Media24Media.com: #DigitalMedia

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #DigitalMedia. Show all posts
Showing posts with label #DigitalMedia. Show all posts

मुंबई में शुरू हुआ BRICS WAVES Bazaar 2026, रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मिलेगा वैश्विक मंच

No comments Document Thumbnail

BRICS WAVES Bazaar का शुभारंभ आज मुंबई में हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य ऑडियो-विजुअल और रचनात्मक उद्योगों में संवाद, व्यापारिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सीमा-पार साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

इस आयोजन में विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग संगठन, फिल्म निर्माता, कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स, निवेशक, ब्रॉडकास्टर्स, OTT प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी कंपनियां, स्टार्टअप्स, सांस्कृतिक संस्थान और रचनात्मक उद्यम शामिल हो रहे हैं।

मुंबई वैश्विक क्रिएटिव इकोसिस्टम का केंद्र: आशीष शेलार

उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्तव्य देते हुए महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई एवं संस्कृति मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने मुंबई को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि कला और प्रौद्योगिकी के बीच की सीमाएं तेजी से समाप्त हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि BRICS WAVES Bazaar केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने वाला उच्च स्तरीय मंच है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक बार फिर 'विश्वगुरु' के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इस दिशा में 'ऑरेंज इकोनॉमी' महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां भारत की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और आधुनिक व्यापार का संगम होता है।

प्रधानमंत्री की सांस्कृतिक दृष्टि का विस्तार: चंचल कुमार

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार संस्कृति और रचनात्मकता को देशों और समाजों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताते रहे हैं। इसी दृष्टि से भारत का BRICS देशों के साथ सिनेमा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि मुंबई में आयोजित BRICS WAVES Bazaar और नवंबर 2026 में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के साथ आयोजित होने वाला BRICS फिल्म फेस्टिवल रचनात्मक उद्योगों को दो अलग-अलग लेकिन पूरक मंच उपलब्ध कराएंगे। एक मंच व्यापार, साझेदारी और बाजार तक पहुंच के लिए होगा, जबकि दूसरा फिल्मों, फिल्मकारों और दर्शकों को जोड़ने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के पास कहानियों, प्रतिभा, दर्शकों, तकनीक और उद्यमिता का विशाल भंडार है। WAVES Bazaar का उद्देश्य इन सभी क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाना है, जहां नई परियोजनाएं, सह-निर्माण (Co-production), निवेश और नए बाजारों के अवसर विकसित हो सकें।

BRICS देशों के कंटेंट को मिले व्यापक पहुंच

चंचल कुमार ने कहा कि BRICS देशों की फिल्मों, वेब सीरीज, एनीमेशन, संगीत और डिजिटल कंटेंट की सदस्य देशों के भीतर बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में अपने अनुभव साझा करने और संस्थागत एवं व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि भारत WAVES, WAVES Bazaar, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, इंडिया सिने हब तथा क्रिएटर स्किलिंग एवं स्टार्टअप्स जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

साथ ही उन्होंने सभी BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों को 2027 में मुंबई में आयोजित होने वाले अगले WAVES संस्करण में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

IFFI 2026 में दिखाई जाएंगी 250 फिल्में

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं IFFI के फेस्टिवल डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने सभी प्रतिभागियों को IFFI 2026 में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 8 क्यूरेटेड सेक्शनों में लगभग 250 फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति और समाज को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम उसका सिनेमा होता है। BRICS WAVES Bazaar जैसे मंच फिल्म निर्माताओं, लेखकों और निवेशकों को एक साथ लाकर नए सहयोग और नई फिल्मों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में रचनात्मक उद्योगों की बढ़ती भूमिका

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (MER-III) राजीव बोडवाडे ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS WAVES Bazaar 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है।

उन्होंने बताया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक GDP का लगभग 3.1 प्रतिशत योगदान देती है और अंतरराष्ट्रीय सेवा निर्यात में 1.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का योगदान करती है। उन्होंने कहा कि BRICS देश अपनी डिजिटल क्षमता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

दो दिनों तक होंगे सम्मेलन और बिजनेस मीटिंग्स

नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में उच्च स्तरीय सम्मेलन, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, बिजनेस नेटवर्किंग और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, कंटेंट फाइनेंसिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बौद्धिक संपदा (IP), महिला उद्यमिता, उभरती तकनीक, सार्वजनिक नीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समापन पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि BRICS WAVES Bazaar भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नवाचार, उद्यमिता, रोजगार और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

यह आयोजन BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

'अटेंशन की होड़ में भ्रामक खबरें लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय' : जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल

No comments Document Thumbnail

रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में मीडिया की बदलती चुनौतियों, जिम्मेदार पत्रकारिता और प्रेस क्लब के विकास पर हुई चर्चा

रायपुर- डिजिटल युग में तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी पर गंभीर मंथन करते हुए जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि 'अटेंशन की होड़ में मिसलीडिंग (भ्रामक) खबरों का बढ़ना लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है।' 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में तथ्यपरक, संतुलित औरजिम्मेदार पत्रकारिता ही मीडिया की सबसे बड़ी ताकत है। वे रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में पत्रकारों से संवाद कर रहे थे, जहां रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों ने भी मीडिया और जनसंपर्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और सतत संवाद को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और पत्रकारों की उपस्थिति में मीडिया की वर्तमान चुनौतियों, पत्रकारिता के मूल्यों तथा प्रेस क्लब के विकास को लेकर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।


न्यू एज मीडिया में दक्ष बनें जनसंपर्क अधिकारी :- आयुक्त रजत बंसल

No comments Document Thumbnail

जनसंपर्क का कार्य जिम्मेदारी का, इसे गंभीरता से लें

परिणाम के अनुरूप होगा हर अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन

प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिलों के अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

रायपुर- जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय और जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि वर्तमान दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक और संचार के नए माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की कोताही से बचना जरूरी है। जनसंपर्क अधिकारी शासन और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि परिणाम के अनुरूप हर अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा। 

बैठक में उन्होंने निर्देशित किया कि मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिले के कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाएं। इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा, जो शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और प्रचार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनसंपर्क आयुक्त ने आगामी एक मई से शुरू हो रहे प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर माध्यम का प्रभावी उपयोग कर योजनाओं की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। 

उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि राज्य में हो रहे विकास कार्यो और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए। इससे अन्य लोगों को भी इनका लाभ लेने के लिए प्रेरणा मिलती है। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क और समन्वय बनाए रखा जाए, ताकि योजनाओं की उपलब्धियों और सरकार के कार्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके। जनसंपर्क आयुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करें ताकि शासन की योजनाएं आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें वहीं उन्होंने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जन संपर्क अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए है। 

बैठक में अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव और हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी मौजूद थे।

​आरंग की गौरवगाथा पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्म डिजिटल मीडिया पर हुई वायरल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने की सराहना

No comments Document Thumbnail

आरंग- ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी आरंग की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास अब डिजिटल पर्दे पर जीवंत हो उठा है। स्वयंसेवी संस्था 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन' द्वारा आरंग की गौरवगाथा पर केंद्रित एक विशेष डॉक्युमेंट्री फिल्म का निर्माण किया गया है, जो इन दिनों विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। दर्शक इसे आरंग की धरोहर को समझने के लिए एक सशक्त माध्यम मान रहे हैं।

​ महोत्सव के दौरान मिली सराहना 

फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि इस डॉक्युमेंट्री का विशेष फिल्मांकन 'राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव-2026' के उपलक्ष्य में किया गया था। महोत्सव के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने इस लघु फिल्म को देखा और इसकी गुणवत्ता व शोध की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। शासन-प्रशासन के स्तर पर मिली इस सराहना ने स्थानीय कलाकारों और संस्था के उत्साह को दोगुना कर दिया है।

​ अनुभवी टीम का मिला साथ 

इस डॉक्युमेंट्री की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रभावी पटकथा और दमदार आवाज है। फिल्म की पटकथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम 'पत्रकारश्री' ने तैयार की है। डॉक्युमेंट्री को अपनी गंभीर और प्रभावशाली आवाज से आकाशवाणी व दूरदर्शन के वरिष्ठ उद्घोषक शशांक खरे ने सजाया है, जो दर्शकों को इतिहास के पन्नों से जोड़े रखती है।

​ तकनीकी पक्ष और टीम वर्क 

संयोजक महेंद्र कुमार पटेल की परिकल्पना पर आधारित इस फिल्म का बेहतरीन फिल्मांकन प्रतीक टोंड्रे द्वारा किया गया है, वहीं टिंकू चेलक ने आधुनिक वीडियो एडिटिंग के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया है। संस्था के अध्यक्ष दूजेराम धीवर के कुशल संयोजन और प्रस्तुति के चलते यह प्रोजेक्ट समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सका।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं: 

 ऐतिहासिक साक्ष्य: फिल्म में आरंग के प्राचीन मंदिरों, राजा मोरध्वज की कथा और पुरातात्विक महत्व के स्थलों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

​ सिनेमैटोग्राफी: ड्रोन शॉट्स और क्लोज-अप एंगल्स के माध्यम से आरंग की वास्तुकला को बारीकी से उकेरा गया है।

​ सांस्कृतिक धरोहर: यह फिल्म न केवल एक वीडियो है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए आरंग के इतिहास का एक डिजिटल दस्तावेज भी है।

​सोशल मीडिया पर इस फिल्म को मिल रहे हजारों व्यूज और शेयर यह दर्शाते हैं कि लोग अपनी जड़ों और क्षेत्रीय इतिहास को जानने के लिए कितने उत्सुक हैं। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की इस पहल को नगरवासियों ने आरंग के गौरव को विश्व पटल पर लाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

एआई युग में प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा: राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर PCI ने दी जिम्मेदार पत्रकारिता की सीख

No comments Document Thumbnail

लोकतांत्रिक देश में प्रेस नागरिकों की आँख और कान होता है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर, एआई युग में बढ़ती भ्रामक जानकारी के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने इस चिंता को व्यक्त किया।

इस वर्ष की थीम “बढ़ती भ्रामक जानकारी के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा” पर बोलते हुए, PCI अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजन प्रकाश देसाई ने कहा—

“एआई कभी भी मानव मस्तिष्क की जगह नहीं ले सकता।”

उन्होंने कहा कि पत्रकारों का निर्णय, विवेक और ज़िम्मेदारी की भावना ही भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोक सकती है।

मुख्य भाषण में समाधान सुझाया गया

PTI के सीईओ विजय जोशी ने ‘इंफोडेमिक’ से निपटने के लिए अपने समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा—
“पारंपरिक मीडिया में गति से पहले सटीकता को प्राथमिकता दें, और डिजिटल मीडिया में एआई एल्गोरिद्म आधारित एंगेजमेंट से अधिक तथ्यपरकता को महत्व दें।”

कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेलवे और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू और PCI सचिव शुभा गुप्ता उपस्थित थे।

PCI ने जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर जोर दिया

न्यायमूर्ति देसाई ने कहा कि PCI का दायित्व प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा करना और उच्च पत्रकारिता मानकों को बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि आज, जब गलत सूचना और तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है, पत्रकारिता में ईमानदारी, सटीकता और सही सूचना साझा करने की प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि PCI ने विभिन्न समितियों और तथ्य-जांच टीमों का गठन किया है और पत्रकारों को हर तथ्य की पुष्टि करने की सलाह दी है।

उन्होंने पत्रकारों के वित्तीय सुरक्षा, कल्याण योजनाओं, बीमा तथा इंटर्नशिप कार्यक्रमों की भी आवश्यकता बताई जो युवा पत्रकारों को नैतिक पत्रकारिता सिखाते हैं।

उन्होंने दोहराया कि AI उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसका दुरुपयोग रोकने के लिए PCI सतर्क है, क्योंकि मानव मस्तिष्क का विवेक और निर्णय क्षमता किसी भी तकनीक से ऊपर है।

एआई युग में विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती

PTI के सीईओ विजय जोशी ने कहा कि प्रेस को लोकतंत्र के नैतिक प्रहरी के रूप में अपनी नैतिकता को बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पेड न्यूज़, विज्ञापकीय खबरें और सनसनीखेज पत्रकारिता ने जनता का भरोसा कम किया है।

डिजिटल दौर में अब एंगेजमेंट को सटीकता से ऊपर रखा जा रहा है, जिससे पूर्वाग्रहपूर्ण सूचना के बुलबुले बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि महामारी ने दिखाया कि कैसे सच और झूठ तेजी से मिल जाते हैं, और आज एआई इस चुनौती को और बढ़ा रहा है।

उन्होंने जोर दिया कि पत्रकारों को सत्य की पुष्टि के लिए सामूहिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
विजय जोशी ने PTI की पारंपरिक मूल्यों— सत्य, सटीकता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता—को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि सटीकता हमेशा गति से पहले होनी चाहिए और खबरें किसी भी एजेंडे से मुक्त होनी चाहिए।

उन्होंने ‘फैक्ट चेक’ जैसे प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई और कहा कि भविष्य के पत्रकारों को नैतिकता और आलोचनात्मक सोच का प्रशिक्षण देना जरूरी है।
उन्होंने कहा—
“प्रेस की स्वतंत्रता सूचना-पर्यावरण को प्रदूषित करने का लाइसेंस नहीं है। पत्रकारिता भरोसे पर आधारित एक सार्वजनिक सेवा है।”

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के बारे में

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा 1966 में (1979 में पुनर्स्थापना) एक अर्ध-न्यायिक संस्था के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य प्रिंट मीडिया के लिए स्वनियमन तंत्र स्थापित करना, समाचारों की स्वतंत्र और जिम्मेदार रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना तथा प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।

तब से PCI समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को सुधारने और प्रेस स्वतंत्रता को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। यह विधायिका और अन्य प्राधिकरणों के लिए एक सलाहकारी निकाय की भूमिका भी निभाता है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.