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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 54 सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले का आरोप, NIA ने 5 राज्यों में की छापेमारी

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नई दिल्ली- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की वेबसाइटों को निशाना बनाकर किए गए कथित साइबर हमलों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। NIA ने साइबर आतंकवाद से जुड़े गुजरात मामले की जांच के तहत महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और दिल्ली में पांच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की 54 वेबसाइटों पर कथित रूप से Distributed Denial-of-Service (DDoS) हमले करने का प्रयास किया था। इन वेबसाइटों में महत्वपूर्ण सरकारी डिजिटल संसाधन और Critical Information Infrastructure से जुड़े सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।

पांच राज्यों में एक साथ कार्रवाई

NIA की तलाशी महाराष्ट्र के पुणे स्थित जुन्नर, गुजरात के खेड़ा स्थित नडियाद, तेलंगाना के करीमनगर स्थित रामागुंडम, बिहार के गोपालगंज और दिल्ली में की गई। यह मामला 25 जून 2025 को दर्ज साइबर आतंकवाद के केस से संबंधित है।

तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव समेत कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनसे कथित हैकिंग गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री मिलने की बात सामने आई है।

दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण के जरिए ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों को सहायता या सहयोग प्रदान किया था। इन्हीं कड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर तलाशी और पूछताछ की गई।

DDoS हमला ऐसी साइबर तकनीक है, जिसमें किसी वेबसाइट या सर्वर पर भारी मात्रा में अवैध इंटरनेट ट्रैफिक भेजकर उसकी सामान्य सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया जाता है।

NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सरकारी डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। मामले की आगे की जांच जारी है।


दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियमों में बड़े बदलाव किए, डिजिटल सुरक्षा को मिलेगा और बल

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने 22 अक्टूबर 2025 को दूरसंचार साइबर सुरक्षा (TCS) नियम, 2024 में संशोधन जारी किए हैं। यह संशोधन उन बढ़ते साइबर जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, जो मोबाइल नंबर, IMEI जैसी टेलीकॉम पहचानियों के तेजी से डिजिटल सेवाओं में एकीकृत होने के कारण सामने आए हैं। ये बदलाव बैंकिंग, ई-कॉमर्स, शासन और अन्य क्षेत्रों की डिजिटल सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

संशोधित नियम तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष रूप से केंद्रित हैं:

1. मोबाइल नंबर वेलिडेशन (MNV) प्लेटफ़ॉर्म

देश में पहचान धोखाधड़ी और म्यूल अकाउंट्स के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए नियमों में MNV प्लेटफ़ॉर्म को संस्थागत रूप से शामिल किया गया है। यह प्लेटफ़ॉर्म सेवा प्रदाताओं को यह सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा कि किसी सेवा के लिए उपयोग किया जा रहा मोबाइल नंबर वास्तव में उसी व्यक्ति का है जिसकी पहचान उनके रिकॉर्ड में दर्ज है। यह डिजिटल लेनदेन में भरोसा बढ़ाएगा।

2. पुनर्बिक्री (Resale) डिवाइस स्क्रबिंग

भारत के तेजी से बढ़ते सेकंड-हैंड मोबाइल बाजार में चोरी किए गए, क्लोन किए गए या ब्लैकलिस्टेड मोबाइल फोन के चलन से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नए नियमों के तहत अब पुनर्बिक्री या रिफर्बिश्ड मोबाइल बेचने वाले हर डिवाइस का IMEI नंबर एक केंद्रीय डेटाबेस से चेक करना अनिवार्य होगा। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षा मिलेगी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चोरी के उपकरणों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

3. टेलीकॉम आइडेंटिफायर यूज़र एंटिटी (TIUE) दायित्व

अब ऐसे सभी संस्थानों को, जो मोबाइल नंबर, IMEI, IP आदि टेलीकॉम पहचानियों का उपयोग करते हैं, परिभाषित किया गया है। नियमों के अनुसार, इन संस्थाओं को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में सरकार से डेटा साझा करना होगा। इससे साइबर धोखाधड़ी की जांच और रोकथाम में बेहतर तालमेल स्थापित होगा, साथ ही डेटा सुरक्षा मानकों का भी पालन सुनिश्चित होगा।

नियमों की अधिसूचना से संबंधित अपडेट

TCS संशोधन नियम, 2025 को 22.10.2025 को G.S.R. 771(E) के माध्यम से राजपत्र में अधिसूचित किया गया था।
29.10.2025 को तकनीकी त्रुटि के कारण इन्हें दोबारा G.S.R. 796(E) के रूप में प्रकाशित कर दिया गया।
25.11.2025 को G.S.R. 863(E) के माध्यम से इस त्रुटि को सुधारा गया और अनजाने में हुई पुनर्प्रकाशना को रद्द कर दिया गया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि 22.10.2025 को जारी किए गए मूल TCS संशोधन नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और लागू रहेंगे।


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