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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा: भारत वैश्विक संतुलन और जिम्मेदारी का भरोसेमंद साझेदार बन रहा है

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 में कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि, तकनीकी क्षमताएँ और सिद्धांत आधारित विदेश नीति ने इसे बदलते वैश्विक परिदृश्य में संतुलन और जिम्मेदारी की आवाज़ बना दिया है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और ग्लोबल साउथ के देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं।

मंत्री ने जोर दिया कि भारत सांस्कृतिक मूल्यों, जिम्मेदारी, रणनीतिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ आज के वैश्विक मुद्दों को आकार दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश द्वारा अपनाई गई पारदर्शी नीतियाँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित रुख भारत की विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।

 सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीतिक सुधार

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, सीमा-पार चरमपंथियों का समर्थन, मौजूदा स्थिति में हस्तक्षेप, समुद्री दबाव और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में सुधार केवल विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता हैं। ये सुधार संस्थाओं की अनुकूलन क्षमता बढ़ाते हैं, सशस्त्र बलों की चुस्ती और तत्परता में वृद्धि करते हैं, और देश को अपनी दिशा तय करने का आत्मविश्वास देते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुरक्षा, आधुनिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • सीमा और समुद्री अवसंरचना को मजबूत करना

  • सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण नई तकनीकों, प्लेटफ़ॉर्म और संरचनाओं के माध्यम से

  • खरीद प्रक्रियाओं में सुधार ताकि गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो

  • आत्मनिर्भरता के माध्यम से रक्षा उद्योग में नवाचार और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना

  • स्टार्टअप्स, डीप-टेक और R&D में निवेश

  • सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हितों को प्राथमिकता

सशक्त और लचीला भारत

रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षमता के साथ-साथ लचीलापन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारतीय सशस्त्र बल देश की लचीलापन की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनका कौशल, तत्परता और अनुशासन भारत को पड़ोसी चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने कहा, "भारत शांति और संवाद में विश्वास करता है, लेकिन जब देश और नागरिकों की सुरक्षा की बात आती है, तो कोई समझौता नहीं करता।"

सशस्त्र बलों का व्यापक योगदान

राजनाथ सिंह ने बताया कि सशस्त्र बल केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं हैं।

  • आपदा के समय नागरिक प्रशासन का समर्थन

  • समुद्री हितों की सुरक्षा

  • अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करना, संयुक्त अभ्यास और शांति संचालन के माध्यम से

  • पेशेवरता और विश्वास निर्माण

इसलिए सशस्त्र बलों में सुधार और आधुनिकीकरण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक भविष्य में निवेश हैं।

वैश्विक शांति और मानव कल्याण में योगदान

मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार केवल अलग-थलग कार्य नहीं हैं, बल्कि भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाने में मदद कर रहे हैं जो वैश्विक शांति और मानव कल्याण को मजबूत करे।

उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति, सुरक्षा और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने से विश्व को कई लाभ होंगे:

  1. स्थिर भारत, स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान देगा

  2. डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर समावेशी और पारदर्शी शासन का मॉडल प्रस्तुत करता है

  3. एथिकल एप्रोच से उभरती तकनीकों (AI, साइबर, अंतरिक्ष) में मानक स्थापित होंगे

  4. शांति, जलवायु और मानवतावादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय सहयोग में नैतिक वजन जोड़ती है

डिजिटल और ग्रीन पहलाओं का शुभारंभ

EKAM: AI as a Service – iDEX ADITI 2.0

  • सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी AI समाधान

  • डेटा सुरक्षा और मिलिट्री ऑपरेशनल डोctrines के लिए कस्टमाइज्ड प्लेटफ़ॉर्म

Prakshepan

  • मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी ऐप

  • भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की भविष्यवाणी

  • दूरदराज क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन के लिए चेतावनी प्रणाली

AI Handbook for Military Leaders

  • कमांड, कंट्रोल, इंटेलिजेंस, युद्ध प्रणाली और ऑटोनोमस प्लेटफ़ॉर्म में AI का उपयोग

Digitalisation 3.0 – From Boots to Bytes & Towards AI Readiness

  • भारतीय सेना का तकनीकी रूपांतरण

  • 100 डिजिटल एप्लिकेशन, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर

ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट (Ladakh, Chushul)

  • 4,500 मीटर ऊँचाई पर

  • फॉसिल ईंधन DG सेट्स की जगह

  • वार्षिक 1,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ

  • सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

  • रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार

  • अन्य वरिष्ठ सैन्य, कूटनीतिक, शैक्षिक और तकनीकी प्रतिनिधि

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी सीमाओं पर रणनीतिक विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 27 नवंबर 2025 से आयोजित हुआ।



चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 : राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सैन्य तैयारी पर गहन विमर्श

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चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आरंभ हुआ, जिसमें सैन्य नेतृत्व, वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञ, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और युवा शोधकर्ता शामिल हुए। उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने, जबकि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मुख्य भाषण दिया।

यह संवाद भारतीय सेना और सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज़ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य केन्द्र "सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत" की राष्ट्रीय दृष्टि है। इसमें भारत की सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी क्षमताओं और बदलते वैश्विक वातावरण का विश्लेषण किया जा रहा है।

राष्ट्रपति का संबोधन

माननीय राष्ट्रपति ने भारतीय सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिरोध क्षमता नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदार व्यवहार पर आधारित है, जो "वसुधैव कुटुंबकम्" की सभ्यतागत सोच को दर्शाती है।

उन्होंने साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव वॉरफेयर जैसे नए क्षेत्रों में तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार सैन्य बलों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सेना द्वारा किए जा रहे सुधारों, आधुनिकीकरण और युवाओं एवं महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों की भी प्रशंसा की।

सेना प्रमुख का वक्तव्य

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि 2023 से प्रारंभ हुआ यह संवाद अब एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने बताया कि वैश्विक परिदृश्य बहुध्रुवीय और अस्थिर होता जा रहा है, ऐसे में भारतीय सेना को निर्णायक और भविष्य के अनुरूप बने रहना होगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री के 5S दृष्टिकोण—सम्मान, संवाद, सहयोग, समृद्धि और सुरक्षा—का उल्लेख करते हुए सेना की परिवर्तन यात्रा के तीन चरण बताए:

  • HOP 2032 – त्वरित परिवर्तन

  • STEP 2037 – संरचनात्मक मजबूती

  • JUMP 2047 – एकीकृत, नेक्स्ट-जनरेशन फोर्स डिज़ाइन

उन्होंने चार मुख्य प्रेरक तत्वों की पहचान की—आत्मनिर्भरता, तेज तकनीकी नवाचार, रक्षा संरचनाओं का अनुकूलन, और सैन्य–उद्योग–अकादमिक साझेदारी।

रक्षा सचिव का वक्तव्य

राजेश कुमार सिंह ने कहा कि 2025 को रक्षा मंत्रालय ने "वर्ष 2025–रक्षा सुधारों का वर्ष” घोषित किया है। उन्होंने बताया कि पूंजीगत खरीद का 75% बजट अब घरेलू उद्योग के लिए आरक्षित है, जिससे रक्षा उत्पादन, नवाचार और निर्यात में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

नीति आयोग के CEO का संबोधन

बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत को वैश्विक जनसांख्यिकीय, आर्थिक, तकनीकी और जलवायु परिवर्तनों के बीच रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने भारत की युवा जनसंख्या, मजबूत संस्थाओं और आत्मनिर्भर तकनीक को भविष्य के लिए निर्णायक बताया।

तकनीकी श्रेष्ठता पर प्रो. के. विजय राघवन के विचार

उन्होंने तीन-चरणीय तकनीकी निवेश मॉडल पर जोर दिया:

  • 0–3 वर्ष: स्टार्टअप, अकादमिक शोध और AI आधारित अपग्रेड के माध्यम से त्वरित क्षमता

  • 3–10 वर्ष: मूल्य श्रृंखलाओं पर नियंत्रण और निजी क्षेत्र को बढ़ावा

  • 10–30 वर्ष: मूल विज्ञान, बायोटेक, सामग्री विज्ञान और कॉग्निटिव वॉरफेयर में साहसिक निवेश

उन्होंने रक्षा तकनीकी परिषद गठन का सुझाव दिया।

पहले दिन की प्रमुख थीमैटिक सत्र

  1. ऑपरेशन सिंदूर: ए सोवरेन स्ट्रैटेजिक विक्ट्री

  2. बदलती स्थिति: रक्षा सुधारों की अनिवार्यता

  3. सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न: परिवर्तन के प्रमुख चालक

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का विशेष संबोधन

उन्होंने कहा कि तकनीक ने भूगोल की सीमाओं को अप्रासंगिक बना दिया है और युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। AI, हाइपरसोनिक्स, रोबोटिक्स और सेंसर-आधारित युद्धक्षेत्र नई रणनीतिक वास्तविकताएँ हैं। उन्होंने मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए नई सैन्य सोच की आवश्यकता पर बल दिया।

दूसरा दिन

दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण होगा रक्षा मंत्री का विशेष सत्र, जिसमें वे भारत की रक्षा सुधार यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण पहलें जारी करेंगे।

निष्कर्ष

दो दिवसीय चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 भारत की सुरक्षा संरचना, आत्मनिर्भरता, तकनीकी श्रेष्ठता और सैन्य आधुनिकीकरण का व्यापक खाका प्रस्तुत करेगा। यह भारतीय सेना की "सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत" के निर्माण में निर्णायक भूमिका को मजबूत करता है।

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 का कर्टन रेज़र: भारतीय सेना ने सुरक्षा–विकास समन्वय पर किया व्यापक विमर्श

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भारतीय सेना ने सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज (CLAWS) के सहयोग से आज नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 (CDD-2025) का कर्टन रेज़र आयोजित किया। यह संवाद 27–28 नवंबर 2025 को “Reform to Transform: सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत” थीम पर आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत भाषण और CDD-2025 के टीज़र लॉन्च के साथ हुआ। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण थलसेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के साथ फायरसाइड चैट रहा। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 की आकांक्षाएँ स्थायी स्थिरता और सुरक्षित वातावरण की मांग करती हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास दोनों का समान रूप से आगे बढ़ना आवश्यक है।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने आतंकवाद के प्रति राष्ट्रीय दृढ़ संकल्प को दोहराया और कहा कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों के लिए जवाबदेही तय करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया है।

विशेष संबोधन पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर द्वारा दिया गया। उन्होंने तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच रणनीतिक संबंध को रेखांकित किया और कहा कि विश्वसनीय व स्वदेशी डिजिटल एवं उभरती प्रौद्योगिकियों का विकास भारत की दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।

पैनल चर्चा: रक्षा में आत्मनिर्भरता – सशक्त भारत की कुंजी

इस पैनल चर्चा की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह, उप थलसेना प्रमुख (क्षमतावर्धन एवं संधारण) ने की। इसमें DRDO, रक्षा उद्योग और शिक्षाविदों के विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:

  • आत्मनिर्भरता के माध्यम से रणनीतिक स्वायत्तता

  • स्वदेशी डिज़ाइन, विकास और नवाचार

  • द्वि-उपयोगी तकनीकों को मजबूत करना

  • DRDO, निजी क्षेत्र और अकादमिक जगत के बीच समन्वित इकोसिस्टम का निर्माण

  • खरीद प्रक्रियाओं में सुधार

  • MSMEs और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की भूमिका

  • मजबूत आपूर्ति शृंखला और कम बाहरी निर्भरता

  • भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के लिए डीप-टेक इकोसिस्टम का तीव्र विकास

CDD-2025 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा ताकि रक्षा सुधार, तकनीकी परिवर्तन, नागरिक–सैनिक एकीकरण और विकसित भारत @2047 की दिशा में भारत की उभरती सुरक्षा प्राथमिकताओं पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके।

CDD-2025 के तहत एक श्रृंखला के रूप में भारतीय सेना ने यंग लीडर्स फोरम का आयोजन 31 अक्टूबर 2025 को किया था, जिसका उद्देश्य युवाओं में रणनीतिक जागरूकता बढ़ाना था।

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