणवत्ता बदली।

2. सामाजिक सुरक्षा

  • कोविड में 80 करोड़ लोगों को PMGKAY के तहत मुफ्त राशन

  • आयुष्मान भारत–PMJAY से 42 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा

  • बीमा, पेंशन और नए श्रम कानूनों ने असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स को सुरक्षा प्रदान की

  • मानसिक स्वास्थ्य कानून ने कमजोर वर्गों की गरिमा को संरक्षित किया

3. समावेशी आर्थिक विकास

  • JAM Trinity ने DBT में क्रांति लाई

  • 56 करोड़ जन धन खाते

  • PM Mudra और PM SVANidhi से करोड़ों नए उद्यम

  • महिलाओं की प्रगति:

    • स्वयं सहायता समूह

    • “लखपति दीदी”

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

    • विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण

4. न्याय और कमजोर समुदायों की सुरक्षा

  • नए आपराधिक कानून

  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट

  • POCSO Act

  • दिव्यांगजनों के अधिकार कानून

  • पीएम-जनमन योजना के माध्यम से आदिवासी समुदायों का विकास

  • वैक्सीन मैत्री जैसी पहलें—मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता की मिसाल

सुशासन स्वयं एक मौलिक अधिकार

अंत में डॉ. मिश्रा ने कहा कि सुशासन (Good Governance) भी मूल अधिकार है—

  • दक्षता

  • पारदर्शिता

  • समयबद्ध सेवा

  • शिकायत निवारण

इन्हीं से एक आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित भारत का निर्माण होगा—जहाँ शहर रहने योग्य और गाँव समृद्ध हों।

उन्होंने उभरती चुनौतियों—जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय न्याय, डेटा संरक्षण, AI की जवाबदेही, एल्गोरिदमिक निष्पक्षता, गिग वर्कर्स की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी—पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।


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